• 30 Aug
    umair hussain

    क्या बहिर्मुखी व्यक्ति अंतर्मुखी बन सकते हैं?

    introvert extrovert

    जब भी हम इन दो श्रेणियों के लोगों, अंतर्मुखी-Introvert और बहिर्मुखी-Extrovert, के बारे में सोचते हैं, तो हम यह मानते हैं कि वे ध्रुवीय विपरीत हैं।

    हमें लगता है कि अंतर्मुखिए अंतर्मुखी हैं, बहिर्मुखिए बहिर्मुखी हैं और किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है। हालांकि, किसी भी अन्य व्यक्तित्व विशेषता की तरह बहिर्मुखता और अंतर्मुखता भी एक स्पेक्ट्रम पर निहित हो सकते हैं। यह कोई वायुरोधी डिब्बों में बंद नहीं हैं जो एक दूसरे पर प्रभाव ना डाल सकें हैं।

    उदाहरण के लिए, एक औपचारिक व्यक्ति जो अकेले बहुत समय बिताता हो (एक अंतर्मुखी की प्रवृत्ति), अगर उसे नेतृत्व का स्थान लेने की स्थिति (एक बहिर्मुखी द्वारा दिखायी गयी प्रवृत्ति) आ जाये तो वह इसको करने में भी सक्षम हो सकता है। इन मतभेदों का अस्तित्व नहीं होता यदि अंतर्मुखी और बहिर्मुखी उतने अलग होते जैसा हम मानते हैं।

    वास्तव में, हम में से एक विशाल बहुमत दो आयामों के बीच रहती है। आबादी का एक बहुत छोटा हिस्सा मुख्यतः अंतर्मुखी या मुख्यतः बहिर्मुखी व्यवहार दिखाता है। ये चरम सीमाएं हैं। हम में से अधिकांश दोनों पक्षों से कुछ-कुछ व्यवहार दिखाते हैं।

    यहां दोनों व्यक्तित्व प्रकारों के बीच मुख्य अंतर हैं जो हमें ध्यान रखना चाहिए: 

    बहिर्मुखी

    अंतर्मुखी

    • उनके पास कम जोश होता है, जिसका अर्थ है कि उन्हें उत्साहित करने के लिए जोश की आवश्यकता होती है। वे ऐसी परिस्थितियों को पसंद करते हैं जहां दूसरों के साथ बहुत से संपर्क हों। 
    • वे सहज होते हैं और निर्णय लेने से पहले बहुत कुछ नहीं सोचते।
    • उनके पास बड़े सामाजिक मंडल होते हैं और किसी से भी खुलने में कोई परेशानी नहीं होती।
    • वे आसानी से परिवर्तन स्वीकार लेते हैं और इसके लिए खुले रहते हैं।
    • वे बहुत बोलनेवाले होते हैं।
    • वे अधिक विचलित होते हैं।
    •  उनके पास काफी ज्यादा जोश होता है, जिसका अर्थ है कि उन्हें उत्साहित करने के लिए जोश की आवश्यकता नहीं होती है।
    • वास्तव में, स्थितियाँ उन्हें थका देते हैं। वे ऐसी स्थितियों को पसंद करते हैं जिनमें दूसरों के साथ कम से कम या कोई संपर्क न हो या एकान्त गतिविधियों में संलग्न हो जाते हैं।
    • वे बहुत आवेगी होते हैं और कुछ भी करने से पहले बहुत कुछ सोचते हैं।
    • उनके पास बस कुछ करीबी दोस्त होते हैं और वह अपने आंतरिक मंडल से बाहर के लोगों से नहीं खुलते हैं।
    • वे परिवर्तन का विरोध करते हैं।
    • वे अच्छे श्रोता होते हैं।
    • वे लंबे समय तक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

     


    अब जब हम अंतर्मुखी और बहिर्मुखी के बारे में जानते हैं, तो हमारे मन में एक और प्रश्न उठता है कि क्या हम इन दो विशेषताओं में से किसी के साथ फंस गए हैं?

    इसका जवाब हाँ भी है और नहीं भी। कुछ आयु-संबंधित परिवर्तन होते हैं जो जीवन के माध्यम से आते हैं लेकिन वे विशेष रूप से कठोर नहीं हो सकते हैं। इसलिए यदि आप स्वाभाविक रूप से एक बहिर्मुखी के अधिक हैं, तो बूढ़े होने पर अकेले रहने की चाह आप पर इतनी कठोर नहीं होगी। ऐसा नहीं है कि आप एक दिन के समय में एक सामाजिक तितली से एक एकांतवासी में बदल जाएंगे। परिवर्तन के स्तर प्रत्येक व्यक्ति के लिए सापेक्ष है, यह सिर्फ तरीका और अनुक्रम हैं जो कि अधिकांश के लिए सामान्य है।


    आम तौर पर, यह देखा जाता है कि उम्र के साथ आंतरायिकता घट जाती है। जैसे ही हम बड़े हो जाते हैं, हमारी सामाजिक आवश्यकताओं में कमी आ जाती है। हम सभी समय-समय पर सामाजिक दबावों का अनुभव करते हैं लेकिन आम तौर पर यह देखा जाता है कि उन अनकहे “उसूलों” पर चलने की ज़रूरत तब ज्यादा होती है जब हम छोटे होते हैं और घट कर कम से कम हो जाती है जब हम वयस्क हो जाते हैं।


    एक कारण है कि "सहकर्मी दबाव" किशोरों के साथ बातचीत करते हुए एक प्रचलित शब्द है और यही वह है। किशोर विशेष रूप से पसंद किए जाने और सामाजिक दबाव के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं और उन चीजों को करने में मजबूर होते हैं जो वे नहीं करना चाहते हैं।

    बच्चों के लिए, वे आमतौर पर बहुत कम जानते हैं कि वे वास्तव में क्या चाहते हैं, इसलिए वे मुख्य रूप से वयस्कों का अनुकरण करते हैं और दंड से बचने के लिए प्राधिकरण के अधीन होते हैं (यदि आपको कभी शादी और परिवार के कार्यों में खींच लिया गया हो और इसका एकमात्र कारण बस यही हो कि आप बहुत छोटे थे, आपको पता चल जाएगा कि मेरा क्या मतलब है)


    युवा वयस्क पसंद और स्वीकार्य होने के लिए उतने उत्सुक नहीं होते हैं, लेकिन विभिन्न कारणों से आंतरायिकता दिखा सकते हैं। वे नेटवर्किंग के माध्यम से अपने कैरियर को आगे बढ़ाना चाहेंगे या अपने पर्यवेक्षक की अच्छी पुस्तकों में पहुँचने के लिए खुद को पहुंच योग्य, आत्मविश्वास और ज़िम्मेदारी लेने के इच्छुक हैं दिखाएंगे। इसलिए, प्रतियोगिता बहिर्मुखता बढ़ने के लिए एक और कारण हो सकता है - आप एक उबाऊ दफ्तर की पार्टी में नहीं चाहेंगे, लेकिन आप तब भी सूट चढ़ाएंगे और एक्सपोजर के लिए या अपने वरिष्ठ अधिकारियों को मक्खन लगाने के लिए जाएंगे।


    हालांकि, एक बार जब आप बूढ़े हो जाते हैं और अपने जीवन यात्रा के आखिरी चरण में होते हैं, तो आपकी सामाजिक ज़रूरतों में एक महत्वपूर्ण बदलाव होता है। इस बात की जागरूकता कि आप किसी भी दिन चल बसने वाले हैं, आपको इस बात से दूर रखती है कि आपके पास जो कम वक़्त बचा है उसको आप अप्रिय स्थितियों में या उन कामों में बिताएं जो आपका नापसंद हों।


    इस प्रवृत्ति को सामाजिक-भावनात्मक चयनात्मकता सिद्धांत कहा जाता है, जहां आप उन लोगों को खुद चुनते हैं जिनसे आप सहभागिता करना चाहते हैं और जो चीजें आप करना चाहते हैं। हो सकता है आपने देखा हो कि आपकी दादी ने स्वास्थ्य समस्याएँ होने के बाद भी चीनी और तले हुए भोजन पर कटौती करने से इनकार कर दिया हो, या आपके दादा जी चिल्लाते हों जब लोग बिना बुलाये आ जाते हों।

    चिंता न करें, वे हमेशा नाराज या निराश नहीं होते हैं, वह बस लोगों को प्रसन्न करने से ऊब गए हैं और अपना सीमित वक़्त उन कामों को करने में बर्बाद नहीं करना चाहते जिनको वे पसंद नहीं करते।

    इस परिवर्तन का एक दूसरा कारण उनकी गतिविधियों का ध्यान भविष्य से वर्तमान में बदलना भी है। युवा लोग कुछ लक्ष्यों को पूरी तरह से प्राप्त करने पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं और इसलिए, भविष्य उन्मुख होते हैं।

