• 25 Aug
    Nandini Harkauli

    अस्वीकृति का सामना करने हेतु 8 युक्तियाँ

    rejection

     

    अच्छे सम्बन्ध एक सार्थक और खुशाल जीवन की नींव हैं। वे अपने साथ खुशियों भरे, संजो के रखने वाले पल, और सकारात्मक अनुभवों की आनंदमय सुगंध लेकर आते हैं। कभी कभी, कुछ रिश्तों का समापन परियों की कहानी की तरह सुखद नहीं होता।

    कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जो हमें जीवन का सबसे बड़ा सबक प्रदान करते हैं। रिश्ते में अस्वीकृति एक भयानक अनुभव हो सकता है, खासकर यदि आप उस व्यक्ति के प्रति समर्पित हैं और उनके लिए बहुत अधिक लगाव रखते हैं।

    अचानक एक निराशाजनक अस्वीकृति के बाद आपको अपनी ज़िन्दगी बिखरती हुई नज़र आती है।

    हालांकि यह एक भावनात्मक सामाजिक परिस्थिति के रूप में प्रतीत हो सकता है, लेकिन इसके मानसिक स्वरूप को समझना भी जरूरी है।

    जितनी गहराई से हम अस्विकृति की पीछे छिपी मानसिकता का अध्ययन करेंगे, उतना ही बेहतर आप इससे जुड़ी बाधाओं को दूर कर सकते हैं, या ऐसा करने में किसी की मदद कर सकते हैं।

    लोग अस्वीकार क्यों करते हैं?

    किसी को अस्वीकार करने के कईं कारण हो सकते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार कुछ सामान्य कारण हैं:

    • मतभेद: व्यक्तित्व, विचार, मनोदशा, सामाजिक मानकों, व्यक्तिगत मूल्यों, मान्यताओं इत्यादि में मतभेद ।
    • दूसरों के साथ तुलना करना
    • विश्वास और आपसी समझ का अभाव
    • किसी तीसरे की दख़लअंदाज़ी
    • अस्वीकार किए जाने का डर
    • मनोवैज्ञानिक कारण: अपने सांस्कृतिक मानदंडों, धर्म या जातीयता के खिलाफ जाने का डर
    • वचनबद्धता का मुद्दा

    अस्वीकृति और इसके मनोसामाजिक रूपरेखाओं में आपको डिप्रेशन, हानि पहुंचानेवाले व्यवहार और नकारात्मकता की गलियों में भटकाने का सामर्थ्य होता है। एक व्यक्तिगत संबंध में अस्वीकृति आत्मविश्वास की कमी, आत्मघाती विचारधारा और मनोवीकार जैसे खतरनाक परिणामों को जन्म दे सकती है। इसलिए, अस्वीकृति का सामना करना और इसे प्रभावी ढंग से दूर करना बहुत महत्वपूर्ण है। 

    आपकी मदद के लिए यहां कुछ युक्तियां दी गई हैं:

     

    1.खुद पर विश्वास करना कभी बंद मत करिए :

    एक व्यक्तिगत संबंध में अस्वीकृति का अनुभव आपके आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वयं-अवधारणा को चोट पहुँचा सकता है।

    ऐसा लगता है मानो दुनिया का अंत हो गया हो और आप स्वयं से घृणा करना शुरू कर देते हैं। अस्वीकृति किसी भी ज्ञात या अज्ञात कारण से हो सकती है। अतः अपने आत्म-विश्वास और आत्म-मूल्य के अनुरूप रहना बुद्धिमानी है। 

    खुद पर और अपने भीतर बसी सकारात्मक जीवन शक्ति पर हमेशा विश्वास कायम रखें।
     

    2. आत्म विश्लेषण और संशोधन:

    यदि आपको लगता है कि अस्वीकृति का कारण आपके व्यक्तित्व या व्यवहार के कुछ पहलू हो सकते हैं, तो आत्म विश्लेषण करने से संभावित मदद मिल सकती है।

    अपने लिए कुछ विशेष समय निकालकर विश्लेषण करें कि, कहाँ ग़लती हुई और आप इसके कितने सीधे रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से ज़िम्मेदार थे ?

    यदि आपकी तरफ से कुछ कमी के कारण ऐसा हुआ है, तो आप हमेशा स्वयं-शोधन से प्रगति प्राप्त कर सकते हैं।

     

    3. आपसी विश्वास, आपसी समझ और सम्मान:

    जीवन और सम्बन्ध की मुश्किल परिस्थितियों के दौरान, अक्सर संदेह के अंधेरे बादल घिर जाते हैं।

    एक सफल संबंध की कुंजी आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी समझ है। इन जादुई मूल्यों को अपनाने की कोशिश करें और अपने व्यक्तिगत संबंधों को खिलते हुए देखें।
     

    4. तुलनात्मक व्यवहार से बचें:

    90% से अधिक रिश्ते अस्वीकृिता में इसलिए अंत होते हैं क्योंकि पार्टनर्स अपने प्रियजनों की तुलना दूसरों के साथ करते हैं,और उनमें ख़ामियां ढूंढते हैं। यह न केवल अस्वीकृति का बेहद क्रूर रूप है,बल्कि रिश्ते में मरम्मत की सभी संभावनाओं को भी ख़त्म कर देता है।

    चाहे आपके साथी में कितने गुण या अवगुण हों, उनकी किसी और से कभी तुलना न करें और उन्हें आजीवन घाव देने से बचें।
     

    5.भावनाओं को सकारात्मक रूप से बाहर निकालना:

    अस्वीकृति के पश्चात,आपको अपनी भावनाओं को अपने भीतर दबाकर, एक कोने में अपने आप को कोकुन में बंद करने का जी चाहता है। लेकिन ऐसा न करें, बात मानिए, इससे अधिक पीड़ा और समस्याएं हो सकती हैं।

