कुल 169 लेख

  • 19 Jan
    Oyindrila Basu

    जश्ने-जीवन साथी-- कैसे अपने जीवन साथी की सफलता का जश्न मनाएं

    life partner

     

    अपने दाम्पत्य जीवन में एक मधुर बदलाव लाने के लिए आज सुबह अपने जीवनसाथी को, "फॉर अ चेंज"(for a change),  उन्होनें जो भी अच्छा किया है, उस के लिए उनको सराहें। कहने का मतलब यह है, कि अगर आज कोई "occasion" नहीं  भी है, तो भी उनके साथ जश्न मनाएं।

    करके देखिये अच्छा लगता है। :)

    साथ में जश्न मनाना, रिश्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता  है, जो अकसर हम समझ नही पातें।

    जश्न मनाना, यानी, अपने लाइफ पार्टनर  की सफलता को प्रोत्साहन देना।

    रिश्ते हमारे लिए बहुत महत्व रखते हैं, पर हम उन्हें अकसर ठीक से संभाल नही पातें। स्वार्थी व्यक्तित्व हम सब में है, चाहे हम मानें, या नकार दें। अगर हमें सफलता मिलती है, तो हम ख़ुशी से पागल होकर "गुड न्यूज़" सबसे शेयर करते हैं, कभी फेसबुक (#Facebook) पर तो  कभी ट्विटर(#Twitter) पर, बड़ी सफलता पर दावतें रखते हैं, पर क्या यही सब हम आमतौर पर, अपने जीवन साथी  की सफलता पर करते हैं?

    कुछ कहेंगे "हाँ", पर, यह सच है ।  आंकड़ों के हिसाब से देखा गया है, कि ऐसी परिस्थिति में, 86% लोग चाहते हुए भी उतना खुश नहीं  हो पाते, जितना वह स्वयं की सफलता पर होते हैं।

    ऐसी सोच, किसी के व्यक्तिगत दोष को नहीं दर्शाती, बल्कि यह एक स्वाभाविक मानसिकता है, जो हमें अपनी तुलना, अपने  पार्टनर से करने पर मजबूर कर देती है, और फिर हमें लगता है, कि हम उतने सफल नहीं है।

    विशेष रूप से, जब पत्नी को सफलता हासिल हो, तो पति उसे खुले मन से अकसर स्वीकार नहीं  कर पाते।

    'डाह' या दूसरों की सफलता से जलन, एक स्वाभाविक मानसिक स्थिति है, जिसके चलते, हमारे  व्यक्तिगत रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है। ये  दोष सिर्फ हमारा दोष नहीं है, बल्कि इस स्थिति के लिए सामाजिक, आर्थिक, जनमत और ऐसे  कई सारे कारक जिम्मेदार होते हैं ।

     रिश्ते(दोस्त, प्यार,जीवनसाथी), जो हमारे लिए इतने प्यारे हैं, डाह की वजह से, हम उनकी खुशियों में शामिल नही हो पाते, उनकी सफलता को सकारात्मक रूप से स्वीकार नहीं कर पाते, और इससे उनको तकलीफ पहुँचती है। अकसर यह  भी होता है, कि बहुत समय से रिश्ते को विशेष रूप से ध्यान न देने की वजह से भी, उनका महत्व घटता नज़र आता है। हमारे दोस्त/पार्टनर हमसे दूर होते नज़र आते हैं।

    पर हम तो ऐसा नही चाहतें, फिर ऐसा क्यों होता है? हम अकसर सोचते हैं ऐसा क्या करें जिससे हमारे रिश्ते मजबूत और टिकाऊ  बने :)

    नही, इसके लिए फेविकोल (Fevicol) का जोर या अम्बुजा सीमेंट (Ambuja Cement) शायद काम न करें :D

    पर पहल तो आपको ही करनी पड़ेगी।

    पहले तो खुद में सकारात्मकता (positivity) लाये। यह बड़ी-बड़ी मुश्किलों को आसान कर देता है।

    ये हमें खुले मन से खुश होने की आज़ादी देता है। तुलना या प्रतियोगिता का भाव रिश्तों में अच्छा नहीं  होता, और सकारात्मकता, हमें इन बुरी भावनाओं से मुक्त करता है।

     

