कुल 169 लेख

  • 18 Jan
    Shiva Raman Pandey

    दस skills जो आपको सफलता पाने के लिए जरूरी है ।

    Skills to get what you want

     

    हम सभी अपने जीवन में अलग-अलग  इच्छा रखते हैं, कोई इंजीनियर का काम, या फिर  बिज़नेस में कोई अपना नाम करना चाहता है । लेकिन  उन सभी wishes को पूरा करने के लिए जो skills आनी चाहिए वे common होती हैं और हमें वे सीखनी होती है ।

    आज हम आपको उन common skills के बारे में बताते हैं ।

    1.हर कार्य में धैर्य बहुत जरूरी है ।

    सभी लक्ष्य पूरा होने में समय लेते हैं। यहाँ तक कि जब आप बहुत से कार्य एक साथ कर रहे हों तो सामान्य चीज़ों को करने में भी समय लग सकता है। इसलिए आगे बढ़ने और उस बढ़त को बरक़रार रखने के लिए धैर्य पहला गुण है जिसकी आपको जरूरत है। जब आपका धैर्य कम होने लगे, तब आप यह याद कीजिये कि आप ने क्या लक्ष्य निर्धारित किया है, और यह भी कि जब आप उसे प्राप्त करेंगे तो कैसा महसूस करेंगे। आप उसे प्राप्त करने की ख़ुशी को महसूस करिये और अपने लक्ष्य में आगे बढ़ते रहिये।

    2.जिस कार्य को शुरू करिये उस पर कायम/टिके रहिये

    इसका सम्बन्ध थोड़ा बहुत धैर्य से लेकिन ज्यादा कठिन परिश्रम से है। इसका मतलब सिर्फ इंतज़ार करना काफी नहीं है। इसका मतलब जो आप पाना चाहते हैं उसके लिए कठिन मेहनत और बेहतर कोशिश करते रहने की आवश्यकता है। धैर्य पूर्वक अपने कार्य को करते रहना और उस पर कायम रहना ही आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचाएगा ।

    3.एक योजना बना कर कार्य करिये ।

    अपने target को सही दिशा दीजिये। मतलब एक प्लान बनाइये कि कौन सा कार्य आपको पहले करना होगा, और कौन सा उसके बाद । इसके साथ साथ आप यह भी प्लान करिये कि किसी कार्य को करने में क्या क्या आवश्यकता होगी, और क्या आपके पास वे जरूरी साधन हैं?

    4.अपने समय का सही उपयोग करें

    हमें अपने समय का उपयोग सही से करना चाहिए, क्योंकि समय बड़ा कीमती है, उदाहरण के तौर पर अगर आप का कार्य किसी दूसरे से करवाने में कम खर्च और पैसे में हो जाता है, तो बेहतर है आप अपना समय उस कार्य को करने में न लगाकर दूसरे जरूरी कार्य करने में लगाएं । ऐसा करने से आप अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुँच सकते हैं ।

    5.अपने क्रोध, और तनाव पर काबू रखें

    यदि आप छोटी-छोटी बात पर गुस्सा होते हैं, और उस बात को लेकर बैठ जाते हैं तो आपको  anger management की तकनीकी सीखनी होगी। आपको अपने तनाव को कम करने की आवश्यकता है। इसके लिए आप योग करें । अपने शरीर, मन को थोड़ा विश्राम दें ।  प्राणायाम का अभ्यास कर साँसों को नियंत्रित करिये । खुद को ऐसे कार्यों में लगाएं जिसमें आपका मन लगे और शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए व्यायाम करें । 

    6.मुसीबत से निपटने की एक योजना पहले से बना कर रखिये ।

    याद रखिये किसी भी कार्य को करने में अड़चने आती हैं, और आपको इसके लिए पहले से योजना बना कर चलिए जिससे उस अड़चन को आप तुरंत हल कर सकें । इसके साथ-साथ यह योजना आपको घबराने नहीं देती । और आपको अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होने देती ।