    अपने भावनाओं की सकारात्मक अभिव्यक्ति के लिए किसी करीबी दोस्त या भरोसेमंद व्यक्ति के साथ उन्हें साझा करें, या फिर इन्हें लिख कर व्यक्त करें। संपूर्ण उद्देश्य अपनी नकारात्मक भावनाओं को दूर करना और सकारात्मकता को उजागर करना है।


    6. संवेदनशील दृष्टिकोण: 'छिपे हुए उद्देश्य को समझना':

    जरूरी नहीं कि अस्वीकृति के पीछे का कारण नकारात्मक हो, कईं बार, आपके प्रियजन या साथी की कुछ मजबूरी, या उनके जीवन में कुछ मुश्किलें हो सकती हैं, जो वह आपके साथ साझा नहीं कर पा रहे।

    उनके उपरी व्यवहार की परत से परे देखने की कोशिश करें और अस्वीकृति के किसी अन्य कारण का पता लगाएं। आपसी विश्वास और एक-दूसरे के साथ बात करने से अस्वीकृति के अनुभव से बचा जा सकता है।

     

    7. पुनर्निर्माण,पुनःपूर्ति करना:

    यदि एक और रूप से देखा जाए, तो अस्वीकृति जीवन में अधिक सकारात्मकता और प्रगति के लिए प्रेरणा बन सकती है।

    कौन जानता है,शायद किसी दिन वही संबंध आपके जीवन में विष बनकर आपके पतन का कारण बन सकता था?

    अस्वीकृति के बाद आशावादी बने रहना कठिन है, लेकिन जितना जल्दी आप सत्य को स्वीकार करते हैं, उतनी जल्दी आप उसे भूलकर आगे बढ़ पाएंगे।

     

    8. एक नई शुरुआत करें :

    एक व्यक्तिगत संबंध में अस्वीकृति वास्तव में एक विनाशकारी अनुभव है लेकिन, यह निश्चित रूप से अंत नहीं है।

    जीवन का एक कड़वा अनुभव आपको चीर नहीं सकता। वास्तव में, यह जीवन को एक नए दृष्टिकोण के साथ फिर से शुरू करने के लिए एक स्पष्ट संदेश है। अतः, एक हर्षित और समृद्ध जीवन जिएं, किसी को आपको रोकने का हक न दें।

    यदि अस्वीकृति को सहन करना आपके दिन-प्रतिदिन पर भारी पड़ रहा है, तो चिंता न करें। हम ewellnessexpert के विशेषज्ञ आपकी मदद के लिए हमेशा उपस्थित हैं। बस क्लिक करें और अपने खुशहाल जीवन को खुल कर जीएं।

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  • 01 Oct
    umair hussain

    9 बातें जो अंतर्मुखी दूसरों को समझाना चाहते हैं!

    जब हम अंतर्मुखता और बहिर्मुखता जैसे व्यक्तित्व लक्षणों के बारे में बात करते हैं, तो हम वास्तव में उस व्यक्ति की ऊर्जा अनुकूलता के बारे में बात कर रहे होते हैं, मतलब कि वह व्यक्ति कहाँ से ऊर्जा खींचता है। भौतिक ऊर्जा नहीं, बल्कि अपनी आत्मा ऊर्जा अगर मैं कहूँ। उदाहरण के लिए, अगर एक अंतर्मुखी को सामाजिक परिवेश में बहुत लंबे समय तक छोड़ दिया जाए, तो उसकी ऊर्जा खत्म होने लगेगी और ऊर्जा हासिल करने के लिए उसे एकांत की आवश्यकता होगी। यह हासिल ऊर्जा शारीरिक नहीं है, बल्कि आत्मा को रिचार्ज करने के लिए है।


    बहिर्मुखी- पर्यावरण और अपने आसपास के लोगों द्वारा प्रेरित होते हैं।

    अंतर्मुखी- खुद से प्रेरित होते हैं। उन्हें व्यक्तिगत प्रतिबिंब, शांतिपूर्ण ध्यान या अकेले एकांत के लिए समय की आवश्यकता होती है।

    9 बातें अंतर्मुखी चाहते हैं दूसरे भी जानें-

    1. वे शर्मीले नहीं हैं

    शर्मीला होना और अंतर्मुखी होना दो अलग चीजें हैं। शर्मीला होना सामाजिक संपर्क से जुड़े स्थितियों में असुविधा और चिंता होने के ज्यादा करीब है। कई अंतर्मुखी शर्मीले नहीं होते हैं, वे अन्य लोगों के आसपास आसानी से रह सकते हैं, बस चीजों को सुलझाने के लिए उन्हें अकेले समय की जरूरत होती है।

    2. वे कठोर या अहंकारी नहीं हैं, वे सिर्फ अधिक आरक्षित हैं

    पत्थर जैसे चेहरे वाला बर्ताव का मतलब अशिष्टता नहीं है और इसका मतलब यह नहीं है कि वे सब कुछ नापसंद करते हैं। वे बस अपने रास्ते में आने वाली सभी चीजों के प्रति प्रतिक्रिया और जवाब नहीं देना पसंद करते हैं।

    3. वे भावनाहीन नहीं होते हैं

    बस, भावनाओं को व्यक्त करना उनके लिए बड़ा कार्य है। वे अपने विचारों, भावनाओं को स्पष्ट करन बहुत मुश्किल पाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप क्या कह रहे हैं इसमें उनकी दिलचस्पी नहीं है। कृपया उनकी मौन को उदासीनता न समझें! वे सिर्फ अपने आप को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते हैं। यकीन मानिये, वे भी समान रूप से खुश या उदास होते हैं लेकिन आपको पता नहीं लग पाता है।

