कुल 169 लेख

  • 19 Dec
    Anjali Khurana

    क्या है मानसिक विकार(Mansik vikar)?

    mansik vikar

    क्या है मानसिक विकार ?

    आप सोच रहे हैं कि मानसिक विकार का मतलब क्या होता है ?

    क्या कमजोर लोग ही मनोचिकित्सा करवाते हैं ?

    क्या इस रोग से ग्रसित व्यक्ति नियन्त्रण में नहीं रह पाते  ?

    क्या मानसिक स्वास्थ्य विकार होने का मतलब आप पागल हैं ?

    या यह बीमारी संक्रामक होती है ?

    अथवा  ग्रसित व्यक्ति के संपर्क में आने से आप को भी यह बीमारी हो जाएगी ?

    इस तरह के और कई अन्य सवाल आपके मन में होंगे । हम नीचे आप के लिए उनमें से कुछ के जवाब दे रहे हैं ।

    मानसिक बीमारी के कारण

    मानसिक विकार में शामिल विभिन्न कारण हैं । ये कारण हैं:

    किसी प्रियजन की मौत , जुदाई , दुर्घटना, अलगाव, व्यापार में घाटा, बचपन के बुरे अनुभव , जॉब को लेकर चिंता , पैसे की कमी , काम का दबाव  इन सभी सामाजिक कारणों की वजह से जो व्यक्ति मानसिक बीमारी के लिए बेहद संवेदनशील होते हैं , वे इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं । अतः आप देख सकते हैं कि मानसिक बीमारी के कारणों में वातावरणीय कारक,बायोलॉजिकल कारक और मनोवैज्ञानिक कारक हो सकते हैं ।

    इसका मतलब है कि मानसिक बीमारी के उपचार के लिए दवाएँ ही अकेले समस्या का समाधान नहीं कर सकती  है। वे मरीज के न्यूरोट्रांसमीटर में हुए असंतुलन को नियंत्रण करने में मदद करती हैं , बाकी काम विभिन्न प्रकार की थेरेपी के द्वारा मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्तर पर किया जाता है । थेरपी व्यक्ति के अंदर के नकारात्मक विचारो को सकारात्मक विचारों में परिवर्तित कर उसे सशक्त बनाती है ।

    परन्तु विडम्बना यह है कि,मानसिक विकार को लेकर काफी सारी भ्रांतियां फैली हुई हैं , हमें इसकी रोकथाम के लिए मिल जुल कर काम करना चाहिए । हम अभी भी मानसिक विकार के रोकथाम और उपचार पर पर्याप्त खर्च नहीं कर रहे हैं, और  सामाजिक परिस्थितियों, गरीबी, शोषण और हिंसा जैसे अनुभवों से इसके और अधिक होने की संभावना है ।  पीड़ित व्यक्ति के साथ प्यार भरा व्यवहार  ही  इसकी रोकथाम की दिशा में पहला कदम  होगा ।

    मानसिक रोग से परेशान व्यक्ति को अपशब्द जैसे 'तुम पागल हो' या 'क्या तुम साइको हो' जैसे वाक्य बोल कर अपमानित नहीं  करना  चाहिए । हमें यह समझना होगा कि पीड़ित व्यक्ति किन संघर्ष के साथ जीवन को जीने की कोशिश कर रहा है । हमे उन लोगों का अपमान नहीं करना चाहिए , क्योंकि वे खुद इस रोग के होने का कारण नहीं है, यह समाज उनकी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है ।

    कृपया अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए वीडियो को देखें ।

  • 19 Dec
    Anjali Khurana

    जानें! कैसे बनें कुशल वक्ता

    Kaise bane kusal vakta

    अगर आपको स्टेज पर लोगों के सामने बोलने  से डर लगता है,तो रखें इन बातों का ध्यान ।
     
    लोगों के सामने बोलने का डर सबसे बड़ा डर माना जाता है।अगर आपको पब्लिक में बोलने से डर लगता है तो आप अकेले इंसान नहीं हैं| आप अपने इस डर को दूर कर सकते हैं| बस आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा |
    सबसे पहले आप इतना सुनिश्चित कर लें कि,जिस टॉपिक को आप बोलने जा रहें हैं वह आपको अच्छे से पता होना चाहिए । वही टॉपिक चुनें जिसके बारे में आपको अच्छे से पता हो,अन्यथा टॉपिक की जानकारी ना होने पर तनाव होगा और आप ठीक से स्टेज पर बोल भी नहीं पाएंगे ।
     
