कुल 169 लेख

  • 05 Jul
    Oyindrila Basu

    महिलाओं को मानसिक तनाव पुरुषों के मुकाबले ज्यादा क्यों होता है?

    indian woman painting

     

    तनाव की शिकार अक्सर महिलाएं ज्यादा क्यों होती हैं, आइये इसका मनोवैज्ञानिक कारण जानने की कोशिश करते हैं ।

    APA की Journal of Abnormal Psychology में कहा गया है, की महिलाएं अपनी भावनाओं को छुपा कर रखने में सक्षम होती हैं;  वे अंदर ही अंदर अपनी समस्याओं का समाधान ढूँढती है;

    समाज में ज्यादा स्वीकारे  जाने के लिए, और खुद को मज़बूत दिखाने के लिए वे सब कुछ मन में दबाये रखती है। इससे उनके मस्तिष्क पर तनाव ज्यादा होता है, और जब समस्याएं बढ़ जाती हैं, तो तनाव ज्यादा होता है।

    दूसरी ओर, मर्द किसी चीज़ की परवाह ना करते हुए अकसर तात्कालिक परिस्थिति केअनुसार व्यवहार करते हैं। वे अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति कर लेते हैं, इससे उनके मस्तिष्क पर ज्यादा तनाव नहीं होता, और नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन होता है।

    वैज्ञानिक रूप से, हॉर्मोन की अलग-अलग प्रक्रियाओं से भी औरतों में मानसिक समस्या ज्यादा होती है।

    औरतों में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम होती है, और इसी वजह से, उनके दिमाग में भी सेरोटोनिन कम मात्रा में तैयार होता है, जो कि दिमाग को शांत रखने में अधिक मददगार होता है; पर इसकी कमी से महिलाओं में तनाव का असर भी ज्यादा होता है।

    इसके अलावा, महिलाओं पर गर्भ-धारण, जन्म, और मातृत्व जैसी गम्भीर ज़िम्मेदारी होती है।

    डर और दुखद घटनाओं का शिकार भी महिलाएं ज्यादा होती हैं। इस कारण उनमें PTSD, १०% अधिक रूप में पाया जाता है, जब की पुरुषों में सिर्फ ४% में यह  घटना देखा गयी है।

    शादी शुदा औरतों को नए घर, नए परिवार में खुद को ढालना पड़ता है, उनके हर काम को नापा जाता है, उनका मत स्वीकारा नहीं जाता, और इन सभी कारणों की वजह से वे दुखी रहती हैं।

    अगर महिला ऑफिस में काम करती हो, तो वे घर में ज्यादा वक़्त नहीं दे पाने के लिए खुद को दोषी मानती हैं, पुरुष इस प्रकार नहीं सोचते; सामाजिक रूप से वे बाहर का काम करने के लिए ही अभ्यस्त हैं, अगर इच्छा हो तो घर का काम करेंगे, लेकिन औरतों को दोनों काम पर बराबर ध्यान देना होता है। इससे खुद के लिए वक़्त नहीं मिलता उन्हें, अधिक काम करके थक जाती हैं, और तनाव बढ़ता है।

    कर्म-क्षेत्र में भी लिंग जनित कारण के लिए अगर वेतन कम  मिले तो इससे महिलाओं के आत्मसम्मान को अधिक ठेस पहुँचाती है।

    इलाज करवाने जाओ तो वहां भी भेद-भाव। औरत अगर निराशा ज़ाहिर करें, तो लोग अकसर उसे स्वाभाविक 'जज़्बाती' व्यवहार बताते हैं, लेकिन पुरुष को तनाव हो, तो जल्द दवाई और चिकित्सा का सुझाव बताया जाता है।

    ध्यान रखें महिलाओं की मानसिक समस्या को नज़र अंदाज़ किया जाए, तो भविष्य में और गहरी समस्याओं का कारण हो सकती है।

    ऐसे में क्या करें महिलाएं?