    अब जब आप थोड़ा 'पॉजिटिव फील' कर चुके हों तो आगे बढ़ते हैं, :) और देखते हैं कि कैसे हम अपने दोस्त/पार्टनर की सफलता का जश्न मनाएं और उन्हें खुश करें :

     

    आप उनके खास दिनों को नोट कर लें, जैसे जन्मदिन, सालगिरह, आदि , और कैलेंडर में 'मार्क' कर लें।

     

    उन दिनों पर अपने दोस्त या पार्टनर को सुबह 'wish' (मुबारकबाद) करें, फ़ोन से , या फूलों के गुलदस्ते से उन्हें सराहें, उनके चेहरे पर जो ख़ुशी होगी, वह आप सोच भी नहीं सकते।

     

    आपके दोस्त को प्रमोशन मिले, तो आप सबसे यह खबर 'शेयर' करें और उनकी तरफ से सब को बुलाकर, आप दावत रखें।

    और फिर अगर यह आपके पति या पत्नी की बात है, फिर तो कोई गल ही ना ! अभी उठिए और उनके लिए एक 'Surprise Gift' लेकर उन्हें अचम्भित कर दीजिये।

     

    अकसर हमें ज़िन्दगी के कुछ ख़ास दिन, जैसे जनम, सालगिरह, नौकरी का पहला दिन, आदि  याद रहता है, पर रिश्ते की शुरुआत, या साथ साथ चलना, ज्यादातर , ख़ास नहीं लगता, तो हम उनको भूल जाते हैं। पर यह याद रखें, जश्न के लिए कोई अवसर ज़रूरी नहीं है। रिश्ते को आप जब चाहें 'ताज़ा' कर सकते हैं, और आपको #लिप्टनचाय भी नही चाहिए,:) बस किचन में जाइए और कुछ ख़ास स्वादिष्ट खाना बनाइये और अपने पार्टनर के साथ अपने रिश्ते की सफलता का जश्न मनाईये, और फिर देखिये कमाल!

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  • 19 Jan
    Oyindrila Basu

    बच्चों से कैसे करें मीठी सुबह की शुरुआत?

    meethi subah ki shuruaat, taare jameen par

    "दुनिया का नारा, जमे रहो, मंज़िल का इशारा, जमे रहो.." कुछ याद आया??

    जी जी, फिल्म #TaareZameenPar का वह गाना जहां मम्मी छोटे ईशान को लग-भग पीट कर नींद से जगाती हैं। क्या आप भी अपने बच्चे को  स्कूल के लिए लेट हो जायेगा या बस छूट जाएगी, यही  सोच कर,  जगाते हैं?

    शांत हो जाइए और सोचिये, क्या इस भाग दौड़ के चक्कर में, क्या आपकी नन्ही जान का बचपन उससे छूट रहा है?

    आजकल, क्या कहते है, कम्पटीशन का दौर है, देर करेंगे तो पीछे रह जायेंगे। यही मंत्र है चारों तरफ, और इसी को उच्चारण करते हुए माँ बाप अपने बच्चों को हर दिन आगे धकेलने की फ़िराक में लगे रहते हैं, पर कम से कम उनकी सुबह तो शांति से होने दें !

    सुबह, पूरे दिन में सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। नींद से तो हम अलार्म बजने के साथ-साथ जाग जाते हैं, पर हमारा मस्तिष्क उतनी जल्दी नहीं जाग पाता, मस्तिष्क की नसें सुस्त रहती है, इसीलिए कोई भी तेज आवाज़ परेशानी पैदा कर सकती है। बच्चों का मन तो और भी कोमल होता है। एक स्थिति से दूसरी स्थिति में जाने के लिए, बच्चों को बड़ों से कुछ प्रतिशत तक, ज्यादा समय लगता है । नींद से जागने तक के बीच में अगर आप उन पर चिल्लाते हैं या उन्हें ज़ोर से डांट कर उठाते हैं, तो भारी आवाज़ से बेचारे बच्चों के मन पर बोझ सा आ जाता  है। सुबह की शुरुआत गलत हो, तो पूरा दिन बिगड़ जाता है। तब स्कूल जा कर भी बच्चा सुस्त रहेगा, उसे नींद आएगी, वह न पढ़ पायेगा न ही खेल पायेगा।

