कुल 169 लेख

  • 26 Jan
    Shiva Raman Pandey

    7 सुझाव कि कैसे तानाशाह बॉस के साथ काम करके खुश रहें।

     

    suffocating boss

     

    दीपक जैसे ही ऑफिस पहुँचा, बॉस ने उसे अपने केबिन में बुला लिया । बॉस के केबिन से बाहर निकलकर दीपक मन ही मन बड़बड़ाते हुए अपनी सीट तक आया...उफ़! ये बॉस रोज कोई न कोई गलती मेरे काम में निकाल ही लेते हैं, समय पर काम न हो तो धमकियां अलग देते हैं, खुद तो सिर्फ आदेश देना जानते हैं, हिटलर कहीं के...और भी न जाने कितनी बातें। सहकर्मी भी उसकी हाँ में हाँ मिला रहे थे।

    क्या ऐसा हो सकता है कि, बॉस और कर्मचारी के बीच अच्छे संबंध हो जाएँ और ऑफिस का माहौल खुशनुमा और सहयोगात्मक हो जाये?

    बहुत से लोग दीपक की ही तरह ऑफिस में अपने बॉस की बुराइयां और उनके रूखे व्यवहार की बातें करते हैं, उनका ज्यादातर समय खडूस बॉस और उनके बुरे व्यवहार की बातें सोचने में ही गुजर जाता है। क्या हम ऐसे बॉस को संभाल सकते हैं? हाँ जरूर ! आइये जानते हैं कैसे...

     

    सबसे पहले ये तय करें कि क्या वाकई में आपके बॉस बुरे हैं, या सुनी सुनाई बातों पर आपने ये धारणा बना रखी है। क्या सच में पिछले हफ्ते या पिछले महीने में उन्होंने कोई ऐसा काम किया है, जिससे आपको तनाव का अहसास हुआ। यदि आप ये बातें याद नहीं कर पा रहें तो एक हफ्ते में कितनी बार उनके व्यवहार से आपने तनाव महसूस किया, और यह किस प्रकार का है, इसे नोट कर लीजिये।  

    बॉस के प्रकार :-

    बुरे बॉस के भी कई टाइप होते हैं :)

    Bully type: इस प्रकार के बॉस आपको छोटा और बेकार का होने का अहसास कराएंगे।

    Bad communicator: इस प्रकार के बॉस काम को कैसे करना है, ये मुश्किल से ही समझायेंगे।

    Micromanager: इस प्रकार के बॉस छोटी से छोटी हर बात आपसे जानना चाहेंगे।

    Saboteur: इस प्रकार के बॉस अच्छे कामों का श्रेय स्वयं लेंगे और बुरे कामों का दोष आपके ऊपर लगा देंगे।   

    Fickle boss: इस प्रकार के बॉस का मूड कब कैसा हो, नहीं कहा जा सकता।

    चलिए ,हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देते हैं, जिनपर अमल करके आप हर प्रकार के बॉस के साथ सहज हो सकेंगे :-

    1.सूचना देना :-कार्य के प्रत्येक कदम की सूचना दें और साथ ही उसकी एक फाइल भी अवश्य  बनाएं ताकि आप micromanager का विश्वास और saboteur मैनेजर को फाइल के रूप में एक सबूत भी दे सकें और उनका विश्वास जीत सकें।

    2.अपनी बात स्वयं रखें :- bully type के या अन्य प्रकार के बॉस भी manage किये जा सकते हैं, यदि आपको ये पता हो कि कैसे खुद के प्रति विश्वास के साथ अपनी बात रखनी है। आपको बिना क्रोध या तेज आवाज के शांत होकर सिर्फ अपनी बात कहना है। यदि आप ऐसा नहीं करते तो बॉस का bullying व्यवहार और अधिक बढ़ सकता है।

    3.इसे सिर्फ पेशे तक ही रखें:- दिल पे मत ले यार ! बॉस के नखरे और मिजाज को दिल से नही लेना चाहिए। बॉस ये बात ना भी कहें तो भी आप को स्वयं ये बात समझनी चाहिए कि ये आलोचनाएं एक जॉब या कार्य के बारे में हैं, न की आपके बारे में।