    7.भावनात्मक पक्ष को ऊपर उठायें।

    दूसरों की भावनाओं को समझने की skill विकसित कीजिये, जिससे आप इस ज्ञान का आपसी बातचीत करने और कार्य को सौहार्द पूर्वक कराने में उपयोग कर सकते हैं । लगभग सभी लक्ष्यों में दूसरों की मदद की जरूरत होती है। स्वयं को और दूसरों को ज्यादा अच्छी तरह समझने के लिए आप अपने भावनात्मक पक्ष को ऊपर उठायें। जिससे उनके साथ अच्छा रिश्ता बनाये रखा जा सके ।

    8.खुद को हमेशा प्रेरित करते रहिये

    जब आप किसी कार्य की शुरुआत करते हैं तो आपके प्रेरणा का स्तर बहुत ऊपर होता है। लेकिन असफलता या तनाव से सामना होने पर यह कम हो सकता है। यह पता करें कि, आपके लक्ष्य का कौन सा भाग आपको ज्यादा पसंद है, और स्वयं को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें याद करें। कभी कभी कार्य से अवकाश लेकर खुद को समझने की कोशिश कीजिये,  अपनी ताकत और उपलब्धियों को याद कीजिये, और खुद पर गर्व महसूस करिये, यह  सब आपको प्रेरणा देंगे ।

    9.लक्ष्य को समय के साथ ढालते रहिये ।

    समय के साथ आप अपने लक्ष्य को पाने में जो भी सफलता और असफलता का सामना करते हैं, उसकी वजह से आप अपने लक्ष्य में बदलाव लाकर उसे समय के अनुसार ढालते रहिये । याद रखिये “परिवर्तन जीवन का नियम है ।“  

    10.हमेशा खुद के अंदर सीखने की ललक रखिये

    अंत में अपने लक्ष्य को पाने के लिए आप जितना ज्ञान, स्किल, जानते हैं, आपको उससे कहीं ज्यादा जाने की जरूरत पड़ती है ।

    हमेशा खुद को नई तकनीकी सीखने के लिए तैयार रखिये । कभी यह मत सोचिये कि आपको सब आता है, यह आपका अपना अहंकार है, जो आपको सफल बनने से रोक सकता है ।

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  • 14 Jan
    Janhavi Dwivedi

    किशोर => रोमांस => गर्भवती => अफ़सोस

    Teenage pregnency

     

    “मैं उसको खो देने की आशंका से इतना डर गई थी,और यही एक कारण था, मैंने सोचा यदि मैंने उसके  यौन अनुरोध को नहीं स्वीकार किया तो मैं उसे खो दूंगी। जैसा हमेशा होता है, मैंने ये बातें अपने माता -पिता से छुपाई।“

    teenage pregnency

    किशोरावस्था में गर्भधारण एक ऐसी समस्या है, जिससे सभी देश चाहे विकशित हो या विकाशशील सभी जूझ रहे हैं ।

    भारत में 1000 महिलाओं पर 62 प्रेग्नेंट किशोरियां हैं, जबकि US और UK में यह संख्या क्रमशः 42 और 24 है।

    नीचे कुछ कारण दिए गए हैं जो 1987 से अबतक किशोर गर्भधारण की दरों में वृद्धि या स्थिरता की व्याख्या करते हैं:

    गरीबी

    अमेरिका हो या भारत, ' गरीबी ' किशोरावस्था गर्भधारण में सबसे बड़ा योगदान देती है ।

    गरीबी का मतलब है, कि एक लड़की को स्वयं के विकास का और अपने शरीर का, साथ ही साथ उसे अनचाहे गर्भ से बचाव के साधनों  की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त करने का मौका नहीं मिलता।

    उसे साथी भी गैरजिम्मेदार मिल सकता है, और उसके पास उन्हें अस्वीकार करने के बहुत से विकल्प भी नही होते हैं। 

    निम्न आय वर्ग में कम उम्र में विवाह सामान्य है, और यह भी किशोरावस्था में गर्भधारण का एक कारण है।