    बच्चे आसानी से कुछ इग्नोर भी नहीं कर पाते, ख़ास कर जो अंतर्मुखी, यानी #इंट्रोवर्ट होते हैं, सुबह की डांट उन्हें पूरा दिन सताती है और इसके प्रभाव से, पूरे दिन का काम, पढ़ाई, सब बर्बाद हो जाता है। 

    पहले अपने बच्चों को समझें, वे क्या चाहते हैं, कैसे सोचते हैं, यह  समझने की कोशिश करें।

    अपने बच्चे में, मजबूत आत्मविश्वास पैदा करें।

    सारादिन आप अपने ऑफिस या दूसरे कामों में व्यस्त रहेंगी और आपका बच्चा, स्कूल और अपने टूशन में, तो सुबह का समय उसके साथ बिताएं, उसे प्यार से कुछ अच्छा कह कर  नींद से उठाएं, जैसे "उठकर देखो बेटा, सूरज मामा कबके तुमसे मिलने आ गयें", या यूँ कहें "आज तुम्हारा मन पसंद ब्रेकफास्ट बनाया है", इससे बच्चा परेशान भी नहीं होगा, और उनके मस्तिष्क को जगाने के लिए एक उत्प्रेरक का काम करेगा ।

    बच्चे शैतानियाँ तो करते हीं हैं, पर अगर उन्होंने होमवर्क नहीं किया है, तो सुबह उन पर बरसने से कोई फायदा नही, स्कूल जाने से आधा घंटा पहले होमवर्क लेकर तो नही बैठेंगे। उनको शान्ति से समझाइये की टीचर से माफ़ी मांग लें, और आगे से वक़्त पर अपना काम खत्म करें, तो रिवॉर्ड मिलेगा। ये गिफ्ट या रिवॉर्ड कभी कभी बच्चों को अच्छा काम करने के लिए काफी प्रोत्साहित करता है।

    ब्रेकफास्ट में, अंडे और दूध के साथ एक चॉकलेट भी उनके प्लेट पर रख दें, या फिर सैंडविच पर केचप से #Smiley बना दें, तो आपके बच्चे का चेहरा ख़ुशी से चमक उठेगा।

    दूध में एक चमच चॉकलेट पाउडर मिलाकर देखें आपकी सुबह भी मीठी हो जायेगी।

    ब्रेकफास्ट टेबल पर उनसे कोई कहानी, जो उन्होंने स्कूल में पढ़ी है, उसको सुनाने की मांग करें, इससे उन्हें महत्त्व मिलेगा, और उनकी पढाई का भी अभ्यास हो जायेगा ।

    उनके लंचबॉक्स में, अपने #HealthyFood को उनके स्वाद अनुसार बनाने की कोशिश करें, जैसे एक स्लाइस चीज़ की, या एक क्रीम बिस्कुट, जो सलाद या रोटी को भी उनके लिए स्वादिष्ट बना सकते है।

    स्कूल जाते वक़्त, बच्चों को गुड बाई किस करना ना भूलें, यह उनको आगे पॉजिटिव एनर्जी देगा, और वह खुद को #ChargedUp महसूस करेंगे।

    आपसे बढ़ावा पाने से, उनकी सुबह आत्मविश्वास से शुरू होगी, तो वे सारा काम सही से करेंगे, फिर आपकी सुबह भी सुन्दर होगी।

    बच्चे खुश रहेंगे, तो आप का भी दिन, अच्छा जायेगा।

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  • 18 Jan
    Shiva Raman Pandey

    दस skills जो आपको सफलता पाने के लिए जरूरी है ।

    Skills to get what you want

     

    हम सभी अपने जीवन में अलग-अलग  इच्छा रखते हैं, कोई इंजीनियर का काम, या फिर  बिज़नेस में कोई अपना नाम करना चाहता है । लेकिन  उन सभी wishes को पूरा करने के लिए जो skills आनी चाहिए वे common होती हैं और हमें वे सीखनी होती है ।

