कुल 169 लेख

  • 07 Oct
    Oyindrila Basu

    ख़ुशी से खेलें, सफलता जरूर मिलेगी ।

    usain bolt

     

    आज हम एक ऐसे शोध का जिक्र करने जा रहे हैं, जिससे यह पता चला है कि, जब खिलाड़ी खेल को प्रतियोगिता मुक्त होकर खेलते हैं, तो वे ज्यादा खुश और जोश से खेलते हैं, और ऐसी स्थिति में उनकी सफलता भी दूर नहीं रहती । खेल में स्फूर्ति से बने रहना एक बहुत बड़ी बात होती है, आप नई-नई तकनीक सीखते हैं, खेल में महारत हासिल होती है, और ऐसे ही खेलते वक़्त आपको मज़ा आता है।

    एक प्रतियोगिता मुक्त परिवेश आपको तनाव मुक्त रहने में मदद करती है, और इससे आपको खेल खेलने में रुचि रहती है; अगर जीत और हार आप के लिए खेल से ज़्यादा महत्व रखता है तो खेल में हार होने से आप निराश के शिकार हो सकते हैं ।

    rio winner

    Rafael Nadal जैसे विख्यात खिलाड़ी सिर्फ खेल में मज़ा और स्फूर्ति उपभोग करने के लिए १२ वर्षीय उम्र में फुटबॉल और टेनिस खेलने लगे , जब की Andre Agasie जबरन टेनिस खिलाड़ी बनने के चक्कर में खेल पर से ही रुचि खो बैठे।

    आजकल ऑनलाइन विडियो गेम में भी जीतने से ज्यादा जरूरी स्कोर पाने पर जोर दिया जाता है,  खुश मिज़ाज खिलाड़ी केवल अपने अच्छे स्कोर से ही काफी खुश रहते हैं, गेम में जिसे किल-डेथ रेशियो कहा जाता है, वह ज़्यादा ज़रूरी हो रहा है।

     

    यह भी एक बढ़िया बात है, विडियो और कंप्यूटर गेम के प्रभाव से लोगों को जो व्यसन या लत लगती है, अगर जीत की चिंता ना हो, तो ये कई हद तक कम हो  सकता है, और इससे आपका काफी समय बचेगा।

    अगर जीत हर हाल पर हासिल करने का जुनून आप में ना हो, तो आप  मानसिक रूप से स्वस्थ  रहते हैं।

    तो क्या इसका ये मतलब है, कि  खेलते वक़्त जीतने की कोशिश भी ना करें?

    अगर एक बच्चे को ये पता हो, कि  जीतना ज़रूरी नहीं है, तो वह खेल में जीतने की कोशिश भी नहीं करेगा। फिर जीवन में अगर आपको हक़ीक़त में लड़ना पड़े, तो इस रवैये से आपको मुश्किलें हो सकती है। अगर रास्ते में गुंडों से आप लड़ रहे हैं, तो जीत की कोशिश ना करने से आप को सब मार कर चले जाएंगे?

    अगर परीक्षा में प्रथम होना ज़रूरी ना हो, तो बच्चा पढ़ाई ही क्यों करेगा?

    इसलिए स्कूल में बच्चों में एक स्वस्थ प्रतियोगिता पूर्वक मस्तिष्क  तैयार किया जाता है, ताकि वे आपके लगन और  मेहनत को कम ना होने दें। पर जीत के साथ साथ हार को भी समान रूप से स्वीकारना चाहिए।

    जीतना बढ़िया बात है, और कुछ कुछ क्षेत्र में ज़रूरी भी है, लेकिन खेल का मज़ा लेना मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज़्यादा ज़रूरी है; किसी भी हालत में जीतना होगा, ऐसी चिंता स्वास्थ्य और खिलाड़ी सचेतनता के लिए हानिकारक है।

    खुश रहें, और ख़ुशी से खेलें।

  • 27 Sep
    Oyindrila Basu

    अधिक क्रोध आपका दिमागी संतुलन भी बिगाड़ता है ।

    anger management therapy

     

     

    गुस्सा सेहत के लिए हानिकारक है, ये हम सभी जानते हैं। इससे केवल मानसिक तनाव ही नहीं होता, बल्कि हमारे इस कार्य से दूसरों को भी तकलीफ पहुँचती है। गुस्से की वजह से दूसरों को दुःख पहुँचता है, हमारा सामाजिक सम्बन्ध बिगड़ता है और शारीरिक नुकसान भी होता है।

    पर हम में से शायद कम ही लोग जानते हैं, की अतिरिक्त गुस्सा करने से दिमागी सन्तुलन और मस्तिष्क का संचालन भी बिगड़ सकता है।

