• 22 Aug
    Nandini Harkauli

    आपकी पहचान आपके अंक नहीं हैं!

    3 idiots

     

    मुझे हमेशा आश्चर्य होता है कि हम मनुष्य संख्याओं पर इतना ध्यान क्यों देते हैं। जैसे लंबाई, वज़न, धन ,सोशल मीडिया पर मित्रों की संख्या और कैसे भूल सकते हैं - मार्क्स! हमें संख्याओं से इतना जुनूनी लगाव है कि हम अपने जीवन में हर चीज़ को मापने की इस दौड़ में जीवन के बाकि पहलुओं को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

    "अच्छे ग्रेड" स्कोर करने की यह दौड़ कभी अंत नही होती है। इसके अलावा, अब अच्छे अंकों की परिभाषा इतनी अस्पष्ट हो गई है, पहले जहां 80% भी अच्छा माना जाता था, अब 95% से कम को औसत दर्जे का माना जाता है।

    लेकिन हम चरित्र और बुद्धिमत्ता को बहुत लंबे समय तक संख्याओं से नाप चुके हैं, और अब समय आ गया है कि हम बदल जाएं। और इसकी शुरुआत सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र में होनी चाहिए - शिक्षा के
     
    यह लेख उन लोगों को संबोधित है जिन्हें कम नंबर लाने के कारण समाज द्वारा लेबल किया गया है।
     
    1. आपकी पहचान आपके अंक नहीं हैं!-

    हां, अंक महत्वपूर्ण हैं, वह जीवन को बहुत आसान भी बना देते हैं, लेकिन क्या आप एक बात जानते हैं ? यह तथाकथित टॉपर्स, जिनके लिए अत्यधिक उच्च कटऑफ वाले कॉलेजस के द्वार खुले रहते हैं, जो बड़ी कंपनियों द्वारा नियुक्त किए जा रहे हैं, जो इन कॉलेजों में एक ब्रांड नाम के साथ आते हैं, एक स्थिर नौकरी प्राप्त करते हैं, शादी करते हैं और फिर उनके बच्चे भी इसी चक्र में चलते हैं ,और इस तरह यह चक्र चलता रहता है।

    क्या आप एक पैटर्न देख सकते हैं? सब कुछ एक ही जैसा ,पूर्वानुमानित और उबाऊ सा लगता है। माना कि, हम में से बहुत लोग एक सुरक्षित कवच में रहना चाहते हैं जो एक स्थिर नौकरी हमें देती है।

    लेकिन आप जानते हैं कि जीवन में हम सबसे ज़्यादा क्या याद रखते हैं? वह समय जब आप बिना किसी लक्षय के बोझ के खुद को ढूँदने यहाँ वहाँ आज़ादी से घूमते थे। रास्ते के अनुभवों के रोमांच और उससे मिलने वाली सीख, दोनों का आनंद उठाते थे।

    टॉपर्स बहुत जल्द एक जगह व्यवस्थित हो जाते हैं, लेकिन जो टॉपर्स नहीं है, थोड़ा अधिक समय लेते हैं क्योंकि वे दुनिया की खोज में व्यस्त रहते हैं, एक नीरस जीवन के शिकार बनने की बजाए वह रोमांचक जीवन पसंद करते हैं।

    आप जो भी अनुभव करते हैं, लोगों से, जीवन से सीखते हैं वह ही आपके व्यक्तित्व का भाग बनता है, अकेले किताबी ज्ञान काफ़ी नहीं होता है। इस देरी का मतलब यह नहीं है कि आप कभी व्यवस्थित नहीं हो पाएंगे।

    क्या हुआ अगर आपको कॉलेज से प्रतिष्ठित प्लेसमेंट नहीं मिल पाई, शायद आप अपने मनचाहे कारोबार को शुरू करने की तमन्ना पूरी कर पाएं, और 10 सीजीपीए वाले अपने सहयोगी की तुलना में अधिक धन भी कमा लें।

    आपकी पहचान आपके विचार, आपकी रचनात्मकता, आपके लोगों से व्यवहार रखने का कौशल, आपका व्यक्तित्व और आपकी चतुराई हैं; जिनमें से कोई भी, अंकों से नहीं मापा जाता है, भारतीय शिक्षा प्रणाली में तो कम से कम नहीं।

     

    2.जीवन अंक के बराबर नहीं है!

    आप स्कूल में गणित और विज्ञान का अध्ययन करते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि आप उन्हें पसंद भी करें।

    और अगर आपको कुछ पसंद नहीं है तो यह संभावना है कि आप उसे करने में रूचि नहीं लेंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप कभी भी कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। हो सकता है कि आप फ्लेमिंग्स के राइट हैंड रूल को या गणित में इंटीग्रेशन के महत्तव को न समझें, लेकिन आप फोटोग्राफी या खाना पकाने की कलाओं में निपुणता पाने की प्रतिभा रखते हों, बस आपको यह पता करने का मौका दिया जाना चाहिए कि आपको क्या पसंद है, तो आप चमत्कार कर सकते हैं।

    ज़िंदगी में गणित, भौतिक विज्ञान के जटिल कानून और रट्टा लगाकर परीक्षाओं में अंक लाने के अलावा भी बहुत कुछ है। आपको अपनी सफलता की राह ढूँदने के लिए ,यह जानने की ज़रूरत नहीं है कि कोशिकाओं में पाए जाने वाले तरल पदार्थ को क्या कहते हैं, या अँग्रेज़ी में मॉडल क्रिया की परिभाषा क्या है। आपको बस विचार और जुनून का मेल चाहिए, इसलिए रोमांच का जोखिम लेने से पीछे मत हटिए, बड़े सपने देखिए और अपने अंकों के बारे में चिंता करना छोड़ दीजिए।