    4.पहले से समझ लेना :- बॉस के साथ कैसे बात करना है ,या बात जानते हुए समस्या को पहले से समझ कर उसके समाधान करने में आप इसका इस्तेमाल अच्छी तरह से करें। बेहतर होगा यदि इस बारे में पहले से बॉस से बात कर लें,कहीं किसी कार्य के प्रति उन्होंने ज्यादा उम्मीद तो नहीं पाल रखी है।

    5.थोड़ा हँस लें :-हंसना या किसी अन्य प्रकार का मनोरंजन आपको कार्य और उसके तनाव से बहुत जरूरी ब्रेक देता है। जिससे आप तनाव पूर्ण स्थिति को अच्छे से सम्भाल सकते हैं।

    6.उलझें नही :-यदि बॉस के सामने किसी स्थिति में क्या करना है, ये आप नही समझ पा रहें हैं तो उनसे उलझने की बजाय आप यह कहकर कि मुझे कोई दूसरा जरूरी काम पहले करना है या अभी मेरी तबियत ठीक नही है कहकर वहां से हट जाएँ। और फिर कार्य की बेहतर रणनीति के साथ वापस आएं।

    7.नजरिया बदलें :-कभी कभी अपनी छोटी सोच के कारण हम दूसरों के अंदर कमियां ही निकलते हैं, एक बार अपना नजरिया बदलकर देखिये कि आपके जॉब, आपके सहकर्मियों और यहां तक कि आपके बॉस (जब वो गुस्से में ना हों ) कि कौन सी अच्छी बात को आप पसंद करते हैं। सोच कर देखिये ,चीजें बदल जाएँगी।

    8.छोड़ दें :-यदि ऊपर के कोई भी उपाय आपके और आपके बॉस के बीच के संबंध को नही सुधार पा रहें हैं और आपके शरीर और मन पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है, तो बेहतर होगा कि अधिक हानि होने के पहले आप इस कार्य क्षेत्र को छोड़ दें।

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  • 25 Jan
    Shiva Raman Pandey

    कार्य पूर्ण करने के लिए अपने मस्तिष्क को प्रशिक्षण दें

     

    procrastination 

    "काल करै सो आज कर, आज करै सो अब।

    पल में परलय होएगी, बहुरि करोगे कब । ।

    कबीरदास जी का यह दोहा हमें आलस का त्याग करके और कार्य को कल पर ना टालने की सीख देता है।

    रूचि पढ़ने बैठती है तो कभी उसका मन कहता।।। कि,पढ़ ले और याद कर लें, वहीं दूसरा आलसी मन कहता.... "अरे ! अभी क्यों मेहनत कर रही है, अभी तो एग्जाम नहीं हो रहें, जब एग्जाम होंगे तब याद करना"... और ऐसा करते करते एग्जाम पास आ जाते, और तब रूचि घबराती...........पढ़ाई अच्छे से नहीं की है,एग्जाम में क्या होगा?

    समय पर अपना कोर्स न पूरा कर पाने के कारण एग्जाम में उसके मार्क्स अच्छे नहीं आ पाते।

    क्या ऐसा आपके साथ भी होता है?

    समय पर अपना कार्य न पूरा करने की आदत से क्या आप  भी परेशान हैं?

     

    तो आइये जानते हैं कि, कार्य पूर्ण करने के लिए कैसे अपने मन को प्रशिक्षित कर सकते हैं।.........

     

    क्या आपने अभी तक दिए गए काम को शुरू भी नही किया है, जिसे आप तीन दिन पहले शुरू करने वाले थे?

    क्या आप सिर्फ एग्जाम के समय पढ़ाई करते हैं?

    क्या हर बार आपको लगता है की काम समय पर पूरा ना करना मेरी गलत आदत है?

    ऐसा लगना कि आपके दो मन हैं....

