कुल 169 लेख

  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    4 वैकल्पिक तरीकों से डिप्रेशन दूर करें :

    depression kaise door kare

    डिप्रेशन एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है, जिसमें व्यक्ति हमेशा नकारात्मक विचारों को सोचता है , मन उदास रहता है ,नींद कम आती है, भूख कम लगती है अथवा  ज्यादा लगती है और जीवन में एक सामान्य उदासीनता सी छाई रहती है ।व्यक्ति जिन कार्यों को करने में खुशी महसूस करता था, अब उन्ही कार्यों को करने में उसका मन नहीं लगता है । डिप्रेशन के इलाज के लिए दवाओं के साथ मनोचिकित्सक से बात करना शामिल होता है ,जिसमे समय ज्यादा लगता है,साथ ही साथ इस रोग के साथ जुड़े कई तरह की भ्रांतियों के चलते लोग अपनी बीमारी को छुपाते हैं, तथा उपचार की लागत और बीमा में इस रोग का शामिल ना होना भी इलाज में बाधक बनते है ।|

    इस स्थिति में इलाज के वैकल्पिक रूपों में विभिन्न प्रकार की थेरेपी है, जिन्हें चिकित्सक की सहायता से व्यक्ति कर सकता है, तथा उसकी देखभाल करने वाले भी इस प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं । ये वैकल्पिक तरीके निम्न हैं ।

    1-लाफ्टर थेरेपी:

    यह थेरेपी शुरू करना बहुत आसान है, आप लाफ्टर थेरेपी करवाने वाली किसी संस्था की मदद से खुद एक क्लब शुरू कर सकते हैं । हँसने से फेफड़ों का विस्तार होता है, और उनमे ज्यादा ऑक्सीजन प्रवाहित होती है, जिससे व्यक्ति का निष्क्रिय दिमाग फिर से नई ऊर्जा से भर जाता है । डिप्रेशन के कारण जो व्यक्ति बिलकुल निष्क्रिय हो जाते हैं, उनके लिए लाफ्टर थेरेपी इलाज की एक अच्छी शुरुआत हो सकती है।

    2-कला थेरेपी:

    मनुष्य ने हमेशा कला का उपयोग खुद की भावनाओं की अभिव्यक्त करने के लिए किया है, चाहे वह गुफा चित्र हों, या मॉडर्न आर्ट। अनुसन्धानों,रिसर्चों से यह पता चला है कि, कला के माध्यम से व्यक्ति अपनी नकरात्मक भावनाओं को  भी अभिव्यक्त कर पाता है और दिमाग किसी संरचनात्मक कार्य में लगने से अवसाद ग्रसित व्यक्ति को अच्छा महसूस होता है।

    3-संगीत और नृत्य थेरेपी:

    जिन लोगों की संस्कृति में संगीत और नृत्य का समावेश होता  है वे एक कक्ष में बैठ कर मनोचिकित्सक के साथ गहन चिंतन करें, यह उनके लिए अच्छा नहीं हो सकता , संगीत से मस्तिस्क के कई नर्व्स एक्टिव हो जाती हैं और जिनसे हमारी सोच और विस्तृत हो जाती है, और हम बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं । नृत्य थेरेपी से हमारे बॉडी से कोर्टिसोल हॉर्मोन का स्राव नियन्त्रित होता है जिससे तनाव काम करने और जल्दी उपचार में मदद मिलती है ।

    4-पालतू पशु थेरेपी :

    अगर आपके पास एक पालतू पशु जैसे कुत्ता या तोता है ,और आप उसके साथ समय बिताते हैं, उसे प्यार करते हैं, तो आप कभी दुखी नहीं रह सकते। पालतू जानवर से हम  बिना किसी शर्त के प्यार करते है, और उनसे बार बार प्यार करना चाहते हैं । हम उनसे बहुत  कुछ सीखते है,और खुद पर  विश्वास करना सीखते हैं ।