    स्पीच को पॉइंट्स में लिखें, ऐसा करने से आप स्पीच को जल्दी और अच्छे तरीके से याद कर पाएंगे ।
     
    आप स्पीच को याद करने के लिए सुबह का समय चुन  सकते है ,क्योंकि यही वह समय है जब आप अपने दिमाग को बिना किसी डिस्टर्बेंस के साथ संकेंद्रित कर सकते हैं|
     
    अगर संभव हो सके तो अपनी स्पीच को रिकॉर्ड करके उसको सुनिए और गल्तियों को सुधार कर फिर से प्रैक्टिस कीजिये ।
    kushal vakta banne ke liye kya kare
    दर्पण के सामने खड़े हो कर स्पीच की प्रैक्टिस करें जिससे आपको अपने अंदर की खूबियों को बाहर लाने का मौका मिलेगा |
     
    अपने दिमाग को संकेंद्रित करने के लिए आप स्टेज पर जाने से पहले सीधे खड़े हो जाइए, फिर आँखो को बंद करके सिर्फ अपनी साँसो की आवाज सुनिये| अब आप पूरी तरह रिलैक्स्ड और कॉंफिडेंट हो कर स्टेज पर जा सकते हैं|
     
    जब आप मंच पर होते है ,आप नर्वस हो सकते है ,पर याद रखिये ,लोग आपके अंदर की इस फीलिंग को नहीं देख सकते| दर्शकों की प्रतिक्रियाओं की ज्यादा चिंता मत करें|
     
    एक अच्छा वक्त होने के लिए इतना ही काफी है की आप जो भी बोले दिल से बोलें|
  • 19 Dec
    Shiva Raman Pandey

    क्यों होता है लड़ाई के बाद सरदर्द ?

    ladai ke bad sar dard kyo hota hai

    उफ़!तुमसे तो बात करके मेरे सिर में दर्द होने लगता है !

    क्या कभी आपने महसूस किया है की जब भी हम तनाव में रहते हैं,अथवा किसी से लड़ाई होती है तो अक्सर हमारा सिरदर्द होने लगता है ?

    ऐसा क्यों होता है? हो सकता है कि हमारा दिमाग और हमारा शरीर एक दूसरे से जुड़े हैं ,और इसलिए हमारा मनोवैज्ञानिक तनाव शारीरिक दर्द के रूप में प्रकट होता है ।

    जी हाँ सच यही है। एक अध्ययन के अनुसार ७०% मामलों में सामान्य चिकित्सकों ने  ऐसा पाया है कि   

    शारीरिक दर्द का प्रमुख कारण तनाव से उत्पन्न होता है ।

    नकारात्मक व्यवहार से ना सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक असर भी होता है | ज्यादातर बीमारियां साइकोसोमाटिक यानि मनोकायिक होती हैं ।

    बिना किसी स्पष्ट शारीरिक कारण के जो दर्द होते हैं, उनका सम्बन्ध  सोमटोफोर्म नामक एक मानसिक विकार से हो सकता है, जिसमें दर्द होने का कोई वास्तविक शरीर से जुड़ा कारण नहीं समझ में आता । इसका डायग्नोसिस भी बहुत मुश्किल हो जाता है, क्योंकि व्यक्ति जब भी सामान्य चिकित्सक के पास इलाज के लिए जाता है, उसे चिकित्सा प्रणाली के विभिन्न दौर से गुजरना पड़ता है, परन्तु जब टेस्ट रिपोर्ट में कुछ नहीं निकलता तो वह डॉक्टर्स के प्रति अपना विश्वास खोने लगता है ।

    अब सवाल यह उठता है कि ऐसे प्रकार के दर्द होते क्यों है? इनका कारण क्या है?