    गुस्से और उत्तेजना की वजह से दिमाग में सेरोटोनिन की मात्रा में कमी आती है; ये सेरोटोनिन हमें शांत और खुशहाल रखने में मदद करता है, ये पदार्थ तनाव और निराशा से लड़ने में मददगार होता है जो अतिरिक्त गुस्सा करने से प्रभावित होता है।

     

    अमरीका में हुए एक रिसर्च द्वारा लैब में देखा गया है, जब चूहों को दूसरे समजातीय जीव पर आक्रमण करने का मौका दिया गया, तो शुरुआत में उनकी उत्तेजना कम मात्रा में थी, जो धीरे धीरे बढ़ती गयी और वे अधिक आक्रामक होते गये, इस दौरान उनके दिमाग में सेरोटोनिन की मात्रा की जांच की गयी, और यह साबित हुआ, की इस पदार्थ की मात्रा में कमी आयी है, जिसकी वजह से उनमें क्रूरता बढ़ती गयी।

    शिकागो में हुए रिसर्च द्वारा ये भी पता चलता है, की कम उम्र के लोगों में गुस्सा जल्दी आता है, खूनी और अपराधियों में भी इस सेरोटोनिन का परिमाप सही रूप से नहीं रहता जिसकी वजह से उनका मस्तिष्क सही रूप से काम नहीं करता, उन्हें क्रोध भी दूसरों से ज़्यादा आता है।

    गुस्से को कम ना करने से मस्तिष्क की कार्य विधि में फर्क आता है, और इसके कारण आप और भी हिंसक बन जाते हैं।

     

     इस प्रवृत्ति को कम करने के लिए हम क्या कर सकते हैं?

    1. हर दिन सुबह १५ मिनट प्राणायाम कीजिये; अच्छे-बुरे ख़याल आएंगे, पर आप उन्हें उनके हाल पर छोड़ दें, उनमें ना उलझें।

    2. जब भी गुस्सा आये, कमरे में जा कर 'ॐ' शब्द का उच्चारण कीजिये, ये शब्द सार्वभौमिकता  का प्रतीक है, और इस शब्द में एक सकारात्मक ऊर्जा है, जो आपको शांत करती है, और मस्तिष्क में सेरोटोनिन की मात्रा को बढ़ाती है।

    3. अधिक पानी पियें।

    4. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी एक प्रकार की काउंसलिंग है, जिससे आप गुस्से को काबू में ला सकते है; ये आप के भीतर के नकारात्मक चिंताओं को निकाल कर खुशहाली पैदा करती है।

  • 25 Sep
    Oyindrila Basu

    पत्नी का दिल घर के बाहर के कार्य करके जीतें

    man doing housework

     

     

    क्या आप सोचते हैं, की पत्नी के घरेलु कार्य में मदद कर आप उनका दिल जीत सकते हैं , तो जरा ठहरिये , और अपनी इस धारणा पर पुनः विचार करें ।

    रिसर्च द्वारा देखा जा रहा है, कि  की जिन घरों में स्त्री घर के काम करती हैं, जैसे खाना पकाना, घर साफ़ करना, कपड़े धोना इत्यादि। और पुरुष, व्यवहारिक सामग्री के लिए बिल भरते हैं, गाड़ी की रिपेयरिंग करवाते है, ऑफिस और अन्य बाहरी कामों में व्यस्त रहते हैं।

    अगर इस रूप से परिवार चलता है, तो देखा गया है, वहां पुरुषों में शारीरिक सम्पर्क बनाने की चाह ज़्यादा होती है। अगर पुरुष को घर के कामों की ज़िम्मेदारी उठानी नहीं पड़ती तो वे यौन में अधिक रुचि रखते हैं, तुलना में उनके जो घर के काम में हाथ बटाते हैं।

    जो पुरुष घर में खाना पकाते हैं, या फिर घर साफ़ करने में मदद करते हैं, ऐसा नहीं है की वे  यौन  सम्पर्क नहीं करते, पर उन में ये रुचि कम दिखाई देती है।

    इसके कई कारण हो सकते है-

    गृह कार्य मानसिक रूप से मर्दों को स्फूर्ति प्रदान नहीं करते, और  उन्हें करते हुए थकान महसूस होती है, और तब उतनी स्फूर्ति या ऊर्जा नहीं रहती कि यौन सम्पर्क के प्रति आकर्षण महसूस करें।

    जो महिलाओं में ज़्यादातर देखा जाता है। महिलाएं अगर बाहर काम करती भी हैं, तो भी घर के अधिक काम उन्हें ही करने पड़ते हैं, और इस सर्व रूप से दायित्व निभाते निभाते उन में योन की चाह बेअसर नहीं, पर कम हो जाती है।