    3. श्रेष्ठता पाने का प्रयास करें-

    क्या कोई आपके स्वस्थ और अच्छे आकर के शरीर को देखकर पूछेगा कि आपका वज़न कितना है? नहीं ना, यही बात परीक्षा के अंकों के लिए भी सच है। एक बार जब आप सफल हो जाते हैं और अपने क्षेत्र में अच्छा कर रहे होते हैं, तब कोई भी मार्क्स की परवाह नहीं करता है।

    आपके अंक तो एक कागज के टुकड़े बनकर रह जाते हैं, जो धूल भारी दराज़ों में बंद कर दिए जाते हैं। मायने रखता है कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं, दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं,आपने कितने लोगों का भरोसा कमाया है,और आपने अपने कार्यों से जो अपना अनूठा "ब्रांड नाम" बनाया है।

    तो क्या हुआ अगर आपके दसवीं कक्षा में 75 % अंक आए थे? जीवन आपको स्वयं को साबित करने के बहुत सारे अवसर प्रदान करती है। अपने परीक्षा के अंकों से न निराश हों न ही इन्हें अपनी पहचान बनने दें।
     

    कल मेरी परीक्षा है लेकिन मुझे

    परवाह नहीं है क्योंकि मात्र एक

    कागज का पन्ना मेरा भविष्य

    तय नहीं कर सकता

    -थॉमस ए एडीसन


    अल्बर्ट आइंस्टीन, वह बच्चे थे जिन्होंने चार साल की उम्र से पहले बोलना तक शुरू नहीं किया था,सात साल की उम्र तक वह पढ़ भी नहीं पाते थे। उनके शिक्षक उन्हें मानसिक रूप से विकलांग मानते थे। लेकिन आज, उन्हें किसी परिचय की जरूरत नहीं है।


    स्टीव जॉब्स, ने कॉलेज पूरा करने से पहले ही छोड़ दिया था। लेकिन एक बार फिर, इस आदमी को भी परिचय की ज़रूरत नहीं है।


    अंग्रेजी को छोड़कर हर विषय को विफल होने के बाद, अल पचिनो ने न्यू यॉर्क हाई स्कूल से दाखिला वापिस लेकर अभिनय की दुनिया में कदम रखा।


    टंबलर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  (CEO) डेविड कार्प ने 15 वर्ष की उम्र से स्कूल छोड़कर घर पर ही शिक्षा प्राप्त की।


    सूची बहुत लंबी है। मेरा विचार आपको स्कूल / कॉलेज छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना नहीं है, बल्कि आपको यह समझाना है कि, ऐसा कुछ है जो परीक्षा में अंकों और पारंपरिक स्कूली शिक्षा से अधिक मायने रखता है।

    आपकी दिलचस्पी किस चीज़ में है, पता करें और उसमें महारत हासिल करें। अंकों के बंधन में उलझने के बजाय अपने सपनों का पालन करने की मुक्ति को अनुभव करें।


    और अगर आप अपने अंकों से प्रभावित होते भी हैं, तो इसके सकारात्मक रूप को अपनाएं।

    आप दसवीं में अच्छे अंक नहीं ला पाए?

    ऐसा लग रहा है सब खराब हो गया ?

    कोई बात नहीं, लंबी सांस लीजिए, अपने आप को संभालिए और खुद से वादा करिए की अगली बार आप अपनी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

    जीवन में बहुत संभावनाएं होती हैं, आप खुद को दूसरा मौका तो दे सकते हैं, है ना?
    याद रखिए आप किसी दो अंकों की संख्या से बढ़कर हैं।

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  • 21 Aug
    Nandini Harkauli

    स्वयं के साथ समय व्यतीत करने के 10 लाभ !

    girl in nature

     

    आज की दुनिया में सब एक दूसरे से किसी न किसी माध्यम से जुड़े हुए हैं, और धीरे-धीरे स्वयं के साथ समय बिताने कीअवधारणा को भूल रहे हैं (या अन्य लोगों को खुद के लिए समय देना भी)। बेहतर तकनीक और संचार उपकरणों के साथ-साथ, हमारी सामाजिक मानसिकता से ऐसा लगता है जैसे अकेले समय बिताना एक बुरी चीज़ है।

    हम सभी उन लोगों के बारे में तुरंत धारणा बना लेते हैं ,जो मूवी थियेटर में या रेस्तरां में अकेले जाते हैं। हम यह मान लेते हैं कि ये लोग किसी तरह से अकेले , नाखुश, स्वाभाव से बुरे हैं या उनमें कोई ख़ामियां हैं। इस लेख में, मैं इस बारे में बात कर रही हूँ, कि कैसे अपने साथ समय बिताना न केवल एक खुशनुमा अनुभव हो सकता है, बल्कि हमारे लिए फायदेमंद भी हो सकता है।
     
    1. हम अपने खुद के साथ का आनंद लेना सीखते हैं:

    कितनी बार ऐसा हुआ है कि, आप अपनी मनपसंद जगह या आयोजन में इसलिए नहीं गए क्योंकि, आपको साथ जाने वाला कोई मिला नहीं ?

    संभावना है, ऐसा अनगिनत बार हुआ होगा। खुद के साथ समय बिताने से आप इसके साथ जुड़े हर अनुभव के लिए अधिक सहज बन जाते हैं - शांति , किसी अन्य व्यक्ति का सहारे या बैसाखी के रूप में न होना, और हर अनुभव को पूरी तरह से मग्न होकर महसूस करना।
     

    2. यह आज़ादी और आत्मनिर्भरता की एक बड़ी भावना प्रदान करता है:

    जब आप अकेले होते हैं, तो आप अपनी शर्तों पर और अपने मन का काम कर सकते हैं। जब भी आप कुछ करना चाहते हैं, आपको किसी और के समय को ध्यान में रखने की भी ज़रूरत नहीं है। सब कुछ आप पर निर्भर है और आप पर किसी का नियंत्रण भी नहीं होता।

    3. हम खुद को बेहतर जानने का अवसर मिलता हैं :

    जब हम दूसरों से घिरे होते हैं, तो हम (जागरूक रूप से या अनजाने में) अपना व्यवहार उस स्थिति के अनुसार उचित रखते हैं या वह करते हैं जिससे हमें दूसरों की प्रशंसा मिले। हम अपने स्वभाव के कुछ पहलुओं को छिपाते हैं, अनजाने में ही सही। अपने साथ समय बिताते हुए आप अपने इन्हीं छिपे हिस्सों को और करीब से जान सकते हैं। जब आप अकेले होते हैं तो आप मनचाह व्यवहार कर सकते हैं और यह आपको मदद करता है यह जानने में कि आप चीजों के बारे में वास्तव में कैसा महसूस करते हैं। इसके परिणामस्वरूप हमें सटीक जानकारी और एक पहचान प्राप्त होती है की हम हैं कौन? 

