कुल 169 लेख

  • 15 Mar
    Oyindrila Basu

    अपनी शादी को बचाईये आज ही!

    Save your Marriage

     

     

    सरिता: तुम्हारे घर में, हम बिल्कुल टीवी नहीं देख पाते थे, आप लोग हमेशा न्यूज़ देखते रहते थे, और आपके पिताजी...

    रविकांत: हाँ हाँ तुम्हें तो हमेशा शिकायत ही रहती है। हमारे घर में तुम्हें ३ महीने में इतना कष्ट हुआ, कि तुम्हारी शिकायतें थमती ही नहीं।

     

    "3 महीना" सुनते ही सरिता अचानक क्रोधित हो गयी।

     

    सरिता: तुम्हें क्या लगता है, कि अगर मैं शादी के १२ साल बाद शिकायत करती तो सती सावित्री कहलाती? और क्योंकि मैं साफ़ साफ़ समस्या बता रही हूँ, तो मैं डायन हूँ। तुम्हारे घरवाले मुझे कभी समझ नहीं पाएंगे। तुम्हारे घरवाले सही हैं कहाँ?

    रविकांत: मैंने कुछ नहीं कहा, मैं बात नहीं करना चाहता।

    सरिता: नहीं, बताओ, क्या मैंने कम सही कहा है? मैंने एडजस्ट करने की कोशिश नहीं की क्या?

    ये झगड़ा चलता रहा, और सरिता गुस्से से लाल हो कर रोने लग गयी, और रविकांत दूसरे कमरे में चला गया।

    शादी के बाद से, सरिता की उसकी सास के साथ नहीं बनती थी। वह उस घर में खुश महसूस नहीं करती थी, और अकसर अपने पति रविकांत से खुलकर इस पर विचार करती। फिर वे दोनों  अमरीका चले गए, और किसी न किसी बात पर घर की बात आती, तो उन में बहस छिड़ जाती।

     

    आज सरिता को लग रहा था, "रवि हमेशा अपने घरवालों को ही सपोर्ट करते हैं, उनके लिए मैं कोई भी माइने नहीं रखती, वह घर के बेटे हैं, और मैं कुछ भी नहीं, मुझे इस रिश्ते में नहीं रहना चाहिए, ये शादी तोड़ देना चाहिए"

    इंसान क्यों शादी जैसे पाक रिश्ते को तोड़ना चाहता है, और कैसे हम इसे बचा सकते हैं?

     

    1. क्रोध बुरा है : अपने गुस्से को खुद पर हावी न होने दें। मतभेद होंगे, झगड़ा होगा, एक दूसरे पर कभी कभी गुस्सा भी आएगा, पर अपने गुस्से से अपने प्यार को मिटने न दें।

     

    2. बात करना ज़रूरी है: अगर आप बात नहीं करेंगे, तो एक दूसरे के नज़रिये को समझ नहीं पाएंगे, और इससे, गलतफहमियां बढ़ सकती है। इसलिए, समस्या जो भी है, गुस्सा है, मलाल है, तो बता दीजिये। बैठ कर उस पर विचार करें, तो मन हल्का हो जाएगा, और मुश्किलें आसान हो जाएँगी।

    3. सुनने और समझने की कोशिश करें: रवि वैसे तो शांत इंसान था, लेकिन हर दिन घरवालों की शिकायत से वह तंग आ गया था। वह अपने घरवालों को जानता था, उनसे जुड़ी समस्या को भी समझता था, पर सरिता की बात को सुनना नहीं चाहता था। समस्या से मुंह फेरना, समस्या का हल नहीं है। सरिता गलत नहीं थी। वह घर में नई थी, और उसे कई नई परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था, और ऐसे में वह रवि को छोड़ किसे बताती? इसलिए अपने साथी की बात को सुने, उनका सहारा बने।

    उनसे बहस करना ज़रूरी नहीं है, समझाया बाद में भी जा सकता है।

    4. खुद को उनकी जगह रख कर सोचें: ये पति पत्नी दोनों पर लागू होता है, कि बहस के वक़्त, वे खुद को एक दूसरे की जगह रख कर सोचें। अगर सरिता ऐसा करती तो वह समझ पाती कि घरवालों की निंदा हमेशा रवि को सुनना पसंद नहीं होगा।