    आज हम आपको उन common skills के बारे में बताते हैं ।

    1.हर कार्य में धैर्य बहुत जरूरी है ।

    सभी लक्ष्य पूरा होने में समय लेते हैं। यहाँ तक कि जब आप बहुत से कार्य एक साथ कर रहे हों तो सामान्य चीज़ों को करने में भी समय लग सकता है। इसलिए आगे बढ़ने और उस बढ़त को बरक़रार रखने के लिए धैर्य पहला गुण है जिसकी आपको जरूरत है। जब आपका धैर्य कम होने लगे, तब आप यह याद कीजिये कि आप ने क्या लक्ष्य निर्धारित किया है, और यह भी कि जब आप उसे प्राप्त करेंगे तो कैसा महसूस करेंगे। आप उसे प्राप्त करने की ख़ुशी को महसूस करिये और अपने लक्ष्य में आगे बढ़ते रहिये।

    2.जिस कार्य को शुरू करिये उस पर कायम/टिके रहिये

    इसका सम्बन्ध थोड़ा बहुत धैर्य से लेकिन ज्यादा कठिन परिश्रम से है। इसका मतलब सिर्फ इंतज़ार करना काफी नहीं है। इसका मतलब जो आप पाना चाहते हैं उसके लिए कठिन मेहनत और बेहतर कोशिश करते रहने की आवश्यकता है। धैर्य पूर्वक अपने कार्य को करते रहना और उस पर कायम रहना ही आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचाएगा ।

    3.एक योजना बना कर कार्य करिये ।

    अपने target को सही दिशा दीजिये। मतलब एक प्लान बनाइये कि कौन सा कार्य आपको पहले करना होगा, और कौन सा उसके बाद । इसके साथ साथ आप यह भी प्लान करिये कि किसी कार्य को करने में क्या क्या आवश्यकता होगी, और क्या आपके पास वे जरूरी साधन हैं?

    4.अपने समय का सही उपयोग करें

    हमें अपने समय का उपयोग सही से करना चाहिए, क्योंकि समय बड़ा कीमती है, उदाहरण के तौर पर अगर आप का कार्य किसी दूसरे से करवाने में कम खर्च और पैसे में हो जाता है, तो बेहतर है आप अपना समय उस कार्य को करने में न लगाकर दूसरे जरूरी कार्य करने में लगाएं । ऐसा करने से आप अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुँच सकते हैं ।

    5.अपने क्रोध, और तनाव पर काबू रखें

    यदि आप छोटी-छोटी बात पर गुस्सा होते हैं, और उस बात को लेकर बैठ जाते हैं तो आपको  anger management की तकनीकी सीखनी होगी। आपको अपने तनाव को कम करने की आवश्यकता है। इसके लिए आप योग करें । अपने शरीर, मन को थोड़ा विश्राम दें ।  प्राणायाम का अभ्यास कर साँसों को नियंत्रित करिये । खुद को ऐसे कार्यों में लगाएं जिसमें आपका मन लगे और शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए व्यायाम करें । 

    6.मुसीबत से निपटने की एक योजना पहले से बना कर रखिये ।

    याद रखिये किसी भी कार्य को करने में अड़चने आती हैं, और आपको इसके लिए पहले से योजना बना कर चलिए जिससे उस अड़चन को आप तुरंत हल कर सकें । इसके साथ-साथ यह योजना आपको घबराने नहीं देती । और आपको अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होने देती ।

    7.भावनात्मक पक्ष को ऊपर उठायें।

    दूसरों की भावनाओं को समझने की skill विकसित कीजिये, जिससे आप इस ज्ञान का आपसी बातचीत करने और कार्य को सौहार्द पूर्वक कराने में उपयोग कर सकते हैं । लगभग सभी लक्ष्यों में दूसरों की मदद की जरूरत होती है। स्वयं को और दूसरों को ज्यादा अच्छी तरह समझने के लिए आप अपने भावनात्मक पक्ष को ऊपर उठायें। जिससे उनके साथ अच्छा रिश्ता बनाये रखा जा सके ।

    8.खुद को हमेशा प्रेरित करते रहिये

    जब आप किसी कार्य की शुरुआत करते हैं तो आपके प्रेरणा का स्तर बहुत ऊपर होता है। लेकिन असफलता या तनाव से सामना होने पर यह कम हो सकता है। यह पता करें कि, आपके लक्ष्य का कौन सा भाग आपको ज्यादा पसंद है, और स्वयं को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें याद करें। कभी कभी कार्य से अवकाश लेकर खुद को समझने की कोशिश कीजिये,  अपनी ताकत और उपलब्धियों को याद कीजिये, और खुद पर गर्व महसूस करिये, यह  सब आपको प्रेरणा देंगे ।