     

    इस आदत को कम करने के लिए यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं :

     

    1.प्रतिदिन छोटे-छोटे कार्य को पूरा कीजिये:

     *सबसे पहले तो हाँ, मै ये काम कर सकता हूँ ऐसा अपने मन को सिखाएं।

    *मन को यह विश्वास दिलाएं कि बहुत कठिन कार्य भी सम्भव है।

    *फिर जब हमारा मन यह विश्वास करने लगता है, तो हम उस काम को पूरा करने के लिए कठिन मेहनत करते हैं।

     हमें कठोर परिश्रम और नियमित अभ्यास कर अपने मन को सिखाना होगा । प्रतिदिन छोटे-छोटे कार्य को पूरा करके हम ऐसा कर सकते हैं ।

    यह देखा गया है कि,जब हम अपने कार्य में देर करते हैं तो उसका कारण हमारे अंदर के दो मन होते हैं ।

    मन का एक भाग हमसे काम करने के लिए कहता है, लेकिन दूसरा भाग सिर्फ दो बातें जानता है आत्म रक्षा के लिए भागना या आराम करना। जब हमारा सामना किसी भय या चिंता से होता है तब मन का दूसरा भाग सक्रिय हो जाता है। तो यदि हम किसी कार्य में टाल- मटोल कर रहे हैं, तो हो सकता है, उसका कारण कोई चिंता हो।  यह चिंता-

    कार्य कहाँ से शुरू करें, ये समझ में नही आने के कारण हो ,

    या कार्य को करने में अप्रसन्नता होने के कारण हो सकता है ,

    या  यह केवल असफलता के डर से हो।

     

    2.असफल होने के डर को मार भगाइए :-

    किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए हमें असफलता के डर को अपने मन से दूर करना होगा।

    क्योंकि जब हम डरते हैं, तो हमारे मन का दूसरा भाग सक्रिय हो जाता है और फिर  हम कहीं किसी बरामदे में बैठकर अपने मनपसंद टीवी सीरियल्स देखने में लगे रहते हैं।

     

    3.निराश करने वाले विचारों को पहचानें :-

     इसलिए अब जबकि आलस करने के कारणों को जान गए हैं,तो अब से हम कार्य को टालें नही यह सुनिश्चित  करने के लिए हम कौन से कदम उठा सकते हैं?

    *सबसे पहले भय या चिंता जैसे विचारों को मन में आने से रोकना होगा                      

    *जो विचार हमें निराश करते हैं उन्हें पहचानना होगा। हमें अपनी इच्छा, भय, क्रोध, और समस्त भावनाओं को नियंत्रित करना सीखना होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि, नकारात्मक विचार हमारे आसपास नहीं होने चाहिए ।

     * हमें अपने लक्ष्य की योजना बनाने की आवश्यकता है, और कार्य को छोटे भागों में बाँट कर हर छोटे भाग को पूरा करने की समय सीमा तय करना होगा।

     

    4.साधन की planning:

     हमें साधनों की योजना बनाने की आवश्यकता है। यदि हमें एक कार्य को करने के लिए दस वस्तुओं की आवश्यकता है, तो जब हम कार्य करने के लिए बैठें तो हमारे पास वे दस वस्तुएं होनी चाहिए।

    साधनो को जुटाने के लिए कदम बढ़ाना कार्य को करने की दिशा में उठाया गया पहला कदम हो सकता है।

    हमें कार्य प्रक्रिया कि योजना बनाने की भी आवश्यकता है :कार्य का कौन सा हिस्सा अधिक समय लेगा, कौन सा कम और कौन से भाग में किसी अन्य की मदद ली जा सकती है....

    किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए जरूरी है उस कार्य को 'मन लगा कर' और 'पूरे विश्वास' के साथ किया जाय। इनके बिना हम सफल नही हो सकते।

     

    5.अपनी सफलता के प्रति सकारात्मक रहें:-

    जो भी कार्य आप शुरू करें उसकी सफलता के प्रति सकारात्मक रहें ,इसके लिए आपको लगातार कार्य करना होगा, एक बार आप उस पर कार्य करना शुरू करते है ,तो आप आत्मविश्वास पा लेंगे।

    याद रखें जब कोई समस्या आपके पास आये,  और आप इसे हल करने के लिए कठिन कार्य करते हैं ,इसका मतलब आपका मन लगातार प्रयास से समस्या हल करने की आदत प्राप्त कर रहा है।

    ऐसा हो सकता है कि कभी आपका मन कार्य करने में नही लग रहा, लेकिन इसे पार कर लिया जाना चाहिए, और आप वापस कार्य करने  की राह पर आ जाएँ।

    ध्यान, योग, आसन और व्यायाम भी आपके मन को ताजगी, ध्यान केंद्रित करने और अच्छा मानसिक विकास करने में मदद करते हैं।

     

    6.असफलता- सफलता की ओर ले जाने वाला कदम है: 

    असफलता वह चीज है, जो हमें गिर जाने का भय दिखाती है, और हम एक ही जगह(comfort zone) पर हमेशा स्थिर रहते हैं।

    इसलिए स्वयं से कहो, कि असफलता, सफल होने का एक कदम, और 'सीखने की प्रक्रिया' है। इससे आपके मन में असफलता के कारण उत्पन्न चिंता खत्म हो जायेगी।

    दूसरा तरीका ये है की आप ये सोचें कि मैं फेल हो सकता हूँ। फिर तो आप देखेंगे कि कैसे आप स्वयं को पास करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं,

    आशा है, इन सुझावों पर अमल करके हम आगे से अपने सभी कार्य समय पर पूरा करना सीख सकते हैं।

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  • 25 Jan
    Mandavi Pandey

    पति को रिझाने के तरीके

    happy indian couple

    पति को रिझाने के तरीके 

    “जब हमारी शादी होने वाली थी, तो राज मुझसे मिलने के लिए बेचैन रहते थे, साथ-साथ  घूमना, फ़िल्में देखना सब इतना अच्छा लगता था।....... अब शादी के दस सालों के बाद हमारा प्यार....... घर,परिवार की जिम्मेदारियों और बेरंग दिनचर्या के बीच कहीं खो सा गया....... "काश ! वो दिन फिर से वापस आ जाते।“ ये सब सोचते-सोचते नेहा भावुक सी हो गयी। 

    वैवाहिक जीवन की भाग -दौड़ में खो जाना काफी आसान होता है, यदि आप अपने रिश्ते को जवान बनाये रखने के लिए कुछ नहीं  करते तो इसका आकर्षण जल्दी ही कम होने लगता है। इसलिए विवाह में नवीनता की कमी के बावजूद कैसे आप अपने दिल में अपने रिश्ते को जवान बनाये रख सकते हैं ?

     

    यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिनसे आप अपने पति की फिर से प्रेमिका बन अपने जीवन में नवरंग घोल सकती हैं । 

     

    1.प्रशंसा:-

    आपके जीवन में जीवन साथी का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है, और इस बात का उन्हें अहसास कराएं।     कहीं ये बातें आप भूल तो नहीं गयीं? और उन्हें भी परिवार के  सामान्य सदस्यों की श्रेणी में शामिल कर लिया है ?तब तो आपने एक छत के नीचे रहने के कारण होने वाले तनावों में भी उन्हें शामिल ही कर लिया होगा। ...,जैसे- आप बगल के खर्राटों से जाग जाती हों, और आप अपने पति की पुरानी छवि(बॉयफ्रेंड) से तुलना करतेहुए उनकी अच्छी बातों को भी अनदेखा करने लगती है। यही तुलना आपके पति को आपकी नजर में सामान्य बना देती है।