    4. वे बात करना पसंद करते हैं

    बेशक, वे पसंद करते हैं! वे बस सुनना अधिक पसंद करते हैं और हमेशा छोटी बातों से बचते हैं। वे गहरी वार्तालापों में शामिल होना चाहते हैं, जिन चीजें से फर्क पड़ता हो और जिनका उन्हें बहुत जुनून हो। अकसर वे कुछ ख़ास लोगों को पसंद करते हैं जो उन्हें जल्द ही न थका दें।

    5. वे अकेले / समाज-विरोधी नहीं हैं

    यह सच है जैसा कि उल्लेख किया गया है, कि उन्हें "रिचार्ज" होने के लिए अपनी जगह की जरूरत है, पढ़कर या परावर्तन करके; लेकिन उन्हें भी मानवीय संपर्क पसंद हैं और वह भी अन्य लोगों की कंपनी का आनंद लेते हैं; लेकिन ज्यादातर उन लोगों के साथ जो उनकी शर्तों से सहमत होते हैं। वे हालांकि उथले सामाजिककरण को नापसंद करते हैं।

    6. उन्हें भी बाहर जाना पसंद है!

    एक अंतर्मुखी होने का मतलब यह नहीं है कि वे हमेशा अपने घरों की चार आरामदायक दीवारों के अंदर रहना चाहते हैं, वे बाहर जाना पसंद करते हैं, नए स्थानों का पता लगाते हैं, नई चीजों का अनुभव करते हैं; वे बस लोगों के बड़े समूह में बहुत सहज नहीं हो पाते हैं। कुछ बहुत करीबी लोगों के साथ या अपने आप से भी, वे निश्चित रूप से बाहर जाना पसंद करते हैं।

    7. उनका व्यक्तित्व अवसादग्रस्त नहीं है!

    सिर्फ इसलिए कि वे अकेले रहना पसंद करते हैं, वे आमतौर पर अवसादग्रस्तता या नकारात्मक झुकाव वाले व्यक्तित्व के समझे जाते हैं। यह आम तौर पर तब होता है जब बहिर्मुखी को अंतर्मुखी (अकेले चुप रहने और अकेले समय खर्च करने वाले) के साथ काफी समय बिताना पड़ता है। वे अंतर्मुखियों के साथ कमजोर महसूस करते हैं और दुखी और उदास महसूस करने की शिकायतें करते पाए गए हैं। मुझ पर भरोसा करिए, हम एकांत और अकेलापन के बीच का अंतर जानते हैं।

    8.वे कभी-कभी सिर्फ बातचीत सुनना पसंद करते हैं

    लोगों के लिए ये बात समझना इतना मुश्किल क्यों है? वे कभी-कभी बोलना नहीं चाहते, सिर्फ सुनना चाहते हैं। सिर्फ इसलिए कि एक अंतर्मुखी अकेला खड़ा है इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्हें किसी से बात करने की आवश्यकता है। यहां तक ​​कि अगर मुझे कहीं अपनी राय पेश न करनी हो तब भी मैं अभी भी मैं आस-पास होना पसंद करूंगा।

    9.कभी-कभी, वे लोगों को अपने आस-पास मौजूद नहीं चाहते

    हां, कई बार ऐसा लगता है कि वह घर में बंद होकर कई दिन के लिए किसी को नहीं देखना चाहते। उन्हें बस कुछ खामोशी की आवश्यकता होती है और जल्द ही ठीक हो जायंगे। लोगों को "क्यों वे यहाँ हैं?" पर फर्जी चिंता नहीं करना चाहिए।  

    आइये अंतर्मुखी और उनकी पसंद को करीब से देखें

    • सामाजिक प्राथमिकताएं 
      उनके सामाजिक समूह छोटे होते हैं। वे मात्रा पर गुणवत्ता पसंद करते हैं। अंतर्मुखी सामाजिक चिंता से ग्रस्त हो सकते हैं या नहीं भी हो सकते हैं। सामाजिक चिंता का मतलब अस्वीकृति या आलोचना का डर, इतना अधिक जिससे यह जीवन के रास्ते में आये। इस तरह के लोग सामाजिक स्थितियों में स्वयं के बारे में नकारात्मक अनुभूतियां विकसित कर लेते हैं। यह शर्मीली महसूस करने या अंतर्मुखी होने से परे है। एक अंतर्मुखी चिंतित या गैर-चिंतित हो सकता है। सामान्य तौर पर, अंतर्मुखी बहुत विशिष्ट होते हैं कि वे किस तरह अपना समय व्यतीत करना चाहते हैं, और अधिक महत्वपूर्ण बात, किसके साथ।

     

    • संज्ञानात्मक प्राथमिकताएं
      अंतर्मुखी बोलने से पहले सोचते हैं। उन्हें उनके विचारों को स्पष्ट करने से पहले उनके विचारों पर विचार करना होता है। यही कारण है कि प्रश्नों का उत्तर देने में वह कुछ समय लगाते हैं। वे गहराई पसंद करते हैं। जबकि बहिर्मुखी अपनी गतिविधियों, वार्तालापों और सामाजिक समूहों में विविधता पसंद करते हैं, वहीं अंतर्मुखी गहराई पसंद करते हैं। उनके पास कुछ दोस्त होते हैं, वे चीजों के बारे में विस्तार से बात करना पसंद करते हैं, वे विवरण और अर्थ पर जोर देते हैं। उनके लिए अर्थ और गहराई इतना महत्वपूर्ण है कि, अनुसंधान ने दिखाया है कि वे ऐसे संगीत पसंद करते हैं जो हिप-हॉप या रॉक संगीत के बजाए अधिक सार्थक हो। इसके अलावा, शोध ने दिखाया है कि अंतर्मुखी आने वाली जानकारी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और वे अपने बहिर्मुखी समकक्षों की तुलना में अधिक जानकारी का विश्लेषण करने के लिए अधिक से अधिक मानसिक प्रयास करते हैं। इसलिए जानकारी प्रसंस्करण की उनकी प्रक्रिया अधिक विस्तृत और गहरी है। आम तौर पर, अंतर्मुखी उत्तेजना के एक उच्च स्तर पर काम करते हैं।