    4. यह तनाव-मुक्त होने का उपाय भी है:

    अकेले समय व्यतीत करना, सार्थक और आनंददायक क्रियाकलापों में भाग लेना, इत्यादि उस तनाव को कम करता है जो काम, अध्ययन, रिश्ते आदि के कारण हमारे भीतर एकत्रित हो जाता है। ये गतिविधियां दूसरों के साथ से भी मज़ेदार हो सकती हैं, लेकिन एकांत में आपके ऊपर दूसरों की अपेक्षाओं का बोझ नहीं होता और आप अपने असल रूप में रह सकते हैं।

    5.यह उत्पादकता बढ़ाता है:

    क्या आपका कभी किसी के साथ मतभेद होने के 4 घंटे बाद, आपको यह विचार आए हैं की आपको अपनी बात रखने की लिए क्या बोलना चहिए था?

    एकांत में रहने और मन की शांत स्थिति में आपके विचारों पर प्रभाव पड़ता है। कुछ लोगों के पास यह उपहार होता है कि वह किसी भी समय नए और स्पष्ट विचारों को सही ढंग से व्यक्त कर पाते हैं, लेकिन हम में से ज्यादातर लोग स्पष्ट, तर्कसंगत बातें तभी सोच पाते हैं जब हम अकेले होते हैं। इसका कारण यह है कि एकांत में हमारे विचारों के लिए कोई रोक, विचलन या अपेक्षाएं नहीं होती हैं और इसलिए हम सोच समझकर चुन सकते हैं की हम क्या करना चाहते हैं।
     
    6. यह हमें चिंतन करने का अवसर प्रदान करता है :

    चिंतनशील सोच महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आत्म-मूल्यांकन और खुद को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करती है। आम तौर पर, हम अपने दिनचर्या में इतने व्यस्त रहते हैं कि हमारे पास दो बार भी सोचने का समय नहीं होता कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। अकेले समय बिताने से हम, हमारे द्वारा किए गए सभी कार्यों के बारे में, हमारे द्वारा चुने गए सभी विकल्पों के बारे में और उनका खुद पर और आसपास के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसके बारे में सोच पाते हैं। हमें हमारे कार्यों का मूल्यांकन करने और जिन कार्यों  को हम स्वीकार्य नहीं मानते उन में बदलाव करने का अवसर मिलता है।
     
    7. यह हमारी ऊर्जा में सुधार करता है:

    लगातार लोगों से घिरा होना काफ़ी थकान भरा हो सकता है। लगातार नई जानकारी लेना और उस पर प्रतिक्रिया देना मस्तिष्क के लिए बहुत मुश्किल काम है। कुछ समय अकेले बिताने से ऊर्जा की भरपाई की जा सकती है जो निरंतर काम करने से खो जाती है। और आपको ज़्यादा जोश के साथ जिंदगी की दौड़ में वापिस लाने में मदद भी करता है।
     

    8. यह संतुलन की भावना को पुनर्स्थापित करता है:

    बहुत अधिक बातचीत हमारे संतुलन को बिगाड़ कर हमारी ऊर्जा समाप्त कर सकती है। जैसा कि मैंने पहले बताया, दूसरों से बहुत समय घिरे रहने के कारण हमारी स्पष्टता से सोचने की शक्ति और स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है। निजी रूप से, मेरे लिए तनाव मुक्त रहने के लिए अकेले समय बिताना बहुत कारगर साबित होता है और ऐसा समय न मिलना मेरी मानसिक थकान का एकमात्र कारणबन जाता है, यह समय आपको विचारों में स्पष्टता और नियंत्रण की भावना प्रदान करता है और जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने की के लिए आवश्यक ऊर्जा भी प्रदान करता है।

    9. हम अपने जीवन में लोगों की सराहना करना सीख जाते हैं :

    जितना अधिक मात्रा में हमारे पास कुछ होता है, उतना ही हम उसे गंभीरता से नहीं लेते। यह बात हमारे आसपास के लोगों पर भी लागू होती है। अगर हम हमेशा लोगों से घिरे रहते हैं, तो हम भूल जाते हैं कि वे हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं। अकेले समय व्यतीत करना ही हमें याद दिलाता है कि कैसे हमारे करीबी और प्रिय लोग हमारे जीवन को समृद्ध करते हैं, इससे उनके साथ हमारे संबंध भी मजबूत होते हैं।

    10. हम किसी प्रियजन के जाने के दुख से बेहतर उभर सकते हैं: 

    अगर हमें कभी किसी प्रियजन की मृत्यु के हादसे से गुज़रना पड़े तो, उससे उभरना इसलिए थोड़ा आसान हो जाता है, कि हम अपनी खुशियों के लिए आत्मनिर्भर रहने में सक्षम होते हैं। उस शक्स की कमी तो हमेशा महसूस होगी लेकिन अकेले काम करने की आदत होने से आप दूसरों की तुलना में ,बहुत बेहतर स्थिति में होंगे।

    आपके आसपास के लोगों का साथ शानदार हो सकता है, लेकिन आप जितना समय दूसरों के साथ व्यतीत करते हैं, उतना ही स्वयं के साथ भी करना चाहिए ताकि आप अधिक स्वस्थ और बेहतर व्यक्ति बन सकें।

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  • 17 Aug
    Nandini Harkauli

    तनाव मुक्त रहने के लिए अपनाएं यह 10 आदतें !

    stress free life

    तनाव या स्ट्रेस वह रोग है जिसने हमारे दैनिक जीवन में अपनी स्थायी जगह बना ली है।

    रोज़ -रोज़ दफ़्तर/ स्कूल से आना जाना, खुद के लिए दो वक्त के खाने का बंदोबस्त करना, ऐसी सभी रोज़मर्रा की गतिविधियों में थोड़ा तनाव तो आज के युग में महसूस होना आम बात है।

    तो, इस अन्धकारमय, तनाव से ग्रस्त दुनिया में, आप स्वयं को कैसे बचा कर रख सकते हैं?  तनाव को खुद से दूर रखकर आप कैसे जीवन का पूरा आनंद ले सकते हैं?

