कुल 169 लेख

  • 22 Jun
    Oyindrila Basu

    आत्मविश्वास बढ़ाने के 7 तरीके।

    believe yourself

     

    खुद पर दृढ़ यकीन होना, किसी भी काम की सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है। ये भरोसा आ तो जाता है, पर इसे बनाये रखना भी ज़रूरी है, इसका अभ्यास करना पड़ता है।

    जब आप किसी भी चीज़ की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो याद रखें, आप को वह हासिल ज़रूर होगा, आप में क्षमता है, आप कर पाएंगे। सिर्फ निम्न बातों को ध्यान में रखें ।



    1. लक्ष्य की स्थापना करें- पहले निश्चित करें कि आपको असल में क्या चाहिए। फिर उसकी तरफ बुद्धि और सकारात्मक सोच से आगे बढ़ें।

    जो चीज़ें आपके बस में है, उन पर प्रयत्न करें। जैसे अगर आपको अच्छा व्यवसायी बनना है, तो 'मेरे पास उतना धन राशि नहीं', 'प्रतियोगिता बहुत है', 'ग्राहक कभी सहयोग नहीं करते' जैसी सोच के बजाए, खुद कोशिश करें।

    अपने व्यवसाय को पूर्ण समय और मेहनत दें, हर हफ्ते एक पक्के मूल्य की धनराशि विज्ञापन के लिए बचाकर रखे।

    यह मान कर चलें कि हर हफ्ते आप कुछ रुपये व्यवसाय के विज्ञापन में खर्च करेंगे, और यह कोशिश करते रहें, जब तक ग्राहक संख्या बढ़ नहीं जाती।



    2. मेहनत लगातार करें- कोई भी अच्छा काम शुरू करना, और उसको करते रहने में फर्क है।

    फल तभी मिलेगा, जब आप कोशिश बीच रास्ते छोड़ेंगे नहीं। मान लें की आप अपना लेखन सुधारना चाहते हैं, एक हफ्ते में कुछ नहीं होगा। लिखने का अभ्यास करते रहे। रोज़, आधा घंटा। ज

    ब तक आपके अक्षर सही और सुन्दर नहीं हो जाते। मेहनत का फल देर से ही सही, पर अवश्य मिलता है।

     

    3. अपना गणित सही रखे- किसी भी चीज़ को शुरू करने से पहले उसके बारे में पूर्ण रूप से जान लेना ज़रूरी है।

    अगर आप विक्रय या व्यवसाय में जाना चाहते हैं, तो अपने क्षेत्र के बारे में सारे सांख्यिकी मालूम कर लें।

    देश में इस क्षेत्र की समीक्षा क्या है, कितना लाभ और कितना नुकसान हो सकता है, कितनी वृद्धि हो सकती है, इसकी सब जानकारी लें, इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, और आपको पता होगा की आपने अब तक कितनी सफलता पाई, और कितना आगे जाना है ।

     

    chase your dream

    4. असफलता का सामना करें- किसी काम में सफलता ना मिलने पर हताश होना स्वाभाविक है, पर उससे निराश ना हों, कोशिश जारी रखें।

    अगर सफर कठिन है, तो ये यकीन रखें की उसका परिणाम उतना ही लाभदायक और मीठा होगा।



    5. नकारात्मक उत्साह- जिस काम में आप पीछे हैं, उसी को बार बार करने की कोशिश करें। अपने दोस्तों के कार्य और उनकी सफलताओं के बारे में जानकारी रखें, ताकि अपने लक्ष्य की ओर आप आगे बढ़ते रहे, ।

     

    6. सकारात्मक प्रोत्साहन- कभी कभी आपको लगेगा की आप खुद से हताश हो रहे हैं, तब जो चीज़ें आपको ख़ुशी देती है, उन्हें देखें या करें। अच्छी यादें, अच्छे गीतों को अपना दोस्त बनाएं।



    7. नकारात्मक सोच से दूर रहें- जो काम आपने शुरू किया है, उसको करते रहे, कोशिश जारी रहना ज़रूरी है। कई लोग आपको गलत बताएँगे, आपकी कोशिश को बेकार और बकवास कहेंगे, पर हिम्मत ना हारें, आप क्या कर रहे हैं वह सब को दिखाएँ, उसका प्रदर्शन करें, मेहनत एक दिन ज़रूर फल देगी । आपका हुनर पहचाना जाएगा।