    5. अपने साथी पर का दबाव न डालें: हम अकसर अपने साथी को सर्वोत्तम समझने लगते हैं, और चाहते हैं, की वह हमारी तरह सोचें और करें, पर सब अलग व्यक्ति है, मत अलग है, तो ये आशा न करें कि आपका साथी आपकी तरह सोचेगा।

    6. साथी बने, अभिभावक नहीं: पत्नियां सोचती हैं, कि वे अपने पति को बदल देंगी, पर इसकी ज़रूरत क्या है? मोबाइल चेक करना, हर बात पर टोकना, घर से बाहर जाते वक़्त रोकना, ये हरकतें, आपको उनके दिल से  दूर कर सकती हैं । उन्हें अपनी ज़िन्दगी जीने दें, अगर कोई आदत उनके लिए हानिकारक है, तो उन्हें सही तरह से समझाएं।

    पति को भी समझना चाहिए की उनकी पत्नी एक पूर्ण महिला हैं, और उन्हें अपनी जिम्मेदारी और फैसले लेना आता है। तो उनके साथी बने, अभिभावक नहीं।

    7. साथ में फैसले करें: इससे हर साथी खुद को ख़ास और महत्वपूर्ण महसूस करेगा, और आपके रिश्ते पर अच्छा असर पड़ेगा।

    8. ईगो को छोड़ दें: "मैं क्यों आगे जा कर बात करूँ, उसने झगड़ा किया है, उसे माफ़ी मांगनी चाहिए, अगर उसे परवाह नहीं, तो मुझे भी नहीं", ऐसी मनोवृत्ति रखने का कोई फायदा नहीं। उन्हें हो न हो, आपको उनकी ज़रूरत है, ये आप समझें, अगर आप कहते हैं, "परवाह नहीं", तो आप खुद को धोखा  दे रहे हैं।

    इस लिए ईगो को छोड़ दें, और खुद आगे बढ़ कर रिश्ते में सुधार लाएं, और अपनी शादी को बचाएं।

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  • 12 Mar
    Oyindrila Basu

    काम और निजी ज़िन्दगी में संतुलंत कैसे बनाएँ?

    housewife managing home and office

     

    मैं एक गृहिणी हूँ और एक प्रोफेशनल भी। मैं सुबह 7 बजे उठती हूँ। पति के लिए चाय बनाती हूँ, और फिर अपने ऑफिस के काम पर लग जाती हूँ,। मैं लेखिका हूँ और हर सुबह एक भाग का काम मैं ब्रेकफास्ट से पहले कर लेती हूँ। 10 बजे नाश्ता करने के बाद फिर से काम पर लग जाती हूँ।


    मैं आपको अपनी डेली रूटीन बता रही हूँ, क्योंकि मैंने दोस्तों को कहते सुना है, कि वे काम और घर में बराबर ध्यान नहीं दे पा रहीं हैं , और शायद ये आपकी भी समस्या हो सकती है, इसलिए निराश ना हों।


    1. अगर काम और घर के बीच सामंजस्य सम्भव नहीं है, तो खुद को अपराधी मानने की जरूरत नहीं। आप काम कर रहे हैं यह कोई गलत बात नहीं है, इसके लिए सबसे पहले आप घर में हो रही समस्याओं के लिए खुद को दोषी मानना बंद करें।


    2.. खुद के लिए एक टाइम टेबल बनाएं। दिन में २४ घंटे होते हैं, और अगर आप सही तरीके से टाइम-टेबल के हिसाब से चलेंगे, तो सारे काम आराम से हो जाएंगे। पर एक समय सीमा के हिसाब से चलना ज़रूरी है, अगर किसी एक काम पर आप ज़रुरत से ज़्यादा वक़्त जाया करेंगे, या सुस्ती दिखाएँगे, तो संतुलंत कभी नहीं बना पाएंगे।


    3. जो काम ज्यादा ज़रूरी हैं, उसे पहले करें। अगर सुबह आपको ऑफिस में प्रोजेक्ट सबमिट करना है, तो पहले उसका काम खत्म करें, क्योंकि आप वर्किंग वुमन हैं, अगर बच्चों को ऐसी स्थिति में आप कम समय दे पा रहीं हैं तो, घर के सदस्यों के मदद लें, और प्यार और सहयोग के साथ अपना कार्य पूर्ण करने के बाद बच्चों और परिवार के साथ समय व्यतीत करें। हाँ एक बात का ध्यान रखें, कार्य बढ़ने की स्थिति में अपने परिवार के जिम्मेदार लोगों को सूचित करें, और आपसी समझ से घर परिवार की जिम्मेदारी निभाएं।

