कुल 169 लेख

  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    टैटू का शौक

    tatoo

    दुनिया भर में प्राचीन काल से ही टैटू बनवाने का प्रचलन रहा है ।

    कुछ इसे अपने कल्चर से जोड़ते हैं तो कुछ शौक के रूप में । पर क्या कभी आपने सोचा है कि लोग शौक में टैटू क्यों बनवाते हैं ?

    कुछ लोगों को टैटू बनवाते समय  सुई  और उसकी चुभन का डर हो सकता है, पर कुछ लोगों को यह अच्छा लगता है।

    एक टैटू बनवाने का मतलब है कि कुछ दिनों तक टैटू वाले भाग को पानी से नहीं धोना और उससे होने वाले दर्द और असुविधा को सहना ।

    फिर भी लोग बड़े गर्व के साथ,ढेर सारा पैसा देकर,बहुत सारा  समय खर्च करके इसे बनवाते हैं।

    इन्हे इसे बनवाने की प्रेरणा कहाँ से मिलती है ?

    टैटू बनवाने के मनौवैज्ञानिक कारणों को जानने के लिए पढ़िए:

    नशीला अहसास:

    जब हम दर्द महसूस करते हैं तो एंडोर्फिन नामक रसायन मस्तिष्क से निकलता है।टैटू बनवाते समय बहुत दर्द होता है क्योंकि इसमें स्याही को त्वचा के अन्दर डाला जाता है; जिससे एंडोर्फिन का स्राव होता है,जो व्यक्ति को नशीला अहसास देता है। लोगों को इसमें इतना आनंद आता है,और वे बार- बार  टैटू बनवाना चाहते हैं ।

    यह लोगों को ज्यादा ऊर्जा देता है:

    जब हम रोमांचक और चुनौतीपूर्ण कार्य करते हैं तो एड्रिनलिन नामक हारमोन का स्राव होता है। टैटू बनवाना भी एक रोमांचक और चुनौती भरा कार्य होता है, जिससे एड्रनलिन का उत्पादन होता है।कुछ अध्ययन यह दावा करते हैं कि कुछ लोगों में एड्रनलिन का स्राव दूसरों से अधिक होता है।उनका झुकाव न केवल टैटू बनवाने में बल्कि अन्य साहसिक और रोमांचिक कार्यों में भी होता है।

    यह भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने का तरीका है:

    शरीर पर टैटू दूसरे व्यक्ति को उसके विचारों के बारे में बताता है । और इसलिए यह एक आत्म अभिव्यक्ति का बहुत ही शक्तिशाली माध्यम है। किशोरावस्था एक ऐसी अवस्था है जिसमें किशोर जोश में होते हैं और टैटू के द्वारा वे अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति कर यह आभास कराते हैं कि उनकी भी एक पहचान है, और यह हमेशा उनके साथ रहेगी |

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  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    प्रभावी ढंग से याद करने के तरीके

    Exam se pahle yad kaise kare

    कविता क्लास पांचवी में पढ़ रही है और अब उसके टेस्ट और एग्जाम शुरू हो चुके हैं,एक चीज जो हमेशा उसको परेशान करती है कि कैसे वह लम्बे प्रश्नउत्तर को याद करे और उसको समझे ।

    अक्सर हम सभी अभिभावक बच्चों को पढ़ाई की इस समस्या से जूझते हैं उनकी मदद करते है और खुद भी समझ में नहीं आता की कैसे किसी पाठ के महत्वपूर्ण पॉइंट्स को याद किया जाए और एग्जाम टाइम में आसानी से सब कुछ अच्छे तरीके से लिखा जाए ।

    तो आज  हम बात करेंगे कि कैसे आप महवपूर्ण,लम्बे या कठिन जानकारियों को याद रख सकते हैं ।