  • 21 Jun
    Oyindrila Basu

    जाने क्यों होता है माइग्रेन

    migrain

     

    शरीर में एस्ट्रोजन की कमी यानी सर दर्द, माइग्रेन का दर्द।

    हम में से कई लोग हैं जो माइग्रेन की शिकायत करते हैं। पर जिन्हें नहीं है, वे ये पीड़ा कभी समझ नहीं पातें।

    पर शोध के अनुसार महिलाएं मर्दों की तुलना में ४ गुना ज्यादा इस दर्द से पीड़ित रहती हैं 

    इसके कई कारण हो सकते हैं- आनुवंशिक तौर पर भी यह आप में आ सकता है। tyramine नामक हॉर्मोन के बढ़ने से भी माइग्रेन के दर्द बढ़ सकते हैं।

    नींद कम आने की समस्या भी एक अहम कारण है।

    पर जो सबसे महत्वपूर्ण कारण पाया गया है, वह है, महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन की कमी, जिससे अधिक सर दर्द की सम्भावनाएं होती हैं।

    घटते एस्ट्रोजन की मात्रा के साथ साथ माइग्रेन का दर्द बढ़ता है। न्यूरोलॉजी नामक एक जर्नल में हाल ही में एक रिसर्च छपा था, जिसके अनुसार, महिलाओं में, मासिक धर्म के एक दो दिन पूर्व एस्ट्रोजन की मात्रा घटने के कारण सर दर्द, और माइग्रेन जैसी पीड़ाएं बढ़ जाती हैं।

    114  महिलाओं पर आज़माई गयी इस  शोध प्रक्रिया द्वारा ये साबित होता है, की शरीर के इस विशेष हॉर्मोन की गतिविधि में अगर संतुलन ना हो, तो सर दर्द गम्भीर रूप ले सकता है।

    दवाइयां काम आती हैं, लेकिन इससे छुटकारा पाने के और भी कई तरीके हैं, जिन्हे हम आज बताने जा रहे हैं ।

     

    शरीर में नमी बनाये रखें- अधिक मात्रा में पानी पीते रहे । इससे शरीर में जल का अनुपात अच्छा रहेगा, दर्द के वक़्त भी अगर एक गिलास ठंडा पानी पी लें तो लाभदायक होता है।

    कैफीन का लाभ- अगर आप रोज़ कॉफ़ी जैसे पदार्थ का सेवन नहीं करते, तो दर्द के वक़्त एक कप कॉफ़ी अच्छा असर दिखाता है।

    गरम भाप- गरम भाप या सर्द-भाप दोनों सर दर्द में लाभ दायक हैं। पर इसके साथ किसी मलहम, बाम का इस्तेमाल ना करें, फिर दोनों बेअसर हो जाएंगे।

    Apple cider vinegar एप्पल साइडर विनेगर- इसकी थोड़ी मात्रा पानी में मिलाएं और शहद के साथ पी जाएँ ।

    पेपरमिंट- पेपरमिंट के तेल को सर के अगले हिस्से में लगाएं, दर्द में ठंडक और राहत मिलेगी।

    Cayenne pepper कायेन पीपर- ये मिर्ची सर दर्द और माइग्रेन के दर्द में जादुई काम करती है।

    अदरक- इसके उपकार कई गुण हैं। ये शरीर में प्रोस्टग्लैंडिंस को कम करती है, जो मस्तिष्क के नसों के लिए काफी हानिकारक हैं।

     

    नींद सही वक़्त पर पूरा करें। हर दिन व्यायाम करते रहना ज़रूरी है। इससे रक्त संचालन स्वाभाविक रहता है । तनाव में ना रहे, फुर्ती में जियें।

  • 18 Jun
    Mandavi Pandey

    फादर्स डे-किस तरह अपने बच्चे के साथ मनाएं ?

     

    fathers day

    संडे और फादर्स डे, इससे बढियां दिन नहीं हो सकता । बच्चों के साथ यह दिन धूम-धाम से मनाएं. 