    १. हर परिस्थिति में खुद को शांत रखने की कोशिश करें।

    २. अपने लिंग के बाकी लोगों से प्रतिस्पर्धा या मुक़ाबला ना करें।

    ३. विश्वास रखें की आप बेहतरीन हैं, और जो भी काम करें १००% उसमें डालें।

    ४. काम और व्यक्तिगत जीवन में सन्तुलंत बनाए रखना एक कला है। कभी खुद को दोषी ना माने।

    ५. आप अपने चारो तरफ की स्थिति को सम्हाल नहीं सकते, खुद पर नियंत्रण रखें, अपनी एक दुनिया बनाएं, पढ़ाई करते रहे; अच्छी फिल्में देखें।

    ६. व्यायाम और मैडिटेशन बहुत ज़रूरी है।

    ७. पौष्टिक आहार लें। ताज़ी हरी सब्ज़ियां, मछली का तेल, प्रोटीन इत्यादि सेरोटोनिन  की वृद्धि के लिए ज़रूरी है।

    ८. आप जैसे हैं वैसे रहे।

  • 04 Jul
    Janhavi Dwivedi

    सच्ची ख़ुशी क्या है ?

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    इस भौतिकतावादी संसार में ख़ुशी के मायने बदल गए हैं, लोग ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना और अधिक से अधिक सुख सुविधा के साधन जुटाने में ही ख़ुशी समझते हैं। जबकि ये चीजे ख़ुशी का सिर्फ बाहरी दिखावा भर हैं।

    आज हम आपको एक कहानी सुनाते हैं, जो आपको जीवन को सही तरीके से जीने के लिए प्रेरित करेगी ।

     

    ये कहानी एक खूबसूरत और महंगे कपड़ों से सजी एक ऐसी महिला के बारे में है, जो अपने मनोचिकित्सक के पास यह  शिकायत ले कर गई, कि उसे लगता था, उसका पूरा जीवन निरर्थक है, और उसके जीवन का कोई मतलब नहीं है।

    और वह काउंसलर के पास ख़ुशी पाने के लिए आई थी। काउंसलर ने अपने ऑफिस में फर्श साफ करने वाली एक बूढी महिला को बुलाया, और उनसे कहा कि, आप इन अमीर महिला  को बताएं कि आपने सच्ची ख़ुशी कैसे प्राप्त की ।

    बूढी औरत ने अपनी झाड़ू रख दी और कुर्सी पर बैठ, गई और अपनी कहानी बताने लगी....

    मेरे पति की मृत्यु मलेरिया से हो गयी थी, और उसके तीन महीने के बाद मेरा बेटा भी एक कार एक्सीडेंट में चल बसा।… मेरे पास कोई नहीं था, और मेरे पास कुछ नहीं बचा था।

    मैं रात को सो नहीं सकती थी, मैं ठीक से खा नहीं पाती थी, मेरे चेहरे पर कभी मुस्कान नहीं आती थी।

    यहां तक कि मैं अपना जीवन समाप्त करने  के बारे में सोचने लगी थी।

    फिर एक दिन काम से घर लौटते वक्त एक बिल्ली मेरा पीछा करने लगी, पता नहीं कैसे मुझे उस बिल्ली पर दया आ गयी..... बाहर बहुत ठंड थी तो मैंने उस बिल्ली को घर के अंदर आने दिया....

    मैं थोड़ा दूध लेकर आई, और वह चाट कर पूरी प्लेट साफ कर गई.... और फिर म्याऊँ म्याऊं करके मेरे पैर को सहलाने लगी, महीनों बाद पहली बार ..... मैं मुस्कुराई।

    उसके बाद मैंने अपनी सोच बदल ली, यदि एक छोटी सी बिल्ली की मदद करने से मेरे चेहरे पर स्माइल आ सकती है तो शायद दूसरे जरूरत मंद लोगों के लिए कुछ करने से मुझे और ख़ुशी मिले।

    इसलिए अगले दिन मैंने कुछ नाश्ता बनाया और उसे लेकर अपने पड़ोसी के पास गई, जो बिस्तर पर बीमार पड़ा था।