     

    इस लेख में हम इन्हीं प्रश्नों के उत्तर जानेंगे।

    आइए शुरू करें!

     

    यूस्ट्रेस्स और डिस्ट्रेस (eustress and distress) - अच्छा और बुरा तनाव।

    मनोविज्ञान में, दो प्रकार के तनाव होते हैं --- साधारण तनाव (eustress) और परेशानी भरा तनाव (distress)।

    तनाव की अवस्था -

     States of stress

    इसे ऐसे समझें -

    • सामान्य अवस्था
      यह आपके शरीर की सामान्य स्थिति है। आपको मूल रूप से कोई तनाव नहीं है
    • यूस्ट्रेस्स: अच्छा तनाव
      तनाव हमेशा हानिकारक नहीं होता, यूस्ट्रेस्स वह तनाव है जो आपको बिस्तर से उठकर, बाहर निकलकर कुछ गतिविधि करने की ऊर्जा देता है।
    • परेशानी: खराब तनाव
      यह वह तनाव है जो आपके उच्च रक्तचाप, उच्च हृदय गति, परेशानी और अन्य सभी नकारात्मक चीजों का कारण बनता है।
       

    कहने का तात्पर्य यह है कि तनाव खुद बुरा नहीं है। यह आपके लिए कुछ गतिविधि करने, लक्ष्य हासिल करने और जीवन में सफल होने के लिए आवश्यक है।


    कहते हैं ना "अति सर्वत्र वर्जयेत्", यानि किसी भी चीज़ की अधिकांश मात्रा बुरी है ,यह बात तनाव पर भी लागू होती है।

     

    10 आदतें जिनको अपनाने से तनाव नियंत्रण में रहता है।

     

    तनाव के खिलाफ़ जंग जीतने के लिए, आपको तैयार रहना होगा,

    और यही हैं वह दस हथियार जो इस युद्ध में आपकी मदद करेंगे। चलिए देखते हैं।

      
    अपने तनाव को नियंत्रित करने के लिए 10 आदतें निम्नलिखित हैं:

    1. कसरत :

    व्यायाम करने के बाद शरीर में "अच्छा महसूस करवाने वाले हार्मोन " संचारित होते हैं, जो तनाव स्तर को कम करने में आपकी मदद करते हैं और आपको शांत रखते हैं।

    तो,शीघ्र ही व्यायाम शुरू करिए !

     

    2. उचित ख़ान-पान :

    खाना आपके शरीर के लिए वही काम करता है जो ईंधन गाड़ी के लिए, यह आपको चलाता है।

    यदि आप गाड़ी में खराब ईंधन डाल दें तो क्या होगा ?

    यह अंततः खराब हो जाएगी और आपको मरम्मत के लिए अपनी जेब से बहुत अधिक खर्चा करना पड़ेगा।

    इसी तरह अपने शरीर रूपी इंजन को ख़तरे में क्यों डालना?

     

    3. पर्याप्त नींद :

    अध्ययनों से पता चला है कि कईं रातों को न सोने और सारी रात जागकर काम पूरा करने से, आपके संयमहीन ,चिढ़चिढ़े और तनावग्रस्त होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।


    4. बात करिए :

    तनाव का कारण कभी-कभी भावनाओं को व्यक्त करने और संवाद करने में कमी भी हो सकती है।

    जब आपके भीतर भावनाओं का घड़ा भर जाता है, तब वह आपके शरीर से बाहर निकलने के लिए उत्तेजना को अपना माध्यम बनाती हैं।

    इसलिए, तनाव मुक्त रहने के लिए अपने करीबी मित्रों या परिवार के सदस्यों से अपनी समस्याओं के बारे में बात करें।

     

    5. नुक़सानदायक आदतों से दूर रहें :

    सारी रात पार्टी करना, धूम्रपान करना पसंद है?

    यह इतनी कम उम्र में आपके बालों के झड़ने का मुख्य कारण हो सकते हैं !

    धूम्रपान, शराब और नशीले ड्रग्स का सेवन करने जैसी नुक़सानदायक आदतें, आपके शरीर में तनाव के स्तर को कईं गुना बढ़ा देती हैं।

    इसके अलावा…

    नींद का अभाव भी लोगों में ऊँचे तनाव स्तर का कारण बन सकता है।

     

    6. स्मार्ट तरीके से काम करें :

    कभी-कभी आप ऐसी चीज़ से परेशान होते हैं जिसे आप बदल नहीं सकते :जैसे समय।

    हमारी दिनचर्या में अनेक ऐसे कार्य होते हैं जो एक समय सीमा में पूरे होने ज़रूरी हैं, और यह हमारे लिए तनावपूर्ण हो सकते हैं।

    आवश्यक है कि आप अपने दायित्वों के अनुसार अपने समय का प्रबंधन करें और उसका सही उपयोग करने में समर्थ रहें।

     

    7. स्वीकार करना सबसे बड़ी कुंजी है :

    हम सभी में ख़ामियां हैं।

    आप अच्छा गा नहीं सकते, नृत्य नहीं कर सकते, आपको कंप्यूटर कोडिंग नहीं आती, आदि बातों पर ज़ोर देने के बजाय, आपको ख़ुद को स्वीकार करना आना चाहिए और अपने कौशल को और निखारना चाहिए।

    आख़िर ,कोई भी हर वर्ग में उत्तम नहीं हो सकता।

     

    8. प्रतिक्रिया करने से पहले सोचें :

    आज के समय में, मनुष्य बहुत बेसब्र हो गया है और बिना सोचे समझे चीजों पर प्रतिक्रिया देने लगा है, जिससे बाद में उसे पछतावा हो सकता है।

    तो फिर क्या करना चाहिए?