    आज हम आपको कुछ सुझाव देते हैं, जो आपका दिन आपके बच्चे के लिए बनाने में आपकी मदद करेगा ।

     

    1 सबसे पहले आप पूरे दिन प्रसन्नचित मन से रहिये, अभिभावक का हंसमुख चेहरा बच्चे के लिए सबसे बड़ा तोहफा होता है ।

    2 अपने बच्चों के साथ मिलकर खाना पकाने का मजा ही कुछ और होता है । भोजन तैयार करते समय आप जो भी काम मिल बाँट कर करते हैं, उसकी खुशनुमा यादें आपके मन और सम्बन्ध दोनों को अच्छा करती हैं ।

    3 आप उन्हें मजेदार चुटकुले सुना सकते है, और उनके साथ कुछ अच्छी मनोरंजक किताबें पढ़ सकते हैं । एक साथ हंसना परिवार को करीब लाने का अच्छा जरिया होता है ।

    4 आप जब अपने बच्चों से बात करें, तो जो भी कार्य कर रहें हैं उसे रोक दें, आपका पूरा ध्यान उनकी बातों को सुनने में होना चाहिए । इससे उन्हें यह महसूस होगा, कि उनकी बातों का आपके लिए महत्त्व है ।

    5 आपके उनके लिए एक प्यार भरा पत्र लिखें, और उनके रूम में रख दें । प्यार जताने का इससे बढ़िया तरीका नहीं हो सकता ।

    6 आप उनके साथ उनके मनपसंद संगीत का आनंद लें ।

    7 उनके साथ मिल बैठ का पुरानी यादों, तस्वीरों को देखें, और उसके बारे में बातें करें ।

    8 और हाँ, उन्हें प्यार की झप्पी देना ना भूलें ।

    9 इलेक्ट्रॉनिक सामान से दूरी बनाइये, और बच्चों के साथ बोर्ड-गेम खेलिए, पार्क में जाइये ।

    10 उन्हें उनकी भावनाओं की अभिव्यक्ति करने का मौका दें, बीच में उन्हें टोकें नहीं ।

    11 उनसे बातें करिये, उनके कमरे में जाकर उनके सामान के बारे में उनसे बात करिये । वे खुश होंगे जब आप उनके कार्य की तारीफ़ करेंगे ।

    12 एक घंटे के लिए आप अपनी भूमिका बदलिए । आप के बच्चे के लिए यह एक जागरूकता भरा अनुभव होगा, और उन्हें एक पिता की भावनाओं का अहसास होगा । 

    13 याद रखिये, जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज, परिवार और उसका प्यार होता है । एक पिता बनकर आप  बिना शर्त प्यार करना, और एक बेहतर इंसान बनना सीखतें हैं ।

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  • 09 Jun
    Janhavi Dwivedi

    महिलाएं तनाव मुक्त जीवन कैसे जियें?

    indian woman

    प्रिय महिलाओं आप अपने आप को कमजोर कभी मत समझिए, क्योंकि समाज में जितना अधिकार और महत्व पुरुष का है उतना ही अधिकार और महत्व महिलाओं का भी है।

    सही मायनों में कोई देश विकसित तभी बन सकता है, जब उस देश की महिलाओं को  बराबरी के अधिकार और सम्मान प्राप्त हों।

    महिलाओं को खुद अपने मानसिक तनाव को कम करने के उपाय सीखने होंगे।बिना महिलाओं के समाज अधूरा है और महत्वहीन है।

    एक माँ के रूप में बच्चे की बेहतर परवरिश करके योग्य नागरिक बनाने का योगदान हो या एक पत्नी के रूप में अपने पति का हर मुश्किल परिस्थिति में साथ देकर उसका मनोबल बढ़ाना, या एक बेटी और बहु के रूप अपने माता-पिता और सास-ससुर की देखभाल करना, इन सभी भूमिकाओं में भारतीय महिलाएं समाज को अपना अमूल्य योगदान देतीं रही हैं।

    वक्त बदलने के साथ अब अधिकांश महिलाएं व्यवसाय या नौकरी करने के लिए घर के बाहर जा रही हैं। लेकिन उनसे अभी भी यही अपेक्षा  की जाती है कि वे परिवार का भी उतना ही ख्याल रखें।

    ये अपेक्षाएं महिलाओं में तनाव का मुख्य कारण है। और इस तनाव से निपटना आज की महिला के लिए मुख्य चुनौती है।