    अनुसंधानों से यह पता चला है कि बच्चे अपनी विकास की अवस्था के दौरान यह संकेत समझते हैं कि जब भी घर का कोई सदस्य बीमार होता है,घर वाले उसका ज्यादा ध्यान रखते हैं । उसे स्कूल नहीं जाना पड़ता, उसे स्कूल का होमवर्क नहीं करना पड़ता । अगर परिवार के लोग बच्चे के साथ समय नहीं बिताते तो अभिवावक का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए बच्चे बीमार होना ज्यादा पसंद करते  हैं ।

    दूसरी बात यह है कि,काफी लोग मनोवैज्ञानिक समस्याओं के  बारे में अनजान हैं | वे इन मामलों को इतना गंभीर नहीं मानते, उन्हें लगता है की मानसिक बीमारियां सिर्फ कमजोर लोगों को होती हैं ।  उस स्थिति में वे इसके बारे में बात करना नहीं चाहते, और इन सब बीमारियों से अनजान बने रहते हैं । उन्हें इसका आभास भी नहीं हो पाता कि किस प्रकार उनके जीवन में होने वाले  मानसिक तनाव का असर उनके शरीर पर पड़ रहा है । और जब यह बहुत ज्यादा हो जाता है ,तो शारीरिक दर्द  के रूप में प्रकट हो जाता  है । दिमाग शारीरिक दर्द के द्वारा यह सिग्नल देता है कि कुछ गलत हो रहा है जिसे विश्राम और विचार के द्वारा दूर किया जाना चाहिए ।

    अक्सर यह देखा गया है की समस्या चाहे, शारीरिक हो या मानसिक, अगर व्यक्ति को प्यार, देखभाल और सहयोग  मिले तो दर्द अपने आप ठीक हो जाता है ।

    अनुसंधानों से यह भी पता चला है की किसी भी रोग के ठीक होने की रफ़्तार तब और बढ़ जाती है, जब व्यक्ति को उस स्थिति में किसी का प्यार मिले और ख़ुशनुमा वातावरण मिले । अतः हमे यह समझना होगा कि क्यों हमारा दिमाग ज्यादा मानसिक तनाव की स्थिति में उसे शारीरिक दर्द के रूप में बदल देता है । जिससे दिमाग यह सुनिश्चित कर ले कि हमें उचित देखभाल,प्यार,और आराम  मिल सके ।

     

    अगर व्यक्ति इस दर्द से लगातार जूझता रहा तो वह यह स्वीकार कर लेता है कि मेरे दर्द का कोई इलाज नहीं है ,और यह सोच उसे और दुखी कर देती है ,उसे यह जानकारी ही नहीं होती की मनोवैज्ञानिक तरीके से भी इस दर्द को दूर किया जा सकता है ।

     

    मनोवैज्ञानिक  थेरेपी के दौरान उन दर्द  के  होने वाले कारणों की जानकारी देते हैं और धीरे धीरे उसे यह अहसास दिलाते हैं कि कैसे नई सोच को विकसित कर दर्द को कम  किया जा सकता है ।

     अनुसंधानों से यह पता चला है कि एक कुशल चिकित्सक के द्वारा थेरेपी होने पर १०-१२ सेशंस में सोमटोफोर्म विकार में काफी सुधार देखने को मिल जाता है ।

  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    क्या होता है पहली नजर का प्यार ?

    Pahli nazar ka pyar

     

    कितने ही गायक,कवि,लेखक और दार्शनिकों ने अपनी रचनाओं में पहली नजर के प्यार का जिक्र किया हैं। आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी इतनी प्रगति कर चुके हैं, और मनोवैज्ञानिकों ने पहली नजर के प्यार पर अनुसंधानों से हुए नतीजों में जो कुछ पाया वह तर्कसंगत है ।

    तो आइये हम बात करते हैं सबसे पहले, पहली नजर में प्यार के खिलाफ तर्क से एक तर्क तो यह है कि पहली नजर का प्यार व्यक्ति के बाहरी रूप, रंग और आकर के आधार पर होता है न कि उसके व्यवहार को देख कर ।

    और दूसरा तर्क यह कि वह प्यार कैसा जिसमें आप उस इंसान को जानते ही नहीं और प्यार करने लगते हैं ।