    4. आपको क्या चाहिए ये तय करें। ज्यादा पैसों के लिए ज्यादा काम करना पड़ता है, ऐसी स्थिति में आप जो काम पसंद से कर रही हैं वही करें। अगर घर में ज्यादा वक़्त देने से आप को ख़ुशी मिल रही है, तो उसे अधिक महत्व दें।


    5. काम से प्रेम होना बहुत ज़रूरी है। कम काम करें लेकिन अच्छा काम करें, तो आप खुश रहेंगी, मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगी।


    6. खुद के लिए समय रखें। अपने लिए समय होना भी ज़रूरी है, इस वक़्त में आप सिर्फ वह करें, जो आपको अच्छा लगता हो। ये आराम का वक़्त भी हो सकता है । इस समय अन्य कोई कार्य न करें ।

    7. यह ध्यान रखें, की आप वर्किंग होते हुए सभी जिम्मेदारियों को नहीं निभा सकती, ऐसी स्थिति में आप वही जरूरी कार्य करें जो आप के अलावा और दूसरा नहीं कर सकता, आधुनिकता के दौर में ऑनलाइन शॉपिंग का महत्त्व समझें, घर के समान आर्डर करना, कपडे खरीदना, बिल जमा करना आदि कार्य आप ऑनलाइन भी कर सकती हैं । इससे आप थकेंगी कम, और वही समय आप परिवार को दे सकती हैं ।

    खुद खुश रहेंगी, तभी दूसरों को खुश रख पाएंगी । अपनी सोच समझ पर टिके रहे। इस तरह से आप अपनी सभी जिम्मेदारियों को सही से निभा पाएंगी ।

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    • omesh upadhay
      omesh upadhay   Dec 27, 2015 08:35 PM

      सेल्फ़ी को आजकल हम लोग अपनी जिंदगी का ही एक हिस्सा जैसे मन लिए है

    • sapna sahi
      sapna sahi   Dec 25, 2015 01:48 PM

      सेल्फ़ी लेना आज कल हम लोगो का पागलपन होता जा रहा है । अगर  किसी सेल्फ़ी लेते हुए देखते है या किसी की सेल्फ़ी को देखते है तो तुरंत ही हमारा मन भी सेल्फ़ी खींचने को करता है चाहे हम जिस जगह पर हो |

  • 11 Mar
    Oyindrila Basu

    जब श्रेष्ठ को पा सकते हो, सिर्फ उत्तम से खुश मत रहो।

    Good to Great

     

     
    बच्चे अकसर नाराज़ हो जातें है, जब माता-पिता उन्हें दूसरे बच्चे का उदाहरण देते हैं कि "बेटा हाईएस्ट मार्क्स लाओ",, तुलना करना सही नहीं है, परन्तु बच्चों उनका उद्देश्य तुमको नीचे दिखाना नहीं है , वे तुम्हें श्रेष्ठ बनने की प्रेरणा देना चाहते हैं।


    सिर्फ माता पिता ही नहीं, बच्चे भी क्लास में अव्वल आना चाहते हैं, हम सब श्रेष्ठ बनना चाहते हैं।


    पर ऐसा क्यों होता है?
    मनोवैज्ञानिक शोध से पता चलता है, कि अगर कोई सर्वोत्तम कार्य करना चाहता है, इसका मतलब है कि उसे पता है वह अभी अपने कार्य में श्रेष्ठ नहीं है, अभी उसमें खामियां हैं, जो लोगों को नज़र आ सकती हैं, इसलिए वे अपनी कड़ी मेहनत से इस खामी को पूरा करना चाहते हैं। और श्रेष्ठता को प्राप्त करना चाहते हैं। यह उनको और बेहतर करने की प्रेरणा देता है। अगर कोई जल्द ही संतुष्ट हो जाय, तो कोशिश करने की इच्छा नहीं रहती, वह आलसी हो जाता है, और उसके काम की शक्ति घटती है।