    ऐसे समय में आप पति की उन अच्छी बातो को ध्यान रखें जिनकी वजह से आपको उनसे प्यार हुआ था।   बढ़िया और अच्छी बातों, के लिए उन्हें सराहें और उनके व्यवहार की प्रशंसा करें। यदि वह आपकी  घर के साथ बाहर के कामों जैसे  सामान लाना, बिजली-फोन के बिल जमा करना आदि में मदद करते हैं या आपके और सासु माँ के बीच विवादों को शांत करने में मदद करते हैं तो उनकी प्रशंसा करना ना भूलें। इन सबके लिए उन्हें धन्यवाद दें , और गले लगाकर या कुछ ज्यादा देकर इसे और  मजबूत बनाये।

     

    2.स्वतंत्रता :-

    हालाँकि बहुत ज्यादा स्वतंत्रता आप दोनों के बीच दूरी ला सकती है,थोड़ी आजादी स्वस्थ  रिश्ते के लिए महत्वपूर्ण होती है। उन्हें अपने दोस्तों के साथ कुछ समय के लिए मजे लेने दें, और आप भी स्वयं का आनंद लेनासुनिश्चित करें, अपने  शौक में व्यस्त रहें या अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाएँ। जब आप थोड़ा समय अलग बिताते हैं तो आप fresh हो जाते हैं और यह नई ऊर्जा के साथ एक दूसरे के पास वापस आने में आपकी मदद करेगा।

     

    3.सजना:-

    "सजना है मुझे 'सजना' के लिए" ये गाना आपने जरूर सुना होगा ,जिसमें पत्नी अपने पति को रिझाने के लिए सज रही है। जब डेटिंग पर जाना होता है तो जोड़े एक दूसरे को अच्छा दिखने के लिए तैयार होते हैं। शादी के बाद ये व्यवहार कम हो जाता है, क्योंकि ये चीजे रोजमर्रा की हो जाती है। हालाँकि अभी भी सिर्फ उन्ही के लिए तैयार होना, जब कोई खास मौका ना हो, उन्हें स्पेशल होने का अहसास करायेगा। इसी तरह आप घूमने जाना हो या साथ में कुछ अंतरंग क्षणों के लिए भी आप अच्छे से तैयार होकर उनके पास  जाएँगी तो उनकी नजरें आप पर से नही हटेंगी,और उन्हें अहसास होगा कि उनकी रोमांटिक प्रेमिका वापस आ गयी है, कुछ समय एक दूसरे के साथ बिताएं और इन पलों का आनंद लें।

     

    4.सरप्राइज :-

    संबंधो में नई जान फूंकने के लिए सरप्राइज या संवेदनात्मक कोशिश से बड़ा कुछ नही होता है। उनके काम के कुछ बोझ को अपने हाथ में ले लें ,या उनके लिए कुछ स्पेशल बनाएं, या बिना किसी खास अवसर के उनके लिए कुछ स्पेशल गिफ्ट लाकर दें। एक आइडिया ये कि उनके दोस्तों को घर पर डिनर के लिए आमंत्रण दें जिससे उन्हें लगे कि आप वास्तव में उनकी और उनके संबंधों  की परवाह करती हैं।

     

    5.आप जैसा कोई नही:-

    आपके पति क्रिकेट,राजनीति,और ऑफिस की बातें करना पसंद करते हैं ,और आप फिल्म ,बाहर घूमने जाना ,और अपनी भावनाओं की बातें करना चाहती हैं। आप दोनों ही अपनी जगह सही हैं। कभी बाहर जाने का मन हो तो पहले ही अपने पति को बता दें जिससे उन्हें भी अपना मन बनाने का मौका मिल जायगा, और आप दोनों में तू-तू, मै-मै की जगह कुछ मीठी बातें होगी। उनमे कुछ खास है, जिसके लिए आप उन्हें प्यार करती हैं।

    तो जीवन साथी को अहसास कराएं कि "सारे शहर में आप जैसा कोई नही.... कोई नही"। 

    आगे पढ़ें :

    कैसे बनें अपने पति की सच्ची जीवनसंगिनी
    क्या modernization से शादी के मतलब बदल गए हैं?