    Cognitive psychology या  संज्ञानात्मक मनोविज्ञान ने स्मृति अनुसंधान  क्षेत्र में काफी काम किया है, और पाया है कि,कोई भी पाठ  याद करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उसको समझ कर और उसके मुख्य मुख्य बिन्दुओं को  एक कोड के रूप में  याद रखें । हलके तरीके से सिर्फ याद नहीं करना चाहिए बल्कि उसको समझ कर उससे जुड़ जाएँ ।

    दिए गए मटेरियल को गहराई से समझने के लिए कई तरीके होते हैं । हम यहाँ उनमें से कुछ पर प्रकाश डालेंगे :

    लिखना या  नोट करना :जब भी हमें टीचर क्लास में बोर्ड के साथ पढ़ाते हैं ,हम उनके द्वारा कही हुई बातों  को सुन कर उनकी मुख्य बातों को कॉपी में लिख लेते हैं ।ह्म ऐसा क्यों करते है ? ताकि सुनने के साथ जब हम उसे मस्तिष्क  में याद कर नोट डाउन करते हैं तो हम उसे ज्यादा गहराई से समझ पाते हैं । इसी तरह जब हम किसी पाठ को अच्छे से समझना चाहते  हैं तो उसे पढ़ कर उसके मुख्य पॉइंट्स को  नोट डाउन कर लें, और फिर दुबारा एक फ़्लोचार्ट या कुछ अन्य संगठित तरीके से इसे फिर से लिख लें।  यह एक आजमाया हुआ तरीका है किसी मैटेरियल को याद करने का ।

    बात करना : जब हम अपने द्वारा पढ़े हुए मटेरियल के बारे में अपने दोस्तों से बात करते हैं तो हम पहले पढ़ी हुई जानकारी को समझ कर दूसरों को समझाते हैं , तो  हमें वह और अच्छे से समझ में आ जाती है , वे हमसे सवाल पूछते हैं, या इसके बारे में बात करते हैं ।

    इस मामले में अभिभावक बच्चे से उसके द्वारा पढ़े हुए पाठ को पूछें और उस पर बात करें , बच्चा जब उसके बारे में बताता है तो वो अपने आप समझता और सुनाता भी है जिससे वह पाठ अच्छे से समझ में आ जाता है ।

     

    स्मृती-विज्ञान Mnemonics:  विस्तृत जानकारी को  एक सरल रूप में आसानी से याद करने के लिए अपने  दिमाग में शब्दो के प्रथम शब्द से बना  एक मुख्य शब्द ध्यान में रख सकते है ।

     उदाहरण के रूप में अगर आपको तैयारी, ऊष्मायन, रोशनी और सत्यापन ये  चार शब्द क्रमबद्ध याद करने हैं, तो आप इन शब्दों का  पहला अक्षर ले लीजिये, जो बनता है - तैऊरोस ।

    अब आप आसानी से इसे अपने दिमाग में याद रख सकते हैं ।

    और जब एग्जाम में लिखना हो तो वह Mnemonics शब्द  याद कर हर एक अक्षर  का मतलब  लिख सकते हैं ।

    एक दूसरा तरीका है जिसे हम लोकी विधि Loci method कहते हैं ।

    जिसमें आप एक परिचित जगह को याद कीजिये और इस जगह पर मानसिक रूप से मुख्य गेट पर पहला अक्षर  फिर लिफ्ट या सीढ़ी पर दूसरा अक्षर, कमरे के गेट पर तीसरा  कमरे के अंदर चौथा अक्षर रख कर मानसिक रूप में याद कर सकते हैं  ।

    साथ ही यह याद रहे कि जिस पाठ का निमोनिक्स याद कर रहे हैं उसके नीचे याद की हुई निमोनिक्स  नोट कर  लें ।

    इसके अलावा जब नोट्स लम्बे हों तो उन्हें धीरे धीरे पढ़ें जिससे कठिन शब्द और मूल अर्थ समझ में आते हैं ।

    नोट्स  को बार बार पढ़ें और निमोनिक्स को पुनः देखें ।

    याद रखें Revisit का मतलब होता है , ‘revise’.