    तो सवाल यह है कि हम सर्वोत्तम कैसे बने?
    "अगर मेरे जीवन के अनुभवों को टटोलो तो उनमें मार्क ज़ुकेरबर्ग, बिल गेट्स और एप्पल के सी ई ओ जैसे लोगों को पाओगे, जो सर्व-श्रेष्ठ हैं, और एक ज़रूरी बात यह है, कि ये सब अपने कार्य में विशेषज्ञ हैं", इन्वाइज़र कंसल्टिंग के लेखक स्टीव तोबक हमें बताते हैं।

     

    1. पहले आप किस क्षेत्र में माहिर हैं, यह पता करें: खुद को समझे, आप में क्या गुण हैं, ये जाने, आप क्या पसंद करते हैं ये समझें। आप अगर अपने काम से प्रेम करेंगे, तो आप के अंदर उसमें बेहतरीन होने की ललक होगी ।


    2. खुद को हर रोज़ एक नयी चुनौती दें: हर रोज़ सुबह एक नया लक्ष्य बनाएं जो चुनौती से भरा हो। ताकि उसे पाने के लिए आपको पिछले दिन से ज्यादा मेहनत करनी पड़े। आप ज्यादा मेहनत करेंगे, तो नई चीज़ें सीखेंगे।



    3. अभ्यास हमेशा जारी रखें: अगर कुछ दिनों के लिए, आपकी प्रतिभा कार्यक्षेत्र में काम नहीं आ रहा है, इसका मतलब ये नहीं कि आप छुट्टी पर हैं। आप जिस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, उसके बारे में पढ़ाई करते रहे, कला-कौशल का अभ्यास करते रहें। अभ्यास आपको श्रेष्ठ बनाता है।



    4. आप खुद के प्रतिद्वंदी हैं: आप खुद को सिर्फ खुद से तुलना करें, दूसरों से नहीं, और बेहतरी की ओर कदम बढ़ाते जाएँ।



    5. अखंडता और ईमानदारी से आगे बढ़ें: ईमानदारी ज़रूरी है, खुद के प्रति, और काम के प्रति, और दूसरों के प्रति। अपने पूरे कार्य जीवन में ईमानदार रहना भी एक एहम बात है। इससे आप में अखंडता का प्रमाण मिलता है, जो किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए ज़रूरी है।

     

    6. अखंडता वादा पूरा करने में मदद करेगी: आप अगर किसी काम को खत्म करने के लिए एक तारीख बनाते हैं, तो उस पर टिके रहना ज़रूरी है, खुद से और दूसरों से किया वादा निभाएं।



    7. श्रेय का लोभ न करें: श्रेय की आशा न करें अगर आप योग्य नहीं हैं तो, औरों के काम पर श्रेय न लें, खुद के काम पर ध्यान देंगे तो आप जरूर उसमें बेहतरीन कर पाएंगे।


    8. गिरकर सम्हालने वाले को बाज़ीगर कहते हैं: जीवन में हर काम सफल नहीं होता, असफलता को स्वीकार करना सीखें । सब कुछ अगर मिल जाए, तो पाने की आशा नहीं रहेगी। हार से निराश न हों, उसको एक अनुभव के तौर पर बेहतरी का रास्ता बनाएं।


    9. अपने लिए सही लक्ष्य बनाएं: अगर श्रेष्ठ को पाने के लिए आप खुद के लिए काल्पनिक या इम्प्रैक्टिकल लक्ष्य बनाते हैं, तो उन पर खरे न उतरने से आप हताश होंगे, और आपका आत्मविश्वास टूट जाएगा। जैसे, आप सोचें कि लोग चाँद पर जाते हैं, मैं सूरज पर जाऊँगा, तो ये बात असंभव है, (सूरज में पहुंचकर आप जल जाएंगे, गल जाएंगे) खुद की क्षमता को समझते हुए आप क्या कर सकते हैं, उस हिसाब से लक्ष्य बनाएं।

     

    इन बातों को याद रखें और उनपर अमल करें, तो सर्वोत्तम कार्य करना आसान हो जाएगा। मेहनत हमेशा रंग लाती है, ये ध्यान में रहे।



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    • omesh upadhay
      omesh upadhay   Dec 27, 2015 08:40 PM

      मुझे कभी कभी कुछ अजीब सी और कभी न सुनी हुई आवाजे सुनाई देती है क्या यह किसी प्रकार की बीमारी हो सकती है । कृपया उत्तर दे धन्यवाद

  • 10 Mar
    Oyindrila Basu

    अपना ज्ञान कैसे बढ़ाएं?