    उपर्युक्त सभी थेरेपी से न सिर्फ डिप्रेशन ,बल्कि और दूसरी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों के दूर होने के प्रमाण मिले हैं। इसलिए अगर आपको  पारंपरिक चिकित्सा को शुरू करने में  हिचक महसूस हो रही है, तो वैकल्पिक तरीकों को बिना झिझक कोशिश करिये ।

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  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    Social phobia या सामाजिक भय के कारण और निदान:

    social phobia kya hai

    Social phobia या सामाजिक भय आप में से बहुत लोगों ने महसूस किया होगा | आप जब मंच पर  जाते हैं , तब आप सोचते हैं की कंही आप कोई गलती ना कर बैठे और लोग आप पर हँसे, हालाँकि मंच पर जाने का भय ही सिर्फ सोशल फोबिया नहीं है, मूलतः आप जब भी लोगों से घिरे होते हैं, और आपको  कुछ बोलना या करना  होता है, तब आपको  बहुत ज्यादा डर लगता है, और आप उस स्थिति से दूर रहना चाहते हैं, इसका मतलब यह भी है की आपको दोस्तों का साथ, या परिवार का साथ अच्छा नहीं लगता । ऐसे में आपको लोगों से रिश्ते बनाने,या डेटिंग करने में दिक्कत आती है।

    समाज में ऐसे लोग शर्मीले और पिछड़े माने जाते हैं, और मुश्किल तो तब आती है जब ऐसे लोग अपनी उन्नति के सारे अवसर सामाजिक भय की वजह से छोड़ते चले जाते हैं, और उनके अंदर सामाजिक डर हमेशा बना रहता है ,और ऐसे लोग अपनी क्षमता से नीचे की नौकरियां पकड़ लेते हैं ।

    सामाजिक भय के कारण:  मनोवैज्ञानिक अनुसंधानों से पता चला है की बच्चे की परवरिश में माता -पिता का बहुत बड़ा योगदान होता है, और उसके अंदर का यह सामाजिक भय भी उसी परवरिश की देन हो सकती है, बच्चे को उसके द्वारा किये गए कार्य के लिए कभी सराहना ना करना, या अनदेखी करना,उनके साथ कठोरता से पेश आना ।  इन सभी कारणों से बच्चे के अंदर खुद के प्रति हीन भावना घर कर लेती है, और उसके आत्मसम्मान में कमी आती है । इन सब कारणों से बच्चे को समाज में लोगों के सामने बोलने में डर लगता है, कि पता नहीं कोई डांट ना दे ।

    बच्चा अपने माता -पिता को ही अपना आदर्श मानता है ,उनके द्वारा कठोर व्यवहार किये जाने की स्थिति में बच्चा दूसरे लोगों से भी डरने लगता ह ।,

    जब भी कोई घटना,होती है उस स्थिति में एक व्यक्ति जिसे अपने ऊपर भरोसा है, एक अवसर के रूप में देखता है । उसकी सोच होती है की उसे यह अवसर उसकी काबिलियत दिखाने के लिए मिली है ,इसे गंवाना नहीं चाहिए

    ,जबकि जिस व्यक्ति का आत्मसम्मान कम होता है वह सोचता है कि मैं इस कार्य के लायक नहीं हूँ या मेरे अंदर इतनी काबिलियत नहीं है,ऐसे व्यक्ति किसी भी गलत कार्य के लिए खुद को जिम्मेदार मान बैठते हैं ,और एक धारणा बना लेते हैं की वे किसी लायक नहीं ।

    अब सवाल यह उठता है कि,क्या यह समाज से भय दूर हो सकता है ?

    जी हाँ ,न सिर्फ समाज में बोलने का भय ,बल्कि और दूसरे प्रकार के चिंता विकार आप अपने मनोचिकित्सक की सहायता से दूर कर सकते हैं । चिकित्सक इस डर पर काबू पाने में 'सामाजिक कौशल प्रशिक्षण' social skills ट्रेनिंग प्रदान करते हैं। जिसमें चिकित्सक आपसे बात करके

    सही चेहरे के भाव कैसे होने चाहिए?

    कैसे बात शुरू कर उसको बनाये रखें?