    इसी प्रकार जो पुरुष गृह कार्य निभाते हैं, उनकी मानसिकता भी कई हद तक महिलाओं जितनी सम्वेदनशील होती है, और ये मानसिकता भी कुछ हद तक योन रुचि कम होने का कारण है, उनके लिए शारीरिक सुख उतना महत्व नहीं रखता।

    आज के दिन में घर सम्हालना किसी अकेले की ज़िम्मेदारी नहीं है। स्त्री-पुरुष को घर और बाहर दोनों के काम, कंधे से कन्धा मिलाकर करना पड़ता है; पर ऐसे में अपने वैवाहिक जीवन को भी स्वाभाविक और सुखमय कैसे रखेंगे ये सोचना ज़रूरी है।

    काम की ज़िम्मेदारियों को हटाकर दिन में कुछ समय अपने लिए भी निकालें, जब आप आराम करें ।

    अपने साथी के साथ वक़्त बिताएं; आराम से शरीर को राहत मिलती है, इस समय दिन भर की चिंताओं को दूर रखिये, सिर्फ अपने साथी पर ध्यान दीजिये, ऐसे शरीर को स्वस्थ रखने से शारीरिक सम्पर्क में भी बाधा नहीं आएगी। और जीवन खुशहाल चलेगा।

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  • 17 Sep
    eWellness Expert

    ख़ुशी को हमेशा के लिए कायम करने के नुस्खे।

    man ko khush karne wale kaary

     

     

    हम सभी खुश रहना चाहते हैं, लेकिन हम हर वक्त खुश नहीं रह पाते । विभिन्न चीज़ों से परेशान हो जाते हैं हम। और ख़ुशी दूर भाग जाती है। पर हाल ही में एक रिसर्च द्वारा पता चलता है, की अगर हम हमारे मिज़ाजी दोमुहेपन को सही रूप से सम्हाल सकें, तब हम हमेशा ही खुश रह सकते हैं।

    स्वल्प समय के लाभ को भुलाकर लम्बे समय के लिए खुश रहना होगा।  छोटे छोटे स्वार्थ को त्यागने से दूर तक हम खुश रह पाएंगे।

    जैसे, अगर स्कूल के  रेस में  आप फर्स्ट नहीं आएं है, तो उस पर दुखी रहने के बजाये, और बेहतर करने के लिए खुद को प्रोत्साहित करें। अभ्यास बढ़ाएंगे, तो आगे जा कर ये हार याद भी नहीं रहेगी, हो सकता है, खेल को ठीक से सीखने के बाद आप ही चैंपियन बन जाएँ।

     

    और हर दिन इसी प्रकार खुश रहने के लिए कुछ नुस्खे अपनाने होंगे।

    दिन भर के काम को समय और मिज़ाज अनुसार बाँट लेने से दुःख और तकलीफ दूर होगी।

    मस्तिष्क के प्रक्रिया अनुसार, हम अलग अलग वक़्त पर, अलग तरह का व्यवहार करते हैं; कभी हम खुश मिज़ाज होते हैं, तो कभी उदास; कारण सही रूप से पता नहीं होता, पर एक दिन में कई जज़्बात हम में आते जाते हैं।

    जिस वक़्त आपका मिज़ाज दुर्बल हो, यानी आप उदास महसूस कर रहे हैं, तो उस वक़्त पढ़ाई, या ऑफिस का काम लेकर ना बैठें, घर के काम  भी कुछ देर के लिए पीछे छोड़ दें। सुबह उठकर अगर बेहाल और दुखी हैं, तो गरमा गर्म चाय बनाएं, और पीने के बाद, कुछ देर व्यायाम करें, साथ में मैडिटेशन भी।

    अच्छी धुन सुने, गाना बजाएं। जब मिज़ाज बेहतर हो जाये, और अंदर से फुर्तीला महसूस करने लगें  आप, तब रसोई, झाड़ू पोंछा, और ऑफिस के काम पर ध्यान दें। इस प्रकार नियम पूर्वक  काम को सही रूप से बांटने पर ख़ुशी बरकरार रह सकती है।

    पर प्लानिंग भी ज़रूरी है। हर दिन के लिए एक रूटीन सेट करें और क्रमानुसार काम करें, पर अगर मिज़ाज किसी काम के लिए सही ना हो, तो उसे छोड़ दें, विश्राम लें, जब बेहतर लगे, तब बाकी काम करें। इससे शरीर और मन दोनों का संतुलन ठीक रहता है।

  • 12 Sep
    Oyindrila Basu

    अद्भुत व्यसन !