    जब भी संदेह हो, कुछ भी प्रतिक्रिया देने से पहले अपने मस्तिष्क का उपयोग ज़रूर करें!

     

    9. अपनी उम्मीदों को नियंत्रित करें :

    कभी-कभी, आपके तनाव का मुख्य कारण आपकी बहुत अधिक अपेक्षाएं हो सकती हैं।
     
    कुछ लोगों की उम्मीदें बहुत अवास्तविक होती हैं।

    अपनी अपेक्षाओं को क़ाबू में रखने से आपको इस मामले में मदद मिल सकती है।

     

    10. हर कीमत पर उत्तेजक पदार्थों से बचें!

    अगर आप अक्सर तनाव में रहते हैं तो चाय ,कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स, इत्यादि जैसे उत्तेजक पदार्थों का सेवन, वास्तव में एक अच्छा विचार नहीं हैं।

    यह आपके नर्वस सिस्टम का काम बहुत बढ़ा देते हैं।

     
    अपना तनाव नियंत्रण में रखने के लिए यह आदतें ज़रूरी हैं।

     

    संक्षेप में कहूँ तो,

    तनाव मानव जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है।

    अपने तनाव को नियंत्रण में बनाए रखने के लिए सर्वोत्तम उपाय है इन अच्छी आदतों को अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में अपनाना। धूम्रपान छोड़िए, नियमित कसरत कीजिए, स्वस्थ भोजन का सेवन करिए, आदि। इनके प्रयास से आप अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त करेंगे और तनाव मुक्त भी रहेंगे।
     
    स्मार्ट आदतें अपनाएं और तनाव से दूर रहें !

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  • 16 Aug
    Nandini Harkauli

    9 संकेत -इस रिश्ते से बाहर निकलने का समय आ गया है !

    malaika arbaaz

    जब आप एक रोमांटिक रिश्ते में होते हैं, तो आपको उस व्यक्ति के साथ की आदत हो जाती है। उनके बिना जीना असंभव सा लगता है। कईं चेतावनियों के बाद भी, आप उन्हें खुद से दूर करने से डरते हैं। किन्तु यह मत भूलिए कि ऐसा रिश्ता अगर आपको आगे बढ़ने में सहायता नहीं कर रहा, तो उस रिश्ते को अंत करने में ही आपकी भलाई है।

    यहाँ कुछ बातें हैं जो आपको बताएंगी कि, एक रिश्ते को छोड़ कर जाने का सही वक्त कब है:

     
    1. भरोसे की कमी:

    किसी भी रिश्ते में भरोसे को सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है। यह गोंद की तरह है जो रिश्ते को जोड़े रखता है। किसी भी झगड़े का अंत बिना इस प्रश्न के नहीं होता -"क्या आप मुझ पर भरोसा नहीं करते? " सारी बातें भरोसे पर ही आकर रुकती हैं। एक बार जब आपका पार्टनर आपका भरोसे तोड़ दे, तो उनके लिए उसे वापिस हासिल करना वास्तव में बहुत कठिन है। यदि आप ज़्यादातर इसी सोच में रहते हैं कि,

    'वे क्या कर रहे हैं'

    'वे कहां हैं' या 'वे किसके साथ हैं' 

    संभावना है कि आप उन पर पूरी तरह भरोसा नहीं करते हैं। अगर रिश्ते में भरोसा नहीं है, तो संभावनाएं कम हैं कि रिश्ता सकारात्मक तरह से आगे बढ़ेगा। शायद यह उन्हें खुद से दूर करने का सही समय है।

     

    2. समाधान के बिना झगड़े:

    संवाद वह साधन हैं जिसमें सब कुछ हल करने की शक्ति होती है, यही कारण है की इसे अंतिम कुंजी कहा जाता है।

    यदि आपके झगड़े ,'यह क्या हुआ' और 'यह क्यों हुआ' जैसे मुद्दों के बारे में बात करे बिना खत्म हो जाते हैं, तो यह एक बहुत बुरा संकेत है, यह आगे चलकर बड़ा संकट बन सकता है।

    एक स्वस्थ रिश्ते में, साथी आपस में बातचीत को महत्त्व देते हैं। यहां तक ​​कि अगर वे नाराज हैं या चिढ़े हुए हैं, तब भी वे समझदार वयस्कों की तरह बात करते हैं। वे जानते हैं कि उन्हें एक समस्या है, और वे उसके लिए समाधान खोजने का प्रयास करते हैं। इसलिए वे संवाद करते हैं, जिसकी कमी से गलतफहमी और ग़लत धारणाएं पैदा होती हैं।

    महत्वपूर्ण चर्चाओं को कभी विलंब नहीं करना चाहिए। अधिकतर, वही मुद्दे बार- बार सामने आते रहते हैं, जो अनसुलझे रह जाते हैं। तो या तो इसे बातचीत से हल कर समाप्त करें, या एक ही झगड़े को फिर से दोहराते रहें।

     
    3. अपर्याप्त समय:

    संवाद करने के लिए, पार्ट्नर्स को अपने व्यस्त दिनचर्या से समय निकालना होगा। जब बात आपके साथी की खुशी की हो, तो आपकी पहली प्राथमिकता आपका रिश्ता होना चाहिए।

    जो लोग अपने रिश्तों को अहमियत देते हैं, हमेशा अपने प्रियजनों के साथ संपर्क में रहते हैं। टैकनोलजी ने ऐसा करना हमारे लिए काफी आसान बना दिया है, अगर आपका साथी आपके साथ कईं घंटों तक संपर्क में न रहे, तो आपका नाखुश होना स्वाभाविक है।

    उनकी ओर से एक टेक्स्ट संदेश की अपेक्षा करना भी स्वाभाविक है। यदि वे आपके बार-बार अनुरोध करने के बाद भी आपके लिए समय नहीं निकालते हैं, तो यह इस रिश्ते से बाहर निकालने का समय है।

     
    4.अधिक देना, कम मिलना:

    क्या आपको कभी ऐसा महसूस हुआ है, जैसे सारे प्रयास केवल आप ही कर रहे हैं?