    हर दिन मैं किसी न किसी के लिए कुछ अच्छा करती। दूसरों को खुश देख कर मुझे इतनी ख़ुशी मिलती। आज मैं अपने सिवा किसी अन्य को नहीं जानती जो मुझसे बेहतर भोजन और नींद लेता हो। “दूसरों को ख़ुशी देकर मैंने सच्ची ख़ुशी प्राप्त कर ली।“

    यह सब सुन कर वह अमीर महिला रोने लगी। उसके पास वह सब कुछ था जो पैसे से खरीदा जा सकता है, लेकिन उसने वो चीजे खो दी थी, जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकती।

     

    मित्रों ‘जीवन की सुंदरता इस पर निर्भर नहीं करती कि आप कितना खुश हैं, बल्कि, दूसरे आपकी वजह से कितना खुश हो सकते हैं…, इस पर निर्भर करती है।‘

    खुशी एक मंजिल नहीं है, यह एक यात्रा है। ख़ुशी कल में नहीं, अभी में है। ख़ुशी निर्भरता नहीं, निर्णय है। ख़ुशी आप क्या हैं ये है, ना कि आप के पास क्या है इसमें है।“

    लीडर्स अपने लोगों में सफलता के प्रति आशा और अपने आप में एक विश्वास जगाते हैं। सकारात्मक सोच वाले लीडर्स लोगों को अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिया सशक्त बनाते हैं।

    "ख़ुशी का एक स्रोत बनें इसी में जीवन का सच्चा आनंद है। "     

  • 29 Jun
    Oyindrila Basu

    साइकोलॉजिकल ट्रिक्स-दूसरों के मन को पढ़ना एक कला है।

    psychological tricks

     

     

    मनोविज्ञान एक प्रशस्त समुद्र की तरह है। जिसमें हम जितना थाह लेते है, उसे उतना ही गहरा पाते हैं । आज इसी समुद्र से हम एक मोती ले कर आये हैं, जिसे आप अगर अपने मन में समझ लें तो आप दूसरों के मन की बात जान सकते हैं ।

    psychological tricks

    1. जब आप किसी से कोई सवाल पूछ रहे हैं, तो अपने सर को “हाँ” में हिलाइए, इसकी ज्यादा सम्भावना है कि, जो आपकी बात सुन रहा है, वह आपके साथ सहमत होगा।

     

    psychological tricks

    1. अगर आपके पास कोई सामान है, और आप उससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो अपने साथी को बातों में उलझाए रखिये, और इस बीच उसके हाथों में वह चीज़ थमा दें, इसकी ज्यादा सम्भावना है कि आपका साथी बिना सवाल किये, उसे ले लगा।

     

    psychological tricks

    1. अगर कोई आपको घूर रहा है, और आप परेशानी महसूस कर रहे हैं, तो उसका ध्यान भटकाने के लिए, अपनी घड़ी को देखें, तो वह घूरने वाला इंसान भी अपने घडी की ओर देखेगा यह जानने के लिए कि आप क्या देख रहे हैं।

     

    psychological tricks

    1. अगर आप चाहते हैं कि सभी आपकी ओर ध्यान दें, या आपको महत्व दें तो वे खुद को 'बेचारा' बनाये रखने की कोशिश करिये। लोग आपकी इस बात पर ध्यान देंगे और ना चाहते हुए भी सहानुभूति दिखाएंगे।

     

    psychological tricks

    1. अगर ज़ेरॉक्स के लाइन में आप आगे जाना चाहते हैं, तो यह कहने के बजाए कि "मुझे सिर्फ दो कॉपी करवानी है" यह कहिये कि "क्या आप मुझे पहले लाइन में लगने देंगे क्योंकि, मुझे जल्दी अर्जेंट काम है" 'क्योंकि' का इस्तेमाल करें। वजह बताना ज़रूरी है। समझदार लोगों को समझाने से वे खुश होंगे, और आपको पहले ज़ेरॉक्स करने देंगे।

    इन बारीकियों को समझ लेने से आप में आत्मविश्वास पैदा होगा, और आप भी लोगों के मन को पढ़ पाएंगे।  सही उपयोग से आपको काफी ख़ुशी और सफलता मिल सकती है, सब का प्यार भी पा सकेंगे आप।