    पुराने लोग अधिक वर्तमान-उन्मुख होते हैं - उन्होंने आमतौर पर जीवन में आवश्यक सभी चीजों को हासिल कर लिया होता है और किसी और चीज का पीछा नहीं करना चाहते हैं इसलिए, वे अपने वर्तमान जीवन को बढ़ाने और सुधारने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

     

    यह हमेशा एक अप्रिय या असुविधाजनक परिवर्तन होना ज़रूरी नहीं है। हालांकि, वे बहुत से सामाजिक संपर्कों से बचना चाहते हैं, लेकिन वे अपने करीबी रिश्तों को मानते हैं, जैसे करीबी दोस्त और तत्काल परिवार।

    वे उन रिश्तों पर कड़ी मेहनत करते हैं जिनके बारे में वे सोचते हैं और जो उन्हें लगता है कि उनके जीवन में वृद्धि होगी और उन लोगों को छोड़ देते हैं जो उनके लिए कुछ नहीं करते हैं।

    यह उन कारणों में से एक है कि क्यों मध्य आयु या युवा वयस्कता की तुलना में जोड़ों में वृद्धावस्था में निकटता और विवाह का संतोष ज्यादा होता है। वृद्ध जोड़े उन रिश्तों पर ध्यान देते हैं जो पुरस्कृत होते हैं।

     

    तो हां, एक निश्चित सम्भावना है कि आप बड़े होकर अधिक अंतर्मुखी हो सकते हैं। लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि  हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारे कुछ खास गुण इन परिवर्तनों से बचेंगे और फिर भी हमारे अधिकांश व्यवहारों को निर्देशित करेंगे (भले ही वे अधिक संतुलित, कम चरम तरीकों में प्रकट हों)।

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  • 30 Aug
    Nandini Harkauli

    थेरपिस्ट के प्रति अपनी भावनाओं का सामना कैसे करें?

    dear jindagi

     

    हम में से अधिकांश लोगों ने फिल्म 'डियर जिंदगी' देखी होगी, यह एक ऐसी लड़की की कहानी के इर्द-गिर्द है जो अपने परित्याग के मुद्दों से बाहर निकलने की कोशिश करती है और आखिर में जिंदगी को जी भर के जीना सीखती है। फिल्म के अंत में, हम यह भी देखते हैं कि वह अपने थेरपिस्ट के प्रति गहरा लगाव और रोमांटिक भावनाएं ( संभावना है) महसूस करने लगती है।


    यह एक काफी सामान्य घटना है जिसे 'ट्रांस्फ़ेरेंसे' नामक एक चिकित्सा में देखा जाता है, जहां एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के लिए क्लाइंट की भावनाओं को थेरपिस्ट की ओर ट्रान्सफर किया जाता है। सिग्मंड फ्रायड, अचेतन दिमाग के विशेषज्ञ, ने इस शब्द को तब गढ़ा जब उनके पास चिकित्सा ले रहीं कुछ महिलाओँ ने उनके प्रति रोमांटिक भावनाएं होने को स्वीकार किया।

    हालांकि, जरूरी नहीं कि ट्रांस्फ़ेरेंस हमेशा सकारात्मक या रोमांटिक भावनाओं के रूप में हो। यह अन्य रूप भी ले सकता है, जैसे क्रोध, अविश्वास, नफरत, पैरेंटिफिकेशन (चिकित्सक को माता या पिता के रूप में देखना), अत्यधिक निर्भरता या आदर्शीकरण (भगवान या गुरु जैसी स्थिति में चिकित्सक को रखना)।

    फ्रायड ने पाया कि कुछ रोगियों द्वारा चिकित्सा के दौरान बात करने में दिखाया हुआ प्रतिरोध नकारात्मक ट्रांस्फ़ेरेंस का परिणाम था - रोगियों ने अपने निजी जीवन में लोगों के प्रति नकारात्मक भावनाओं को चिकित्सीय रिश्तों में पुनः निर्देशित कर दिया था। उदाहरण के लिए, यदि किसी के माता पिता बहुत ही अधिक नियंत्रित करने वाले थे, तो वह चिकित्सक को भी, नियंत्रित करने वाले, हावी स्वभाव के और उनके निर्णयों को निर्देशित करने के इरादे रखने वाले व्यक्ति के रूप में देखते हैं। इसी तरह, एक क्लाइंट जो प्रेमहीन या अपमानजनक संबंध में है, चिकित्सक के लिए रोमांटिक भावनाएं विकसित कर सकता है क्योंकि चिकित्सक उसे सुरक्षित वातावरण के साथ उसे समझने की भावना प्रदान करता है, जो क्लाइंट ने पहले कभी महसूस नहीं किया होता।

    ट्रांस्फरेंस मनोचिकित्सा में एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय उपकरण के रूप में काम कर सकता है क्योंकि यह अचेतन मन में छिपे संघर्षों पर रोशनी डालता है जो कि क्लाइंट चिकित्सक की ओर अपने व्यवहार से दर्शाता है। यह व्यवहार चिकित्सक को संकेत देते हैं कि क्लाइंट को बेहतर महसूस कराने की मदद प्रक्रिया को किस तरह से शुरू किया जाना चाहिए। अन्य मामलों में, ट्रांस्फ़ेरेंस चिकित्सक के साथ एक विश्वासी बंधन के निर्माण में सहायता कर सकता है, जिससे समस्याओं को खुलकर साझा करना आसान हो जाता है (जैसे उन मामलों में जहां चिकित्सक को माता-पिता या दोस्त के रूप में देखा जा रहा हो)।

    हालांकि ट्रांस्फरेंस काफी प्राकृतिक और सामान्य है, क्लाइंट्स को कुछ बातें हमेशा याद रखनी चाहिएं, जैसे-

    • वे वास्तव में थेरपिस्ट से नहीं, बल्कि उनके मन में बनी थेरपिस्ट की एक छवि से जुड़ रहे हैं, जिससे उपचार प्रक्रिया उनके लिए एक आसान अनुभव बन जाए। क्लाइंट को सावधानी से विचार करना चाहिए कि क्या चिकित्सक सचमुच वह व्यक्ति है जो उन्हें लगता है कि वह है या उन्होंने मन में उनकी एक छवि बना रखी है?

     

    • चिकित्सकों के साथ चिकित्सीय परिस्थिति के बाहर संबंध रखना, रोमांटिक या अन्यथा, अनैतिक है और चिकित्सा के नियमों का उल्लंघन करता है। इन भावनाओं को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

     

    • भावनाओं को प्रक्रिया में बाधा बनने की बजाय मददगार होना चाहिए। भावनाओं को चिकित्सा की मांग के मूल उद्देश्य से हस्तक्षेप नहीं करनी चाहिए। वर्तमान में जो समस्या है, उससे भटकना नहीं चाहिए।

    यहाँ कुछ तरीके हैं जो इन भावनाओं से निपटना आसान बनाते हैं -

    • समझना कि यह बिल्कुल सामान्य और आम है:
      किसी के लिए भावनाएं विकसित होना, चिकित्सक के लिए भी, बहुत स्वाभाविक है और पूरी तरह से आपके नियंत्रण से बाहर है, इसलिए इसके लिए खुद को दोषी न ठहराएं। यह हमारी सोच से अधिक आम है। अपनी भावनाओं को स्वीकार करें क्योंकि उनको स्वीकार करना उनसे मुकाबला करने का पहला कदम है।
    • अपने चिकित्सक से छिपाएं नहीं :
      यह शुरू में मुश्किल लग सकता है, लेकिन याद रखें कि कोई भी अच्छी तरह से पढ़ा चिकित्सक ट्रांस्फ़ेरेंसे की अवधारणा से परिचित होता है, इसलिए आप को इस बात की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है की वह आपके बारे में क्या राय रखेंगे। अपने चिकित्सक को इन भावनाओं के बारे में बताकर आप उन्हें आपकी समस्याओं को स्पष्ट रूप से समझने में मदद कर सकते हैं।
    • अपनी भावनाओं का कारण खोजें :
      दोनों पक्षों को मिलकर पता लगाना होगा कि आपको चिकित्सक के प्रति इस प्रकार का लगाव (या अन्य भावनाएं) क्यों है? 
      भीतर छिपे मुद्दे, जिससे ट्रांस्फ़ेरेंसे संभव हो सकता है, को सुलझाने से चिकित्सकों के प्रति भावनाओं को बहुत कम किया जा सकता है।
    • इस बारे में स्पष्ट रहें कि इन भावनाओं को आगे कोई रूप नहीं दिया जा सकता है :
      यह किसी और चीज़ से ज़्यादा आपकी भावनाओं को बचाने के लिए अधिक आवश्यक है। चिकित्सक के साथ रोमांटिक या अन्य व्यक्तिगत संबंध बनाने की आशाएं न रखें। आपकी बातचीत केवल पेशेवर है और इससे अधिक रिश्ते बनाने को अनैतिक माना जाता है।
    • अपनी भावनाओं का निष्पक्ष मूल्यांकन करें:
      विचार करें, क्या आपका चिकित्सक वास्तव में वह सब कुछ है जो आप उसे बाहरी रूप से समझ रहे हैं(या नहीं)। ऐसी संभावना है कि आपके द्वारा महसूस किया गया आकर्षण व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि एक विचार के प्रति है। चिकित्सक केवल आपको सुनकर और आपकी सहायता करके अपनी नौकरी कर रहा है। आपके चिकित्सक की अच्छी सुनने की क्षमता, सहानुभूति, और समझ उनके पेशे का एक हिस्सा है, सिर्फ आपके लिए कुछ आरक्षित नहीं है। याद रखें, उन्हें आपको सुनने के लिए आपके द्वारा भुगतान दिया गया है।