    संबंधों की वृद्धि के लिए समझौते महत्वपूर्ण हैं, वे बड़े हों या छोटे। अपने साथी की खुशी या रिश्ते के लिए समझौता करना व स्वयं में छोटे-छोटे बदलाव करना एक बहुत अच्छा संकेत है। हालांकि, अगर आपके समझौते की सराहना नहीं की जा रही है, या यदि अकेले आप ही समझौते कर रहे हैं, तो यह काफी निराशाजनक हो सकता है। अगर आपको अपने साथी से बदले में वही प्रयास नहीं मिल रहे हैं, जो आप उनके प्रति दिखाते हैं और उनसे उम्मीद करते हैं, तो शायद इस रिश्ते को छोड़ने का समय आ गया  है।

     

     5. अतीत में रहना:

    अतीत में रहने से कुछ बेहतर नहीं होगा। अतीत का अतीत होना किसी कारण के लिए है, है ना?

    यदि आपका साथी अपने अतीत, या आपके अतीत को पीछे नहीं छोड़ पा रहा, तो यह अच्छा संकेत नहीं है। आप उस अतीत से आगे बढ़ गए हैं, बड़े हो गए हैं और बेहतर व्यक्ति बन गए हैं। आपको हर वक्त अपने अतीत के स्मरण की आवश्यकता नहीं है।

    यदि आपका साथी महीनों पहले हुई, एक ही चीज़ के बारे में लड़ता रहता है, या सालों पहले हुई आपकी किसी ग़लती के बारे में बार-बार बात करता है, तो वक्त आ गया है कि आप उन्हें बताएं, कि आपको अपने जीवन में इस तरह की नकारात्मकता की आवश्यकता नहीं है।

     

     6. गलतियों को दोहराना:

    ग़लती करना गलत नहीं है, वे हमें बेहतर बनाती हैं। लेकिन वही ग़लती फिर से बार-बार दोहराना बहुत गलत है। अपनी गलतियों से सीखना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हर बार 'सॉरी' का एक ढाल के रूप में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

    एक ही ग़लती से बार-बार अपने साथी को चोट पहुंचाने में कोई समझदारी नहीं है। यदि आपका साथी वही पुरानी बात दोहराता रहता है जिसपर आप दोनों सौ बार झगड़ चुके हैं, तो इस रिश्ते से बाहर निकलने का समय आ गया है।

     

     7. अपने साथी के साथ लूका-छुपी न खेलें:

    लूका-छुपी बच्चों का एक खेल है, जिसमें वे छिप जाते हैं और फिर प्रकट होते हैं। एक मज़बूत रिश्ते में, किसी प्रकार के राज़ के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए और न ही कोई झूठ होना चाहिए,  फिर राज़ चाहे कितना बड़ा या छोटा हो।

    साथी अक्सर एक दूसरे से चीजों को छिपाते हैं, वह सोचते हैं कि बताने से सब बर्बाद हो जाएगा, या उनका साथी गुस्सा या परेशान हो जाएगा, या सिर्फ इसलिए कि वे उन्हें बताने का साहस नहीं रखते। पर बाद में जब समय के साथ रहस्य खुलते हैं, तब वे केवल अपने किए के लिए ज़िम्मेदार नहीं होते, बल्कि वे इसके भी ज़िम्मेदार होते हैं, कि बात जल्द से जल्द बताने की बजाय वह उसे छिपाते रहे।

    चीजों को खुद तक सीमित रखने से रिश्ते में विश्वास की कमी बढ़ जाती है, जो आप दोनों को जिस भी रास्ते ले जाए,कभी साथ तो नहीं लाएगा।


     
    8. "हमें अलग चीजें चाहिए":

    कईं बार, भले ही दोनों पार्ट्नर्स एक-दूसरे से प्यार करते हैं और उनके बीच सबकुछ ठीक है, पर रिश्तों को खत्म करना पड़ता है।

    अगर दोनों साझेदारों के जीवन में अलग-अलग लक्ष्य हैं, या जीने के अलग-अलग तरीके हैं, या बस अलग-अलग जीवन शैली हैं, और वे ऐसी बातों पर आपसी सहमती नहीं बना पा रहे हैं, तो उनके पास रिश्ते को अंत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसी स्थिति में, किसी की कोई ग़लती नहीं है। ग़लती या दोष का तो प्रश्न ही नहीं है; यह बस समझने की बात है क़ी दोनों लोगों की बेहतरी के लिए क्या सही है।

     
    9. प्यार की कमी और नफरत की कमी:

    रिश्तों में झगड़े और खुशियाँ दोनों का ही एक के बाद आते रहना, जितना दिखता है उतना बुरा नहीं है। इस तरह, जहाँ झगड़े हैं, वहाँ उनसे उबरने का पर्याप्त समय भी है। पर जब कोई रिश्ता आगे न बढ़े और उसमें कोई ऊर्जा न बची हो, तो रिश्ते खराब हो जाते हैं। ऐसे रिश्ते में व्यक्ति अपने विचारों को व्यक्त करने की ज़रूरत महसूस करना बंद कर देते हैं, भले ही वे अपने पार्टनर की बात से सहमत न हों। वह एक दूसरे से किसी प्रकार की आशा नहीं रखते।

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  • 21 Sep
    Nandini Harkauli

    व्याकुलता विकार - क्या आप लोगों की नज़रों में आने से बचते हैं ?

    social anxiety

     

    निम्न परिदृश्यों के बारे में सोचें:
    1) नए स्कूल, कॉलेज या कार्यस्थल में आपका पहला दिन
    2) मंच पर प्रदर्शन
    3) एक पार्टी में शामिल होना जहां ज्यादातर लोग अजनबी हैं

    यह परिस्थितियां आपको किस प्रकार की भावनाएं ध्यान में लाती हैं? और क्यों?