    दोनों ही तर्क काफी हद तक सही हैं और एक दूसरे से जुड़े भी हुए हैं ।

    देखा जाए तो, इन तर्कों में भी दम है जब आप पहली बार किसी को देखते है और वह आपको आकर्षित लगती या लगता है, आपको उसके व्यक्तित्व का पता भी नहीं होता है, और आप प्यार कर बैठते हैं । कितने ही लोग हैं जो यह भी कहते हैं की जिनसे उन्हें पहली नजर का प्यार हुआ उनसे उनके सम्बन्ध ठीक नहीं रहे ।

    उन्हें लगता है की जिसे पहली बार देखने पर अच्छा लगता है, उसके साथ समय बिताना भी अच्छा लगेगा ।

    हालाँकि उस व्यक्ति के साथ समय बिताने से प्यार की जो कल्पना दूसरे व्यक्ति के मन में होती है उस पर मतभेद हो सकता  है।

    पर यह सही नही है जब हम किसी से पहली नजर का प्यार कर बैठते है तो अक्सर हम उसकी गलतियों को भी नजरअंदाज कर देते हैं । एक प्रकार से प्यार हमें अँधा बना देता है और उसकी गलतियां भी हमें बुरी नही लगती । हालाँकि यह बात हर पहली नजर के प्यार करने वाले पर लागू नहीं होती ।

    दूसरी बात यह कि दो बातें हमेशा हमें भ्र्म में डालती हैं एक संबंधो को आप कितने दिन तक साथ निभाते है और दूसरा प्रेम आप किस हद तक करते है ।

    पहली नजर का प्यार उसके करने वाले की तीव्रता पर निर्भर करता है जबकि सालों साल चलने वाला प्यार उसके प्यार भरे संबंधों पर टिका होता है ।

    हालाँकि दोनों बातें एक दूसरे पर टिकी होती हैं ।

    सिर्फ इसलिए कि आप को उनसे पहली बार देखते ही प्यार हो गया,प्यार ज्यादा दिन नहीं चलता इसका मतलब यह नहीं कि यह  प्यार ही है या यही सच्चा प्यार है ,

    अतः हम इन सब निष्कर्ष के आधार पर कह सकते है कि, यह पूरी तरह से स्पष्ट  नहीं है कि क्यों कोई व्यक्ति सिर्फ एक व्यक्ति के लिए आकर्षित होता है, जबकि दुनिया में इतने आकर्षित लोग है ।

    स्पीड डेटिंग प्रतियोगिताओं में परीक्षण से यह पता चलता है की अगर उस एक नजर में ही कोई यह यह पता कर लेता है की उस व्यकि का व्यवहार, उसका दिखावा उसके अनुकूल है तब सवाल यह नहीं है की प्यार पहली नजर में हो सकता है,बल्कि सवाल यह है की कैसे उस प्यार को बरकरार रखा जाए ।

    कभी कभी पहली नजर के प्यार से बने रिश्ते को धीरे धीरे विकसित करने में उस प्यार का अस्तित्व लोग खो देते है, वे इसकी चिंता नहीं करते की पहले वे किस तरह बात किया करते थे ।

    इसलिए सिर्फ प्यार में पड़ने के अलावा हमें यह भी सीखना होगा की कैसे प्यार के साथ जिया जाए |

     

     

  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    क्यों होता है भोजन विकार eating disorder?

     

    Bhojan vikar

    आज कल बढ़ता मोटापा और उसका स्वास्थ्य पर होने वाला बुरा असर सबसे महत्वपूर्ण चिंताजनक विषयों में है 

    एक तरफ, मोटापा, एक महामारी बनता जा रहा है । जिसकी वजह से जीवन शैली सम्बंधित स्वास्थ्य बीमारियां जैसे मधुमेह और उच्चरक्तचाप बढ़ रहें हैं ।

    दूसरी तरफ यंग लोग जिनमें मुख्यतः लडकियां है अपनी बॉडी इमेज को लेकर काफी सजग और चिंतित हो रहीं हैं । उन्हें लगता है कि अगर सुन्दर और आकर्षक दिखना है तो छरहरी काया और फिट फिगर होना चाहिए । ख़ास तौर से modeling के carrier में इस तरह के figure की बहुत demand होती है । मॉडलिंग करती हुई स्लिम लड़कियों को देख कर समाज में एक भ्रामिक सन्देश दिया जा रहा है, कि खुद को फिट और सुन्दर दिखाना है तो खाना कम खाओ , डाइटिंग करो जो समाज में एक नकारात्मक सन्देश दे रहा है । इसके साथ साथ मोटापा काम करने के लिए बाजार में तरह तरह के वजन कम करने के product और इस बारे में लोग expert से भी सलाह लेने लग गए हैं ।