    Encyclopaedia

     

     

    हम अकसर सोचते हैं, काश हम सब जान पातें, काश हर प्रश्न का उत्तर हमारे पास होता। फिर सब हमें ग्यानी समझतें, इज़्ज़त करते।


    हर समस्या का समाधान अगर हमारे पास होता तो कितना अच्छा होता, है न!


    तो कैसे हम अपना ज्ञान बढ़ाएं?


    1. और पढ़ना चाहिए- किताबों से प्रेम करें। पढ़ने की कोई सीमा नहीं। विभिन्न किताब, विभिन्न विषय पर पढ़ाई करें। हर रोज़ २० पन्ने पढ़ेंगे, तो साल में ७३०० पन्ने खत्म होंगे। बिल गेट्स जी भी किताबों के शौक़ीन हैं। इससे हमारा ज्ञान बढ़ेगा, हम हर विषय पर एक सक्षम मत रख पाएंगे।


    2. सवाल करने में ना हिचकिचायें- अगर आप लोगों के बीच चर्चा में शामिल हैं तो, कुछ समझ ना आने पर, चुप मत रहिये, सवाल करिये। कुछ देर के लिए आप शायद ही बेवक़ूफ़ बन जाएँ, लेकिन जवाब मिलने पर आपके दिमाग का अँधेरा घट जाएगा।

     

    3. खुद पर ध्यान हटा कर दूसरों पर रुचि दिखाइए- दूसरों में दिलचस्पी रखने वाले जल्द ही दोस्त बना लेते हैं। अगर दूसरे क्या बोल रहे है, उसे सुने तो आप को अलग अलग नज़रिया मिलेगा, और आप जब तर्क-वितर्क कर रहे होंगे, तो ये विभिन्न मत आपको मदद देंगे।

     

    4. एक साथ सीखने में जुट जाएँ- सब के साथ ज्ञान बाटने से ही ज्ञान बढ़ता है। दूसरों के साथ ज्ञान आदान-प्रदान करेंगे, तो आप में जो गलतियां है, वे नज़र आएंगी, और आप उसे सुधार पाएंगे।


    5. खुद को बेहतरीन की ओर ले चलें- खुद को हमेशा और बेहतर बनाने में लगे रहे। अगर जल्द ही संतुष्ट हो जाएंगे, तो उच्चता पर पहुँचने की इच्छा मर जायेगी।

     

    6. निंदा और आलोचना, को ख़ुशी से स्वीकारें- अगर आप प्रशंसा को महत्व देते है, तो निंदा और समालोचना को भी ध्यान में रखें, और उसे बेहतरी का ज़रिया बनाएं।

     

    7. खेल खेल में सीखें- अकसर शतरंज, या वीडियो गेम्स में हम कुछ ऐसे कौशल सीखते हैं, जिन्हें हम असल ज़िन्दगी में भी व्यवहार में ला सकते हैं, इसलिए दिमाग को खुला रखें।

    8. सिनेमा और हर तरह की खबरों में रुचि रखें- देश में क्या हो रहा है, जीवन में क्या होता है, ये भी जानना ज़रूरी है।


    9. आत्मविश्वास अधिक ज़रूरी है- खुद पर भरोसा रखें कि आप ही श्रेष्ठ हैं। खुद पर उम्मीदें बनाएं, और उन पर खरे उतरें।

     

    सीखने का कोई उम्र नहीं, और ज्ञान कभी बेकार नहीं जाता। आप जितना सीखेंगे, उतनी आपकी समृद्धि होगी। सिर्फ डिग्री या नौकरी के लिए नहीं, ज्ञान जीवन धारण के लिए होता है। खुद की उन्नति में मदद करता है। अगर आप सीखते रहे तो एक दिन आप के ज्ञान से दुनिया रोशन होगी।

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  • 08 Mar
    Oyindrila Basu

    नारी में है शक्ति

    naari divas

     

     