    अशिक्षा

    अशिक्षा और गरीबी  एक दूसरे से बंधे हुए होते हैं। अशिक्षित महिला उन साधनों और ज्ञान तक नही पहुँच सकती जो उसे उसके शरीर को समझने और अनचाहे गर्भ से बचने में मदद कर सकें ।  

    अशिक्षित महिलाओं के कड़े नियमों से प्रभावित होने की संभावना होती हैं, और वह किसी को कुछ भी बताने में असमर्थ होती हैं । फिर चाहे वह एक योग्य पेशेवर हो या नीम हक़ीम ।

    अशिक्षित महिलाएं गर्भ निरोधक के इस्तेमाल पर खुद निर्णय लेने में हिचकती हैं, और पुरुषों के भरोसे ज्यादा रहती हैं ।

    उनके मन में, अपनी जरूरतों के लिए किसी डॉक्टर या केमिस्ट के पास जाने के लिए आत्मविश्वास में कमी भी पाई गई है ।

    धारणात्मक रवैया/कलंक judgmental attitude/stigma:

    बहुत सी किशोरियां जो गर्भनिरोधक की भूमिका के प्रति जागरूक होती हैं वे भी केमिस्ट और स्वास्थ्य सेवाओं के पेशेवर लोगों के द्वारा हेय दृष्टि से देखे जाने के कारण जाने से घबराती हैं ।

    विश्व के बहुत से देशों में सेनेटरी नैपकिन के पैकेट अभी भी न्यूज़ पेपर में बांधे जाते हैं, और दुकानदार इसे  काले प्लास्टिक बैग में लपेट कर देते हैं ताकि कोई देख न ले ।

    इन देशों में अभी भी इन प्रक्रियाओं को मासिकधर्म के समान प्राकृतिक माना जाता है, और इसलिए किशोरियों की सुविधा के लिए गर्भनिरोधक का इस्तेमाल तो  दूर की बात है।

    यहां तक की प्रशिक्षित डॉक्टर की सलाह और दवाइयाँ लेने गई किशोरियों के प्रति लोगों के मन में नकारात्मक विचार आते हैं ।

    परिवार में विश्वास करने में असमर्थता :-          

    हालाँकि विभिन्न देशों में अलग -अलग कानून और पारिवारिक मूल्य हैं, लेकिन बहुत से देशों में स्थिति निम्न प्रकार है -

    युवा लड़कियां अक्सर अपने परिवार के सदस्यों को यह नहीं बताती कि उनका बॉयफ्रेंड है, और वे प्रेग्नेंट हैं ।

    बहुत से देशों में  १६ वर्ष से कम उम्र की महिला को गर्भपात कराने के लिए क़ानूनी रूप से एक अभिभावक  या माता -पिता के साथ की आवश्यकता होती है।

    ये लड़कियां अपने परिवार पर विश्वास नही कर सकती, और इस वजह से वे क़ानूनी रूप से गर्भपात नही करा सकती, जिससे या तो उन्हें एक बच्चा हो जाता है, या वे अनाधिकृत डॉक्टर या हॉस्पिटल  जाती हैं, जो उन्हें नुकसान पहुंचा सकतें हैं।

    रूढ़िवादी धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वास :-

    कठोर सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वास इसमें मदद देते हैं, ऐसा नही लगता, क्योंकि युवा लोग अबतक सेक्स के साथ प्रयोग कर रहे हैं।

    हालाँकि वे गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करें या नही, ये उनका धर्म या संस्कृति, जिसे वे मानते  हैं, निर्धारित करता है।

    ऐसा देखा गया है कि रूढ़िवादी पृष्ठभूमि के युवाओं का विश्वास होता है कि गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए ।

    इस समस्या से निपटने के कुछ सुझाव:

    हमें  एक बेहतर समाज, जागरूक समाज और एक  अच्छे माता-पिता बनना है।

    सेक्स की शिक्षा इसलिए दी जाती है कि आप सेक्स करने की तरफ attract न होकर बल्कि इसे सुरक्षित रूप से करें । और यह एक प्राकृतिक उत्सुकता है, और अक्सर इसकी कोशिश करने वाले परवाह नहीं करते कि वे क्या करने जा रहे हैं ।

    प्रिय पाठकों यह जानकारी हम इसलिए दे रहे हैं ताकि, समाज किशोरों द्वारा हुई गलती को उनका अपराध मानने की बजाय, उन्हें सेक्स के बारे में सही जानकारी दें, सलाह दें, मार्गदर्शन करें, ताकि वे आप पर विश्वास करें और अनियोजित गर्भधारण से खुद को बचा सकें ।

    Image credit 1 2 

     

  • 12 Jan
    Mandavi Pandey

    कुंदन जोया से बेहद प्यार क्यों करता था ?

    Aakarshan  ka lokpriyata se kya samband hai

     

    अगर आपने रांझणा फिल्म देखी है, तो आप समझ जायेंगे कि किशोरों के लिए आकर्षण का कितना महत्व होता है। हालाँकि ,इसमें कोई शक नही है कि, आकर्षित व्यक्ति अपने आकर्षण के बल पर किसी को भी अपने कंट्रोल में कर सकते हैं । और कभी-कभी वे इसका इस्तेमाल दूसरों को नुकसान पहुँचाने में भी कर सकते हैं।

     

    आकर्षक होने के फायदे:

    अनुसंधानों से पता चलता है कि, अगर आप आकर्षक (attractive)   हैं तो आप इसका इस्तेमाल  फ्रेंड्स और लाइफ पार्टनर चुनने में कर सकते हैं । आप अपने आकर्षक (attractive) होने के बल पर पॉलिटिक्स(politics) में या फिर कैरियर में भी अपना प्रभाव डाल सकते हैं । और ये तो हम सब जानते ही हैं  कि अभिनय की दुनिया को यह कैसे प्रभावित  करता  है।

     

    लेकिन ऐसा क्या है कि, जो हम आकर्षण(attractiveness) को  इतना महत्व देते हैं ?

    क्यों हम आकर्षक चेहरा पसंद करते हैं ?

    आप देखने में अच्छे हैं, इसका मतलब क्या आपका नेचर(nature) अच्छा है?

    और समाज में आप अपने आकर्षक चेहरे की वजह से पॉपुलर (popular)हो जाते हैं ?

    लोग attractivness को इतना क्यों अच्छा मानते हैं ?

     

    लोकप्रियता पर हुए रिसर्च का परिणाम

    बहुत से शोध आकर्षण (attractivness)और लोकप्रियता(popularity) के ऊपर अलग -अलग और दोनों को मिलाकर किये गए हैं। संक्षेप में लोकप्रियता पर हुए रिसर्च(research) से यह बात पता चलती है कि, पॉपुलैरिटी popularity दो प्रकार की होती है

    एक कितने लोग आपको कितना पसंद करते हैं?

    और दूसरा समाज में आपकी चर्चा कितनी है?

    ये दोनों एक जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यहां बहुत सूक्ष्म अंतर है। आगे वाले का मतलब है कि लोग आपको अच्छा और मिलनसार मानते हैं । पीछे वाले का मतलब  है कि, आप जो चाहते हैं वो पाते हैं ।

     

    बच्चे भी आकर्षक चेहरे को वरीयता देते हैं।

    आकर्षण पर हुए रिसर्च से यह पता चलता है कि, बच्चे जिनको वास्तव में मीडिया या समाज में किसी भी प्रकार  का एक्सपोज़रexposure नहीं मिला है उनका भी खिचाव आकर्षण की तरफ हो सकता है और वे भी आकर्षक चेहरे को वरीयता देते हैं।  लेकिन चेहरे का भाव जो उसे आकर्षक बनाता है, वह है समरूपता और माधुर्य (आप ज्याद क्रोध नहीं करते, हंसमुख स्वभाव के माने जाते हैं ) 

     

    तो क्या हैआकर्षणशीलता  का मतलब ?