    अगर आपके मन और कोई सवाल है तो कृपया कमेंट्स बॉक्स में पोस्ट करें ।

    -eWellness Expert

  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    कहीं आप झूठे सम्बन्ध के जाल में तो नहीं

    jhuthe sambandh kya hote hai

    मेघना की शादी हुए तीन साल हो गए, परन्तु उसने कभी यह महसूस नहीं किया कि सुनील के दिल में उसके लिए प्यार है । अक्सर दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर तकरार होना, उसकी छोटी सी गलती पर भी सुनील का कठोर व्यवहार, और इन सबसे ऊपर उसके पति का अपनी ही दुनिया में खुश रहना । मेघना अंदर ही अंदर दुखी रहने लगी । वह किसी से अपनी परेशानी बता ना पाने की वजह से  अंदर ही अंदर दुखी रहने लगी । इन सबकी वजह से उसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों गिरने लगा ।

    रिश्तों का व्यक्ति  के जीवन में एक विशेष स्थान होता है , हालाँकि ,कुछ लोग  सिर्फ  किसी के साथ रहने के लिए झूठे सम्बन्ध निभाते जाते हैं आज हम आपको झूठे सम्बन्ध को पता करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें बताते हैं ।

    1 संवादहीनता:

    अगर आपके और आपके  साथी के बीच बात न होकर तकरार ही हो, और एक दूसरे के ऊपर विश्वास नहीं हो, तो आप समझ लीजिये कि आप झूठे सम्बंध में है । बातचीत होने का मतलब है कि, आप दोनों एक सच्चे रिश्ते को निभाना चाहते हैं ।

    २ एकांत में अकेले रहना:

    अगर आप अपने साथी के साथ रहना पसंद नहीं करते और एकांत में अकेले  बैठ कर आपको ज्यादा ख़ुशी महसूस होती है, तो आप समझ लीजिये कि आप झूठे सम्बंध को निभा रहें हैं ।

     

    3 अपने जीवन साथी से दूर रहने में ख़ुशी मिलना:

    अगर आपका आपके  साथी से अलग होना आसान है अथवा आप अपने साथी से बात नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि सच्चे संबंध में अपने साथी के साथ रहने की तड़प होती है और एक दूसरे से अलग होना आसान नहीं होता, अगर यह आपके लिए आसान है तो आप एक झूठे सम्बन्ध को निभा रहे हैं ।

    4  ऐसा महसूस होना जैसे आप अपने जीवन साथी  को नहीं जानते:

    अगर आप को ऐसा लगता है कि आप अपने साथी को पूरी तरह से नहीं जानते या नहीं समझते । कभी-कभी जब आपका साथी आपसे  कुछ कहता है या कहने की कोशिश करता है और आपको कुछ ऐसा लगता है जैसे कि कोई अनजान व्यक्ति आपसे कुछ कह रहा है या आप किसी अनजान व्यक्ति से कुछ कहना चाह रहे हैं तो यह भी झूठे सम्बन्ध का एक चिह्न हैं ।

    5 संबंधों में कमी बने रहना:

    अगर आप यह महसूस करते हैं,कि जो दरार आपके रिश्तों के बीच है वह कम नहीं हो रही, और विश्वास, वफ़ादारी और बातचीत की कमी है तो यह एक झूठा सम्बन्ध हो सकता है ।

     

    6 अपनी  गलती के लिए अपने साथी को दोष देना(अपनी गलती को नज़रअंदाज  करना):

    अगर आप और आपका साथी खुद गलती करें और  की गयी गलती को एक दूसरे की गलती बताते हैं और इस बात को लेकर  दोनों वाद-विवाद करते है तो आप झूठे संबंध में हैं ।

    7 किसी दूसरे की तरफ आकर्षित होना:

    अगर आपको लगता है कि आपको अपने साथी के बजाय किसी दूसरे के साथ समय बिताना ज्यादा अच्छा लगता है और आपको वास्तव में यह पता न हो कि उस व्यक्ति के साथ रिश्ता निभाना कैसा होगा, तो आप समझ लीजिये कि यह एक झूठा सम्बन्ध है, और आप का दिल अब इस वर्तमान रिश्ते को निभाना नहीं चाहता |

     

    8  विश्वास की कमी:

    अगर आप और आपके साथी के रिश्तों में विश्वास की कमी है । अगर आप अपने साथी को  ईमानदारी और सच्चाई के साथ अपने रहस्यों के बारे में बता सकते हैं और आपको  विश्वास है कि आपका साथी आपको छोड़ेगा नहीं । और अगर ऐसा नहीं है तो आप एक झूठे सम्बन्ध में हो सकते हैं ।

    आप  क्या कर सकते हैं ?