    यह संभावना है कि आपको अधिक घबराहट या आशंका महसूस होती है और यह भाव, अपने आस-पास के लोगों के सामने अच्छी छवि बनाने की आवश्यकता के कारण पैदा होते हैं।

    हम में से कुछ लोगों के लिए अपरिचित सामाजिक परिस्थितियों में अपने आप को अनिश्चित महसूस करना सामान्य बात है और इन अनिश्चितता की भावनाओं को प्रबंधित भी किया जा सकता है। हम शुरू में नए लोगों के बीच परेशान महसूस कर सकते हैं, लेकिन कुछ समय बाद यह घबराहट कम हो जाती है और हमें उनके साथ अच्छा महसूस होता है और हम उनके साथ का आनंद भी लेते हैं।
    हालांकि, कुछ लोग इतने भाग्यशाली नहीं होते हैं।

    कुछ लोगों के लिए, घबराहट की यह भावना इतनी तीव्र होती है कि वे इन परिस्थितियों से पूरी तरह से बचने की कोशिश करते हैं, उनके लिए ये बहुत असुविधाजनक स्थिति बन जाती है, जिसके कारण वह सामाजिक संबंधों का आनंद लेने में असमर्थ रहते हैं। वे हमेशा दूसरों द्वारा नकारात्मक मूल्यांकन के डर में रहते हैं और घबराते हैं कि वे कुछ ग़लत न कह दें या खुद को शर्मिंदा न कर लें।

    इस दूसरे समूह के अनुभव सामाजिक व्याकुलता विकार के लक्षण हैं, या सामाजिक चिंता (पहले सामाजिक फ़ोबिया के रूप में जाना जाता था)।

    यह दूसरों के सामने प्रदर्शन करने तक ही सीमित हो सकता है (जहां व्यक्ति को बोलने और प्रतिभा प्रदर्शित करने में समस्याएं हैं, जैसे कि एक भीड़ से पहले गायन और नृत्य करना), इस समस्या को प्रदर्शन चिंता कहते हैं, लेकिन ये भावनाएं किसी भी अपरिचित सामाजिक स्थिति के दौरान उत्पन्न हो सकती हैं जहां व्यक्ति जांच के अधीन होने की संभावना महसूस करता है।

    दूसरे मनोवैज्ञानिक विकारों की तरह, सामाजिक चिंता के भी कईं आलोचक हैं। उनके अनुसार इतने सामान्य बात के लिए निदान और पेशेवर मदद की क्या आवश्यकता है?


    हालांकि, विकार से ग्रस्त लोगों के लिए, भय और चिंता की भावना बहुत वास्तविक है। घबराहट संबंधी विकार वाले अधिकांश लोगों की तरह, सामाजिक चिंता विकार वाले लोगों को पता होता है कि उनका भय अकर्मक है और स्थिति अनुसार अत्यधिक है, जिस वजह से उनकी चिंता बढ़ जाती है।
    अपरिचित सामाजिक स्थितियों से बचना रीत बन जाती है, इस हद तक कि उनके सामाजिक, पेशेवर और दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप बन जाती हैं।

    इस तरह की बातचीत के दौरान, सामाजिक चिंता से ग्रस्त व्यक्ति को पसीने, कांप, शुष्क मुंह, तेज़ हृदयगाति, चक्कर आना और मांसपेशियों में तनाव जैसे शारीरिक लक्षणों का अनुभव हो सकता है, जो कि एक घबराहट की प्रतिक्रिया या आतंक विकार के हमले के दौरान भी अनुभव होता है।

    वे मनोवैज्ञानिक लक्षणों का अनुभव भी कर सकते हैं जैसे कि एक सामाजिक घटना से दिनों या सप्ताहों पहले चिंता, शर्मिंदगी / सार्वजनिक अपमान के साथ व्यस्तता, चिंता करना कि दूसरे आपकी घबराहट देख रहे हैं और यथासंभव सामाजिक स्थितियों से बचने के तरीकों की तलाश करना। कुछ मामलों में सामाजिक स्थिति को आसान बनाने के लिए लोग मादक द्रव्यों के सेवन को उपाय बना लेते हैं।

    सामाजिक घटनाओं से बचने के साथ-साथ, वे छोटी-छोटी गतिविधियों से भी बचते हैं जहाँ बातचीत की संभावनाएं होती है और जहां उन्हें जाँचा या मापा जाए, जैसे कि फोन पर बात करना, सार्वजनिक जगह भोजन करना, सार्वजनिक विश्रामगृह का उपयोग करना या दिशा-निर्देश पूछना।

    सामाजिक चिंता का कारण क्या है?

    पिछले बुरे अनुभव, जैसे कि अति-आलोचक माता-पिता, धमकियों या दुर्व्यवहार का शिकार होना, किसी भी प्रकार के सामाजिक संपर्क से बचने के कारण बन सकते हैं।
    हालांकि, कुछ अनुसंधान से सबूत मिले हैं जो बताते हैं कि सामाजिक चिंता आनुवंशिक भी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके कुछ लक्षण जैसे घबराहट या आत्म-घृणात्मक होना एक पीढ़ी से दूसरी में भी आ जाते हैं।
    एक अन्य कारण सेरोटोनिन के स्तर में असंतुलन हो सकता है ( न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन मनोदशा और भाव को विनियमित करने में मदद करता है) या अत्यधिक सक्रिय एमिग्डाला ( मस्तिष्क का एक हिस्सा है जो भय प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है) हो सकता है।

    इसे कैसे संसाधित किया जाए?