  • 22 Jun
    Oyindrila Basu

    आत्मविश्वास बढ़ाने के 7 तरीके।

    believe yourself

     

    खुद पर दृढ़ यकीन होना, किसी भी काम की सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है। ये भरोसा आ तो जाता है, पर इसे बनाये रखना भी ज़रूरी है, इसका अभ्यास करना पड़ता है।

    जब आप किसी भी चीज़ की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो याद रखें, आप को वह हासिल ज़रूर होगा, आप में क्षमता है, आप कर पाएंगे। सिर्फ निम्न बातों को ध्यान में रखें ।



    1. लक्ष्य की स्थापना करें- पहले निश्चित करें कि आपको असल में क्या चाहिए। फिर उसकी तरफ बुद्धि और सकारात्मक सोच से आगे बढ़ें।

    जो चीज़ें आपके बस में है, उन पर प्रयत्न करें। जैसे अगर आपको अच्छा व्यवसायी बनना है, तो 'मेरे पास उतना धन राशि नहीं', 'प्रतियोगिता बहुत है', 'ग्राहक कभी सहयोग नहीं करते' जैसी सोच के बजाए, खुद कोशिश करें।

    अपने व्यवसाय को पूर्ण समय और मेहनत दें, हर हफ्ते एक पक्के मूल्य की धनराशि विज्ञापन के लिए बचाकर रखे।

    यह मान कर चलें कि हर हफ्ते आप कुछ रुपये व्यवसाय के विज्ञापन में खर्च करेंगे, और यह कोशिश करते रहें, जब तक ग्राहक संख्या बढ़ नहीं जाती।



    2. मेहनत लगातार करें- कोई भी अच्छा काम शुरू करना, और उसको करते रहने में फर्क है।

    फल तभी मिलेगा, जब आप कोशिश बीच रास्ते छोड़ेंगे नहीं। मान लें की आप अपना लेखन सुधारना चाहते हैं, एक हफ्ते में कुछ नहीं होगा। लिखने का अभ्यास करते रहे। रोज़, आधा घंटा। ज

    ब तक आपके अक्षर सही और सुन्दर नहीं हो जाते। मेहनत का फल देर से ही सही, पर अवश्य मिलता है।

     

    3. अपना गणित सही रखे- किसी भी चीज़ को शुरू करने से पहले उसके बारे में पूर्ण रूप से जान लेना ज़रूरी है।

    अगर आप विक्रय या व्यवसाय में जाना चाहते हैं, तो अपने क्षेत्र के बारे में सारे सांख्यिकी मालूम कर लें।

    देश में इस क्षेत्र की समीक्षा क्या है, कितना लाभ और कितना नुकसान हो सकता है, कितनी वृद्धि हो सकती है, इसकी सब जानकारी लें, इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, और आपको पता होगा की आपने अब तक कितनी सफलता पाई, और कितना आगे जाना है ।

     

    chase your dream

    4. असफलता का सामना करें- किसी काम में सफलता ना मिलने पर हताश होना स्वाभाविक है, पर उससे निराश ना हों, कोशिश जारी रखें।

    अगर सफर कठिन है, तो ये यकीन रखें की उसका परिणाम उतना ही लाभदायक और मीठा होगा।



    5. नकारात्मक उत्साह- जिस काम में आप पीछे हैं, उसी को बार बार करने की कोशिश करें। अपने दोस्तों के कार्य और उनकी सफलताओं के बारे में जानकारी रखें, ताकि अपने लक्ष्य की ओर आप आगे बढ़ते रहे, ।

     

    6. सकारात्मक प्रोत्साहन- कभी कभी आपको लगेगा की आप खुद से हताश हो रहे हैं, तब जो चीज़ें आपको ख़ुशी देती है, उन्हें देखें या करें। अच्छी यादें, अच्छे गीतों को अपना दोस्त बनाएं।