    यदि आप अपने झूठे सम्बन्ध को  ठीक करना चाहते है तो आप अपनी भावनाओं को  अपने साथी के प्रति सच्चा और मजबूत बनाइये । और  अगर ऐसा नहीं है तो अलग हो जाइए और रिश्तों को छोड़ दीजिये

    किसी झूठे सम्बन्ध को सच्चे सम्बन्ध में बदलना इतना आसान नहीं होता इसलिए आपको काउंसलिंग और सही मार्गदर्शन की  जरूरत है जो की आप ewellnessexpert.com पर ले सकते हैं । फिर भी  यदि आपको लगता है कि आपके सम्बंध ठीक नहीं हो सकते तो बेहतर है कि उस सम्बन्ध से दूर हो जाइए । और स्वयं को आप किसी अन्य काम में  व्यस्त कर लीजिये यह सब आपको थोड़ा कष्ट जरूर देंगे, लेकिन कुछ समय में आपका अकेलापन दूर हो जायेगा और अकेले होने पर भी आप खुद को संतुष्ट महसूस करेंगे ।

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  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    क्या आप मनोचिकित्सक से परामर्श सेवा Psychotherapy लेना चाहते हैं?

     

    psychotherapy kya hoti hai

    जैसे की Medicines की विभिन्न प्रकार की शाखाएं और उपचार के तरीके है,ठीक उसी तरह से मनोचिकित्सा परामर्श की भी विभिन्न शाखाएं और दृष्टिकोण हैं ।

    कुछ उपचार अधिक विशिष्ट और विशेष प्रकार के मनोरोगों के लिए उपयोगी होते हैं और कुछ सामान्य और कई लोगों के लिए प्रयोग की जाती हैं।

    सामान्यतः,मनोरोग से जुड़े विभिन्न मसलों को हल करने के लिए अलग अलग थेरेपी और तरीके होते हैं।

    चिकित्सा तब दूसरे प्रकार की होती है जब यह एक व्यक्ति,जोड़े में, समूह के लिए या परिवार के लिए होती है ।

    इसके अलावा उपचार में थेरेपिस्ट की भूमिका का भी अहम योगदान होता है।

     मनोचिकित्सकों द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाली साइकोथिरैपी के विभिन्न प्रकार:

    संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी(Cognitive behaviour therapy):

    यह आज तक के  सबसे अधिक इस्तेमाल किये जाने वाले उपचारों में से एक है । इसके कारण यह है कि यह शोध पर आधारित है और अवसाद और चिंता के इलाज में काफी कारगर है, और अधिकतर लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं । सीबीटी थेरेपिस्ट अपने (client) के सोचने के तरीके में बदलाव की तकनीक सिखाते हैं। वे यह बताते हैं कि कैसे हमारे विचार, हमारी भावना और कार्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, और अगर हम हमारे विचारों में परिवर्तन लाएं तो हमारी भावनाएँ और कार्य करने के तरीके अपने आप बदल जाते हैं। सीबीटी का इस्तेमाल वैवाहिक जीवन में कलह दूर करने, नशीली दवाओं का सेवन रोकने यहां तक कि खाने से संबंधी विकार eating disorder, और दूसरी अन्य मानसिक समस्याओं को दूर करने में किया जाता है ।