    ऐसे कईं चिंता विरोधी दवाएं हैं जिन्हें सामाजिक व्याकुलता से पीड़ित लोगों के लिए निर्धारित किया जा सकता है। उनमें बीटा-ब्लॉकर्स शामिल हैं (जो एड्रेनालाईन के उत्तेजक प्रभाव को अवरुद्ध करते हैं और हृदय गति, रक्तचाप और कंपन को कम करते हैं) और सिलेक्टिव सेरोटोनिन रीआप्टेक इनहिबिटर (या एसएसआरआई, जो सेरोटोनिन स्तर बनाए रखने में सहायता करते हैं) शामिल हैं।
    सामाजिक चिंता के लिए चिकित्सा का सबसे लोकप्रिय रूप संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी है (cognitive behaviour therapy), जहां चिकित्सक नकारात्मक विचारों को बदलने और स्वयं-छवि में सुधार करने में आपकी मदद करते हैं।
    एक्सपोजर-आधारित संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (Exposure-Based Cognitive Behaviour Therapy) में, क्लाइंट के साथ भय-उत्पादन स्थितियों को संभालने में कुशलता प्राप्त करने की ओर काम किया जाता है और उनके स्थिति से बचने वाले व्यवहार को एक -एक करके दूर करने का लक्ष्य बनाया जाता है।

    क्या सामाजिक व्याकुलता को प्रतिबंध किया जा सकता है? यदि हां, तो कैसे?

    इस बात का आश्वासन तो नहीं दिया जा सकता कि स्वयं की मनो-प्रतिरक्षित करने की कोशिश से सक्रिय रूप से सामाजिक चिंता को रोका जा सकता है क्योंकि इससे कईं जैविक और आनुवांशिक कारक भी जुड़े हुए हैं।
    हालांकि, निम्नलिखित सुझाव निश्चित रूप से हमारे समग्र मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकते हैं :

    • एक स्वस्थ आत्म-सम्मान विकसित करना:                                                                                                                                                                                                जब आप स्वयं को सकारात्मक रूप से देखते हैं, तो आप बहुत ज्यादा चिंता नहीं करेंगे। संभावना है, आप परवाह नहीं करेंगे। आप कौन हैं इसके बारे में सुरक्षित महसूस करना और अपनी ताकत और कमजोरियों के बारे में यथार्थवादी दृष्टिकोण रखने से सामाजिक संपर्कों को शांति से निपटने में आपकी काफी मदद हो सकती है।अपने कुछ पहलुओं पर काम करने से जहाँ सुधार की आवश्यकता है, आपको अधिक आत्‍मविश्वासी महसूस करने में मदद मिल सकती है। यहां तक ​​कि अगर आप एक हद के पार परिवर्तन करने में असमर्थ हैं, तो आप कम से कम कोशिश करने के लिए अपने बारे में बेहतर महसूस करेंगे।

     

    • स्वयं की दूसरों से अपेक्षाओं को कम करें:                                                                                                                                                                                                क्या आप जिस भी व्यक्ति से मिलते हैं, हर एक को पसंद करते हैं? निश्चित रूप से नहीं। उसी तरह, जो भी व्यक्ति आप से मिलते हैं, ज़रूरी नहीं कि वह आपको पसंद करें और वे उस राय के हकदार हैं। कुछ लोगों की आपस में नहीं बनती हैं और आप इस नियम के अपवाद नहीं हैं। जितनी जल्दी आप यह बात समझ जाएंगे, उतना कम आप दूसरों द्वारा पसंद किए जाने का दबाव महसूस करेंगे। आप अपना उत्तम प्रदर्शन करें, जैसे हैं वैसे ही रहें और सब अच्छा होने की आशा करें।

     

    • एक स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना:                                                                                                                                                                                                      उन पदार्थों से बचें जो आपकी बेचैनी को बढ़ाएँ और आपको अधिक चिंता की ओर ले जाएं। इसमें कैफीन, अत्यधिक चीनी और कुछ दवाएं शामिल हैं जो मस्तिष्क को उत्तेजित करती हैं (उदाहरण के लिए, प्रदर्शन बढ़ाने वाले पदार्थ जैसे एम्फ़ेटामीन्स और हैलुसिनोजन जैसे मारिजुआना)।

             सामाजिक व्याकुलता शराब के सेवन का एक आम कारण है। इस परेशानी से ग्रसित व्यक्ति ये दावा करते हैं कि यह किसी सामाजिक समारोह से पहले उन्हें आराम पाने में और चिंता दूर करने में मदद करती है और उन्हें          इन स्थितियों से निपटने के लिए आत्मविश्वास देती है। याद रखें कि शराब "आपको आत्मविश्वास नहीं देती", यह आपके संकोच को कम करती है, इसलिए यदि आप कभी-कभी पीने या धूम्रपान का आनंद लेते हैं, तो                  सुनिश्चित करें कि आप इसे विशुद्ध रूप से मनोरंजक उद्देश्यों के लिए ही करें और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आराम पाने के लिए उन पर निर्भर न रहें।
             नियमित रूप से व्यायाम करें क्योंकि शरीर में एंडोर्फिन रिलीज़ होते हैं जो मनोदशा को संतुलित करते हैं।

    • संकेतों को जल्दी पहचानें:
      जितना पहले कि आप समस्या के लक्षणों को पहचान कर पकड़ते हैं, उतनी जल्दी आप इसे आगे बढ़ने से रोक सकते हैं। यदि आप या आपके परिचित व्यक्ति, सामाजिक व्याकुलता के लक्षण दिखा रहे हैं, तो तुरंत एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श करें।
       

    यदि आपको लक्षण अत्यधिक नहीं हैं लेकिन थोड़ी मात्रा में आप बचने वाले व्यवहार के संस्करणों को दिखाते हैं, जो लेख में पहले वर्णित है, तो इन्हें छिपाएं या नकारे नहीं, बल्कि इन पर काम करें ताकि यह गंभीर रूप लेने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकें।