• 23 Oct
    eWellness Expert

    जीवन में सपनों के साथ साथ भविष्य की चिंता भी करनी चाहिए।


    ambition

     

    कर्म क्षेत्र की दुविधा हम सब में होती है। कौन से विषय पर पढाई करनी चाहिए, कौनसा क्षेत्र नौकरी इत्यादि के लिए लाभदायक है, ये हम सभी को सोचना पड़ता है, पर साथ में यह भी सोचना पड़ता है कि हमें क्या पसंद है, और आजकल इसी पर ध्यान ज़्यादा दिया जाता है, कि बच्चा क्या चाहता है। हालाँकि  माता-पिता हमेशा बच्चों को अपने जीवन में समृद्ध और खुशहाल देखना चाहते हैं, और इसीलिए उनकी चेष्टा रहती है, कि बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बने। पर किसी भी तरह का दबाव बच्चों पर बुरा असर डालता है, और इसलिए, हम क्या पसन्द करते हैं, किस विषय में हम अच्छा काम कर सकते हैं,यह सब सोचने की आज़ादी हमें  मिलती है।

    पर हमारा निर्णय भी क्या हमेशा जीवन के लिए सही होता है? आज हमें कुछ पसंद है, कल कुछ और पसंद हो सकता है; हम इंसान है, और वक़्त के साथ साथ हमारी सोच और रुचि भी बदलती है, मान लीजिये, आज आप कॉलेज में हैं, फेस्ट और कॉन्सर्ट वगैरा आपको आकर्षित करते  है, इसलिए आप संगीतकार बनना चाहते हैं, लेकिन आज से ६ साल बाद, कौन कह सकता है, इसी निर्णय के लिए आप पछतायेंगे नहीं! जीवन में ठहराओ आने पर आपको आर्थिक लाभ का महत्व मालूम होगा।

    इसलिए जब हम किसी विषय पर आगे पढ़ने की सोचते है, तो यह निर्णय अहम है, और सोच समझ कर लेना चाहिए; अपनी ख़ुशी और सपनों के साथ साथ भविष्य की सुरक्षा का ख़याल भी रखना चाहिए।

    जब तक घर में अनाज है, तब तक सुर संगीत, सब अच्छा लगता है, ये कहावत में भी है, अगर आपको पता हो, कि आज आपको खाना मिल रहा है, कल नहीं भी मिल सकता है, तो इस स्थिति में, आप क्या संगीत बनाएंगे?

    इसका यह मतलब नहीं की आप ऐसा कुछ करें जिसमें आपको कोई रुचि नहीं। जिस भी विषय पर आप स्वीकृति हासिल करना चाहते हैं, उसे गंभीरता से जीवन में शामिल करें। अगर आप क्रिकेटर बनाना चाहते हैं, तो उसके लिये अधिक मेहनत की आवश्यकता है। विश्व स्तर पर महारत हासिल करने के लिए साधारण चेष्टा काफी नहीं, खर्च भी करना पड़ेगा और ये सब जानते हुए आपको फैसला लेना पड़ेगा।

    आपको उसी विषय को लेकर आगे बढ़ना चाहिए, जो आप अच्छा कर सकते हैं, ना कि वह, जो आपका शौक है। आपको वही करना चाहिए, जिसमें आपका भविष्य सुरक्षित हो, और मानसिक रूप से आप खुश और शांत रह पाएं।

    सब के लिए डॉक्टरी या इंजीनियरिंग करना आवश्यक नहीं, लेकिन इन विषय पर आगे पढ़ने से आपका करियर जल्द शुरू होता है, और आर्थिक रूप से सबल हो सकते हैं, इससे इंसान का मानसिक संबल बढ़ता है । आत्मनिर्भरता बेहत ज़रूरी है।

    जीवन में अर्थ भी ज़रूरी है, और इंसान का सपना भी। लेकिन सबसे ज़रूरी है शरीर और मन से स्वस्थ रहना, जो तभी सम्भव है जब आप सुरक्षित महसूस करें, हर तरह से सबल महसूस करें, और इसलिए, अपने सपनों को अवश्य महत्व दें पर साथ में भविष्य की सुरक्षा और करियर के बारे में भी सोच विचार कर लें।

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  • 29 Jan
    Oyindrila Basu

    जागो गृहणी जागो-नए जमाने के साथ खुद को ढालें ।

    work from home

    अकसर गृहवधूओं को लगता है, की उनका वक़्त घर बैठे बैठे बेकार हो रहा है, इसलिए वे किटी-पार्टीज या महिला सम्मेलनों में ज्यादा उत्सुक हो जातीं है। यह अकसर विदेशों में रहने वाले दोस्तों के घर में, आम बात है, जहां, वीसा और कुछ कानूनी प्रक्रियाओं की वजह से, सरकार की तरफ से पत्नियों को काम करने की अनुमति नहीं है। पर झुण्ड के साथ, दूसरों की चर्चा करने से अच्छा है, आप खुद घर से कुछ कोशिश करें।

    इंटरनेट हर चीज़ का समाधान है। आजकल #WorkFromHomeCulture ने नौकरी की प्रक्रिया को बदल डाला है। विभिन्न साइट्स पर ऐसे कई अच्छे ऑफर आते हैं, जिन में घर से नौकरी करने की आज्ञा होती है। अगर आप उपयुक्त हैं, तो नौकरी मिलना, और घर बैठे कमाना कोई बड़ी बात नहीं।

    आप खुद का कोई व्यवसाय भी शुरू कर सकतें हैं।

    अगर किसी ख़ास काम में आपकी रुचि है, जैसी सिलाई, या सजावट, तो उसका प्रयास भी आप कर सकती हैं, घर बैठे।

    पढ़ाई पूरी करना चाहें, तो वह भी आजकल घर से संभव है, #Edx में जाएँ और देखें कमाल :)।

    नृत्य गीत की चर्चा करने से आपका घर में दिल लगा रहेगा।

    नित्य कुछ न कुछ व्यायाम का अभ्यास ज़रूरी है। अगर खराब मौसम की वजह से जॉगिंग नहीं हो पा रहा है, तो घर में ही योगा और मैडिटेशन का अभ्यास करें।

    घर पर  वक़्त का ऐसे ही पूर्ण लाभ उठाते रहें।

     

    ऐसे में अगर इस खराब मौसम में आप और आपके पतिदेव घर पर छुट्टी मना रहे हैं और अगर आपको एक दिन घर पर बिताने का मौका मिल रहा है, तो उसे ना गवाएं। अपने साथी के साथ थोड़ी देर तक प्रातः झपकी का मज़ा लें। आप सिर्फ सो नहीं रहे होंगे, इस दौरान, उनको थोड़ा प्यार से निहार लें, दो प्यारी बातें कर लें, अपने बचपन की, या अपने खूबसूरत रिश्ते की, तो आपका दिन बन जाएगा।

    आज कुछ ख़ास करें , जिसमें, दोनों का सहयोग हो। जैसे, दोनों मिलकर

    घर को नई तरह से सजाएं।

    या फिर आप साथ में दोपहर को एक फिल्म भी देख सकते हैं।

    कोई जासूसी किताब का साथ में विश्लेषण करें,

    या फिर साथ में शतरंज भी खेल सकते हैं।

    अगर कहीं यात्रा का सोच रहें हैं, तो उसकी योजना भी साथ बैठ कर आज ही बनाएं।

  • 29 Jan
    Oyindrila Basu

    मौसम को मात दें-घर पर ही समय का सदुपयोग करें।

    boy reading at home

    दोस्तों,सर्दियों का मौसम है, और बाहर सर्द हवाओं की कँपकँपी मची हुयी है। दरअसल, क्रिसमस के बाद से ही, हमारे देश, और कईं बाहरी देशों में, तापमान के घट जाने से, मौसम घूमने फिरने, या पिकनिक मनाने के लिए सही नहीं रहता। इसी साल, दिल्ली और कलकत्ता में ठंड के प्रकोप को याद कर के ही रोंगटे खड़े हो रहे हैं, तो ऐसे में कोई अपनी मरज़ी से सज-संवर कर कहाँ जाये? सर्द के साथ साथ, धुंधला आसमान और बरसाती दिनों से मन उदास हुआ जा रहा है।