     

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  • 25 Jan
    Shiva Raman Pandey

    थेरेपिस्ट (चिकित्सक) न ही भगवान है, न ही जादूगर

    therapist

     

     

    थेरेपी या काउंसलिंग के बारे में बहुत सी गलत धारणाएं होती हैं जिनके कारण लोग चिकित्सक को एक जादूगर मानने लगे हैं। चिकित्सक से इतनी ज्यादा अपेक्षा करना क्या सही है?....

    क्योंकि कई बार होता ये है कि मरीज अप्रशिक्षित और गैर पेशेवर के चक्कर में फँस जाते हैं जो मरीज के किसी प्रश्न का उत्तर नही देते, और अपर्याप्त सेवाओं के लिए ज्यादा फीस वसूलते हैं। दूसरी तरफ इस धारणा के कारण मरीज चिकित्सक से किसी चमत्कार की उम्मीद करने लगते हैं, और सब कुछ चिकित्सक के ऊपर छोड़ देते हैं, और स्वयं कुछ नही करते।


    थेरेपी एक सहयोगी प्रक्रिया है.... 
    मरीज से यह उम्मीद की जाती है कि वह थेरेपी के दौरान समान रूप से शामिल हो और नियमित रूप से पूछे गए सवालों के जवाब दे। लेकिन जब मरीज चिकित्सक को भगवान या जादूगर मानने लगते हैं, तब वे चिकित्सक के सुझावों को आदेश की तरह लेते हैं जिसका पालन किसी भी कीमत पर किया जाना है । ,इसके बारे में चिकित्सक से कोई चर्चा नही करते और इसलिए यह एकतरफा और बेमानी हो जाती है।


    थेरेपी का मतलब विचारों और भावनाओं का वास्तविक बदलाव है ।

    थेरेपी के दौरान व्यक्ति के मन में बदलाव आने पर उसके विचार और भावनाएं बदलने लगती हैं। और यह होना भी चाहिए । यदि वह चिकित्सक को भगवान मान बैठेगा तो कैसे उनसे अपनी किसी गलत भावना को बता पायेगा, जिससे पूरी चिकित्सा झूठी हो सकती है । वह चिकित्सक की हर बात पर सिर हिलाकर सहमति दे देगा, और जिसके कारण विचारों और भावनाओं का कोई भी वास्तविक बदलाव नहीं हो सकता।


    मिल कर विचार करना ही सबसे अच्छा समाधान होगा ।

    इसलिए सिर्फ चिकित्सक से बातचीत करके समस्या गायब नहीं हो सकती। वे आपकी बात ध्यान से सुनते हैं, जिससे आपको अच्छा महसूस होगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप को कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है। समस्या के बारे में बात करना तो शुरुआत है। आपको इसका हल निकलने के लिए जो भी मुश्किल हैं उन पर मिलकर बात करें।

     

    वास्तविक उपचार के लिए थेरेपी पर विश्वास करना बहुत जरूरी है।
    चिकित्सक सब कुछ जानता है और यही आप के लिए सबसे अच्छा है। क्योंकि जब तक आप उन्हें अच्छा दोस्त नहीं मानेंगे,अपनी गलतफहमियों और कमियों की खुलकर चर्चा नहीं करेंगें तब तक आप कैसे थेरेपिस्ट को अपना विश्वसनीय दोस्त बना पाएंगे ।


    थेरेपिस्ट को बहुत प्रभावशाली मानना भी गलत होगा।
    शोध बताते हैं कि जो लोग थेरेपिस्ट को ऊँचे और प्रभावपूर्ण स्थान पर रखते हैं,उनके साथ यह संभावना अधिक रहती है कि वे अपने जीवन में भी अन्य व्यक्तिओं को स्वयं से ज्यादा प्रभावशाली मानते हों, इसका मतलब वे उनमें आत्मसम्मान की कमी है । उन्हें इस चलन में सुधार लाना चाहिए। थेरेपिस्ट के साथ अच्छे संबंध परामर्श की अच्छी शुरुआत में मदद करेगा।

     