     

    • भावनात्मक प्राथमिकताएं
      अंतर्मुखी अपनी भावनाओं को जमा कर लेते हैं। उन्हें खुद को व्यक्त करना मुश्किल लगता है। उन्हें कभी-कभी भावनात्मक रूप से मृत माना जाता है लेकिन बात यह है कि भावनात्मक पहलू पर चीज़ें उनके लिए थोड़ी अधिक कठिन होती हैं। चूंकि अंतर्मुखी पहले से ही उत्तेजना के उच्च स्तर पर कार्य कर रहे हैं, इसलिए वे ऐसे वातावरण और परिस्थितियों से बचते हैं जो बहुत उत्तेजक हों, तब यह उनके लिए बहुत भारी हो जाता है और वे खुद को व्यक्त करने या स्थिति से बचने कि कोशिश करते हैं।

     

    • निजी जगह
      वे एक बुलबुले में रहते हैं। उनका स्थान उनके लिए पवित्र है और उनके ठीक से काम करने के लिए बेहद जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति उनकी जगह पर आक्रमण करता है, तो उन्हें तुरंत असहज महसूस होता है। इस गोपनीयता के बिना उनके लिए कार्य करना कठिन है।

     

    • पारस्परिक प्राथमिकताएँ
      उन्हें अकेले बहुत समय की जरूरत होती है, वे शांति पसंद करते हैं। वे अकेले बहुत समय बिताकर ठीक रह सकते हैं। वे अपनी मौजूदगी से प्यार करते हैं और अपने आप से ऊबते नहीं हैं। हालांकि, वे अपने करीबी लोगों को किसी भी चीज़ से ज्यादा पसंद करते हैं और बिना किसी हिचकिचाहट के उनसे खुल सकते हैं।

    अंतर्मुखी गलत समझे गए लोगों का एक समूह है। मैं व्यक्तिगत रूप से इच्छा करता हूं कि लोग उनके व्यक्तित्वों को पहचानने में इतनी जल्दबाजी न करें। वे लोग और समाज को पसंद करते हैं, बस बहिर्मुखियों से अलग तरह से। (:

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  • 23 Sep
    umair hussain

    परीक्षा ‘परिणाम’ के तनाव को हराने के 10 नुस्खे

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    परिणाम घोषित हो गए हैं; छात्र और उनके माता-पिता दोनों ही परिणाम के बाद के दौर से जूझना शुरू कर रहे हैं। जहाँ परिणाम अपेक्षा से कम या ज्यादा हो सकते हैं, हजारों छात्र मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों जैसे उदासी और सामाजिक चिंता से पीड़ित होते हैं, फिर भी कभी भी सहायता लेने के लिए साहसिक नहीं हो पाते।

    स्कूल जाने वाले बच्चों में आत्महत्या दरों में हर साल वृद्धि हो रही है, और परीक्षा परिणाम घोषणा के समय  माता-पिता और देखभाल करने वालों को सावधान रहना चाहिए।

    वास्तव में, इस समय के दौरान माता-पिता भी बहुत दबाव में होते हैं। तो, इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान कैसे सामना करें? हम आपको परीक्षा के तनावों को कैसे हराएँ (यह तरीके छात्र और माता-पिता दोनों की मदद कर सकते हैं) के बारे में दस टिप्स देते हैं:

    • सुबह की धूप में लंबे समय तक चलें। सनलाइट सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ा देता है। सीरोटोनिन की कमी अवसाद का कारण बनता है। मनोदशा को बढ़ावा दें; घूमने जैसी गतिविधियां अवसाद को कम करने के लिए जानी जाती हैंI तो अपने तनाव से दूर चलें!

     

    • अपने तनाव को ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega 3 fatty acids) जैसे आहार की खुराक खाकर कम करें। काफी सारे वैज्ञानिक डेटा ने ओमेगा 3 फैटी एसिड के निम्न स्तर को दिमागी/भावनात्मक मुद्दों, जैसे कि अवसाद, आत्महत्या, हिंसक व्यवहार आदि से लिंक किया है। मछली का तेल दो आवश्यक ओमेगा 3 फैटी एसिड- ईपीए (ईकोस्पेंटेनोइक एसिड) और डीएचए (डोकोसाहेक्साइनोइक एसिड), का एक समृद्ध स्रोत है।

     

    • बेहतर आहार, जिसमे ड्राई फ्रूट, सुगन्धित बीज, ताज़े फल और सब्जियां हों, आपके दिमागी स्वास्थ्य के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाता है। कुछ खाद्य पदार्थ जिन्हें अवसाद से राहत लाने से जोड़ा गया है, वह हैं, अखरोट, डार्क लीफी ग्रीन्स, एवोकैडो, जामुन और मशरूम हैं।

     

    • अपने मूड को बढ़ावा देने के लिए हलका व्यायाम करें। अपने रोज़ मर्रा के कामों में से वक़्त निकाल कर हल्का-फुलका व्यायाम करें। व्यायाम हमें कैसे बेहतर महसूस करा सकता है? यह अवसाद में आसानी करने वाले ‘फील-गुड’ दिमागी कैमिकल्स (न्यूरोट्रांसमीटर, एंडोर्फिन और एंडोकैनाबिनोइड्स) को निकालकर ऐसा करता है, इम्यून सिस्टम कैमिकल्स को कम कर के जो अवसाद को बदतर कर सकते हैं।

     

    • किसी प्रिय या दोस्त से बात करें। अकसर, किसी से बात करने का सरल कार्य अवसाद से पीड़ित व्यक्ति के लिए एक बड़ी मदद हो सकता है। अपनी परेशानी के बारे में एक मित्र, परिवार के सदस्य या किसी रिश्तेदार (शायद कोई समझने वाला कजिन) से बात करें। बात करने से तनाव कम हो जाता है जब आप किसी मित्र के साथ अपने तनाव को साझा करते हैं।

     

    • रिश्तेदारों को एक निश्चित सीमा से परे आपको परेशान न करने दें। याद रखें कि रिश्तों का मतलब मुश्किल वक़्त आसान बनाना है, मुश्किल नहीं। अन्य लोगों की टिप्पणियों को व्यक्तिगत रूप से नहीं लेने का प्रयास करें। अगर चीजें बहुत मुश्किल हो जाती हैं, तो बाहर कुछ समय बितायें। पर्याप्त प्रमाण हैं कि प्रकृति में होने के बहुत से मानसिक लाभ होते हैं और अवसाद के जोखिम भी कम होते हैं। स्टैनफोर्ड शोधकर्ताओं के एक हालिया अध्ययन में यह प्रमाणित किया गया है कि प्रकृति में चलने से अवसाद का खतरा कम हो सकता है।

     

    • आराम करें और अपने भविष्य के लिए सही कोर्स / कॉलेज चुनें। आराम करने और खुलने के लिए, कोई छोटी सी चीज करें जो के आपको खुश करती हो। एक गर्म शावर लें, एक किताब पढ़ें, एक प्याला हरी चाय लें, किसी की मदद करें, अपनी मां या दोस्त के लिए गुलाब खरीदें; कुछ भी जो आपको खुश करता है। याद रखें यह जीवन के छोटे पल हैं जो ज़िन्दगी की एक बड़ी तस्वीर को जोड़ते हैं।

     

    • साथियों के दबाव को अच्छी तरह से संभालें। साथियों के साथ तुलना एक प्रमुख कारण है कि लोग बिना योग्यता और शौक के किसी इंजीनियरिंग कॉलेज आ बैठते हैं। अपने विचारों और भावनाओं सहित दैनिक गतिविधियों की एक पत्रिका लिखें। यह एक शानदार मौका है रुककर देखने का कि, आपके दिमाग में चल क्या रहा है। यह हमें अपनी चिंताओं को देखने का एक उद्देश्यपूर्वक नज़रिया देता है। तो किसी डायरी या पत्रिका में लिखने के लिए समय निकालें।
    • किसी कुत्ते या बिल्ली को पालें (यदि आपके पास कोई हो)। पालतू जानवर अत्यंत चिकित्सकीय होते हैं। किसी मुलायम कुत्ते या बिल्ली को प्यार करने से बेहतर कोई अनुभव नहीं है, और यह आपके लिए अच्छा भी है, खासकर अवसाद या चिंता के लिए। विशेष रूप से कुत्ते तनाव, चिंता, और अवसाद को कम कर सकते हैं, अकेलेपन को कम करते हैं और अभ्यास और चंचलता को प्रोत्साहित करते हैं ।

     

    • इस बात को समझें कि ये परीक्षा के अंक आपको परिभाषित नहीं करते हैं, आप जितने भी अंक अर्जित करते हैं, आप उससे अधिक हैं! सफल लोगों के बहुत सारे उदाहरण हैं, जिन्होंने शिक्षाविदों में अच्छा नहीं किया। तो कृपया चिंता में जल्दबाजी के फैसले न करें। बड़ी तस्वीर देखने की कोशिश करें!


    यदि आपको लगता है कि अवसाद से निपटने के लिए आपने अपने दम से सब कुछ करने का प्रयास किया है और कुछ भी काम नहीं कर रहा है, तो इस क्षेत्र के भीतर बहुत सारे अनुभव वाले पेशेवर लोग हैं। परीक्षा परिणाम घोषणा, छात्रों और उनके माता-पिता के लिए स्कूली जीवन का एक चुनौतीपूर्ण हिस्सा हो सकता है। एक चिकित्सक या परामर्शदाता से परामर्श करने में कोई शर्म की बात नहीं है।

    समकालीन समय में, ऑनलाइन परामर्श इस समस्या के समाधान प्रदान करता है। आधुनिक जीवन तेज और जटिल है, लेकिन एक सलाहकार से आराम से अपने घर सपर से परामर्श करना आसान है, सहायता लेने के लिए कम दबाव के साथ। eWellness Expert ऑनलाइन परामर्श के लिए एक महान माध्यम है। चूंकि, भावनात्मक कठिनाइयाँ किसी बुखार या ठंडा होने के जैसे ही आम हैं। अनुभवी पेशेवरों से परामर्श वास्तव में मदद करता है।


    आज की तेज ज़िन्दगी में, अपने घर के आराम से परामर्श लेना परीक्षा परिणाम तनाव को हराने के लिए सही समाधान लगता है। ऑनलाइन परामर्श विश्वसनीय, सुरक्षित, उपयोग में आसान, सस्ती और बहुत प्रभावी है, खासकर तकनीक-समझने वाली युवा पीढ़ी के लिए।

    तो आशा न खोएं और हमेशा उज्ज्वल पक्ष को देखें! मदद मांगें अगर ज़रुरत पड़े और अपने भविष्य के बारे में आशावादी रहें।

  • 22 Aug
    Nandini Harkauli

    आपकी पहचान आपके अंक नहीं हैं!

    3 idiots

     

    मुझे हमेशा आश्चर्य होता है कि हम मनुष्य संख्याओं पर इतना ध्यान क्यों देते हैं। जैसे लंबाई, वज़न, धन ,सोशल मीडिया पर मित्रों की संख्या और कैसे भूल सकते हैं - मार्क्स! हमें संख्याओं से इतना जुनूनी लगाव है कि हम अपने जीवन में हर चीज़ को मापने की इस दौड़ में जीवन के बाकि पहलुओं को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

    "अच्छे ग्रेड" स्कोर करने की यह दौड़ कभी अंत नही होती है। इसके अलावा, अब अच्छे अंकों की परिभाषा इतनी अस्पष्ट हो गई है, पहले जहां 80% भी अच्छा माना जाता था, अब 95% से कम को औसत दर्जे का माना जाता है।

    लेकिन हम चरित्र और बुद्धिमत्ता को बहुत लंबे समय तक संख्याओं से नाप चुके हैं, और अब समय आ गया है कि हम बदल जाएं। और इसकी शुरुआत सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र में होनी चाहिए - शिक्षा के
     
    यह लेख उन लोगों को संबोधित है जिन्हें कम नंबर लाने के कारण समाज द्वारा लेबल किया गया है।
     
    1. आपकी पहचान आपके अंक नहीं हैं!-

    हां, अंक महत्वपूर्ण हैं, वह जीवन को बहुत आसान भी बना देते हैं, लेकिन क्या आप एक बात जानते हैं ? यह तथाकथित टॉपर्स, जिनके लिए अत्यधिक उच्च कटऑफ वाले कॉलेजस के द्वार खुले रहते हैं, जो बड़ी कंपनियों द्वारा नियुक्त किए जा रहे हैं, जो इन कॉलेजों में एक ब्रांड नाम के साथ आते हैं, एक स्थिर नौकरी प्राप्त करते हैं, शादी करते हैं और फिर उनके बच्चे भी इसी चक्र में चलते हैं ,और इस तरह यह चक्र चलता रहता है।

    क्या आप एक पैटर्न देख सकते हैं? सब कुछ एक ही जैसा ,पूर्वानुमानित और उबाऊ सा लगता है। माना कि, हम में से बहुत लोग एक सुरक्षित कवच में रहना चाहते हैं जो एक स्थिर नौकरी हमें देती है।

    लेकिन आप जानते हैं कि जीवन में हम सबसे ज़्यादा क्या याद रखते हैं? वह समय जब आप बिना किसी लक्षय के बोझ के खुद को ढूँदने यहाँ वहाँ आज़ादी से घूमते थे। रास्ते के अनुभवों के रोमांच और उससे मिलने वाली सीख, दोनों का आनंद उठाते थे।

    टॉपर्स बहुत जल्द एक जगह व्यवस्थित हो जाते हैं, लेकिन जो टॉपर्स नहीं है, थोड़ा अधिक समय लेते हैं क्योंकि वे दुनिया की खोज में व्यस्त रहते हैं, एक नीरस जीवन के शिकार बनने की बजाए वह रोमांचक जीवन पसंद करते हैं।

    आप जो भी अनुभव करते हैं, लोगों से, जीवन से सीखते हैं वह ही आपके व्यक्तित्व का भाग बनता है, अकेले किताबी ज्ञान काफ़ी नहीं होता है। इस देरी का मतलब यह नहीं है कि आप कभी व्यवस्थित नहीं हो पाएंगे।

    क्या हुआ अगर आपको कॉलेज से प्रतिष्ठित प्लेसमेंट नहीं मिल पाई, शायद आप अपने मनचाहे कारोबार को शुरू करने की तमन्ना पूरी कर पाएं, और 10 सीजीपीए वाले अपने सहयोगी की तुलना में अधिक धन भी कमा लें।

    आपकी पहचान आपके विचार, आपकी रचनात्मकता, आपके लोगों से व्यवहार रखने का कौशल, आपका व्यक्तित्व और आपकी चतुराई हैं; जिनमें से कोई भी, अंकों से नहीं मापा जाता है, भारतीय शिक्षा प्रणाली में तो कम से कम नहीं।

     

    2.जीवन अंक के बराबर नहीं है!

    आप स्कूल में गणित और विज्ञान का अध्ययन करते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि आप उन्हें पसंद भी करें।

    और अगर आपको कुछ पसंद नहीं है तो यह संभावना है कि आप उसे करने में रूचि नहीं लेंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप कभी भी कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। हो सकता है कि आप फ्लेमिंग्स के राइट हैंड रूल को या गणित में इंटीग्रेशन के महत्तव को न समझें, लेकिन आप फोटोग्राफी या खाना पकाने की कलाओं में निपुणता पाने की प्रतिभा रखते हों, बस आपको यह पता करने का मौका दिया जाना चाहिए कि आपको क्या पसंद है, तो आप चमत्कार कर सकते हैं।

    ज़िंदगी में गणित, भौतिक विज्ञान के जटिल कानून और रट्टा लगाकर परीक्षाओं में अंक लाने के अलावा भी बहुत कुछ है। आपको अपनी सफलता की राह ढूँदने के लिए ,यह जानने की ज़रूरत नहीं है कि कोशिकाओं में पाए जाने वाले तरल पदार्थ को क्या कहते हैं, या अँग्रेज़ी में मॉडल क्रिया की परिभाषा क्या है। आपको बस विचार और जुनून का मेल चाहिए, इसलिए रोमांच का जोखिम लेने से पीछे मत हटिए, बड़े सपने देखिए और अपने अंकों के बारे में चिंता करना छोड़ दीजिए।

    3. श्रेष्ठता पाने का प्रयास करें-

    क्या कोई आपके स्वस्थ और अच्छे आकर के शरीर को देखकर पूछेगा कि आपका वज़न कितना है? नहीं ना, यही बात परीक्षा के अंकों के लिए भी सच है। एक बार जब आप सफल हो जाते हैं और अपने क्षेत्र में अच्छा कर रहे होते हैं, तब कोई भी मार्क्स की परवाह नहीं करता है।

    आपके अंक तो एक कागज के टुकड़े बनकर रह जाते हैं, जो धूल भारी दराज़ों में बंद कर दिए जाते हैं। मायने रखता है कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं, दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं,आपने कितने लोगों का भरोसा कमाया है,और आपने अपने कार्यों से जो अपना अनूठा "ब्रांड नाम" बनाया है।

    तो क्या हुआ अगर आपके दसवीं कक्षा में 75 % अंक आए थे? जीवन आपको स्वयं को साबित करने के बहुत सारे अवसर प्रदान करती है। अपने परीक्षा के अंकों से न निराश हों न ही इन्हें अपनी पहचान बनने दें।
     

    कल मेरी परीक्षा है लेकिन मुझे

    परवाह नहीं है क्योंकि मात्र एक

    कागज का पन्ना मेरा भविष्य

    तय नहीं कर सकता

    -थॉमस ए एडीसन


    अल्बर्ट आइंस्टीन, वह बच्चे थे जिन्होंने चार साल की उम्र से पहले बोलना तक शुरू नहीं किया था,सात साल की उम्र तक वह पढ़ भी नहीं पाते थे। उनके शिक्षक उन्हें मानसिक रूप से विकलांग मानते थे। लेकिन आज, उन्हें किसी परिचय की जरूरत नहीं है।


    स्टीव जॉब्स, ने कॉलेज पूरा करने से पहले ही छोड़ दिया था। लेकिन एक बार फिर, इस आदमी को भी परिचय की ज़रूरत नहीं है।


    अंग्रेजी को छोड़कर हर विषय को विफल होने के बाद, अल पचिनो ने न्यू यॉर्क हाई स्कूल से दाखिला वापिस लेकर अभिनय की दुनिया में कदम रखा।


    टंबलर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  (CEO) डेविड कार्प ने 15 वर्ष की उम्र से स्कूल छोड़कर घर पर ही शिक्षा प्राप्त की।


    सूची बहुत लंबी है। मेरा विचार आपको स्कूल / कॉलेज छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना नहीं है, बल्कि आपको यह समझाना है कि, ऐसा कुछ है जो परीक्षा में अंकों और पारंपरिक स्कूली शिक्षा से अधिक मायने रखता है।

    आपकी दिलचस्पी किस चीज़ में है, पता करें और उसमें महारत हासिल करें। अंकों के बंधन में उलझने के बजाय अपने सपनों का पालन करने की मुक्ति को अनुभव करें।


    और अगर आप अपने अंकों से प्रभावित होते भी हैं, तो इसके सकारात्मक रूप को अपनाएं।

    आप दसवीं में अच्छे अंक नहीं ला पाए?

    ऐसा लग रहा है सब खराब हो गया ?

    कोई बात नहीं, लंबी सांस लीजिए, अपने आप को संभालिए और खुद से वादा करिए की अगली बार आप अपनी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

    जीवन में बहुत संभावनाएं होती हैं, आप खुद को दूसरा मौका तो दे सकते हैं, है ना?
    याद रखिए आप किसी दो अंकों की संख्या से बढ़कर हैं।

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  • 21 Aug
    Nandini Harkauli

    स्वयं के साथ समय व्यतीत करने के 10 लाभ !

    girl in nature

     

    आज की दुनिया में सब एक दूसरे से किसी न किसी माध्यम से जुड़े हुए हैं, और धीरे-धीरे स्वयं के साथ समय बिताने कीअवधारणा को भूल रहे हैं (या अन्य लोगों को खुद के लिए समय देना भी)। बेहतर तकनीक और संचार उपकरणों के साथ-साथ, हमारी सामाजिक मानसिकता से ऐसा लगता है जैसे अकेले समय बिताना एक बुरी चीज़ है।

    हम सभी उन लोगों के बारे में तुरंत धारणा बना लेते हैं ,जो मूवी थियेटर में या रेस्तरां में अकेले जाते हैं। हम यह मान लेते हैं कि ये लोग किसी तरह से अकेले , नाखुश, स्वाभाव से बुरे हैं या उनमें कोई ख़ामियां हैं। इस लेख में, मैं इस बारे में बात कर रही हूँ, कि कैसे अपने साथ समय बिताना न केवल एक खुशनुमा अनुभव हो सकता है, बल्कि हमारे लिए फायदेमंद भी हो सकता है।
     
    1. हम अपने खुद के साथ का आनंद लेना सीखते हैं:

    कितनी बार ऐसा हुआ है कि, आप अपनी मनपसंद जगह या आयोजन में इसलिए नहीं गए क्योंकि, आपको साथ जाने वाला कोई मिला नहीं ?

    संभावना है, ऐसा अनगिनत बार हुआ होगा। खुद के साथ समय बिताने से आप इसके साथ जुड़े हर अनुभव के लिए अधिक सहज बन जाते हैं - शांति , किसी अन्य व्यक्ति का सहारे या बैसाखी के रूप में न होना, और हर अनुभव को पूरी तरह से मग्न होकर महसूस करना।
     

    2. यह आज़ादी और आत्मनिर्भरता की एक बड़ी भावना प्रदान करता है:

    जब आप अकेले होते हैं, तो आप अपनी शर्तों पर और अपने मन का काम कर सकते हैं। जब भी आप कुछ करना चाहते हैं, आपको किसी और के समय को ध्यान में रखने की भी ज़रूरत नहीं है। सब कुछ आप पर निर्भर है और आप पर किसी का नियंत्रण भी नहीं होता।

    3. हम खुद को बेहतर जानने का अवसर मिलता हैं :

    जब हम दूसरों से घिरे होते हैं, तो हम (जागरूक रूप से या अनजाने में) अपना व्यवहार उस स्थिति के अनुसार उचित रखते हैं या वह करते हैं जिससे हमें दूसरों की प्रशंसा मिले। हम अपने स्वभाव के कुछ पहलुओं को छिपाते हैं, अनजाने में ही सही। अपने साथ समय बिताते हुए आप अपने इन्हीं छिपे हिस्सों को और करीब से जान सकते हैं। जब आप अकेले होते हैं तो आप मनचाह व्यवहार कर सकते हैं और यह आपको मदद करता है यह जानने में कि आप चीजों के बारे में वास्तव में कैसा महसूस करते हैं। इसके परिणामस्वरूप हमें सटीक जानकारी और एक पहचान प्राप्त होती है की हम हैं कौन? 