    संवाद बहुत ज़रूरी है। आपके मन में जो भी विचार हैं, उनके बारे में ईमानदारी से खुलकर बात करें। अपने चिकित्सक के लिए भावनाओं का होना भ्रामक और परेशानी भरा अनुभव हो सकता है, लेकिन जब तक उन्हें परिपक्व रूप से सुलझाया जा रहा है, तब तक वह चिकित्सा के लिए बाधा नहीं बनेंगे।
    यदि फिर भी साथ काम करना संभव नहीं है, तो क्लाइंट के लिए चिकित्सक को बदलना ही उचित है। क्योंकि ऐसे में भावनाएं केवल चिकित्सा के बीच बाधक बन के आएंगी और मौजूदा समस्या को सुलझाने में भी सहायता नहीं मिलेगी। कईं चिकित्सक, इन भावनाओं के बारे में जानने के पश्चात, क्लाइंट को उनकी बेहतरी के लिए किसी अन्य चिकित्सक के पास भेजना सही समझते हैं।

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  • 30 Aug
    Nandini Harkauli

    ऑनलाइन थेरेपी व्यक्तिगत उपचार जितनी ही प्रभावी क्यों है?

     

    क्या आप कपड़ों की खरीदारी करना चाहती हैं पर नए ट्रेंड्स से परिचित नहीं हैं?

    एमाज़ॉन और फ्लिपकार्ट हैं ना मदद के लिए।

    घर का राशन ख़त्म?

    कोई बात नहीं 'बिगबस्केट' आपके दरवाज़े तक समान पहुँचा कर जाएगा।

    भूख लगी पर कुछ पकाने का मन नहीं है?

    कोई बात नहीं, भोजन ऑर्डर करने के एप्लिकेशन्स के ज़रिए आप आसपास के रेस्टुअरंट से तुरंत अपने मनपसंद व्यंजन ऑर्डर कर उनका आनंद उठा सकते हैं।

    आजकल सारी दुनिया ऑनलाइन हो गयी है। फलस्वरूप जिन कामों में पहले समय और मेहनत लगती थी वो काम अब बटन दबाने जितने सुविधाजनक हो गए हैं। ये आश्चर्य की बात नहीं की इंटरनेट ने हमारे जीवन के हर पहलू में अपनी जगह बना ली है,यह हमारे लिए मुश्किल समय में एक समर्थक भी बन गया है।

    ऑनलाइन चिकित्सा का पहला रूप 1960 में एलिज़ा नामक एक कंप्यूटर प्रोग्राम था जिसे एक थेरपिस्ट की नकल करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। आज हम ईमेल,वीडियो कॉलिंग, मेसेजिंग इत्यादि माध्यम से वास्तविक चिकित्सकों से तुरंत सलाह ले सकते हैं।

    हाल ही में, ज़्यूरिक में हुए एक अध्ययन में पता चला की मध्यम अवसाद(डिप्रेशन) वाले व्यक्तियों के लिए ऑनलाइन थेरपी भी व्यक्तिगत थेरपी जितनी ही प्रभावी साबित है।

    यह अध्ययन 62 रोगियों पर किया गया था, जिन्हें 31 लोगों के 2 समूहों में विभाजित किया गया था।

    एक समूह को पारंपरिक संज्ञानात्मक(cognitive) चिकित्सा, दोनों मौखिक रूप एवं लिखित रूप में प्रदान की गई, जबकि दूसरे समूह को 'पूर्वनिर्धारित लेखन कार्य' के साथ ऑनलाइन चिकित्सा प्रदान की गई थी ।

    अध्ययन के अंत तक, ऑनलाइन थेरेपी समूह में से 53% और परंपरागत चिकित्सा समूह में से 50% प्रतिभागी,अवसाद से मुक्त पाए गए थे।

    अध्ययन समाप्त होने के तीन महीने बाद, ऑनलाइन चिकित्सा समूह के 57%,जबकि पारंपरिक चिकित्सा समूह के 42% प्रतिभागिओं में अवसाद के कोई लक्षण नहीं मिले।

    अध्ययन का निष्कर्ष यह था कि ऑनलाइन चिकित्सा पारंपरिक चिकित्सा के लिए एक अच्छी पूरक साबित हो सकती है।

    अध्ययन के बावजूद , कि ऑनलाइन चिकित्सा पारंपरिक चिकित्सा से अधिक प्रभावी है, इनके प्रभाव में पाया गया अंतर काफी छोटा है अर्थार्थ माननीय नहीं है (यह दर्शाता है कि इस अंतर के कोई अन्य कारण हैं)। अभी भी ऑनलाइन चिकित्सा का प्रशासन करने वाले लोगों की योग्यता पर कईं सवाल हैं (जैसे कि धोखाधड़ी का खतरा), क्या ऑनलाइन चिकित्सा वास्तव में व्यक्ति-चिकित्सा का एक विकल्प हो सकती है?

    तथ्य यह दिया जाता है कि यदि चिकित्सक शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, तो वे शारीरिक हाव - भाव से मिलने वाले कईं महत्वपूर्ण संकेतों पर ध्यान नहीं दे पाएंगे। हालांकि, वीडियो कॉलिंग इस समस्या का एक अच्छा हल साबित हो रहा है। कईं ऑनलाइन चिकित्सक स्काइप और अन्य वीडियो-कॉलिंग सेवाओं के माध्यम से आमने-सामने सेशन का आयोजन करते हैं।

    माना, गंभीर मानसिक बीमारियों का इलाज इंटरनेट के माध्यम से नहीं हो सकता, उनके लिए व्यक्तिगत परामर्श की आवश्यकता होती है, लेकिन कम तीव्र, रोज़ की समस्याओं के लिए मदद पाने के लिए इस माध्यम के कईं फायदे हैं -

    यह एक सुरक्षित स्थान प्रदान करता है, जहाँ आपको कोई आंक नहीं रहा -

    अज्ञातता के बारे में खास बात यह है कि जब हमारी असली पहचान गोपनीय रखी जाती है, तब हम कोई भी बात करने में कम हिचकिचाते हैं। ऑनलाइन थेरेपी चिकित्सा थेरपी के मूल सिद्धांत पर खरी उतरती है - 'निःसंकोच आदान-प्रदान'। एक स्क्रीन के पीछे सुरक्षित महसूस करते हुए, लोग खुलकर अपनी समस्याओं के बारे में बात करते हैं। यह ऑनलाइन थेरपी की लोकप्रियता का मुख्य कारण है, क्योंकि मानसिक बीमारी से जुड़े बहुत से सामाजिक कलंक हैं जो व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों से मदद लेने से रोकते हैं।

    लिखित अभिव्यक्ति अपने आप में फ़ायदेमंद हो सकती है -

    अक्सर, पारंपरिक चिकित्सा के दौरान, व्यक्ति भावुक और व्याकुल हो जाते हैं, जिसके कारण वह पहले कुछ सेशन्स में अपनी समस्याएँ सटीक ढंग से समझा नहीं पाते। इसका कारण यह है कि किसी चिकित्सक के साथ एक भरोसेमंद संबंध बनाने में समय लगता है। कईं मरीज़ आसानी से नहीं खुलते, इसलिए अपनी समस्या के बारे में एक चिकित्सक को लिखकर बताने से सभी बातें स्पष्ट हो जाती हैं और यह मरीज़ के लिए भी अपनी बीमारी को समझने में सहायक साबित होता है।

    यह किफायती है -

    ऑनलाइन चिकित्सा सेवाएं अभी नई शुरू हुई हैं, इसलिए ये सुविधाएं अभी बहुत सस्ती हैं। कुछ एप्स तो मुफ्त में भी सहायता प्रदान करते हैं। ऑनलाइन मंचों और समर्थन समूहों में शामिल होने के लिए भी कोई अतिरिक्त लागत नहीं है। ईवेल्लनेस विशेषज्ञओं का अपना चर्चा मंच है जहां आप सभी प्रकार के प्रश्न पूछ सकते हैं और विशेषज्ञों, इंटर्न और अन्य उपयोगकर्ताओं द्वारा जवाब पा सकते हैं।

    यह सुविधाजनक है:

    ऑनलाइन चिकित्सा सेवाएं किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और इंटरनेट कनेक्शन के उपयोगकर्ता के लिए उपलब्ध हैं। उन्हें किसी भी समय, कहीं भी, अपनी सुविधा अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है। अब आपको अपने दस काम छोड़कर चिकित्सक के पास जाने की कोई ज़रूरत नहीं है,आप अपने घर बैठकर आराम से इन सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।

    यह अप्रत्यक्ष रूप से मनोविज्ञान प्रदान करता है:

    जब हम अपनी समस्याओं के लिए ऑनलाइन सहायता प्राप्त करते हैं, तो यह सीखने के लिए एक अवसर प्रदान करता है। चर्चा मंच और ऑनलाइन सहायता समूह, हमें दूसरों के समस्याओं के सामना करने के अनुभवों से परिचित कराते हैं और हमें अपनी समस्याओं का प्रबंधन करने के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न रणनीतियों से पहचान करते हैं।  हमें सहायता का लाभ तो मिलता ही है, साथ में, यह हमें हमारे आस-पास मुश्किल समय से गुज़र रहे लोगों को पहचानने व उनके प्रति अधिक संवेदनशील होना भी सिखाते हैं।

     

    ऑनलाइन चिकित्सा एक उभरता हुआ मंच है, इसमें अभी और प्रगति हो सकती है, लेकिन अभी से ही से ही कई लोगों के लिए यह फायदेमंद साबित हो रहा है। अक्सर, हम अकेले ही अपने संघर्षों से जूझते रहते हैं, क्योंकि हमारे समाज में मानसिक बीमारी से जुड़ी किसी भी बात को दबे स्वरों में ही करना पसंद किया जाता है। इंटरनेट हमें विभिन्न लोगों और समुदायों से जोड़ता है, जिनके साथ हम हमारी समस्याओं से संबंधित जानकारी साझा कर सकते हैं, जिससे हमें अकेलापन महसूस नहीं होता।

     

    हालांकि, अभी इसमें कईं कमियां और जोखिम हो सकते हैं, कुछ नवपरिवर्तन और बदलाव के पश्‍चात, मेरा मानना है कि ऑनलाइन चिकित्सा पूरी तरह से विकसित हो जाएगी और हम पूरी तरह से व्यापक चिकित्सा इंटरनेट और वर्ल्ड वाइड वेब के माध्यम से प्रदान करने में सक्षम हो जाएँगे।

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  • 09 Aug
    umair hussain

    इस खामोशी और जंजीर को तोड़ दें, आप इसके हकदार नहीं हैं

    violence against women

    ज़रूरी नहीं कि हमें पता हो, हिंसा की कहानियां कैसे सुनते हैं, क्योंकि ये स्वीकारना मुश्किल है कि अहिंसा जितनी आसान है उतनी ही मुश्किल भी, कि जो आपको तकलीफ पहुँचाये आप उसको भी प्यार कर सकते होकि जो आपको तकलीफ देता हो आप उसके साथ रह भी सकते होकि आपको वही इनसान तकलीफ दे सकता है जो आपसे बहुत प्यार करता हो, कोई अजनबी इनसान आपको तकलीफ दे सकता हैकि आपको इतनी भयंकर और सुपरिचित तरीके से तकलीफ दी जा सकती है।

    -रोक्साने गे, हंगर: अ मेमॉयर ऑफ़ (माय) बॉडी  Roxane GayHunger: A Memoir of (My) Body

    पिट कर काली-नीली हुई मेरी सहकर्मी दफ्तर के केबिन में घुसी। ये पहली बार नहीं था जब मैंने उसके ज़ख्मों को देखा हो। ऐसा बहुत बार हुआ है जब उसने अपने ज़ख्मों के निशानों को छिपाया हो। लेकिन अपनी शादी से पहले वह एक बहुत खूबसूरत और जिंदादिल इनसान हुआ करती थी। लेकिन शादी के बाद उसका गुलाबी चेहरा नीला पड़  गया, उसकी चमकदार आंखें फीकी पड़ गयीं, और मुसकुराते हुए होंठ मौन हो गए। कभी-कभी वह बिना वजह ही अपने आप हँसने लग जाती और कभी-कभी बस ग़मगीन होकर रोने लग जाती। उसके ज़ख्मों के बारे में पूछे जाने पर... वह अलग-अलग बहाने कर के बस निकल जाती। मगर… चीज़ें बदली। उस दिन उसने अपनी चुप्पी तोड़ ही दी और रो कर अपनी दिल की सारी बातें मेरे सामने कह दीं।

    अपनी शादी के चंद अरसे बाद ही वह घरेलु हिंसा, पत्नी की पिटाई और भावनात्मक शोषण का शिकार हो गयी। अपने ससुराल वालों के यहाँ उसे कई सारे लोगों के सामने ज़लील किया गया, उसे अपने पति के दोस्तों के सामने नीचा दिखाया गया और इसके ज़िम्मेदार और कोई नहीं बल्कि खुद उसका पति और उसके ससुराल वाले थे। जब मेरी सहकर्मी के घर वालों ने बीच में आकर मदद करने की कोशिश की तो उनका यह कह कर मुंह बंद करवा दिया गया कि , “आपकी लड़की की गलती यह है कि वह एक लड़की है। घर का काम करना, पति और सबको खुश रखना उसकी ज़िम्मेदारी है। और अगर कोई कुछ कहे तो उसे चुप-चाप सुनकर अपने घर गृहस्थी  पर ध्यान देना चाहिए। अगर वह ज्यादा मुंह खोलेगी या ज़्यादा सवाल जवाब करेगी तो उसके साथ यही होगा और यही होना चाहिए। इसी लिए वह पिटती रहती है। मेरी सहकर्मी वैवाहिक बलात्कार का भी शिकार हुई। उसे उसकी मर्ज़ी के खिलाफ उसके पति से संबंध बनाने को मजबूर किया गया; और अगर वह पेट से हुई तो उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। उसके गुप्तांग में गहरे घाव दिए गए, उनमें लाल मिर्च पाउडर भी लगाया गया और उसे ऐसी प्रताड़ना सहनी पड़ी, जो कोई अपने बुरे से बुरे सपने में भी नहीं देखना चाहेगा।

    जब वह अपनी आप बीती सुना रही थी, सवालों की कतार मेरे दिमाग पर प्रहार कर रही थी: क्या औरत होना सच में अपराध है? क्या हमारे पास हक नहीं कि हम कुछ कहें या सवाल भी करें, जब हम कुछ गलत देखें? औरतों को अपने पति और ससुराल वालों द्वारा क्यूँ उचित सम्मान और सम्पूर्णता नहीं दिए जाते हैं? अगर कोई पति अपनी पत्नी को मारे या विवाहेतर सम्बन्ध रखे तो क्या ये उसकी मर्दानगी की निशानी है, और अगर पत्नी भी ऐसा करे तो? अज की ज़िन्दगी में जहाँ हम औरतों के हक और मर्द और औरत की समानता के लिए लड़ रहें हैं, तो मुझे नहीं लगता कि हम एक गज भी आगे आये हैं, जब बात आती है लिंग निरपेक्षता की।

    जब मैंने अपनी सहकर्मी से पूछा कि वह क्यूँ उस अपमानजनक रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहती है, तो उसका जवाब था: अपमान से क्या मतलब है? शायद में इसकी हक़दार हूँ! शायद में घरेलू जिम्मेदारियों, पारिवारिक वचन और काम-काज की जिम्मेदारियों को बेहतर संभालना चाहिए था बिना असफल हुए या जब में बीमार या थकी हुई भी थी। अगर में अपने पति से अलग हो गयी तो समाज क्या कहेगा? में भावनात्मक रूप से कैसे बने रहूंगी? शायद आपकी का औरत को मारना ठीक है।

    मैं सोचने लगा क्या मेरी सहकर्मी एक मासूम शिकार है, या सिर्फ चोटों से भरी और जले हुए घावों से भरी एक जिंदा लाश है। एक मनोवैज्ञानिक के तौर पर, मैंने अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी समझी कि मैं सब को पत्नी की पिटाई, अपमान और घरेलू हिंसा के बारे में मनोवैज्ञानिक शिक्षा दूँ। क्योंकि ये सिर्फ एक जोड़े का सवाल नहीं है, ये उन लाखों औरतों के बारे में है जो पूरी दुनिया में घरेलू हिंसा और अपमान को सहती हैं और इंसानियत के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। यह प्रतिबिम्ब सिर्फ तथ्यों के सामान्यीकरण, किसी विशिष्ट मामले या आलोच्नात्मक होने के बारे में नहीं है। यह सब इंसानों में मानवता और इंसानियत पैदा करने के लिए है।

    घरेलू हिंसा और शोषण क्या है?

    कोई भी ऐसा व्यवहार जो किसी दूसरे के लिए खतरा हो या नुकसान पहुँचता हो, शोषण कहलाता है। ये शारीरिक शोषण भी सकता है और मानसिक भी, नाम चिढ़ाने, तिरस्कार करने, बदमाशी करने से लेकर वैवाहिक बलात्कार और यौन शोषण तक। शादी किसी आदमी या ससुराल वालों को औरत को किसी तरह का नुकसान पहुँचने का कोई हक नहीं देती; चाहे वह बातों से हो, शारीरिक हो या मनोवैज्ञानिक हो।

    यूनाइटेड नेशंस ने औरतों के खिलाफ हिंसा को ऐसे परिभाषित किया है लिंग-आधारित हिंसा का कोई भी कार्य जिसके परिणामस्वरूपशारीरिकयौन या मानसिक हानि या महिलाओं के साथ पीड़ित होने की संभावना होइस तरह के कृत्योंबलात्कार या स्वतंत्रता से वंचितचाहे वह सार्वजनिक या निजी जिंदगी में हो।"

    अंतरंग साथी हिंसा का मतलब है एक अंतरंग साथी या पूर्व साथी द्वारा शारीरिकयौन या मनोवैज्ञानिक नुकसान का कारण बननाजिसमें शारीरिक आक्रमणयौन बलात्कार और मनोवैज्ञानिक दुरुपयोग और नियंत्रण व्यवहार शामिल हों।

    यौन हिंसा का मतलब है "कोई भी यौन कृत्य, यौन संबंध को प्राप्त करने का प्रयासया जबरन किसी व्यक्ति की कामुकता के खिलाफ निर्देशित कार्यकिसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी स्थिति मेंइसमें बलात्कार शामिल है,जिसका मतलब है एक लिंगदूसरे शरीर के अंग या वस्तु के साथ योनि या गुदा का प्रवेश।"

    (http://www.who.int/mediacentre/factsheets/fs239/en/ Violence against women. Accessed on 25/07/17)

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक अनुमानों के मुताबिक दुनिया भर में हर ३ में से १ औरत (३५ %) शोषण और घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। इससे भी अधिक, ३८% महिलाओं के कत्ल किसी अंतरिम पुरुष भागीदारों द्वारा किये जाते हैं। ये सब देखते हुए, यह शोषण और घरेलू हिंसा के लक्षण, इसका असर और रोकथाम को समझने के लिए उच्च समय है।

    शोषणपत्नी की पिटाई और घरेलू हिंसा के संकेत

    • शरीर के विभिन्न भागों में नियमित आधार पर या समय-समय पर अस्पष्टीकृत अंक या चोट
    • व्यक्ति के व्यवहार में लगातार परिवर्तन
    • व्यक्ति के शारीरिक या मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य में गिरावट
    • बुरी तरह रोना और अन्य भावनात्मक क्रियाएँ
    • अवसाद, तनाव, चिंता, घबराहट महसूस करना या नींद की समस्याएँ
    • क्रोध की परेशानी, आसानी से निराश होना
    • स्वयं को नुकसान पहुँचाने का भाव, दूसरों को नुकसान पहुंचाना और आत्मघाती प्रयास करना
    • कोई अन्य नकारात्मक या असामान्य व्यवहार जो व्यक्ति के नियमित व्यवहार क्रिया या विचार प्रक्रियाओं का हिस्सा नहीं है

    कारण

    घरेलू हिंसा और शोषण के पीछे कोई एक अकेली वजह नहीं है। इसके कारण कई हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं: पालन-पोषण, पारिवारिक तरीके, ऐसे व्यवहारों को मजबूत करना, सांस्कृतिक रूढ़िवादी, क्रोध समस्या, अहंकार संघर्ष, अवसाद, तनाव और हताशा के लिए दोषपूर्ण मुकाबला तंत्र, अतिरिक्त वैवाहिक सम्बन्ध, लिंग रूढ़िवादी, आदि।

    "अपने अपराधों के लिए जवाबदेही से बचने के लिएअपराधी अपनी भूल को बढ़ावा देने के लिए सब कुछ करता है यदि गोपनीयता में विफल रहता हैतो अपराधी अपने शिकार की विश्वसनीयता पर हमला करता है। अगर वह उसे पूरी तरह से चुप नहीं कर सकतातो वह यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि कोई भी ना सुने।"

    -जूडिथ लुईस हरमन, ट्रॉमा एंड रिकवरी: हिंसा का परिणाम- घरेलू दुरुपयोग से राजनीतिक आतंक Judith Lewis HermanTrauma and Recovery: The Aftermath of Violence - From Domestic Abuse to Political Terror

     

    बचाव

    घरेलू हिंसा और दुरुपयोग बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। चाहे कुछ  भी हो, किसी को भी अपने साथी को मारने या उसे नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है। यह पूरी तरह से किसी व्यक्ति की गरिमा, अखंडता और मानवाधिकारों के खिलाफ है। इसलिए, घरेलू हिंसा और दुरुपयोग से बचने और रोकने के लिए पर्याप्त उपाय किए जाने चाहिए। कुछ उपाय इस प्रकार हैं:

    • आपको हानि पहुँचाया जाना या दुरुपयोग किया जाना आपकी गलती बिल्कुल नहीं है: ज़रूरी नहीं आप कौन हैं, कहाँ हैं या आप/दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं; आपको ये बात समझना चाहिए कि शोषण किया जाना या नुकसान पहुँचाया जाना बिलकुल भी आपकी गलती नहीं है! आप पर हिंसा के किसी भी कार्य के लिए आप ज़िम्मेदार नहीं हैं। राय या स्थिति गत मतभेद हो सकते हैं। लेकिन, किसी भी मामले में मारना या हानि स्वीकार्य नहीं है। इसलिए, अपने बारे में कभी भी नकारात्मक ना सोचें या खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें। यह आपकी गलती नहीं है।

     

    • आपके जीवन के अधिकार का सम्मान करें, जिसमें दायित्व के साथ जीने का अधिकार भी शामिल है: अपने तथाकथित अपमानजनक साथी और परिवार के अन्य सदस्यों को सम्मान या प्रेम करने से पहले, हमेशा अपने जीवन के अधिकार का सम्मान करना याद रखें। यह अप्रत्याशित कुछ नहीं है। यह आपका अपना संवैधानिक जनादेश है मनोवैज्ञानिक रूप से, इसका अर्थ है कि आप प्यार करते हैं, सम्मान करते हैं और स्वयं को स्वीकार करते हैं।

     

    • खुद को सक्षम और सशक्त करें: अपने आप को दुरुपयोग और घरेलू हिंसा से सुरक्षित रखने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं, कृत्यों और कानून, कानून और प्रावधानों पर मनो-शिक्षित करें। अपने आप को सशक्त बनाएं, अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें और विश्वास करें कि आप जीवन में अच्छी तरह से और उचित रूप से व्यवहार करने योग्य हैं। आप अपन लिए श्रेष्ठ के हक़दार हैं।

     

    • किसी भी पिछली विसंगत मुद्दे को हल करें: कैद की हुई भावनाओं और अनसुलझे पिछले मुद्दे वर्तमान में सताए रख सकते हैं और आपके भविष्य को नष्ट कर सकते हैं। यदि आप या आपके साथी किसी भी पिछले भावनात्मक मुद्दे, वित्तीय समस्याओं, पिछले संबंधों के मुद्दों और पसंद में बंधे हैं, तो इन लंबित मुद्दों को हल करने के लिए हर उचित कदम उठाएं और कैद हुई भावनाओं को निकाल दें।

     

    • संवाद करें: यदि यह दुरुपयोग या घरेलू हिंसा राय, व्यक्तित्व, सोचने की प्रक्रिया और व्यवहार में मतभेद के कारण उत्पन्न हो रही है; तो इसमें एक दूसरे के साथ संवाद करना एक बुद्धिमान कदम है। अपने लिए गुणवत्ता का समय निकालें, आपस में बात करें और एक-दूसरे के प्रति व्यवहार की स्पष्ट सीमाएं खींचें, अपेक्षाएं और आप दोनों नुकसान लिये या नुकसान पहुंचाए बिना कैसे एक साथ रह सकते हैं।

     

    • एक समर्थन प्रणाली बनाएं: अपराध, पश्चाताप, क्रोध की भावनाएं और अतीत, वर्तमान, भविष्य के बारे में प्रश्न, महत्वपूर्ण अन्य लोगों की प्रतिक्रिया और सामाजिक प्रतिक्रिया आपके दिमाग पर वास्तव में बौछार कर सकते हैं। ऐसे समय के दौरान उन विचारों को थोड़ी देर के लिए अलग रखने की कोशिश करें, उन लोगों के बारे में सोचने की कोशिश करें जो वास्तव में आपको गैर-निष्पक्ष तरीके से समझ सकें और नरक जैसी स्थिति से बाहर निकलने में आपकी सहायता करें। अगर आपको कोई भी नहीं मिल सकता है, तो बहुत से गैर-सरकारी संगठन और समर्थन समूह हैं जो सशक्त और मजबूत हैं, जो आपके पक्ष में खड़े हैं और आपके लिए एक सक्षम वातावरण बना सकते हैं।

     

    • अपनी स्वयं की सहायता प्रणाली बनें: याद रखें कि आप कम नहीं हैं। आपके भीतर हर सामर्थ्य है और मौका मिलने पर आप आसमान में ऊंची उड़ान भरने की हर संभावना रखते हैं। अपने आप में विश्वास करें और एक सुरक्षित जीवन का निर्माण करने की दिशा में काम करें जिसके आप वास्तव में योग्य हैं और जीने में सक्षम हैं।

     

    • किसी अनुभवी की सहायता लें: न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पुरुष भी शोषण और हिंसा के पीड़ित हैं। दोनों मामलों में, आप में से प्रत्येक के कल्याण की दिशा में काम करना महत्वपूर्ण है। अतः, निष्पक्ष और गैर-निष्पक्ष दृष्टिकोण से परिस्थितियों को समझने के लिए व्यावसायिक सहायता लेने में हमेशा ही बुद्धिमानी होती है, अपने आप को एक पीड़ित से एक मजबूत उत्तरजीवी में बदलें।

    कुछ लोगों के लिए शादी निश्चित रूप से जीवन में एक बड़े बदलाव वाली घटना है। यह अच्छा भी हो सकता है या आपके विरुद्ध भी। पूरी तरह से हर मामले में, यह समझना जरूरी है कि दुरुपयोग, पत्नी की मार या घरेलू हिंसा बिल्कुल ठीक नहीं है। ये मानवीय आधार पर अनैतिक है और कानून के खिलाफ भी दंडनीय अपराध है।

    तो, आप अपने जीवन का प्रभार ले लें, इससे पहले की बहुत देर हो जाए। अगर आपको लगता है कि आप या आपका जानने वाला कोई भी ऐसी समस्याओं से गुजर रहा है, तो कृपया बेझिझक हमसे संपर्क करें। अगर कोई भी परवाह नहीं करता है या मदद नहीं करता है तो।.. हम वहां हैं, सिर्फ एक क्लिक दूर। हमारे अनुभवी और लाइसेंस प्राप्त विशेषज्ञ सार्थकता और गरिमा का जीवन जीने में आपकी सहायता करने के लिए तैयार हैं; मुस्कुराहट और चमचमापन से भरे जीवन का नेतृत्व करने के लिए काम करने के लिए जिसके आप वास्तव में हकदार हैं।

     

    खामोश ना रहें। चुप्पी को तोड़ें और जंजीरों को तोड़ें........

    ज़हरीले रिश्ते आपकी सेहत के लिए खतरनाक हैं; ये आपको वास्तव में मार देंगे। तनाव आपके जीवन काल को छोटा करता है। यहां तक ​​कि एक टूटा हुआ दिल आपको मार सकता है। मन और शरीर में एक निर्विवाद सम्बन्ध है। आपका तर्क और घृणास्पद बातें आपको आपातकालीन कमरे में या मुर्दाघर में पहुंचा सकते हैं। आप चिंता के बुखार में रहने के लिए नहीं बने हैंभयानक घबराहट से चिल्लाते हुएलड़ें-या-उड़ान की स्थिति में घबराए हुए, जो आपको थका हुआ बनाता है और दुःख से सुन्न करता है। आप जानवरों की तरह जीने के लिए नहीं बने हैं,जो एक दूसरे को टुकड़ों में फाड़ते हैं। अपने बालों को धूसर न करें। अपने चेहरे की मीठी झुर्रियों में दर्द की एक रूपरेखा तैयार न करें। अपने दिल में फंस गएभयभीत प्राणी की तरह शांत न हों। अपनी अनमोल और सुंदर ज़िंदगी के लिएऔर अपने आस-पास के लोगों के लिए - सहायता प्राप्त करें या खुद बढ़ें इससे पहले कि देर हो जाए। यह आपके लिए जगाने वाली पुकार है!

    -ब्र्यंत मैकग्रिल Bryant McGill

     

    स्वीकृतियाँ

    मेरे सीईओ, eWellness Expert, श्री शिव रमन पांडेय के लिए जिन्होंने दुरुपयोग और हिंसा से बचे लोगों के दर्द को समझा और जिन्होंने मुझे अपने शब्दों को आगे रखने के लिए एक मंच दिया। मजबूत बचे लोगों के लिए जिन्होंने हिम्मत रखी, अपने जीवन को दूसरा मौका दिया और अपनी इच्छाओं और सपनों का एक नया रूप दिया। अपने ग्राहकों के लिए, जो आगे बढ़ने के लिए मेरे सर्वोत्तम शिक्षक रहें हैं और goodreads.com के योगदानकर्ताओं के लिए, जो हिंसा को रोकने के लिए आगे आये और एक नई जीवन शक्ति को लागू किया......

     

    Read in English

     

  • 29 Aug
    Nandini Harkauli

    सामान्य चिंता, विकार का रूप कैसे ले लेती है?

    anxiety and its disorders

     

    कभी किसी बड़ी परीक्षा से पहले घबराहट महसूस की है? या जॉब इंटरव्यू से पहले पेट में अजीब सी गुदगुदी हुई हो? क्या कभी मंच पर बोलने से पहले मुँह सूखने का अनुभव किया है?

    हम सभी, कभी ना कभी, किसी ना किसी बात पर ,जिसका परिणाम अनिश्चित हो ,चिंता या बेचैनी महसूस करते हैं। हम सभी इस चिंता को अलग- अलग तरीके से अनुभव करते हैं । हम में से कुछ के लिए, यह अव्यवस्थता की एक छोटी सी भावना तक ही सीमित रहती है, जबकि कुछ लोग पसीने आना ,कंपन ,हृदयगती बढ़ना , मांसपेशियों में तनाव और शुष्क मुंह जैसे शारीरिक लक्षणों का अनुभव करते हैं। शारीरिक लक्षण अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र(स्य्म्पथेटिक नर्वस सिस्टम) की वजह से होते हैं, जो हमारी लड़ाई-या-उड़ान प्रतिक्रिया (एक रक्षा तंत्र जो तब काम करता है जब भी हमे ख़तरे का आभास होता है) को बंद कर देते हैं। अन्य लक्षणों में संज्ञानात्मक (अर्थात् चिंतित विचार) और व्यवहार संबंधी लक्षण (अलगाव व्यवहार, बेचैनी, ध्यान में कमी इत्यादि) शामिल हैं।

    चिंता होना काफ़ी आम बात है और यह कुछ हद तक आवश्यक भी है क्योंकि यह हमें खतरे की परिस्थितियों से निपटने के लिए सक्षम बनाती है। जब तक व्याकुलता की तीव्रता कम है और यह हमारे दिन-प्रतिदिन के कामकाज को प्रभावित नहीं कर रही,तब तक परेशानी की कोई वजह नहीं है।

    जब संज्ञानात्मक, व्यवहारिक और शारीरिक लक्षण लगातार, गंभीर रूप से व्यक्ति के लिए गहन संकट का कारण बनकर उसकी रोजमर्रा के जीवन की कार्यशैली में बाधक बन जाएं, यही चिंता "व्याकुलता विकार" का रूप धारण कर लेती है। कुछ ऐसे सामान्य लक्षण जिन्हें आप व्याकुलता विकार वाले व्यक्ति में पहचान सकते हैं,वह हैं:

    संज्ञानात्मक :

    • बेचैनी भरे विचार (जैसे "मैं नियंत्रण खो रहा हूं")
    • अनिश्चित मान्यताएं (जैसे "केवल कमजोर लोग चिंतित हो जाते हैं")
    • संदिग्ध पूर्वानुमान (जैसे "मैं खुद को अपमानित करने वाला हूँ" या "कुछ भयानक होने वाला है")

    व्यवहारिक:

    • भय उजागर करने वाली स्थितियों से बचाव
    • ऐसी गतिविधियां जो कि उत्सुकता से मिलती हुई भावनाओं का कारण बनें (जैसे सांस फूलना और पसीने आना -दोनो व्याकुलता के लक्षण हैं , इनसे बचने के लिए व्यायाम से परहेज़ करना)
    • छोटे-छोटे टालने वाले व्यवहार (जैसे ध्यान भटकाना, ज़रूरत से ज़्यादा बोलना,अस्थिरता)
    • सुरक्षा केंद्रित व्यवहार (जैसे कि हमेशा दरवाज़े के करीब रहना ताकि किसी भी खतरनाक स्थिति से बाहर निकलना आसान हो)

     

    शारीरिक:

    • शारीरिक लक्षण जो स्थिति से अत्यधिक और बेमेल हैं, जैसे चक्कर आना, धड़कन बढ़ना, और श्वासहीनता (जिसे दिल का दौरा समझा जा सकता है)

    चिंता सम्बंधी विकार लगातार मौजूद हो सकते हैं या कम समय में ही तीव्र और कष्टदायी हो सकते है। यह चिंता बिना किसी स्पष्ट कारण या बहुत ही मामुली कारण से हो सकती है, जो और लोगों को तुच्छ या मूर्खतापूर्ण लग सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि,व्याकुलता से पीड़ित ज्यादातर लोग अपने भय के तर्कहीन प्रकृति से अवगत होते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें नियंत्रित करने में असमर्थ रहते हैं।

    चिंता विकारों के प्रकार:

    प्रकृति और चिंता की अवधि के आधार पर व्याकुलता विकार कईं प्रकार के हो सकते हैं। कुछ सबसे उल्लेखनीय प्रकार हैं -

    • सामान्यीकृत चिंता विकार
    • आतंक विकार
    • जुनूनी बाध्यकारी विकार
    • विशिष्ट फोबियाज़
    • पश्च-आघात तनाव विकार।

     

    सामान्यीकृत  व्याकुलता  विकार  (जनरल  एंग्ज़ायटी  डिसॉर्डर , जीएडी)

     

    generalized anxiety disorder

     

    क्या जब आप घर देर से आते हैं आपकी माँ, चिंतित होकर आपकी राह देखती हैं? आपको कईं बार कॉल और मेसेज भी करती हैं?आपके घर आते ही यह चिंता दूर भी हो जाती है।

    हालांकि, अगर वह पूरे समय जब आप बाहर रहते हैं ,चिंता में डूबी रहती हैं, किसी और कार्य में खुद को व्यस्त करने में असमर्थ रहती हैं और आप देर से क्यों आ रहे हैं, इस बारे में भयावह परिस्थितियों की कल्पना करती रहती हैं, तो यह विकार के संकेत हो सकते हैं।

    जीएडी एक विकार है जिसकी विशेषता छोटी सी बात पर अत्यधिक, अनियंत्रित चिंता करना है। निदान के लिए लक्षण 6 महीने की अवधि के लिए मौजूद होने चाहिए। इस विकार वाले लोग विभिन्न चीजों के बारे में चिंता करते हैं , ज़रूरी नहीं कि चिंता कुछ विशिष्ट कारणों से ही हो, कभी कभी चिंता पूरी तरह से डर और अस्वस्थता की भावना के रूप में प्रकट हो सकती हैं, जिससे बाहर आना या समझ पाना मुश्किल होता है।

    इस विकार के लोग तर्कहीन हो जाते हैं। अपनी समस्याओं को हल करने व उपाय करने के बजाय, वे चीज़ों से बचने वाले व्यवहार में लग जाते हैं।

    उदाहरण के लिए: यदि रक्तचाप या शर्करा का स्तर असामान्य है तो यह चिंता का विषय है, एक सामान्य व्यक्ति लगातार इन स्तरों की जांच करेगा और उन्हें बढ़ने या रोकने के लिए एहतियात बरतेगा। दूसरी ओर, जीएडी वाले व्यक्ति, इन स्तरों को पूरी तरह से जांचने से बचते हैं और इसके बारे में कुछ नहीं करते।

    वे शारीरिक लक्षण जैसे मांसपेशियों में तनाव, ठीक से नींद न आना, बेचैनी, ध्यानहीनता और चिड़चिड़ेपन का अनुभव भी कर सकते हैं।

     

    आतंक विकार (अगॉरफोबिया के साथ या बिना)

     

    panic disorder

     

    पिछली बार जब आप बेहद डरे हुए थे ,क्या आपको घबराहट महसूस हुई थी?आपकी हृदयगति तेज़ हो गई थी? पसीने आने लगे थे? क्या आपको ऐसा लगा था कि आप एक ही जगह पर स्थिर हो गये थे और आगे या पीछे की ओर नहीं बढ़ सकते थे?

    यह प्रतिक्रिया तब होती है जब आपके सामने वह चीज़ आ जाए जिससे आपको अधिक भय है। आप निश्चिंत तभी महसूस करते हैं जब आपके डर का कारण ,कोई चीज़ या परिस्थिति पूरी तरह से दूर या अंत नहीं हो जाती।

    अब कल्पना कीजिए कि आप यह सभी शारीरिक लक्षणों को बिना किसी कारण या बिना वातावरण में खतरे के बावज़ूद,अनुभव कर रहे हैं। इस सब के साथ आपको अत्यंत घबराहट, नियंत्रण खोने और मृत्यु करीब होने का आभास भी हो रहा हो, ऐसा ही लगता है जब आतंक विकार का दौरा आता है।

    इस विकार में अचानक ही पर्यावरण के किसी भी खतरे के बिना, शारीरिक डर प्रतिक्रियाओं की शुरूआत होती है। आतंक विकार के निदान के लिए 1 या अधिक आतंक के दौरे पर्याप्त हैं। यह एक तरह के "झूठे अलार्म" के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि यह किसी कारण के बिना होते हैं।

    चिंता के शारीरिक लक्षण इस विकार में हावी होते हैं। आतंक दौरों का सामना कर रहे लोगों को अधिक भय, मतली, चक्कर आना, तीव्र बेचैनी, दिल की धड़कन तेज़ होना, छाती के दर्द, श्वासहीनता अनियंत्रितता या आसन्न मृत्यु की भावना महसूस होती है।

    इन लक्षणों की अचानक शुरुआत समस्या का विषय हो जाती हैं और जो लोग इन दौरों का सामना करते हैं, वे अक्सर इस डर में रहते हैं कि अगला दौरा कभी भी आ सकता है। इससे अगॉरफोबिया नामक एक भय विकार विकसित होता है, जहां वे लोग ऐसी स्थितियों और गतिविधियों से बचते हैं जो आतंक की भावना उत्पन्न कर सकती हैं। इन लोगों को डर रहता है कि उन्हें जब दौरा आएगा तब आसपास कोई मदद के लिए नहीं होगा, इसलिए वे अकेले स्थानों पर नहीं जाते। उनमें से कुछ ऐसी गतिविधियों से डरते हैं जो आतंक दौरों  (जैसे व्यायाम, जो पसीना और श्वासहीनता का कारण बनता है) के समान प्रभाव पैदा करती हों ।

    भयग्रस्त विकार(स्पेसिफिक फोबीया)

    specific phonia

     

    मान लीजिए कि आपको कुत्तों से डर लगता है, उनकी उपस्थिति में आप असहज महसूस करते हैं और अगर कोई कुत्ता आपके पास आने की कोशिश करे या भौंके तो आप वहाँ से तुरंत पीछे हट जाते हैं।लेकिन अगर एक कुत्ता उँची दीवार के पीछे सुरक्षित रूप से बंधा हुआ हो, तो आप कुत्ते को ख़तरा नहीं मानेंगे।

    अब सोचिए कि एक और व्यक्ति है जो भी कुत्ते से डरता है और वह भयभीत है, उसकी साँस फूल रही है और वह दीवार के पास जाने के विचार से ही तनाव महसूस कर रहा है,उस व्यक्ति के लिए यह देखना या इस बात का ज्ञान होना ही काफ़ी है की दीवार की दूसरी ओर कुत्ता है। तो आप मान सकते हैं कि इस व्यक्ति को कुत्तों का फोबीया है।

    विशिष्ट डर (स्पेसिफिक फोबीया) एक विशेष वस्तु या स्थिति के प्रति अत्याधिक एवम् तर्कहीन भय को कहते हैं। निदान के लिए 6 महीने या उससे अधिक की अवधि के लिए लगातार इस अत्यधिक डर का होना ज़रूरी है। डर का स्तर परिस्थिति अनुसार न होकर अत्यधिक होता है।