    इसलिए आकर्षणशीलता  का मतलब है, ऐसा चेहरा जो समरूपता और औसत हो इसका यह मतलब भी है, कि वह चेहरा जो स्वस्थ और खुश है।

    जीवन के विकास क्रम के अनुसार वे लोग जिनका अनुवांशिक जीन अच्छा है, वे  संभावित आनुवांशिक गुणों में अच्छा योगदान दे सकते है। एक खुशनुमा चेहरे वाले व्यक्ति से कम संभावना रहती है कि वह किसी को हानि पहुंचा सकता है ।

     

    आकर्षण पर हुए अनुसंधानों से पता चला है कि जो बच्चे ज्यादा आकर्षक होते हैं, वे  माता-पिता, दूसरे बच्चों और उसी तरह अन्य वयस्कों की ओर से ज्यादा ध्यान पाते हैं,  जिससे उन्हें सामाजिक दक्षता का ज्यादा अभ्यास होता है। इसलिए ऐसे लोग अपनी इसी गुण की वजह से लोगों से जल्दी घुल मिल जाते हैं, ज्यादा मिलनसार होते हैं और वे धन,हैसियत, उन्नति,ताकत,धनवान जीवन साथी आदि जल्दी और सरलता से पा जाते हैं ।

     

    इसका मतलब यह भी है की सिर्फ सुन्दर होना ही इस बात का proof  नहीं है कि अब आप जो चाहे वो पा सकते हैं, सुन्दर होना और आकर्षित होना दो अलग अलग चीजें हैं अगर आप सुन्दर हैं पर हंसमुख नहीं तो आप समाज में पॉपुलर नहीं हो सकते ।   आपको खुद भी प्रयास लगाना होता है, आप की मुस्कान, आप का बोलने-चलने का अंदाज, आपका पहनावा, आपका उचित व्यवहार यह सब भी काफी महत्वपूर्ण होते हैं ।

    इसलिए हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहा करते हैं  ‘Be presentable’

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  • 08 Jan
    Janhavi Dwivedi

    घर की याद आती है Homesickness

    kyo aati hai ghar ki yad

    सिन्हा जी के बेटे का selection IIT bombay हो गया । एक तरफ इतने अच्छे कॉलेज में दाखिले की ख़ुशी, तो दूसरी तरफ घर से दूर रहने का दुःख ऐसे में, घर की याद करना स्वाभाविक है ,खास कर जब आप पहली बार घर से दूर हुए हों। घर छोड़ने का मुख्य कारण सिर्फ घर नही होता, बल्कि आपकी पहचान भी बदल जाती है । पुराने माहौल में आप ढल से जाते हैं । पुराने दोस्त, रिस्तेदार, वो गलियाँ, मोहल्ले सब में बदलाव आता है । और बदलाव के लिए ये सब पीछे छोड़ने में, और नए माहौल के साथ सामंजस्य बैठाने में कुछ समय लगता है।

    "घर के बाहर रहने के कारण होने वाली उदासी" (Home sickness ) के sign:

    1. जब भी आपको घर की याद आती है, आपको एक अजीब सा महसूस होता है, घबराहट सी होना कि नया माहौल कैसा होगा । 
    2. आप जो काम करना चाहते हैं उस पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं, या बिस्तर से उठने में असमर्थ हैं, क्योंकि आपको जहाँ जाना है वह जगह भी आपके लिए अपरिचित है, और एक महीना से ज्यादा बीत जाने के बावजूद आप इन सब के अभ्यस्त नहीं हो पाये हैं।
    3. बिना किसी खास कारण से शरीर में कहीं भी आपको दर्द और पीड़ा होती है, अक्सर बीमार पड़ना  भूख या नींद में कमी , और घर से एक के बाद अगले फोन कॉल का इंतजार करना।