    कुछ सुझाव जो महिलाओं को खुश रहने में मददगार हो सकते हैं :-

    • अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए समय दें और इसके लिए पैसा खर्च करने में संकोच ना करें, क्योंकि आपका स्वास्थ्य आपके लिए अनमोल है।
    • आत्म निर्भर रहना सीखें। जरूरी नहीं कि आप पैसा ही कमाए, लेकिन आत्मनिर्भर होना महत्वपूर्ण है।
    • यदि आप सीख सकती हैं तो कार या बाइक चलाना सीखें, ये जरूरी नहीं है कि हमेशा आपके साथ कोई हो।
    • अपनी बचत और आय के प्रबंधन करने के लिए निवेश और करों के बारे में सीखें। हमेशा इन सबके लिए किसी पर निर्भर ना रहें।
    • अपनी इच्छाओं या उपहारों के लिए भी बचत करें। ये जरूरी नहीं की हर बार आपके पति या बॉयफ्रेंड या आपके पापा ही आपके लिए आपकी पसंद के उपहार लाएं। खुद को गिफ्ट दीजिये।
    • जब आप दोनों पति पत्नी ऑफिस में बराबर काम करते हैं तो घर की जिम्मेदारियां भी दोनों बराबर की लें। माँ या पत्नी के नाम पर वीकेंड में काम करना या देर रात तक काम करना सही नहीं है।
    • अपने माता -पिता की बराबर की जिम्मेदारी लें। हमेशा आपका भाई ही उनके सारे काम करें ये सही नहीं है।
    • कभी बीमार बच्चे की देखभाल पापा को करने दें। ठीक है, आपका कैरियर भी महत्वपूर्ण है और बच्चे के पापा भी तो बराबर के जिम्मेदार हैं।
    • कभी घर के दूसरे सदस्यों को भी किचन संभालने का मौका दें, क्या हुआ, यदि किचन का प्लेटफॉर्म बहुत ही गंदा है या सिंक बर्तनों से भरी पड़ी है। कुछ समय इससे ब्रेक लें और आराम करें।
    • दूसरी महिलाओं की मदद करें, भले ही आप उन्हें पसंद ना करती हों। आपको नहीं पता वे कितना संघर्ष कर रही हैं।
    • जरूरतमंद को सशक्त बनाएं, जैसे-आपकी काम वाली। उसे स्वच्छ्ता, शिक्षा और वित्त संबंधी मूलभूत बातें सिखाइए ।
    • एक सपोर्ट सिस्टम तैयार करें, इसके लिए आप अपने सास-ससुर का सहयोग ले सकती हैं। जरूरी नहीं हर परिवार में सास बहू जैसे ड्रामे होते हों।
    • आपके पति से अलग कुछ दोस्त या सहेली होना गलत नहीं है, कुछ समय परिवार से अलग आप अपने ग्रुप में बिताएं।
    • हमेशा दुखी होना या रोना सही नहीं है, सभी महिलाओं को हर समय भावनात्मक होना जरूरी नहीं है।
    • सावधान रहें, कठिन स्थितियों को संभालने के लिए हमेशा तैयार रहें। यदि आप असफल हो जाएँ तो, निराश ना हो, निराशा से ऊबर कर समस्या को पहचानने की कोशिश करें। खुद को ‘मुसीबत की मारी’ ना समझें।
    • बच्चों को स्वावलम्बी, जिम्मेदार और स्वास्थ्य के प्रति सचेत बनाएं। घर के प्रत्येक सदस्य को समान रूप से जवाबदेह और जिम्मेदार बनाएं।
    • अपनी समस्या अपनी अलग-अलग हमउम्र सहेलियों को बताएं, उनकी राय लें, और अंत में अपना निर्णय लें और उस निर्णय के प्रति आश्वस्त रहें।
    • कुछ समय अपना मनपसंद काम करने में लगाएं, चाहे वह खाली बैठना ही क्यों ना हो। इसके लिए खुद को दोषी ना समझें क्योंकि दूसरों को ये बेकार लग रहा है।
    • खुद पर विश्वास करें, यदि आप खुद पर विश्वास नहीं रखेंगी तो कोई अन्य आप पर नहीं करेगा।
  • 09 Jun
    Oyindrila Basu