    समूह थेरेपी(Group Therapy): इस थेरेपी का प्रयोग तब किया जाता है जब काफी संख्या में लोग एक ही प्रकार की मानसिक समस्या से जूझ रहे हों। ग्रुप थेरेपी तब और कारगर  होती है जब एक व्यक्ति  को विश्वास हो जाता है कि अकेले वह ही इस चिंता से नहीं जूझ रहा है बल्कि और भी बहुत से लोग हैं,जो उसी की तरह हैं । और अगर वे ठीक हो गए हैं तो मैं भी हो सकता हूँ ।

    समूह चिकित्सा के विभिन्न स्वरूपों हो सकते हैं जो उसके बनाने वाले और प्रयोग करने वाले पर निर्भर करता है।

    समूह चिकित्सा की मदद से क्रोध पर काबू रखना , शोषण से होने वाले मानसिक तनाव को कम करना,सामाजिक कौशल सिखाना, या समय प्रबंधन का महत्त्व आदि की ट्रेनिंग दी जाती है ।

    द्वंद्वात्मक व्यवहार थेरेपी(Dialectical Behaviour Therapy): यह थेरेपी सीमा व्यक्तित्व विकार(borderline personality disorders), मूड विकारों के  साथ ही अन्य व्यक्तित्व विकार के लिए उपयोगी है ।

    मन की वह अवस्था जिसमें व्यक्ति दुविधा में हमेशा रहे या दो विपरीत प्रकार के कार्य एक साथ करे,यह स्थिति थोड़े समय के लिए ठीक है परन्तु ज्यादा समय से हो तो उससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, घबराहट सी होती है  ।

    ऐसी स्थिति से निकलने के लिए Mindfulness therapy का प्रयोग किया जाता है ।Mindfulness पूरी तरह से पल में जीने में विश्वास रखता है,मतलब अगर आप एक कार्य कर रहे हैं तो उसे मन लगा कर अच्छे से करिये दूसरे तरफ ध्यान मत लगाइये ।

    आजकल, mindfulness के प्रभाव को बढ़ाने के लिए डीबीटी और सीबीटी दोनों थेरेपी का एक साथ प्रयोग किया जाता है ।

    परिवार थेरेपी(Family Therapy): परिवार में कलह होने की एक प्रमुख वजह होती है विचारो की असहमति । और उस स्थिति में पूरा परिवार बिखरने लगता है,अतः फैमिली थेरेपी में,पूरे परिवार को एक साथ बैठा कर मतभेदो को सुलझाने की थेरेपी होती है । परिवार के सदस्यों के बीच आपसी बात-चीत बढे ,और समस्या का समाधान हो,यह इस थेरपी का प्रमुख उद्देश्य होता है ।

    इन सभी विभिन्न प्रकार की मनोचिकित्सा के अलावा, एक योग्य मनोचिकित्सक की भूमिका भी अहम होती है ।

    और साथ ही साथ  अपने थेरेपिस्ट को थेरेपी के बाद हुए बदलाव की जानकारी देना ,और उसका असर आपके जीवन पर कितना हुआ,यह सब भी थेरेपी के प्रभाव को बढ़ाते हैं ।

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  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    क्या करें जब आपका अपना मनोविकृति का शिकार हो?

     kya kare jab aap manovikrit se pidit ho

    मेरे मन की ये बेचैनी को कोई सुन नहीं सकता ।
    मैं आवाजों को सुनता हूँ, कोई मुझको बुलाता है ।
    यहाँ सब लोग मुझको ही बस पागल समझते हैं ।
    मेरे अपनों का बस मुझको एक सहारा चाहिए ।
    दिल का दर्द समझे जो वो एक अपना चाहिए ।