    थेरेपिस्ट आपका गाइड या एक अच्छा दोस्त है।
    थेरेपिस्ट को अपना एक अच्छा गाइड या एक सच्चा दोस्त मानना चाहिए ,जो हमेशा आपका भला चाहता है, लेकिन यदि आप उससे असहज महसूस कर रहे हैं तो आप बता सकते हैं और मिलकर इस पर काम करना चाहिए।

  • 22 Jan
    eWellness Expert

    गुस्सा हमें क्यों आता है ? कैसे इसे कंट्रोल करें?

    angry

     

    वैज्ञानिकों के अनुसार यह भावना व्यक्त करने का माध्यम है, जैसे  हम जब ज्यादा परेशान हो जाते हैं, या हमारे मन में कोई डर बैठ जाता है... या फिर हमें किसी चीज के खो जाने का डर होता है... जैसे हमारे अपने,  हमारी इज़्ज़त, संपत्ति, या खुद की पहचान। और ख़ास कर तब, जब हमारे पास ऐसे हालत से निपटने  के लिए कोई हल नजर नहीं आता ।

    उदाहरण के लिए:

    हम किसी को कोई बात समझाना चाहते हैं, और वह  व्यक्ति उस बात को समझने की बजाय आप से वाद-विवाद करने लगे...तो आप अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए गुस्से का सहारा लेते हैं ।

    या फिर हमें पता चलता है, कि हमारे अपनों को, कोई नुकसान पहुंचाना चाहता है पर हम कुछ  कर नहीं पाते हैं, तो हमें खुद पर गुस्सा आता है...

    अगर आप अपने गुस्से को काबू में नहीं रख पाते, तो इससे..

    आपका ही नुकसान है ...

    आपका स्वास्थ्य खराब होता है..

    आपके मस्तिष्क को हानि पहुँचती है...

    आपका ब्लड प्रेशर बढ़  सकता है,

    यहाँ तक, इसके अधिक प्रचार से दिमाग की नसें फट सकती है, और इंसान की मौत भी हो सकती है...

    हम गुस्से में अपना साधारण स्वभाव भूल जाते है, क्योंकि इसकी वजह से हमारे मस्तिष्क में हॉर्मोन्स के प्रभाव से दिमाग सुन्न हो जाता है, और हमारे सोचने की क्षमता पर असर पड़ता है, हम ऐसा बुरा व्यव्हार करते हैं जिसका बाद में हमें पछतावा होता है ।

    क्रोध से हम सिर्फ अपना ही नहीं,  हमारे अपनों की भी हानि करते हैं । हमारे अतिरिक्त गुस्से से वे भी परेशान हो जाते हैं। उन्हें हमारे कठोर जवाबों से दुःख और तकलीफ होती है, धीरे धीरे वह हमसे दूर होने लगते हैं।

    बाहर भी, क्रोधित इंसान के स्वभाव की वजह से, कोई उन्हें पसंद नहीं करता।

    क्रोध को नियंत्रण में लाने के लिए, पहले उसके होने वाले कारण को पहचानना जरूरी है ।

    आइये जाने गुस्से को काबू में करने के कुछ गुण:

    1.बात करते वक़्त, अगर वाद-विवाद की संभावना दिखे तो खुद को  तर्क से दूर रखिये ।

    2.गुस्से को शांत करने के लिए अच्छा गाना गायें या सुनें (जो आपको पसंद हो)

    3.अच्छी चीज़ें सोचें, जो चीज़ें आपको ख़ुशी देती है।

    4.क्रोध को कम करने के लिए बातचीत बंद करें, और खाने में जो चीज़ पसंद है, उसे स्वयं के लिए बनाना शुरू करें, तो कुछ ही समय में आप क्रोध को भूल जायेंगे ।

    5.योगा, हमारे शरीर और मन की संतुलन को ठीक रखने में हमारी मदद करता है। हर रोज़ योगा का और मैडिटेशन का प्रयास, क्रोध को नियंत्रण करने में बहुत हद  तक मदद करता है।

    अगर कुछ काम ना आये तो ज्ञानी पुरुषों की बात मानें और अकेले में "ॐ" स्वर का प्रयोग करें। laughing

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