    इन सबके चलते एक दुविधा वाली स्थिति सी बन गई है । young age यही सोच रहा है की वजन घटाना ही हर समस्या का समाधान है । ऐसी स्थिति में, कैसे कोई पता करे की वजन घटाने की दिशा में बढ़ाया गया कदम सही है अथवा नहीं ? अगर मन में यह बैठ जाए कि मुझे परहेज कर के वजन कम ही रखना है । तो व्यक्ति की भोजन के प्रति भावना बदल जाती है । और भोजन ग्रहण करना हमेशा से एक ऐसा व्यवहार है जो भावना से जुड़ा होता है ।

    ऐसी भावना के चलते वह परहेज करना शुरू कर देता है, मतलब भूख होते हुए भी मन को दबा लेना, की मुझे ज्यादा नहीं खाना ,नहीं मेरा वजन बढ़ जायेगा ।

    और धीरे धीरे यही भावना बढ़ कर eating disorder के रूप में सामने आती है । व्यक्ति भोजन करते समय अगर खुश नहीं है तो वह खाना अच्छी तरीके से digest भी नहीं होता । जिसकी  वजह से शरीर में अन्य पोषक तत्वो की कमी होने लगती है ।

    इसलिए, हमारी कुछ भावनाएं खाना और खाने के तरीके से जुडी हुई हैं अगर हमें किसी के खाने की आदत के बारे में जानना है तो उसकी भावनाओं का पता लगाना  होगा ।

    तो यहां दो सवाल उठते हैं

    या तो आप खुद की इमेज को पसंद नहीं करते

    अथवा आप खुद की इमेज को पसंद करते हैं, और स्वस्थ्य बने रहना चाहते हैं,

    मनोवैज्ञानिकों की राय में भोजन विकार तीन के प्रकार होते हैं ।

    1. #एनोरेक्सिया नर्वोसा  (Anorexia Nervosa): एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति अपनी शरीर की जरूरत के हिसाब से कम भोजन ग्रहण करता है जिसकी वजह से आयु ,लिंग ,और विकास  प्रक्षेपवक्र (developmental trajectory)के हिसाब से कम वजन होता है । इसके और गंभीर संकेतों में व्यक्ति हमेशा वजन बढ़ाने से डरता है,जबकि उसका खुद का वजन कम होता है ।
    2. (#Bulimia nervosa)खाना उगलने की आदत: दूसरी तरफ एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी जरूरत से ज्यादा खा कर और फिर उसे किसी भी तरह ,चाहे उबकाइयां लेकर अथवा मुह में ऊँगली डाल कर भोजन को उलटी के द्वारा बाहर निकालने का प्रयास करते  हैं, क्योंकि वे खुद को ज्यादा खाने के लिए दोषी मानते हैं । बार बार जुलाब का प्रयोग करना ,और जबरदस्ती बार बार उलटी करने से उनके पाचन तंत्र और भोजन नली को नुकसान पहुँचता है ।
    3. Binge eating disorder घातुमान विकार: जिसमें व्यक्ति को अक्सर ज्यादा खाना खाने के दौरे पड़ते हैं,वह अपने को नियंत्रित नहीं कर पाते । और ज्यादा खाने से होने वाले नुकसान को समझ नहीं पाते ।

    अगर आप ऐसे किसी व्यक्ति को जानते हों जिनका अचानक से वजन घटना,खुद को चोट पहुँचाने वाला व्यवहार नजर आये,तो यह एक प्रकार का खाने का विकार हो सकता है ,और उन्हें मनोचिकित्सक से सलाह की जरूरत है ।

    भोजन विकारों का इलाज हो सकता है,और ठीक होने की दर इस बात पर निर्भर करती है कि इलाज कितनी जल्दी होता  है ।

    एक योग्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक आपको विस्तार से यह समझाने में मदद करेंगे ।

    और अगर आप  मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक से परामर्श लेने  के लिए दुविधा में है तो एक एक सामान्य चिकित्सक से इस बारे में बात करने की कोशिश कर सकते हैं ।

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