कुल 169 लेख

  • 29 Jan
    Shiva Raman Pandey

    आपके निगेटिव में क्या पॉजिटिव है?


    positive thinking

     

    एक युवा महिला अपनी डाइनिंग टेबल पर बैठी थी और चिंतित थी, इस बात से परेशान थी कि, इनकमटैक्स देना पड़ता है। घर का ढेरों काम करना होता है और ऊपर से कल त्यौहार के दिन लंच पर बहुत से रिश्तेदार भी आने वाले हैं।

    कुल मिलाकर वो बहुत परेशान थी।

     

    करीब ही उसकी 10 साल की बिटिया अपनी स्कूल नोटबुक लिए बैठी थी।माँ के पूछने पर वो बोली---" टीचर ने होमवर्क दिया है (Negative Thanks giving) और कहा है कि, उन चीजों पर एक पैरेग्राफ लिखो जो प्रारम्भ में हमें अच्छी नहीं लगतीं, लेकिन बाद में वो अच्छी ही होती हैं। मैंने एक पैरेग्राफ लिख लिया है। "

     

    उत्सुकतावश माँ ने बेटी से नोटबुक ली और पढ़ने लगी कि, उसकी बेटी ने क्या लिखा है।

    बेटी ने लिखा था,

     

     

    “ मैं अपनी फाइनल एग्जाम को धन्यवाद देती हूँ क्योंकि इसके बाद स्कूल बंद होकर छुट्टियाँ लग जाती हैं। "

     

    " मैं उन कड़वी खराब स्वाद वाली दवाइयों को धन्यवाद देती हूँ जो मेरे स्वस्थ होने में सहायक होती हैं। "

     

    " मैं सुबह सुबह जगाने वाली उस अलार्म क्लॉक को धन्यवाद देती हूँ जो सबसे पहले मुझे बताती है कि, मैं अभी जीवित हूँ। "

     

    पढ़ते पढ़ते माँ ने महसूस किया कि, उसके खुद के पास भी तो बहुत कुछ ऐंसा है जिसके लिए वो भी धन्यवाद कह सकती है।

     

    उसने फिर सोचा,

     

    " उसे इनकमटैक्स देना होता है, इसका मतलब है कि वो सौभाग्यशाली है कि, उसके पास एक अच्छी सैलरी वाली बढ़िया नौकरी है। "

     

    " उसे घर का बहुत काम करना पड़ता है, इसका मतलब है कि उसके पास एक घर है, एक आश्रय है। "

     

    " उसे परिवार के बहुत से सदस्यों के लिए खाना बनाना होगा, इसका मतलब है कि उसके पास एक बड़ा परिवार है जिनके साथ वो त्योहारों पर सेलिब्रेट करती है। "

     

    मॉरल :

     

    हम निगेटिव बातों या चीजों को लेकर बहुत शिकायतें करते हैं लेकिन उनके पॉजिटिव पक्ष को समझने, देखने में असमर्थ रहते हैं।

    आपके निगेटिव में क्या पॉजिटिव है, उसे समझिए और अपने हर दिन को एक बेहतरीन दिन बना लीजिए।

    क्योंकि ये नेगेटिविटी भी एक शक्ति है, जो हमारे अंदर, घुस जाती है, और हम उसके आदी हो जाते है।

    'सकारात्मकता' या 'पाजिटिविटी' भी एक प्रकार कि अंदरूनी शक्ति, या ऊर्जा है।

    मरियम वेबस्टर के अनुसार सकारात्मकता एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हम मानसिक रूप से अच्छा महसूस करते हैं।

    नकारात्मकता को सकारात्मकता से ही जीता जाता है।  

    • अपने अंदर कि पाजिटिविटी को बाहर निकालिये । और सकारात्मक सोच को विकसित करने के लिए ऐसे लोगों के साथ अपना वक़्त बिताएं जो हमेशा सही और सकारात्मक सोच रखते हों । 
    • अच्छा गाना सुने, जो आपको पसंद हो ऐसी चीज़ों में खुद को व्यस्त रखें।
    • दिल से जलन, गुस्सा जैसी भावनाओं को कम करने की कोशिश करें।
    • अगर कुछ नकारात्मक बात आपको परेशान कर रही है, तो दोस्तों से या किसी निकट इंसान से बात करें। नेगेटिविटी घट कर आधी हो जाएगी, और आप में पाजिटिविटी दुगनी हो जायेगी। 

    पाजिटिविटी या सकारात्मकता हमें, कठिन समय का सामना करने की ताकत  देता है।

    हमारा मनोबल बढ़ाता है।

     

     

  • 23 Oct
    eWellness Expert

    जीवन में सपनों के साथ साथ भविष्य की चिंता भी करनी चाहिए।


    ambition

     

    कर्म क्षेत्र की दुविधा हम सब में होती है। कौन से विषय पर पढाई करनी चाहिए, कौनसा क्षेत्र नौकरी इत्यादि के लिए लाभदायक है, ये हम सभी को सोचना पड़ता है, पर साथ में यह भी सोचना पड़ता है कि हमें क्या पसंद है, और आजकल इसी पर ध्यान ज़्यादा दिया जाता है, कि बच्चा क्या चाहता है। हालाँकि  माता-पिता हमेशा बच्चों को अपने जीवन में समृद्ध और खुशहाल देखना चाहते हैं, और इसीलिए उनकी चेष्टा रहती है, कि बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बने। पर किसी भी तरह का दबाव बच्चों पर बुरा असर डालता है, और इसलिए, हम क्या पसन्द करते हैं, किस विषय में हम अच्छा काम कर सकते हैं,यह सब सोचने की आज़ादी हमें  मिलती है।