    9.लक्ष्य को समय के साथ ढालते रहिये ।

    समय के साथ आप अपने लक्ष्य को पाने में जो भी सफलता और असफलता का सामना करते हैं, उसकी वजह से आप अपने लक्ष्य में बदलाव लाकर उसे समय के अनुसार ढालते रहिये । याद रखिये “परिवर्तन जीवन का नियम है ।“  

    10.हमेशा खुद के अंदर सीखने की ललक रखिये

    अंत में अपने लक्ष्य को पाने के लिए आप जितना ज्ञान, स्किल, जानते हैं, आपको उससे कहीं ज्यादा जाने की जरूरत पड़ती है ।

    हमेशा खुद को नई तकनीकी सीखने के लिए तैयार रखिये । कभी यह मत सोचिये कि आपको सब आता है, यह आपका अपना अहंकार है, जो आपको सफल बनने से रोक सकता है ।

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  • 14 Jan
    Janhavi Dwivedi

    किशोर => रोमांस => गर्भवती => अफ़सोस

    Teenage pregnency

     

    “मैं उसको खो देने की आशंका से इतना डर गई थी,और यही एक कारण था, मैंने सोचा यदि मैंने उसके  यौन अनुरोध को नहीं स्वीकार किया तो मैं उसे खो दूंगी। जैसा हमेशा होता है, मैंने ये बातें अपने माता -पिता से छुपाई।“

    teenage pregnency

    किशोरावस्था में गर्भधारण एक ऐसी समस्या है, जिससे सभी देश चाहे विकशित हो या विकाशशील सभी जूझ रहे हैं ।

    भारत में 1000 महिलाओं पर 62 प्रेग्नेंट किशोरियां हैं, जबकि US और UK में यह संख्या क्रमशः 42 और 24 है।

    नीचे कुछ कारण दिए गए हैं जो 1987 से अबतक किशोर गर्भधारण की दरों में वृद्धि या स्थिरता की व्याख्या करते हैं:

    गरीबी

    अमेरिका हो या भारत, ' गरीबी ' किशोरावस्था गर्भधारण में सबसे बड़ा योगदान देती है ।

    गरीबी का मतलब है, कि एक लड़की को स्वयं के विकास का और अपने शरीर का, साथ ही साथ उसे अनचाहे गर्भ से बचाव के साधनों  की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त करने का मौका नहीं मिलता।

    उसे साथी भी गैरजिम्मेदार मिल सकता है, और उसके पास उन्हें अस्वीकार करने के बहुत से विकल्प भी नही होते हैं। 

    निम्न आय वर्ग में कम उम्र में विवाह सामान्य है, और यह भी किशोरावस्था में गर्भधारण का एक कारण है।

    अशिक्षा

    अशिक्षा और गरीबी  एक दूसरे से बंधे हुए होते हैं। अशिक्षित महिला उन साधनों और ज्ञान तक नही पहुँच सकती जो उसे उसके शरीर को समझने और अनचाहे गर्भ से बचने में मदद कर सकें ।  

    अशिक्षित महिलाओं के कड़े नियमों से प्रभावित होने की संभावना होती हैं, और वह किसी को कुछ भी बताने में असमर्थ होती हैं । फिर चाहे वह एक योग्य पेशेवर हो या नीम हक़ीम ।

    अशिक्षित महिलाएं गर्भ निरोधक के इस्तेमाल पर खुद निर्णय लेने में हिचकती हैं, और पुरुषों के भरोसे ज्यादा रहती हैं ।

    उनके मन में, अपनी जरूरतों के लिए किसी डॉक्टर या केमिस्ट के पास जाने के लिए आत्मविश्वास में कमी भी पाई गई है ।

    धारणात्मक रवैया/कलंक judgmental attitude/stigma:

    बहुत सी किशोरियां जो गर्भनिरोधक की भूमिका के प्रति जागरूक होती हैं वे भी केमिस्ट और स्वास्थ्य सेवाओं के पेशेवर लोगों के द्वारा हेय दृष्टि से देखे जाने के कारण जाने से घबराती हैं ।

    विश्व के बहुत से देशों में सेनेटरी नैपकिन के पैकेट अभी भी न्यूज़ पेपर में बांधे जाते हैं, और दुकानदार इसे  काले प्लास्टिक बैग में लपेट कर देते हैं ताकि कोई देख न ले ।

    इन देशों में अभी भी इन प्रक्रियाओं को मासिकधर्म के समान प्राकृतिक माना जाता है, और इसलिए किशोरियों की सुविधा के लिए गर्भनिरोधक का इस्तेमाल तो  दूर की बात है।

    यहां तक की प्रशिक्षित डॉक्टर की सलाह और दवाइयाँ लेने गई किशोरियों के प्रति लोगों के मन में नकारात्मक विचार आते हैं ।

    परिवार में विश्वास करने में असमर्थता :-          

    हालाँकि विभिन्न देशों में अलग -अलग कानून और पारिवारिक मूल्य हैं, लेकिन बहुत से देशों में स्थिति निम्न प्रकार है -

    युवा लड़कियां अक्सर अपने परिवार के सदस्यों को यह नहीं बताती कि उनका बॉयफ्रेंड है, और वे प्रेग्नेंट हैं ।

    बहुत से देशों में  १६ वर्ष से कम उम्र की महिला को गर्भपात कराने के लिए क़ानूनी रूप से एक अभिभावक  या माता -पिता के साथ की आवश्यकता होती है।

    ये लड़कियां अपने परिवार पर विश्वास नही कर सकती, और इस वजह से वे क़ानूनी रूप से गर्भपात नही करा सकती, जिससे या तो उन्हें एक बच्चा हो जाता है, या वे अनाधिकृत डॉक्टर या हॉस्पिटल  जाती हैं, जो उन्हें नुकसान पहुंचा सकतें हैं।

    रूढ़िवादी धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वास :-

    कठोर सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वास इसमें मदद देते हैं, ऐसा नही लगता, क्योंकि युवा लोग अबतक सेक्स के साथ प्रयोग कर रहे हैं।

    हालाँकि वे गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करें या नही, ये उनका धर्म या संस्कृति, जिसे वे मानते  हैं, निर्धारित करता है।

    ऐसा देखा गया है कि रूढ़िवादी पृष्ठभूमि के युवाओं का विश्वास होता है कि गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए ।

    इस समस्या से निपटने के कुछ सुझाव:

    हमें  एक बेहतर समाज, जागरूक समाज और एक  अच्छे माता-पिता बनना है।

    सेक्स की शिक्षा इसलिए दी जाती है कि आप सेक्स करने की तरफ attract न होकर बल्कि इसे सुरक्षित रूप से करें । और यह एक प्राकृतिक उत्सुकता है, और अक्सर इसकी कोशिश करने वाले परवाह नहीं करते कि वे क्या करने जा रहे हैं ।

    प्रिय पाठकों यह जानकारी हम इसलिए दे रहे हैं ताकि, समाज किशोरों द्वारा हुई गलती को उनका अपराध मानने की बजाय, उन्हें सेक्स के बारे में सही जानकारी दें, सलाह दें, मार्गदर्शन करें, ताकि वे आप पर विश्वास करें और अनियोजित गर्भधारण से खुद को बचा सकें ।

    Image credit 1 2 

     

  • 12 Jan
    Mandavi Pandey

    कुंदन जोया से बेहद प्यार क्यों करता था ?

    Aakarshan  ka lokpriyata se kya samband hai

     

    अगर आपने रांझणा फिल्म देखी है, तो आप समझ जायेंगे कि किशोरों के लिए आकर्षण का कितना महत्व होता है। हालाँकि ,इसमें कोई शक नही है कि, आकर्षित व्यक्ति अपने आकर्षण के बल पर किसी को भी अपने कंट्रोल में कर सकते हैं । और कभी-कभी वे इसका इस्तेमाल दूसरों को नुकसान पहुँचाने में भी कर सकते हैं।

     

    आकर्षक होने के फायदे:

    अनुसंधानों से पता चलता है कि, अगर आप आकर्षक (attractive)   हैं तो आप इसका इस्तेमाल  फ्रेंड्स और लाइफ पार्टनर चुनने में कर सकते हैं । आप अपने आकर्षक (attractive) होने के बल पर पॉलिटिक्स(politics) में या फिर कैरियर में भी अपना प्रभाव डाल सकते हैं । और ये तो हम सब जानते ही हैं  कि अभिनय की दुनिया को यह कैसे प्रभावित  करता  है।

     

    लेकिन ऐसा क्या है कि, जो हम आकर्षण(attractiveness) को  इतना महत्व देते हैं ?

    क्यों हम आकर्षक चेहरा पसंद करते हैं ?

    आप देखने में अच्छे हैं, इसका मतलब क्या आपका नेचर(nature) अच्छा है?

    और समाज में आप अपने आकर्षक चेहरे की वजह से पॉपुलर (popular)हो जाते हैं ?

    लोग attractivness को इतना क्यों अच्छा मानते हैं ?

     

    लोकप्रियता पर हुए रिसर्च का परिणाम

    बहुत से शोध आकर्षण (attractivness)और लोकप्रियता(popularity) के ऊपर अलग -अलग और दोनों को मिलाकर किये गए हैं। संक्षेप में लोकप्रियता पर हुए रिसर्च(research) से यह बात पता चलती है कि, पॉपुलैरिटी popularity दो प्रकार की होती है

    एक कितने लोग आपको कितना पसंद करते हैं?

    और दूसरा समाज में आपकी चर्चा कितनी है?

    ये दोनों एक जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यहां बहुत सूक्ष्म अंतर है। आगे वाले का मतलब है कि लोग आपको अच्छा और मिलनसार मानते हैं । पीछे वाले का मतलब  है कि, आप जो चाहते हैं वो पाते हैं ।

     

    बच्चे भी आकर्षक चेहरे को वरीयता देते हैं।

    आकर्षण पर हुए रिसर्च से यह पता चलता है कि, बच्चे जिनको वास्तव में मीडिया या समाज में किसी भी प्रकार  का एक्सपोज़रexposure नहीं मिला है उनका भी खिचाव आकर्षण की तरफ हो सकता है और वे भी आकर्षक चेहरे को वरीयता देते हैं।  लेकिन चेहरे का भाव जो उसे आकर्षक बनाता है, वह है समरूपता और माधुर्य (आप ज्याद क्रोध नहीं करते, हंसमुख स्वभाव के माने जाते हैं ) 

     

    तो क्या हैआकर्षणशीलता  का मतलब ?

    इसलिए आकर्षणशीलता  का मतलब है, ऐसा चेहरा जो समरूपता और औसत हो इसका यह मतलब भी है, कि वह चेहरा जो स्वस्थ और खुश है।

    जीवन के विकास क्रम के अनुसार वे लोग जिनका अनुवांशिक जीन अच्छा है, वे  संभावित आनुवांशिक गुणों में अच्छा योगदान दे सकते है। एक खुशनुमा चेहरे वाले व्यक्ति से कम संभावना रहती है कि वह किसी को हानि पहुंचा सकता है ।

     

    आकर्षण पर हुए अनुसंधानों से पता चला है कि जो बच्चे ज्यादा आकर्षक होते हैं, वे  माता-पिता, दूसरे बच्चों और उसी तरह अन्य वयस्कों की ओर से ज्यादा ध्यान पाते हैं,  जिससे उन्हें सामाजिक दक्षता का ज्यादा अभ्यास होता है। इसलिए ऐसे लोग अपनी इसी गुण की वजह से लोगों से जल्दी घुल मिल जाते हैं, ज्यादा मिलनसार होते हैं और वे धन,हैसियत, उन्नति,ताकत,धनवान जीवन साथी आदि जल्दी और सरलता से पा जाते हैं ।

     

    इसका मतलब यह भी है की सिर्फ सुन्दर होना ही इस बात का proof  नहीं है कि अब आप जो चाहे वो पा सकते हैं, सुन्दर होना और आकर्षित होना दो अलग अलग चीजें हैं अगर आप सुन्दर हैं पर हंसमुख नहीं तो आप समाज में पॉपुलर नहीं हो सकते ।   आपको खुद भी प्रयास लगाना होता है, आप की मुस्कान, आप का बोलने-चलने का अंदाज, आपका पहनावा, आपका उचित व्यवहार यह सब भी काफी महत्वपूर्ण होते हैं ।

    इसलिए हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहा करते हैं  ‘Be presentable’

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