    7. नकारात्मक सोच से दूर रहें- जो काम आपने शुरू किया है, उसको करते रहे, कोशिश जारी रहना ज़रूरी है। कई लोग आपको गलत बताएँगे, आपकी कोशिश को बेकार और बकवास कहेंगे, पर हिम्मत ना हारें, आप क्या कर रहे हैं वह सब को दिखाएँ, उसका प्रदर्शन करें, मेहनत एक दिन ज़रूर फल देगी । आपका हुनर पहचाना जाएगा।

  • 21 Jun
    Oyindrila Basu

    जाने क्यों होता है माइग्रेन

    migrain

     

    शरीर में एस्ट्रोजन की कमी यानी सर दर्द, माइग्रेन का दर्द।

    हम में से कई लोग हैं जो माइग्रेन की शिकायत करते हैं। पर जिन्हें नहीं है, वे ये पीड़ा कभी समझ नहीं पातें।

    पर शोध के अनुसार महिलाएं मर्दों की तुलना में ४ गुना ज्यादा इस दर्द से पीड़ित रहती हैं 

    इसके कई कारण हो सकते हैं- आनुवंशिक तौर पर भी यह आप में आ सकता है। tyramine नामक हॉर्मोन के बढ़ने से भी माइग्रेन के दर्द बढ़ सकते हैं।

    नींद कम आने की समस्या भी एक अहम कारण है।

    पर जो सबसे महत्वपूर्ण कारण पाया गया है, वह है, महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन की कमी, जिससे अधिक सर दर्द की सम्भावनाएं होती हैं।

    घटते एस्ट्रोजन की मात्रा के साथ साथ माइग्रेन का दर्द बढ़ता है। न्यूरोलॉजी नामक एक जर्नल में हाल ही में एक रिसर्च छपा था, जिसके अनुसार, महिलाओं में, मासिक धर्म के एक दो दिन पूर्व एस्ट्रोजन की मात्रा घटने के कारण सर दर्द, और माइग्रेन जैसी पीड़ाएं बढ़ जाती हैं।

    114  महिलाओं पर आज़माई गयी इस  शोध प्रक्रिया द्वारा ये साबित होता है, की शरीर के इस विशेष हॉर्मोन की गतिविधि में अगर संतुलन ना हो, तो सर दर्द गम्भीर रूप ले सकता है।

    दवाइयां काम आती हैं, लेकिन इससे छुटकारा पाने के और भी कई तरीके हैं, जिन्हे हम आज बताने जा रहे हैं ।

     

    शरीर में नमी बनाये रखें- अधिक मात्रा में पानी पीते रहे । इससे शरीर में जल का अनुपात अच्छा रहेगा, दर्द के वक़्त भी अगर एक गिलास ठंडा पानी पी लें तो लाभदायक होता है।

    कैफीन का लाभ- अगर आप रोज़ कॉफ़ी जैसे पदार्थ का सेवन नहीं करते, तो दर्द के वक़्त एक कप कॉफ़ी अच्छा असर दिखाता है।

    गरम भाप- गरम भाप या सर्द-भाप दोनों सर दर्द में लाभ दायक हैं। पर इसके साथ किसी मलहम, बाम का इस्तेमाल ना करें, फिर दोनों बेअसर हो जाएंगे।

    Apple cider vinegar एप्पल साइडर विनेगर- इसकी थोड़ी मात्रा पानी में मिलाएं और शहद के साथ पी जाएँ ।

    पेपरमिंट- पेपरमिंट के तेल को सर के अगले हिस्से में लगाएं, दर्द में ठंडक और राहत मिलेगी।

    Cayenne pepper कायेन पीपर- ये मिर्ची सर दर्द और माइग्रेन के दर्द में जादुई काम करती है।

    अदरक- इसके उपकार कई गुण हैं। ये शरीर में प्रोस्टग्लैंडिंस को कम करती है, जो मस्तिष्क के नसों के लिए काफी हानिकारक हैं।

     

    नींद सही वक़्त पर पूरा करें। हर दिन व्यायाम करते रहना ज़रूरी है। इससे रक्त संचालन स्वाभाविक रहता है । तनाव में ना रहे, फुर्ती में जियें।