    हाल ही में, अमेरिका के कई जगहों में #स्नोज़िल्ला के दबाव से, घर से निकलना तो क्या, बाहर देखना तक मुश्किल हो रहा है, तो ऐसे में, आपकी शॉपिंग या लम्बी ड्राइव की इच्छाएं धरी की धरी रह जाती हैं।

    तो क्या करेंगे आप? अपने वीकेंड को व्यर्थ भी तो नहीं जाने दे सकतें। एक समय था, जब सर्दियों का मौसम सब से रोचक मौसम था । मज़ा, मस्ती, साज-श्रृंगार, भोजन और भ्रमण के लिए। पर अब बदलते वैश्विक मौसम ने ऐसी कहावतों को झुठला दिया है। आजकल, अजब मौसम की गज़ब कहानी, साल भर हमें परेशान करती है।

    पर आप परेशान न हों, जब हम हैं, तो क्या ग़म है।:P

     

    अगर आप घर परअकेले हैं, और मम्मी पापा, चाचा-चाची, या मामा-मामी के घर गयें है, तो भी बोर होने की ज़रूरत नहीं है। कुछ नया और अच्छा करें।

    जिस किताब को बीच में ही छोड़ दिया था, उसे पूरा करें।

    या फिर कोई नए चित्र की शुरुआत करें,(अगर आप आर्टिस्ट हैं तो)

    खुद के लिए कुछ ख़ास बनाएं, और अकेले ही उस खाने का मज़ा लें, कोई अच्छी फिल्म के साथ।

    अच्छा गाना भी सुन सकते हैं,

    या फिर अकेले अकेले एक लम्बी नींद का मज़ा लें।

  • 26 Jan
    Shiva Raman Pandey

    7 सुझाव कि कैसे तानाशाह बॉस के साथ काम करके खुश रहें।

     

    suffocating boss

     

    दीपक जैसे ही ऑफिस पहुँचा, बॉस ने उसे अपने केबिन में बुला लिया । बॉस के केबिन से बाहर निकलकर दीपक मन ही मन बड़बड़ाते हुए अपनी सीट तक आया...उफ़! ये बॉस रोज कोई न कोई गलती मेरे काम में निकाल ही लेते हैं, समय पर काम न हो तो धमकियां अलग देते हैं, खुद तो सिर्फ आदेश देना जानते हैं, हिटलर कहीं के...और भी न जाने कितनी बातें। सहकर्मी भी उसकी हाँ में हाँ मिला रहे थे।

    क्या ऐसा हो सकता है कि, बॉस और कर्मचारी के बीच अच्छे संबंध हो जाएँ और ऑफिस का माहौल खुशनुमा और सहयोगात्मक हो जाये?

    बहुत से लोग दीपक की ही तरह ऑफिस में अपने बॉस की बुराइयां और उनके रूखे व्यवहार की बातें करते हैं, उनका ज्यादातर समय खडूस बॉस और उनके बुरे व्यवहार की बातें सोचने में ही गुजर जाता है। क्या हम ऐसे बॉस को संभाल सकते हैं? हाँ जरूर ! आइये जानते हैं कैसे...

     

    सबसे पहले ये तय करें कि क्या वाकई में आपके बॉस बुरे हैं, या सुनी सुनाई बातों पर आपने ये धारणा बना रखी है। क्या सच में पिछले हफ्ते या पिछले महीने में उन्होंने कोई ऐसा काम किया है, जिससे आपको तनाव का अहसास हुआ। यदि आप ये बातें याद नहीं कर पा रहें तो एक हफ्ते में कितनी बार उनके व्यवहार से आपने तनाव महसूस किया, और यह किस प्रकार का है, इसे नोट कर लीजिये।  

    बॉस के प्रकार :-

    बुरे बॉस के भी कई टाइप होते हैं :)

    Bully type: इस प्रकार के बॉस आपको छोटा और बेकार का होने का अहसास कराएंगे।

    Bad communicator: इस प्रकार के बॉस काम को कैसे करना है, ये मुश्किल से ही समझायेंगे।

    Micromanager: इस प्रकार के बॉस छोटी से छोटी हर बात आपसे जानना चाहेंगे।

    Saboteur: इस प्रकार के बॉस अच्छे कामों का श्रेय स्वयं लेंगे और बुरे कामों का दोष आपके ऊपर लगा देंगे।   

    Fickle boss: इस प्रकार के बॉस का मूड कब कैसा हो, नहीं कहा जा सकता।

    चलिए ,हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देते हैं, जिनपर अमल करके आप हर प्रकार के बॉस के साथ सहज हो सकेंगे :-

    1.सूचना देना :-कार्य के प्रत्येक कदम की सूचना दें और साथ ही उसकी एक फाइल भी अवश्य  बनाएं ताकि आप micromanager का विश्वास और saboteur मैनेजर को फाइल के रूप में एक सबूत भी दे सकें और उनका विश्वास जीत सकें।

    2.अपनी बात स्वयं रखें :- bully type के या अन्य प्रकार के बॉस भी manage किये जा सकते हैं, यदि आपको ये पता हो कि कैसे खुद के प्रति विश्वास के साथ अपनी बात रखनी है। आपको बिना क्रोध या तेज आवाज के शांत होकर सिर्फ अपनी बात कहना है। यदि आप ऐसा नहीं करते तो बॉस का bullying व्यवहार और अधिक बढ़ सकता है।

    3.इसे सिर्फ पेशे तक ही रखें:- दिल पे मत ले यार ! बॉस के नखरे और मिजाज को दिल से नही लेना चाहिए। बॉस ये बात ना भी कहें तो भी आप को स्वयं ये बात समझनी चाहिए कि ये आलोचनाएं एक जॉब या कार्य के बारे में हैं, न की आपके बारे में।

    4.पहले से समझ लेना :- बॉस के साथ कैसे बात करना है ,या बात जानते हुए समस्या को पहले से समझ कर उसके समाधान करने में आप इसका इस्तेमाल अच्छी तरह से करें। बेहतर होगा यदि इस बारे में पहले से बॉस से बात कर लें,कहीं किसी कार्य के प्रति उन्होंने ज्यादा उम्मीद तो नहीं पाल रखी है।

    5.थोड़ा हँस लें :-हंसना या किसी अन्य प्रकार का मनोरंजन आपको कार्य और उसके तनाव से बहुत जरूरी ब्रेक देता है। जिससे आप तनाव पूर्ण स्थिति को अच्छे से सम्भाल सकते हैं।

    6.उलझें नही :-यदि बॉस के सामने किसी स्थिति में क्या करना है, ये आप नही समझ पा रहें हैं तो उनसे उलझने की बजाय आप यह कहकर कि मुझे कोई दूसरा जरूरी काम पहले करना है या अभी मेरी तबियत ठीक नही है कहकर वहां से हट जाएँ। और फिर कार्य की बेहतर रणनीति के साथ वापस आएं।

    7.नजरिया बदलें :-कभी कभी अपनी छोटी सोच के कारण हम दूसरों के अंदर कमियां ही निकलते हैं, एक बार अपना नजरिया बदलकर देखिये कि आपके जॉब, आपके सहकर्मियों और यहां तक कि आपके बॉस (जब वो गुस्से में ना हों ) कि कौन सी अच्छी बात को आप पसंद करते हैं। सोच कर देखिये ,चीजें बदल जाएँगी।

    8.छोड़ दें :-यदि ऊपर के कोई भी उपाय आपके और आपके बॉस के बीच के संबंध को नही सुधार पा रहें हैं और आपके शरीर और मन पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है, तो बेहतर होगा कि अधिक हानि होने के पहले आप इस कार्य क्षेत्र को छोड़ दें।

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  • 25 Jan
    Shiva Raman Pandey

    कार्य पूर्ण करने के लिए अपने मस्तिष्क को प्रशिक्षण दें

     

    procrastination 

    "काल करै सो आज कर, आज करै सो अब।

    पल में परलय होएगी, बहुरि करोगे कब । ।

    कबीरदास जी का यह दोहा हमें आलस का त्याग करके और कार्य को कल पर ना टालने की सीख देता है।

    रूचि पढ़ने बैठती है तो कभी उसका मन कहता।।। कि,पढ़ ले और याद कर लें, वहीं दूसरा आलसी मन कहता.... "अरे ! अभी क्यों मेहनत कर रही है, अभी तो एग्जाम नहीं हो रहें, जब एग्जाम होंगे तब याद करना"... और ऐसा करते करते एग्जाम पास आ जाते, और तब रूचि घबराती...........पढ़ाई अच्छे से नहीं की है,एग्जाम में क्या होगा?

    समय पर अपना कोर्स न पूरा कर पाने के कारण एग्जाम में उसके मार्क्स अच्छे नहीं आ पाते।

    क्या ऐसा आपके साथ भी होता है?

    समय पर अपना कार्य न पूरा करने की आदत से क्या आप  भी परेशान हैं?

     

    तो आइये जानते हैं कि, कार्य पूर्ण करने के लिए कैसे अपने मन को प्रशिक्षित कर सकते हैं।.........

     

    क्या आपने अभी तक दिए गए काम को शुरू भी नही किया है, जिसे आप तीन दिन पहले शुरू करने वाले थे?

    क्या आप सिर्फ एग्जाम के समय पढ़ाई करते हैं?

    क्या हर बार आपको लगता है की काम समय पर पूरा ना करना मेरी गलत आदत है?

    ऐसा लगना कि आपके दो मन हैं....

     

    इस आदत को कम करने के लिए यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं :

     

    1.प्रतिदिन छोटे-छोटे कार्य को पूरा कीजिये:

     *सबसे पहले तो हाँ, मै ये काम कर सकता हूँ ऐसा अपने मन को सिखाएं।

    *मन को यह विश्वास दिलाएं कि बहुत कठिन कार्य भी सम्भव है।

    *फिर जब हमारा मन यह विश्वास करने लगता है, तो हम उस काम को पूरा करने के लिए कठिन मेहनत करते हैं।

     हमें कठोर परिश्रम और नियमित अभ्यास कर अपने मन को सिखाना होगा । प्रतिदिन छोटे-छोटे कार्य को पूरा करके हम ऐसा कर सकते हैं ।

    यह देखा गया है कि,जब हम अपने कार्य में देर करते हैं तो उसका कारण हमारे अंदर के दो मन होते हैं ।

    मन का एक भाग हमसे काम करने के लिए कहता है, लेकिन दूसरा भाग सिर्फ दो बातें जानता है आत्म रक्षा के लिए भागना या आराम करना। जब हमारा सामना किसी भय या चिंता से होता है तब मन का दूसरा भाग सक्रिय हो जाता है। तो यदि हम किसी कार्य में टाल- मटोल कर रहे हैं, तो हो सकता है, उसका कारण कोई चिंता हो।  यह चिंता-

    कार्य कहाँ से शुरू करें, ये समझ में नही आने के कारण हो ,

    या कार्य को करने में अप्रसन्नता होने के कारण हो सकता है ,

    या  यह केवल असफलता के डर से हो।

     

    2.असफल होने के डर को मार भगाइए :-

    किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए हमें असफलता के डर को अपने मन से दूर करना होगा।

    क्योंकि जब हम डरते हैं, तो हमारे मन का दूसरा भाग सक्रिय हो जाता है और फिर  हम कहीं किसी बरामदे में बैठकर अपने मनपसंद टीवी सीरियल्स देखने में लगे रहते हैं।

     

    3.निराश करने वाले विचारों को पहचानें :-

     इसलिए अब जबकि आलस करने के कारणों को जान गए हैं,तो अब से हम कार्य को टालें नही यह सुनिश्चित  करने के लिए हम कौन से कदम उठा सकते हैं?

    *सबसे पहले भय या चिंता जैसे विचारों को मन में आने से रोकना होगा                      

    *जो विचार हमें निराश करते हैं उन्हें पहचानना होगा। हमें अपनी इच्छा, भय, क्रोध, और समस्त भावनाओं को नियंत्रित करना सीखना होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि, नकारात्मक विचार हमारे आसपास नहीं होने चाहिए ।

     * हमें अपने लक्ष्य की योजना बनाने की आवश्यकता है, और कार्य को छोटे भागों में बाँट कर हर छोटे भाग को पूरा करने की समय सीमा तय करना होगा।

     

    4.साधन की planning:

     हमें साधनों की योजना बनाने की आवश्यकता है। यदि हमें एक कार्य को करने के लिए दस वस्तुओं की आवश्यकता है, तो जब हम कार्य करने के लिए बैठें तो हमारे पास वे दस वस्तुएं होनी चाहिए।

    साधनो को जुटाने के लिए कदम बढ़ाना कार्य को करने की दिशा में उठाया गया पहला कदम हो सकता है।

    हमें कार्य प्रक्रिया कि योजना बनाने की भी आवश्यकता है :कार्य का कौन सा हिस्सा अधिक समय लेगा, कौन सा कम और कौन से भाग में किसी अन्य की मदद ली जा सकती है....

    किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए जरूरी है उस कार्य को 'मन लगा कर' और 'पूरे विश्वास' के साथ किया जाय। इनके बिना हम सफल नही हो सकते।

     

    5.अपनी सफलता के प्रति सकारात्मक रहें:-

    जो भी कार्य आप शुरू करें उसकी सफलता के प्रति सकारात्मक रहें ,इसके लिए आपको लगातार कार्य करना होगा, एक बार आप उस पर कार्य करना शुरू करते है ,तो आप आत्मविश्वास पा लेंगे।

    याद रखें जब कोई समस्या आपके पास आये,  और आप इसे हल करने के लिए कठिन कार्य करते हैं ,इसका मतलब आपका मन लगातार प्रयास से समस्या हल करने की आदत प्राप्त कर रहा है।

    ऐसा हो सकता है कि कभी आपका मन कार्य करने में नही लग रहा, लेकिन इसे पार कर लिया जाना चाहिए, और आप वापस कार्य करने  की राह पर आ जाएँ।

    ध्यान, योग, आसन और व्यायाम भी आपके मन को ताजगी, ध्यान केंद्रित करने और अच्छा मानसिक विकास करने में मदद करते हैं।

     

    6.असफलता- सफलता की ओर ले जाने वाला कदम है: 

    असफलता वह चीज है, जो हमें गिर जाने का भय दिखाती है, और हम एक ही जगह(comfort zone) पर हमेशा स्थिर रहते हैं।

    इसलिए स्वयं से कहो, कि असफलता, सफल होने का एक कदम, और 'सीखने की प्रक्रिया' है। इससे आपके मन में असफलता के कारण उत्पन्न चिंता खत्म हो जायेगी।

    दूसरा तरीका ये है की आप ये सोचें कि मैं फेल हो सकता हूँ। फिर तो आप देखेंगे कि कैसे आप स्वयं को पास करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं,

    आशा है, इन सुझावों पर अमल करके हम आगे से अपने सभी कार्य समय पर पूरा करना सीख सकते हैं।

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