    यह पंक्तियाँ उस मन की अभिव्यक्ति हैं जो एक ऐसे स्थिति से जूझ रहा है जिसमें व्यक्ति वास्तविकता और कल्पना की स्थिति में अंतर नहीं कर पाता । इसे हम मनोविकृति (सायकोसिस) कहते हैं ।इस रोग से परेशान व्यक्ति को जब सायकोटिक अटैक होता है तो भ्रम की स्थिति में वे जो भी देखते,सुनते,या अनुभव करते हैं, वह ना हमें दिखाई देता है और ना ही सुनाई देता है। ऐसी स्थिति में रोगी को होने वाले भ्रम से आप समझ नहीं पाते कि क्या करें? उनके द्वारा देखी,सुनी बातों पर यकीन करे,या ना यकीन करें अथवा कुछ भी ना करें। इसके अलावा उनके हिंसक होने की स्थिति में आप क्या करें? सायकोटिक अटैक के दौरे मरीज को कई बार होते हैं, अतः हम यहां आपको कुछ जानकारी दे रहें है जिनको इस प्रकार के दौरों में आप जानकारी के रूप में प्रयोग कर सकते हैं | आप मरीज से पूछ सकते हैं, कि दौरे पड़ने के दौरान

    उन्हें क्या हुआ था?
    उन्होनें क्या देखा और सुना?
    दौरे के दौरान क्या वे आक्रामक हुए थे?
    उन्हें इस एपिसोड से निकलने में कितना समय लगा?
    अगर वे बात करने की स्थिति में है तो आप उनसे बात करके एक कार्यप्रणाली तैयार कर सकते हैं|

    एक बहुत ही प्रमुख बात जो ध्यान देने योग्य है कि उनकी जल्द से जल्द दवा चिकित्सा शुरू की जाय ।

    सही दवा और मनोचिकित्सा से इस मनोविकृति के बार बार आने की तीव्रता में कमी आती है और इस मनोविकृति के बारे में जानकारी होने से अधिक से अधिक मदद मिल सकती है।

    दूसरी बात यह सुनिश्चित कर लें कि मरीज के रहने वाले स्थान पर कोई भी धारदार हथियार ना हो, जिसे वे खुद को या दूसरों को हानि पहुँचने के लिए प्रयोग कर सकें। उस स्थान पर कोई भी खिड़की या बालकनी ना हो जिससे वे वहां से कोई खतरनाक कार्य ना करें ।

    रोगी को जब भी मानसिक दौरे पड़ते हैं, और उन्हें भ्रम की स्थिति होती है, तो आप कभी भी उनके इस भ्रम से सहमत ना हों, अन्यथा उनका भ्रम विश्वास में बदल जायेगा, परन्तु यह भी ध्यान रखें कि उनसे असहमति भी मत रखिये, अन्यथा वे और अधिक हिंसक और उत्तेजित हो सकते हैं ।

    सबसे अच्छी बात यह होगी कि आप उनको प्यार से समझाएं, उनके साथ सहनभूति रखें, उनसे कहें कि जो भी वो देख रहे या सुन रहे हैं वह आपको नहीं दिख रहा, आप उन्हें कह सकते हैं कि आप उनके साथ हैं, और उन्हें हर संभव मदद करेंगे ।

    मानसिक विछिप्तता की स्थिति में मरीज को यह और भी डरावना लगता है कि कोई कैमरा लेकर उसका पीछा कर रहा है, इस स्थिति में अगर आपको मरीज को देखने के लिए किसी प्रशिक्षित और अनुभवी व्यक्ति की मदद मिल जाये तो बेहतर होगा, साथ ही आप को तनाव और थकान से राहत मिलेगी ।

    जब भी आपका अपने बात करने की स्थिति में हों, उनसे बात करनी चाहिए । अनुसंधानों से स्पष्ट हुआ है कि, अगर मरीज को उनको पड़ने वाले दौरों के बारे में उन्हें जानकारी दी जाए, विस्तृत विवरण उपलब्ध कराया जाए, तो वे उपचार के लिए तैयार रहते हैं, और उनको बेहोश किये जाने की स्थिति में वे ज्यादा विरोध नहीं करते ।

    मनोविकृति को लेकर जितनी भी अफवाह हैं वे सभी हम सब को मिल कर दूर करना होगा । यह मधुमेह जैसी बीमारियों की तरह ही है, समय से उपचार और जागरूकता से यह कंट्रोल में आ सकती है ।

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