    आम तौर पर व्यसन या लत की बात की जाए, तो शराब, सिगरेट और जुए के किस्से ही हमें याद आते हैं।
    इन चीज़ों की आदत लग जाए तो छोड़ना बहुत ही मुश्किल होता है, और इसी कारण आजकल बहुत सी संस्थाएं हैं, जो नशे या आदत को मिटाने के लिए प्रयास कर रहीं हैं, ताकि हम मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकें।
    लेकिन, नशीले पदार्थ के अलावा भी हमारे रोज़-मर्रा के जीवन में कई आदतें ऐसी होती हैं, जिन्हें हम बड़ी आदत या लत के रूप से पहचानते ही नहीं।
    अजीब हैं ये आदतें । एक बार लग जाए तो छोड़ना मुश्किल होता है।


    smartphone addiction

    स्मार्ट फ़ोन और टेबलेट-

    आज कल हम सभी के पास ये यंत्र अवश्य होते हैं। स्मार्ट फ़ोन में ऐसा क्या है पता नहीं, लेकिन एक आम मोबाइल यूजर दिन में लगभग १५० बार इसके स्क्रीन पर कुछ ढूंढता रहता है।

    अगर हम फ़ोन पर बात नहीं भी कर रहे हैं, तब भी स्क्रीन पर स्क्रॉल करना एक आदत, या यूँ कहें, व्यसन की तरह है, कुछ तो देखना पड़ेगा, फ़ोन में कुछ तो देखना पड़ेगा।

    ये कुछ ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर सा है, जिसमें इंसान बार बार आदतन एक ही काम करता है।

    हाथ में हमेशा फ़ोन लेकर घूमने से आपकी नज़र स्वाभाविक रूप से उस पर पड़ती है, और आप उसे कुरेदने लगते हैं, और इसी प्रकार स्क्रॉलिंग एक आदत बन जाती है।



    nail biting

    नाखून कुरेदना, और चबाना-

    ये भी एक अजीब आदत है, नाखून चबाना कोई नई बात नहीं, बच्चों से लेकर जवान तक, हम सभी में ये आदत है।

    कुछ लोग, नाखून के पास वाले हिस्से को कुरेदते रहते हैं, ये भी एक आदत है। ये नाखून की बात नहीं, इससे मस्तिष्क को एक अजीब तरह की राहत मिलती है, फ्रायड ने इन सभी अहसासों को यौन का आनंद मिलने वाला माना है। जैसे बच्चे को ऊँगली चूसने में मज़ा आता है, क्योंकि इससे उसके शरीर में कुछ हॉर्मोन के संचालन होते हैं।

     

    spray tanning

    टैनिंग-

    यानी धूप में चमड़े को सेकना। आश्चर्य की बात है, जब की भारत में, हम आज भी सफ़ेद त्वचा के पीछे पागल है, वही विदेश के कई भागों में, लोग सांवला रंग पाने के लिए घंटों धूप में बैठे रहते हैं।

    और धीरे धीरे ये एक आदत बन जाती है। उन्हें समझ में नहीं आता कि धूप से निकलने वाले अल्ट्रावायलेट रेज़ से उनके शरीर को अधिक नुकसान हो सकता है। ये सूर्यताप उन्हें धीरे-धीरे आरामदायक लगने लगता है।



    lip balm addiction

    लिप बाम-

    कई लोगों को बैग में लिप बाम लेकर चलना पसंद है, हम सोचते हैं, ये शारीरिक रूप से अपना ख़ास ख़याल रखते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, लिप बाम की नमी धीरे धीरे एक आदत बन जाती है, फिर हर वक़्त होठों पर कुछ न कुछ लगाते रहना पड़ेगा, इस लिए विभिन्न स्वाद के लिप बाम भी आज कल उपलब्ध हैं।


    love addiction

    प्यार में पड़ना-

    बार बार प्यार में लोग पड़ते रहते हैं, और फिर अकेले रह ही नहीं पाते हैं। ये भी एक आदत है, हर वक़्त एक साथी की ज़रूरत महसूस होती है इन्हें।


    fitness classes

    व्यायाम-

    एक्सरसाइज और व्यायाम करना अच्छी बात है, लेकिन जो इसे रोज़ करते हैं, और दिन के साथ-साथ बढाते रहते हैं, उनके लिए ये एक अजीब आदत बन जाती है; फिर किसी कीमत पर ये व्यायाम करना छोड़ नहीं सकते, अगर बीमार हैं, या फिर चोट लगी है, तब भी नहीं।



    व्यसन से लड़ने के उपाय हमने पहले भी चर्चा की है-

    1 कॉग्निटिव बेहवियरल थेरेपी अधिक लाभ दायक है।
    2 अपने जीवन में एक ठहराव लाना भी ज़रूरी है।
    3 अपने आप प्रयास कीजिये, एक दिन अपने आप से वादा कीजिये कि अपनी कमज़ोरी को आज से खत्म करेंगे, और खुद से किये गए इस वादे को निभाएं ।
    4 दोस्तों से अपनी समस्या शेयर कीजिये।
    5 हमेशा अच्छे काम में खुद को व्यस्त रखिये।

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