    मैं हूँ जो मैं सोचती हूँ कि मैं हूँ।

    समाज के द्वारा दिए जाने वाले दबावों से मैं नहीं रूकती

    समाज में पीड़ित होने का दबाव, बुरी माँ कहलाने का दबाव

    डायन कहलाने का दबाव, आलोचनात्मक होने का दबाव,

    तुम मुझे नहीं समझते तो ना सही,मैं उत्तर दाई नहीं हूँ।

    मैं फैसले कर सकती हूँ, मैं चुन सकती हूँ,

    मैं कमा सकती हूँ, और खिला भी सकती हूँ,

    मैं हूँ मैडोना, मैं हूँ मैरी,

    मैं हूँ कॉम और मैं हूँ केट,

    मैं वही हूँ, जो मैं जानती हूँ, मैं वही हूँ जो मैं चाहती हूँ।

     

    आज के जमाने में महिला को अबला नारी नहीं माना जा सकता। जीवन के हर क्षेत्र में वे अपना दायित्व स्फूर्ति से निभाती हैं, और समाज में सर ऊंचा करके चलती हैं।

    वह दिन गए जब हमें इतिहास के पन्नो में नारी के उपलब्धि की दास्ताँ ढूंढ़नी पड़ती थी। और इतिहास हमें केवल फ़ुटनोट में रख कर ठगता था।

    आज हम अपना इतिहास खुद लिखते हैं।

    अपनी दृढ़ता से, अपने काम से, महिला आज ऊंचाइयों को नाप रहीं हैं।

    2015 में भी  महिलाओं नें गिनीस में अपना नाम दर्ज कराया ।

    मलाला योसाफ्ज़ाई Malala Yousafzai जिन्हे सबसे कम उम्र में नोबेल प्राइज मिला है।

    जुलिआना बुहरिंग Juliana Buhring जो सबसे कम समय में साइकिल पर 24000 मील कवर कर चुकी हैं।

     

    आज ये साबित हो चुका है कि महिलाएं सारे काम बेहतर ढंग से कर सकती हैं। उसके कई कारण हैं।

    • उन में संगठन में कार्य करने की क्षमता है। सब का मत सुन कर वे फैसला लेती हैं, और खुद के ज्ञान को भी बाँटती हैं।

     

    • छोटे विषय पर भी महिलाएं निपुणता से विचार करती हैं।

     

    • मुश्किल वक़्त में महिलाएं शांत रहती हैं, इस लिए वे बेहतर सोच पाती है, काम के क्षेत्र में ख़ास कर।

     

    • महिलाएं अपने काम के बारे में खुले विचार और ईमानदारी का भाव रखती हैं।

     

    • दूसरों के प्रति सहानुभूति उन में ज्यादा है, तो वे किसी भी व्यक्ति से जल्द जुड़ जाती हैं, और उनकी बात समझ पाती हैं।

     

    इसी लिए आज महिला सब से बेहतर नेता और इंटरप्रेन्योर Entrepreneur मानी जाती हैं।

     

    पर और भी कई काम हैं जो सिर्फ महिला ही कर सकती है:

    • मातृत्व धारण करना: पुरुष और महिला का बराबर योगदान होता है इंसान के जन्म में, लेकिन गर्भ धारण का विशेषाधिकार महिला का है।
    • महिला मल्टीटास्किंग करने में माहिर है। खाना बनाने के साथ साथ वह फ़ोन पर बात भी करती है । इसी गुण की वजह से वे घर और बाहर दोनों जगह बराबर ईमानदारी से काम कर पाती है ।
    • महिला अपने सूरत के साथ कई एक्सपेरिमेंट्स कर सकती हैं। वे स्कर्ट और पैंट दोनों को अच्छे से पहन सकती हैं।

    अगर सोचें, तो ऐसा कोई क्षेत्र  नहीं, जहाँ महिलाओं ने अपनी छाप न छोड़ी हो।

    अपनी लगन, मेहनत, और दृढ़ता से महिला खुद में साफ़ सोच लाती हैं, जिससे वह फैसला ले पाती है।

    तभी आज हमारे बीच इंद्रा नूई (सी इ ओ पेप्सिको),  हेलेन केलर, और बुला चौधरी जैसी महान महिलाएं हैं ।

    ऐसी महिलाएं हमें भविष्य में भी प्रेरित करती रहेंगी। हमारे सामने है एक और अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस, और ऐसे में हम आशा करते हैं, कि महिलाओं को और मनोबल मिले और वे आगे बढ़ती जाएँ।