    उड़ता पंजाब-ड्रग्स के विरुद्ध एक लड़ाई।


    udta punjab

    बॉलीवुड हमेशा से सामाजिक परिवर्तन में भागीदार रहा है, चाहे वह उन्नति हो या अवनति ।  हर गम्भीर विषय पर चर्चा के द्वारा बॉलीवुड जागरूकता फैलाने में कामयाब रहा है।

    ड्रग्स और व्यसन द्रव्य भी इन्हीं में से एक विषय है, जो समाज की युवा पीढ़ी को अंदर से खोखला बना रही है।

    ड्रग ट्रैफिकिंग से सिर्फ भारत में ही नहीं पूरे विश्व में करोड़ों के व्यापार चलते हैं। हर साल टीनेज बच्चों में व्यसन और बड़ी आदतें बढ़ती नज़र आ रही है । लेकिन हमारा समाज ड्रग्स के खिलाफ कोई आवाज़ या ठोस कदम नहीं उठाता।

    ड्रग्स जैसे विषय पर बात छिड़ते ही सब कहने लगते हैं, "छी, ड्रग्स! नहीं नहीं, अच्छे घर के लोग ऐसे विषय अपने ज़बान पर नहीं लातें", समाज में फैले ऐसे कलंक और दोगलेपन से ही युवा पीढ़ी भटक रही है।

    उन्हें सही राह दिखाने वाला कोई नहीं। हम व्यसन के शिकार को कलंकित कर उन्हें समाज से दूर कर देते हैं; अपने बच्चों को ऐसे लोगों से बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी मदद कोई नहीं करता।

    उन्हें मानसिक सहायता की ज़रूरत है, लेकिन कोई इस बात को नहीं समझता। सही रास्ता मनोरोग विशेषज्ञ के पास है, पर उस तरफ ले कर कोई नहीं जाता, और इस प्रकार नई पीढ़ी विचलित और परेशान होकर गलत दिशा में प्रेरित होते रहते हैं।

    व्यसन और ड्रग्स के बारे में सही जानकारी ज़रूरी है। और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। और इसी क्षेत्र में कदम बढ़ा रहा है Abhishek Chaubey की नई फिल्म 'उड़ता पंजाब'

    4 अलग लोगों पर आधारित 4 कहानियाँ एक दूसरे से जुडी हैं सिर्फ एक कड़ी से-ड्रग ट्रैफिकिंग यानी व्यसन व्यवसाय।

    पंजाब में बढ़ती ड्रग की समस्या पर आधारित ये फिल्म शाहिद कपूर, आलिया भट, करीना कपूर और दिलजीत दोसांज को मुख्य किरदारों में दर्शाता है। ये चार एक लड़ाई पर हैं जो युवा पीढ़ी से व्यसन जैसे नासूर को मिटाने की फ़िराक में है।

    2016 में ये फिल्म काफी चर्चा में है, पर इससे पहले भी बॉलीवुड में हमने ड्रग्स पर फिल्में देखी है, 'हरे रामा हरे कृष्णा' (1971) और 'नया नशा' (1973) उन्हीं में से कुछ विचित्र फिल्में हैं।

    लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद जागरूकता अधूरी रही और समाज में ये ड्रग्स नामक ज़हर फैलता गया।

    और आज फिर से हिंदी सिनेमा इस व्यसन से बुरे प्रभाव को पर्दे पर दर्शा रहा है।

    Valerie Bertinelli जैसे प्रसिद्ध व्यक्तित्व भी इस आदत के शिकार रह चुके है, पर सराहने वाली बात ये है, कि वे ड्रग्स से लड़ें और जीतें।

    " cocaine बंद करने के बाद भी मुझे सालों लगे खुद को सम्हालने में, सूरज की रौशनी को महसूस करके खुश होने में"

    कोई भी लड़ाई आसान नहीं है। ड्रग्स से लड़ना अकसर ज्यादा  मुश्किल होता है, क्योंकि शारीरिक प्रक्रियाओं पर बस नहीं होता हमारा। लेकिन नामुमकिन कुछ भी नहीं।

    कोशिश करते रहना ही अहम बात है। और ड्रग्स और व्यसन के खिलाफ ये कोशिश करने आई है 'उड़ता पंजाब' और इससे जुड़ी जुर्मों को मिटाने के लिए हम सब साथ में कहेंगे, "ड्रग्स दी माँ दी"