    कुछ फोबिया जैसे प्राकृतिक पर्यावरण फोबिया (जैसे पानी या प्राकृतिक घटना के डर के रूप में) और पशु फोबिया बचपन में आरंभ होते हैं और किशोरावस्था या वयस्कता तक यह गायब हो जाते हैं। ऊंचाइयों का भय (एरोफोबिया) और सांप का भय सबसे अधिक देखे जाने वाले फ़ोबिया हैं।

    कुछ फोबिया स्थिति के अधीन होते हैं, जैसे अगॉरफोबिया (जिसका मैंने पहले उल्लेख किया था) और क्लॉस्ट्रफोबिया (बंद स्थान का डर)।

    सामाजिक भय / व्याकुलता

     

    social phobia

     

    हम सभी दर्शकों के सामने मंच पर जाने से पहले घबराहट महसूस करते हैं।अजनबियों से भरे हुए एक समारोह में जाने से पहले या नए स्कूल, कॉलेज, कार्यस्थल का हिस्सा बनने से पहले भी बेचैनी होती है। हम सभी दूसरों के द्वारा स्वीकार किए जाना चाहते हैं और हम सभी को शंका रहती है कि ऐसा नही होगा। हालांकि, यह भावनाएँ हमें परिस्थितियों में प्रवेश करने से नहीं रोकती।

    अगर अन्य लोगों द्वारा अन्याय और अस्वीकार किए जाने का डर इतना तीव्र है कि आप इन अवसरों को पूरी तरह से टालते हैं, तो यह सामाजिक व्याकुलता का एक संकेत हो सकता है।

    सामाजिक व्याकुलता वाले लोगों को सार्वजनिक तौर पर अपमानित, उपहासित और दूसरों के द्वारा नकारात्मक तरीके से देखे जाने का अत्यधिक भय होता है। इसमें विभिन्न प्रकार की सामाजिक स्थितियों को शामिल किया गया है और इसे स्टेज फिअर ("मंच भय") के साथ भ्रमित नहीं करना चाहिए, जो कि दूसरों के सामने प्रदर्शन (गायन, नृत्य, बोलने आदि) तक सीमित है।

    जुनूनी बाध्यकारी विकार (ऑबसेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर ,ओसीडी)

     

    ocd

     

    कुछ ऐसी चीजों का नाम गिनिए जो आप अपनी रोज़मर्रा के जीवन में करते हैं,जैसे दिन में दो बार ब्रश करना, स्नान करना, खाने से पहले हाथ धोना आदि। या सुनिश्चित करना कि गैस स्टोव बंद हो गया है ,सोने या बाहर जाने से पहले दरवाजे बंद हैं या नहीं। स्वयं की देखभाल की गतिविधियां सामान्य हैं और घर में चीजों की एक या दो बार जांच करना भी सामान्य बात है। यदि हम अपने हाथों को धोए बिना भोजन ख़ालें या फिर अपने दांतों को मंजन किए बिना सो जाएं, तो यह कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है।

    अब, कल्पना करें कि आपको नींद नहीं आ रही, क्योंकि आप बार-बार यही सोच रहें है कि घर का दरवाजा खुला है और कोई भी घर में प्रवेश कर सकता है, 8 बार जांच करने के बावजूद भी आप सुनिश्चित नहीं हो पा रहे कि दरवाज़ा लॉक है। या सोचिए आप गाड़ी चलाकर कॉलेज या काम पर जा रहें हैं पर आपको आधे रास्ते जाकर वापिस घर आना पड़े, क्योंकि आपको लगता है कि आप स्टीम प्रेस को चलता हुआ छोड़ आए हैं और उससे आग भी लग सकती है, यह सब तब जबकि आप घर से निकलने से पहले 3 बार सुनिश्चित कर चुके थे कि प्रेस बंद है.

    ओब्सेशन्स ऐसे हस्तक्षेप करने वाले या दखल देने वाले विचारों को कहते हैं जो नियंत्रण से बाहर हैं, वे अक्सर तर्कहीन और हठी होते हैं। इनमें भय भी शामिल हो सकते हैं जैसे कि मैंने ऊपर उल्लेख किया है - घर में घुसपैठियों का भय, विनाश, कीटाणु आदि का भय। कम्पल्शन्स, वह बाध्यकारी व्यवहार हैं जो कि नियमित रूप से बार बार दौराहे जाते हैं। ये ओब्सेशन्स से उत्पन्न घबराहट को दूर करने के लिए किये जाते है, लेकिन यह राहत बहुत कम समय के लिए ही रहती है और जल्द ही, व्यवहार को दोहराया जाना पड़ता है।

    ओसीडी दिन के कामकाज में एक बड़ी रुकावट बन जाता है और इन लोगों में जो कार्यपूर्णता की विशेषता होती है, वही इन्हें कार्य पूरा करने से रोकती है। उदाहरण के लिए, सफाई का जुनून रखने वाला व्यक्ति ,कोई और काम ना करके, पूरे दिन घर की सफाई में व्यस्त रह सकता है।

    ओसीडी से पीड़ित व्यक्तिओं में कुछ सामान्य ओब्सेशन्स समरूपता से जुड़े (जैसे चीजों का बराबर और एक पंक्ति में होना आवश्यक होता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति बार-बार चीज़ों को व्यवस्थित करने की कोशिश करता रहता है पर निश्चिंत नहीं होता ) और होर्डिंग - ऐसी वस्तुएं एकत्रित करना जिनका कोई वास्तविक मूल्य नहीं हैं, उन्हें यकीन होता है कि उन्हें एक दिन उस वस्तु की आवश्यकता होगी और इसलिए वह उन्हें फेंकने से घबराते हैं।

    पश्च-आघात तनाव विकार (पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, पीटीएसडी)

    ptsd

    अगर आपने कभी किसी प्राकृतिक आपदा (जैसे भूकंप), सड़क दुर्घटना या किसी प्रियजन की मृत्यु का सामना किया है, तो आपको आभास होगा कि यह कितना विनाशकारी अनुभव हो सकता है। आम तौर पर, आप अपने जीवन को ट्रैक पर वापस लाने की कोशिश करेंगे और घटना के खत्म होने के बाद जो कुछ हुआ, उसके बारे में सोचकर चिंतित नहीं होंगे।

    परंतु कुछ लोग इतनी आसानी से आगे नहीं बढ़ पाते। घटना के बाद भी ,उसकी यादें उनके दिमाग में ताजा रहती हैं और वे त्रासदी से जुड़े  प्रत्येक भयानक क्षण और उस क्षण से जुड़ी भावनाओं को बार -बार जीते हैं।

    पीटीएसडी एक तनाव प्रतिक्रिया है जो किसी दर्दनाक घटना से गुज़रने के बाद होती है। घटना के बीत जाने के बाद भी, वह व्यक्ति उस हादसे से बाहर नहीं आ पाता है। वे 'फ्लैश बैक' (जो कि मूल घटना के दौरान अनुभव की गई भावनाओं को महसूस करते हैं) के माध्यम से त्रासदी को पुनः जीते हैं और उस दर्दनाक घटना के बुरे सपने आने के कारण ठीक से सोते भी नही हैं।

    पीटीएसडी चिंता विकारों की श्रेणी में आता है, क्योंकि आतंक विकार वाले लोगों की तरह ही, पीड़ित व्यक्ति हर उस परिस्थिति से बचने की कोशिश करता है जिस से उसे वह हादसा याद आए ।

    एक महीने या उससे अधिक समय तक लक्षणों का सामना करने पर पीटीएसडी का निदान दिया जाता है। एक महीने से कम समय तक लक्षणों का सामना करने के लिए उन्हें तीव्र तनाव विकार (एक्यूट स्ट्रेस डिसॉर्डर) का निदान दिया जाता है।

    घबराहट संबंधी विकार, यहां तक कि अत्यधिक चिंता भी आजकल काफी आम समस्या है। हम इसके संकेतों को अनदेखा कर देते हैं हैं क्योंकि हमारी संस्कृति मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से नहीं लेती और इन चीजों को अस्थायी मानकर खारिज कर देती है। 4 वयस्कों में से 1 चिंता विकार से ग्रस्त हैं और पीड़ित मुख्य रूप से महिलाएं हैं। कार्य,अध्ययन और अन्य नियमित गतिविधियां इन विकार वाले लोगों के लिए एक चुनौती बन जाती हैं।

    इनका उपचार सम्भव हैं, और यह जितना पहले पकड़ में आ जाएँ ,उतना बेहतर है। अपने आप को इन विकारों के बारे में शिक्षित करना और लक्षणों की पहचान सीखना आपके और आपके आस-पास के लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है ।

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