    4. यह तनाव-मुक्त होने का उपाय भी है:

    अकेले समय व्यतीत करना, सार्थक और आनंददायक क्रियाकलापों में भाग लेना, इत्यादि उस तनाव को कम करता है जो काम, अध्ययन, रिश्ते आदि के कारण हमारे भीतर एकत्रित हो जाता है। ये गतिविधियां दूसरों के साथ से भी मज़ेदार हो सकती हैं, लेकिन एकांत में आपके ऊपर दूसरों की अपेक्षाओं का बोझ नहीं होता और आप अपने असल रूप में रह सकते हैं।

    5.यह उत्पादकता बढ़ाता है:

    क्या आपका कभी किसी के साथ मतभेद होने के 4 घंटे बाद, आपको यह विचार आए हैं की आपको अपनी बात रखने की लिए क्या बोलना चहिए था?

    एकांत में रहने और मन की शांत स्थिति में आपके विचारों पर प्रभाव पड़ता है। कुछ लोगों के पास यह उपहार होता है कि वह किसी भी समय नए और स्पष्ट विचारों को सही ढंग से व्यक्त कर पाते हैं, लेकिन हम में से ज्यादातर लोग स्पष्ट, तर्कसंगत बातें तभी सोच पाते हैं जब हम अकेले होते हैं। इसका कारण यह है कि एकांत में हमारे विचारों के लिए कोई रोक, विचलन या अपेक्षाएं नहीं होती हैं और इसलिए हम सोच समझकर चुन सकते हैं की हम क्या करना चाहते हैं।
     
    6. यह हमें चिंतन करने का अवसर प्रदान करता है :

    चिंतनशील सोच महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आत्म-मूल्यांकन और खुद को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करती है। आम तौर पर, हम अपने दिनचर्या में इतने व्यस्त रहते हैं कि हमारे पास दो बार भी सोचने का समय नहीं होता कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। अकेले समय बिताने से हम, हमारे द्वारा किए गए सभी कार्यों के बारे में, हमारे द्वारा चुने गए सभी विकल्पों के बारे में और उनका खुद पर और आसपास के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसके बारे में सोच पाते हैं। हमें हमारे कार्यों का मूल्यांकन करने और जिन कार्यों  को हम स्वीकार्य नहीं मानते उन में बदलाव करने का अवसर मिलता है।
     
    7. यह हमारी ऊर्जा में सुधार करता है:

    लगातार लोगों से घिरा होना काफ़ी थकान भरा हो सकता है। लगातार नई जानकारी लेना और उस पर प्रतिक्रिया देना मस्तिष्क के लिए बहुत मुश्किल काम है। कुछ समय अकेले बिताने से ऊर्जा की भरपाई की जा सकती है जो निरंतर काम करने से खो जाती है। और आपको ज़्यादा जोश के साथ जिंदगी की दौड़ में वापिस लाने में मदद भी करता है।
     

    8. यह संतुलन की भावना को पुनर्स्थापित करता है:

    बहुत अधिक बातचीत हमारे संतुलन को बिगाड़ कर हमारी ऊर्जा समाप्त कर सकती है। जैसा कि मैंने पहले बताया, दूसरों से बहुत समय घिरे रहने के कारण हमारी स्पष्टता से सोचने की शक्ति और स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है। निजी रूप से, मेरे लिए तनाव मुक्त रहने के लिए अकेले समय बिताना बहुत कारगर साबित होता है और ऐसा समय न मिलना मेरी मानसिक थकान का एकमात्र कारणबन जाता है, यह समय आपको विचारों में स्पष्टता और नियंत्रण की भावना प्रदान करता है और जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने की के लिए आवश्यक ऊर्जा भी प्रदान करता है।

    9. हम अपने जीवन में लोगों की सराहना करना सीख जाते हैं :

    जितना अधिक मात्रा में हमारे पास कुछ होता है, उतना ही हम उसे गंभीरता से नहीं लेते। यह बात हमारे आसपास के लोगों पर भी लागू होती है। अगर हम हमेशा लोगों से घिरे रहते हैं, तो हम भूल जाते हैं कि वे हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं। अकेले समय व्यतीत करना ही हमें याद दिलाता है कि कैसे हमारे करीबी और प्रिय लोग हमारे जीवन को समृद्ध करते हैं, इससे उनके साथ हमारे संबंध भी मजबूत होते हैं।

    10. हम किसी प्रियजन के जाने के दुख से बेहतर उभर सकते हैं: 

    अगर हमें कभी किसी प्रियजन की मृत्यु के हादसे से गुज़रना पड़े तो, उससे उभरना इसलिए थोड़ा आसान हो जाता है, कि हम अपनी खुशियों के लिए आत्मनिर्भर रहने में सक्षम होते हैं। उस शक्स की कमी तो हमेशा महसूस होगी लेकिन अकेले काम करने की आदत होने से आप दूसरों की तुलना में ,बहुत बेहतर स्थिति में होंगे।

    आपके आसपास के लोगों का साथ शानदार हो सकता है, लेकिन आप जितना समय दूसरों के साथ व्यतीत करते हैं, उतना ही स्वयं के साथ भी करना चाहिए ताकि आप अधिक स्वस्थ और बेहतर व्यक्ति बन सकें।

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