    कैसे किसी की तारीफ करें?

    और कैसे सही दिशा में तर्क करें? आदि का प्रशिक्षण बहुत मददगार साबित होता है ।

    मनोचिकित्सक, थेरेपी के दौरान उस व्यक्ति से बात करके उसके विचारो को जानने की कोशिश करते हैं। किस तरह के नकारात्मक विचारोँ की वजह से व्यक्ति समाज से दूर रहना चाहता है,जैसे कि उसका विचार है की वो जो भी कार्य करे वह बेस्ट होना चाहिए ,ऐसे सोच एक अवास्तविक सोच है जिसकी वजह से व्यक्ति की चिंता बढ़ जाती है । चिकित्सक उन विचारों को स्वस्थ विचारों में बदल कर व्यक्ति को सोचने की सही दिशा प्रदान करते हैं ,धीरे-धीरे वह व्यक्ति अपने आप अपने विचारों में परिवर्तन कर सही दिशा में सोचना शुरू कर देता है, और जिसकी वजह से उसकी चिंता कम और मन हल्का महसूस होता है ।

    अक्सर होता यह है कि जिस व्यक्ति को समाज से भय होता है उसे अन्य दूसरे प्रकार की मानसिक चिंता जैसे panic डिसऑर्डर,सामान्य चिंताजनक विकार ,भीड़ से डर लगना और अवसाद जैसे अन्य विकार भी हो सकते हैं, कभी कभी चिंताओं की तीव्रता को कम करने के लिए चिकित्सक दवा का सुझाव भी देते हैं। जिससे व्यक्ति को उस स्तर पर लाया जाए जहां उसके विचारों को बात के द्वारा सुलझाया जा सके ।

     अगर आपको यह लगता है कि किसी आपके दोस्त के अंदर यह दिक्कत है ,तो कृपया उसे यह ना कहें की यह इतना सरल कार्य है तुम क्यों नहीं कर सकते । अगर यह कार्य उसके लिए इतना ही आसान था तो यह उसने  पहले ही कर लिया होता । उन्हें आपकी मदद की जरूरत है ,जितनी जल्दी उनकी मदद होगी,उतनी जल्दी उनके अन्य चिंता जनक विकार भी कम होंगे ।

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  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    8 टिप्स से परीक्षा और परिणाम से पहले चिंता को नियंत्रित करें:

    pariksha ki chinta kaise door kare

    आधुनिकीकरण के इस दौर में अभिवावक अपने बच्चों से भी ज्यादा उम्मीद करने लगे हैं । अगर आपके जानने वालों में से किसी का बच्चा अच्छे नंबर्स लाता है तो आप अपने बच्चे से भी उम्मीद करते हैं की वह भी अच्छे से पढ़ाई करे । जिसके परिणाम स्वरुप एग्जाम के दौरान और उसके परिणाम के दौरान बच्चों का ज्यादा चिंतित होना स्वाभाविक है, वे इस चिंता में रहते हैं की उनके नंबर कैसे आएंगे? खराब नंबर आये तो अभिवावक,टीचर,रिश्तेदार और दोस्त सब मजाक बनाएंगे ।

    “लता पढ़ने में बहुत तेज है, मेहनती है ,परन्तु दसवीं की परीक्षा परिणाम आने के पहले उसे चिंता होने लगी ,उसे भूख कम लगती ,बेचैनी की शिकायत, जी घबराना इन सब परेशानियों के कारण उसने घर से निकलना कम कर दिया, सारा दिन एक कमरे में बंद सोचती रहती।“

    बच्चे ने भले ही बड़ी  मेहनत की है परन्तु वह चिंतित रहता है ।

    और यह समस्या समय के साथ और गंभीर होती जा रही है इसी चिंता के चलते अधिकतर बच्चे बोर्ड एग्जाम के समय आत्मदाह तक कर लेते है ।

    समाज के जिम्मेदार लोग जिनमें अभिवावक, टीचर और विद्यार्थी है को मिल कर इस समस्या से निपटना होगा ।

    परीक्षा और परिणाम से पहले चिंता को नियंत्रित करने के टिप्स:

    1 एग्जाम की तैयारी करते समय यह सुनिश्चित कर लें कि पढ़ाई के जरूरी टिप्स जैसे स्मृति विज्ञानं (mnemonics) की मदद, पढ़ाई का प्रॉपर टाइम टेबल बनाना, नोट्स के द्वारा याद करना,और पढ़ाई के दौरान थोड़ी थोड़ी देर में ब्रेक लेना शामिल हो ।

     

    2 जो भी याद किया या समझा है उसे फिर से देख लें, पुनरीक्षण आपके आत्मविश्वास को बढ़ावा देगा। एक अच्छी नींद भी बहुत जरूरी होती है, जिससे जो भी आप नें सीखा   वह याद हो जाता है ।और आप की चिंता नियंत्रित रहती है जब भी आप ज्यादा  चिंतित हों तो सोचिये कैसे आपने अपना सबसे अच्छा टेस्ट दिया था । चिंता  से उपजे हुए विचार अगर ज्यादा हैं तो कॉउंसलर की मदद से इन पर काबू पाया जा सकता है ।

     

    3 इसके साथ ही अभिभावक, भाई-बहन और दोस्तों को समझना होगा कि एग्जाम देने वाले को ज्यादा अच्छा करने के लिए दबाव न डाला जाए । उन्हें यह ना लगे कि अगर वे कम नंबर पाएंगे तो उन्हें  दूसरे भाई -बहनो की तुलना में कम प्यार मिलेगा । साथ ही साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि एग्जाम को एक एग्जाम की तरह ही लिए जाए इसके अलावा और कुछ नही, उसके आधार पर उन्हें जज न किया जाये ।

    4 बहुत से रिश्तेदारों की यह आदत होती है कि, सामान्य दिनों में वो बच्चे का हाल चाल नहीं लेंगे बल्कि जब रिजल्ट आ जाता है तो पता करने के लिए फ़ोन करते हैं , या मिलने चले आ जाते हैं कि रिजल्ट कैसे आया ? इन सबसे छात्र के मन में आ जाता है कि उसके प्रदर्शन को आँका जा रहा है, और यह बात उसे दुखी कर सकती है ,ख़ास कर तब जब उसके मार्क्स कम आये हों । एक अभिभावक के तौर पर ,आप इतना कर सकते हैं कि, बच्चे को ऐसे लोगों से दूर रखें  और बच्चे को समझायें की ऐसे लोगों की बातों को गंभीरता से न लें ।

    5 सबसे महत्वपूर्ण यह कि ,आप बच्चे की उन भ्रांतियों को दूर कीजिये जिनकी वजह से उसे एग्जाम और उसके परिणाम से डर लग रहा है । उसे सम्पूर्ण प्यार और अच्छा माहौल दीजिये, दबाव और तुलना कर उसका मनोबल न गिराएं ।

    6 हमेशा बच्चे से पढ़ाई के बारे में ही ना पूछे ,उसके अन्य दूसरे शौक ,रूचि ,दोस्तों के बारे में भी पूछे ।

    7 इतना सुनिश्चित करें कि बच्चा पढ़ाई के साथ साथ एक निश्चित समय खेल, सैर और पिकनिक का भी आनंद उठा सके ।

    8 हमें बच्चे को यह आश्वासन दिलाना होगा कि आपने अपना पूरा प्रयास किया है ,उसके बावजूद अगर परिणाम  उम्मीदों के अनुसार नहीं आया है तो कोई बात नहीं जीवन में यही महत्वपूर्ण नहीं है ,अभी और भी कई उपलब्धियों के लिए प्रयास करना है  ।अगर हम इस तरह आश्वासन दें तो बच्चे की चिंता कम हो जाती है और वह फिर नए जोश से अपनी पढ़ाई शुरू कर सकता है ।

    चिंता उसे  कुछ नहीं बस असफल होने का डर होता है ,अगर हम वह डर दूर करें तो चिंता अपने आप दूर हो जाती है ।

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  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    चमत्कारी पानी

    chamatkari pani

    "रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून पानी गए न ऊबरे मोती मानुष चून"

    “जल ही जीवन है"

    हमें हमारे स्कूल के दिनों से ही यह सभी बातें पढ़ाई जाती रहीं है और हमनें भी पानी के महत्त्व को अपने जीवन में अनुभव किया है ।

    जब भी सरदर्द हो तो-पानी

    मुहांसे हो तो-पानी

    कब्ज हो तो-पानी

    ज्यादा दवाई का सेवन हो तो-पानी

    धरती पर जीवन की उत्पत्ति का कारण-पानी

    मतलब सभी प्रकार के स्वास्थ्य चिकित्सा में पानी का नाम लिया जाता है ।

    आधुनिकीकरण के इस दौर में हम स्वास्थ्य उत्पादों के विभिन्न प्रकार से भ्रमित से हो जाते हैं ।

    सिर्फ सोया मिल्क के ही दस प्रकार हैं। ऐसे समय में ,क्या स्वास्थ्यकर है और क्या नही यह सच में बहुत दुविधा वाला हो सकता है। यही समय है जब हम वापस सबसे सरल साधनों की ओर जाएं। इनमें  सबसे अच्छा है : पानी

    How water important for life

    आइये ये जानने के लिए पढ़ते हैं कि कैसे सिर्फ पानी पीना आपके स्वास्थ्य के लिए चमत्कारी हो सकता है:

     

    1 पानी थकान कम करता है :- हमारी मांसपेशियाँ ठीक से काम करे इसके लिए उन्हें पानी की आवश्यकता होती है। पानी को नियमित रूप से पीने का मतलब है कि आप थकान कम महसूस करते हैं। इसका मतलब बेहतर एकाग्रता ,ज्यादा ऊर्जा और अधिक सतर्कता (मस्तिष्क  भी एक मांसपेशी है )

    2 भोजन और पानी का अनुपात:- हालांकि मानक  एक दिन में आठ गिलास पानी  का है,पर यह हमेशा लगभग  न्यूनतम होता है। आपको  भोजन ग्रहण करने के आधार पर अधिक पानी पीना चाहिए ।

    प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को पचने के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। यह मांसाहारी भोजन पर भी उतना ही सच है जितना कुछ दालों के लिए।कार्बोहाइड्रेट की अधिकता वाले भोजन जैसे मैदा और ब्रेड को भी ठीक से  पचने के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

    कुछ पेय पदार्थ  जैसे चाय,कॉफी और शराब,पानी के साथ बाहर निकलते समय शरीर पर मूत्र की मात्रा बढ़ाने वाला  प्रभाव डालते हैं। जिसे  पूरा करने के लिए आपको अधिक पानी की जरूरत होती है।इसलिए भोजन और पेय पदार्थ दोनों को  मिलाकर आपको 8-10 गिलास से ज्यादा पीने की जरुरत है और दूसरे पेय पदार्थो में पानी की मात्रा को नहीं जोड़ना चाहिए।

     

    3 वजन कम करता है:-पानी की उचित मात्रा ,दूसरे पेय पदार्थो की अपेक्षा पानी के उचित मात्र से आप अच्छा महसूस करते हैं क्योंकि यह आपके पाचन तंत्र को भी ठीक से काम करने की शक्ति देता है और भोजन को सही ढंग से अवशोषण में मदद करता है इस प्रकार आप ताज़गी  महसूस करते हैं।वजन कम करने के लिए सबसे महत्व पूर्ण  है कि जब आप ज्यादा पानी पीते हैं तो आपके शरीर को पानी की कमी  का अनुभव नहीं होता है और इसलिए यह अन्य तरीकों से पानी का संचय नहीं करता है जो वजन बढ़ाने शरीर के फूलने और सूजन बढ़ाने में मदद करते हैं।

    4 त्वचा:-पानी आपकी स्वच्छ और चमकती त्वचा का राज  हो सकता है ,पानी की कमी  से सुस्ती,मुहांसे और झुर्रियों को बढ़ावा मिलता है। ज्यादा पानी त्वचा की कोशिकाओं को स्वस्थ रख सकता है और त्वचा को चमकाता भी है। हालाँकि ज्यादा पानी त्वचा की समस्या को गायब नहीं करेगा यह सिर्फ अच्छी रोकथाम ,और बुनियादी इलाज है। आप अपनी त्वचा की कोशिकाओं को मॉइस्चराइज़र का उपयोग करके  भी नम रख सकते हैं।

    5 सम्पूर्ण स्वास्थ्य:-पानी सभी अंगो को ताज़गी देता है और उन्हें ख़ास तौर से दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है। अच्छी मात्रा में पानी पीने से हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है ।

    अब जबकि आप पानी के फायदे जान गए हैं , इसे पीने के तरीको के बारे में बात करते हैं। हालाँकि चाय या दूसरे पेय पदार्थो के साथ पानी लेना नहीं जोड़ा जाता, निम्बू पानी ,पुदीना पानी और दूसरे कैफीन रहित पेय को जोड़ सकते हैं। फल और सब्जियां जो पानी से भरे होते हैं वे भी मदद करते हैं ,जैसे खीरा, तरबूज, खरबूजा और इसी तरह के अन्य फल।

    अतः आगे बढ़िए, और  एक स्वस्थ  जीवन के लिए पानी का महत्त्व कभी ना भूलें ।

     

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  • 20 Dec
    Shiva Raman Pandey

    अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस- मन की शांति कैसे प्राप्त करें?

    international yoga day

    प्रिय पाठकों, लोग अक्सर मन की शांति के बारे में बात करते हैं लेकिन किस तरह से उसे पाया जाये यह उनसे पूछा जाता है तो  ज्यादातर लोग एक संतोषजनक समाधान देने में विफल हो जाते हैं । 

    आधुनिकीकरण के इस दौर में हर उम्र के लोगो में तनाव महसूस करना इन दिनों आम समस्या  हो गई है।

    लोगों की इच्छाएँ बढ़ गयी हैं, और जीवन की रफ़्तार वास्तव में तेज हो गई है।

    आप हमेशा एक ही बार में बहुत से चीज़ें पा लेना चाहतें हैं।

    मन की शांति तभी मिल सकती है जब आप वर्तमान में जीना शुरू करेंगे ।

    इस तरह के भाग दौड़ और व्यस्त जीवन में क्या आप  तनाव पर नियंत्रण कर पाएँगे?

    जी हाँ,निश्चित रूप से,जरूरत है सिर्फ यह जानना कि कैसे.... 

    आज हम आपको बताएँगे कैसे आप अपने मष्तिष्क को संकेंद्रित कर चिंता मुक्त जीवन जी सकते हैं ।

    इसे करने से आप की कार्य करने की शक्ति भी बढ़ जाती है ।

    तनाव से राहत पाने का सबसे प्रभावी तरीका है-सांसो का समुचित उपयोग।

    अधिक ऑक्सीजन के सेवन से कुछ ही पलों में हमारे मस्तिष्क को तनाव से राहत मिल जाती है और आप  शांत हो जाते हैं । 

    मस्तिष्क को विश्राम देने और और नियमानुसार श्वसन के बहुत से तरीके हैं, जिनमें सबसे आसान और सरलता से समझ में आने वाले तरीके निम्न हैं :

     

    1. 4-स्क्वायर श्वसन
    2. 8 मांसपेशी समूह का विश्राम:
    3. ध्यान पूर्वक चिंतन।

     

    4-स्क्वायर श्वसन:

    साँस लीजिये (4 तक गिनती करिये) 1,2,3,4

    साँस को रोकिये 1,2,3,4

    साँस छोड़िये 1,2,3,4

    आराम 1,2,3,4

    यह एक वर्ग की चार भुजाओं की तरह है, इसलिए इसे 4 स्क्वायर श्वसन कहा जाता है। इसे आप तब तक कर सकते हैं, जब तक आपको मानसिक शांति नहीं मिल जाती ।

     

    8 मांसपेशी समूह का विश्राम:

    मनोवैज्ञानिक यह मानते हैं की आप  अगर अपनी मांसपेशियों को आराम देते हैं, तो आपका मष्तिष्क भी तनाव रहित होता है ।

    इस किया में प्रत्येक मांसपेशी समूह को ३० सेकेण्ड के लिए खींचकर दूसरे मांसपेशी समूह पर जाने के पहले छोड़ दें। ये करते समय आँखे बंद होनी चाहिए। जब इसे पहली बार करें तो एक या दो चक्र से शुरू करे ।

    सबसे पहले अपनी भुजाएं थोड़ा फैलाएं,कोहनी को मोड़ें, मुठ्ठी तानें और वापस खीचें ।

    इसके बाद दोनों पैर फैलाए,अंगूठे ऊपर की ओर करें।  

    और फिर पेट को मेरुदण्ड की ओर अंदर खींचिए।

    फेफड़े में साँस भरें और 10 तक की गिनती तक रोके रखें।

    अपने कन्धों को कान की दिशा में ऊपर उठाएं

    सिर को पीछे की ओर खीचें।

    आखों के किनारों के तरफ देखिए, नाक की नोक के पास चेहरे की पेशियों को घुमाइए।

    माथा और भौहें उठाइये।

    (आप प्रत्येक मांसपेशी समूह के व्यायाम के बीच 30 सेकण्ड्स या ज्यादा का अंतर दे सकते हैं।)

     

    परिपूर्ण मस्तिष्क ध्यान Mindfulness meditation:

    ध्यान विचारों का शिक्षण केंद्र है,जो पूरी तरह केंद्रित हो कर और एक समय पर एक ही कार्य को करने में विश्वास रखता है।

    हमारे  मस्तिष्क के लिए ध्यान से हटना आसान है और यही थकान को बढ़ाता है। 

    जिसे आप  अक्सर तनाव के रूप में महसूस करते हैं।

    हालाँकि ध्यान एक दर्शन है, जिसे आप  पूरे दिन कर सकते हैं। आप ध्यान को अभ्यास के  द्वारा शुरू कर सकते हैं।

    हाथों को जांघो पर रखिये,चेहरा नीचे,आँखे कुछ खुली हुई और टकटकी लगाकर सामने फर्श पर 4-६ फिट दूर देखते रहिये।

    इसके पीछे धारणा यह है की जो भी आपके सामने है वही आपके ध्यान में है।

    अपनी नज़र के साथ कुछ विशेष ना करें और उसी जगह पर रहने दें जहाँ इसे केन्द्रित किया है।

    इसी वातावरण में कुछ मिनटों तक इसी मुद्रा में बैठने से शुरुआत करें।

    यदि आपका ध्यान भटकने लगे तो धीरे-धीरे अपने शरीर और वातावरण में वापस आ जाइये ।

    मुख्य शब्द  यहाँ 'धीरे' है। आपके मस्तिष्क में भटकाव होगा; यह  Mindfulness meditation  का एक हिस्सा है

    जब आप महसूस करेंगे कि आपका मन भटकने लगा है तो आप अपने शरीर और वातावरण में वापस आ जाइये।

    अभ्यास का दूसरा भाग है सांसो के साथ कार्य करना।

    इस  अभ्यास में सांसो पर हल्का(हाँ हल्का) ध्यान दें। 

    जब सांस आपके शरीर में प्रवेश करे और जब बाहर  जाये, इसे अनुभव करें।

    इस प्रक्रिया में श्वसन की कोई विशेष विधि नहीं है।

    एक बार फिर, आपकी रूचि इसमें होनी चाहिए कि आप  पहले से कैसे हैं, ना कि इस बात में कि, आप अब कैसे हैं ।

    जब आप अपनी सांसों में बदलाव करते है, और पाते हैं कि, वास्तव में आप सांसों को  नियंत्रित कर पा रहे है जैसे किया जाना चाहिए तो उसी तरह से करें।