    यदि आप वास्तव में घर की याद महसूस कर रहे हैं, तो निम्नलिखित उपाय आप के लिए उपयोगी हो सकते  हैं :

    1.शारीरिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना : जब  भी आप कुछ सुस्ती और घर की याद में sadness  का अनुभव करते हैं तो स्वास्थ्य की अनदेखी करना काफी आसान होता है, अस्वस्थता महसूस क्ररने से फिर से आपको घर की याद आएगी। इसलिए अच्छी तरह से खाना और सोना सुनिश्चित करें, और बीमार होने पर अपने डॉक्टर की मदद लें।

    2.बाहर जाएँ : जब भी आप खाली हों, तो दोस्तों के साथ ट्रिप या अपनी मनपसंद जगह जैसे सिनेमा, म्यूजियम, कला प्रदर्शनी आदि स्थानों पर जाएं , इससे आपका समय भी अच्छा बीतेगा और आपका मन भी लगा रहेगा । ऐसा करने से आपकी सोच उन घूमें हुए पल में चली जायेगी और आपको सोचने के लिए कुछ विषय मिल जाता  है। घूमने से आपको अच्छा लगेगा, और कुछ अच्छी यादें आपके दिमाग में बस जाती हैं और आप नई जगह पर अच्छा महसूस करेंगे ।

    3.किसी से बात करें: अक्सर घर का मतलब, होता है कि वहां आप अपने लोगों से बात करते हैं और मन का बोझ हल्का होता है । नई जगहों पर भरोसेमंद दोस्तों या सलाहकारों को खोजें, जिनसे आप मन की बात कह सकें, और उन्हें मन के अंदर दबा के ना रखें ।

    4.कुछ नया सीखें: यदि आपके पास समय है तो नई होब्बीएस या नई स्किल सीखें । परन्तु ध्यान रहे, उस नए काम को करने में आपको अच्छा लगना चाहिए । और यही आप का ध्यान घर की याद से हटा कर आपको शांत रखेगा ।

    5.व्यस्त रहें: अपने कार्यस्थल चाहे वो ऑफिस हो या स्कूल या कॉलेज दिए गए कार्य को समय से पूर्ण करें । कार्य पूरा करने में आप व्यस्त रहेंगे और आपको अच्छा महसूस होगा । यह आपको यह याद दिलाने में  मदद करेगा कि,  भले ही आप घर से बाहर रहना पसंद नही करते, लेकिन ये सब आप एक कारण से कर रहे हैं। और धीरे -धीरे आप नई जगह पर adjust हो जायेंगे ।

    इन सब सुझावों के बाद भी यदि आपको घर की याद और उदासी सी लग रही है तो, थोड़े दिन के लिए घर दुबारा घूम कर आ सकते हैं ।

    आपको यदि कोई अन्य मदद न दिखाई दे तो, आप  एक काउंसलर या मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से बात कर सकते हैं ।

  • 19 Dec
    Shiva Raman Pandey

    कैसे अपने किशोर बच्चे के साथ सार्थक संवाद करें?

    how to talk with a teeneger

    आइये मिलते हैं, छवि जी से जो अपने 16 वर्षीय बेटे को लेकर परेशान हैं ।

     "आज  मेरा बेटा किशोर  सुबह से जाने किस बात पर मुझसे गुस्सा है? सुबह नहाने के बाद जब मैंने उससे भगवान के सामने हाथ जोड़ने के लिए कहा' तो बोलने लगा कि माँ भगवान नहीं होते,  सब झूठ है। स्कूल से आया तो मैंने पूछा "आज का दिन कैसा था?" तो बोला "माँ परेशान मत करो मेरा दिमाग अभी थका हुआ है।" वह मेरी कोई बात मानता ही नहीं है । बेटा शायद अब बड़ा हो गया है और माँ  छोटी हो गई है।“

    किशोर हो रहे बच्चों के माता पिता की भूमिका बेहद मुश्किल हो जाती है । क्योकि बच्चा उसी काम को करना चाहता है, जिसे आप  मना करते हैं या जो आपकी मर्जी के खिलाफ होता है ।जीवन की यह अवधि न केवल आपके  लिए बल्कि बच्चे लिए भी चुनौती भरी होती है।

    एक किशोर शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत सी चुनौतियों के दौर से गुज़र रहा होता है, साथ ही उसे पढ़ाई, स्कूल और कैरियर  के बढ़ते दबाव को भी झेलना पड़ता है।

    यौवनावस्था आने पर बहुत से हार्मोन्स में परिवर्तन आता है, जिससे समझा जा सकता है कि क्यों किशोर मूडी हो जाते हैं ?

    हमारे मस्तिष्क का वह  भाग जो निर्णय लेने में हमारी मदद करता है उसे हम  प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स कहते हैं । उसका विकास किशोरावस्था में हो रहा होता है, जिसके कारण किशोरावस्था में लिए गए  निर्णय जोखिम भरे, आवेशी और कई बार खतरनाक भी हो सकते हैं ।

    आज के इस लेख में हम आपको बताएँगे की कैसे एक किशोर के साथ संवाद स्थापित करें:

    • अक्सर कई बार किशोर चाहते हैं की उन्हें गंभीरता से लिया जाये, उनके भी अपने विचार और मन हैं, और वे नहीं चाहते हैं कि उन्हें बच्चो की तरह समझाया जाय। यह जरुरी है कि बढ़ती उम्र के किशोर की स्वायत्ता का सम्मान किया जाय ताकि जब वे वयस्क हों तो उनमें आवश्यक आत्म-सम्मान हो।

     

    • यह सुनिश्चित करें की जब भी परिवार में कोई निर्णय लिया जाय तो आप उनसे हम उम्र की तरह बात करे,उनसे उनकी राय लें जैसे आप अपने दोस्तों या सहयोगियों से बात करते हैं।

     

    • किशोर दिल से  बहुत संवेदनशील होते हैं, अगर आप अपने किशोर बच्चो को आदर देंगे तो वे भी आपका आदर करेंगे और तब उन्हें समझना और भी आसान हो जायेगा ।

     

    • आप जो भी उपदेश दे उसका पालन स्वयं करें । यदि आप उन्हें किसी कार्य को नहीं करने के लिए कहते हैं (उदहारण-झूठ ना बोलने के लिए ) पर आप उसे खुद उनके सामने करते रहते हैं , तो वे खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं । जब आप उन्हें कुछ ऐसा सिखाना चाहते हैं, जिसमे आप विश्वास नहीं करते और जिसका आप दैनिक जीवन में अनुसरण नहीं करते। इसलिए अच्छा व्यवहार सिखाने के लिए सबसे अच्छा है कि उन्हें उदहारण से सिखाया जाय। ध्यान दें -एक अभिभावक के रूप में उनके स्कूल ,दोस्तों, उनके सपनों और आकांक्षाओं के लिए प्यार भरी चिंता दिखाएँ ।

     

    • आप यह सुनिश्चित करें कि वे किसी विषय में आप से आसानी से बात कर सकें। अपने विचारों को उनके विचारों  अनुकूल बनाने की कोशिश करें ताकि आप अपने बच्चे के विचारों को समझ सकें ।

     

    • खासकर जब बच्चे में किसी बुरी आदत के संकेत दिखाई देते हैं, तो उनपर झूठ बोलने का आरोप मत लगाइये बल्कि उन्हें बहुत गंभीरता से लीजिये और जितने जल्दी हो सके उनसे इस समस्या पर चर्चा करें।

     

    • मदद लें - अगर आप अपने जीवन साथी के साथ बहुत अधिक झगड़ा करते हैं, तो यह आपके बच्चे के कोमल मन को प्रभावित कर सकता है, और उस सम्मान को भी जो आपके लिए उसके मन में है। आप अपनी वैवाहिक समस्याओं और बच्चे के लिए अपने लड़ाई और झगड़े को कम करने और आपस में बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए मनोचिकित्सक से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं ।

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