    पर हमारा निर्णय भी क्या हमेशा जीवन के लिए सही होता है? आज हमें कुछ पसंद है, कल कुछ और पसंद हो सकता है; हम इंसान है, और वक़्त के साथ साथ हमारी सोच और रुचि भी बदलती है, मान लीजिये, आज आप कॉलेज में हैं, फेस्ट और कॉन्सर्ट वगैरा आपको आकर्षित करते  है, इसलिए आप संगीतकार बनना चाहते हैं, लेकिन आज से ६ साल बाद, कौन कह सकता है, इसी निर्णय के लिए आप पछतायेंगे नहीं! जीवन में ठहराओ आने पर आपको आर्थिक लाभ का महत्व मालूम होगा।

    इसलिए जब हम किसी विषय पर आगे पढ़ने की सोचते है, तो यह निर्णय अहम है, और सोच समझ कर लेना चाहिए; अपनी ख़ुशी और सपनों के साथ साथ भविष्य की सुरक्षा का ख़याल भी रखना चाहिए।

    जब तक घर में अनाज है, तब तक सुर संगीत, सब अच्छा लगता है, ये कहावत में भी है, अगर आपको पता हो, कि आज आपको खाना मिल रहा है, कल नहीं भी मिल सकता है, तो इस स्थिति में, आप क्या संगीत बनाएंगे?

    इसका यह मतलब नहीं की आप ऐसा कुछ करें जिसमें आपको कोई रुचि नहीं। जिस भी विषय पर आप स्वीकृति हासिल करना चाहते हैं, उसे गंभीरता से जीवन में शामिल करें। अगर आप क्रिकेटर बनाना चाहते हैं, तो उसके लिये अधिक मेहनत की आवश्यकता है। विश्व स्तर पर महारत हासिल करने के लिए साधारण चेष्टा काफी नहीं, खर्च भी करना पड़ेगा और ये सब जानते हुए आपको फैसला लेना पड़ेगा।

    आपको उसी विषय को लेकर आगे बढ़ना चाहिए, जो आप अच्छा कर सकते हैं, ना कि वह, जो आपका शौक है। आपको वही करना चाहिए, जिसमें आपका भविष्य सुरक्षित हो, और मानसिक रूप से आप खुश और शांत रह पाएं।

    सब के लिए डॉक्टरी या इंजीनियरिंग करना आवश्यक नहीं, लेकिन इन विषय पर आगे पढ़ने से आपका करियर जल्द शुरू होता है, और आर्थिक रूप से सबल हो सकते हैं, इससे इंसान का मानसिक संबल बढ़ता है । आत्मनिर्भरता बेहत ज़रूरी है।

    जीवन में अर्थ भी ज़रूरी है, और इंसान का सपना भी। लेकिन सबसे ज़रूरी है शरीर और मन से स्वस्थ रहना, जो तभी सम्भव है जब आप सुरक्षित महसूस करें, हर तरह से सबल महसूस करें, और इसलिए, अपने सपनों को अवश्य महत्व दें पर साथ में भविष्य की सुरक्षा और करियर के बारे में भी सोच विचार कर लें।

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  • 29 Jan
    Oyindrila Basu

    जागो गृहणी जागो-नए जमाने के साथ खुद को ढालें ।

    work from home

    अकसर गृहवधूओं को लगता है, की उनका वक़्त घर बैठे बैठे बेकार हो रहा है, इसलिए वे किटी-पार्टीज या महिला सम्मेलनों में ज्यादा उत्सुक हो जातीं है। यह अकसर विदेशों में रहने वाले दोस्तों के घर में, आम बात है, जहां, वीसा और कुछ कानूनी प्रक्रियाओं की वजह से, सरकार की तरफ से पत्नियों को काम करने की अनुमति नहीं है। पर झुण्ड के साथ, दूसरों की चर्चा करने से अच्छा है, आप खुद घर से कुछ कोशिश करें।

    इंटरनेट हर चीज़ का समाधान है। आजकल #WorkFromHomeCulture ने नौकरी की प्रक्रिया को बदल डाला है। विभिन्न साइट्स पर ऐसे कई अच्छे ऑफर आते हैं, जिन में घर से नौकरी करने की आज्ञा होती है। अगर आप उपयुक्त हैं, तो नौकरी मिलना, और घर बैठे कमाना कोई बड़ी बात नहीं।

    आप खुद का कोई व्यवसाय भी शुरू कर सकतें हैं।

    अगर किसी ख़ास काम में आपकी रुचि है, जैसी सिलाई, या सजावट, तो उसका प्रयास भी आप कर सकती हैं, घर बैठे।

    पढ़ाई पूरी करना चाहें, तो वह भी आजकल घर से संभव है, #Edx में जाएँ और देखें कमाल :)।

    नृत्य गीत की चर्चा करने से आपका घर में दिल लगा रहेगा।

    नित्य कुछ न कुछ व्यायाम का अभ्यास ज़रूरी है। अगर खराब मौसम की वजह से जॉगिंग नहीं हो पा रहा है, तो घर में ही योगा और मैडिटेशन का अभ्यास करें।

    घर पर  वक़्त का ऐसे ही पूर्ण लाभ उठाते रहें।

     

    ऐसे में अगर इस खराब मौसम में आप और आपके पतिदेव घर पर छुट्टी मना रहे हैं और अगर आपको एक दिन घर पर बिताने का मौका मिल रहा है, तो उसे ना गवाएं। अपने साथी के साथ थोड़ी देर तक प्रातः झपकी का मज़ा लें। आप सिर्फ सो नहीं रहे होंगे, इस दौरान, उनको थोड़ा प्यार से निहार लें, दो प्यारी बातें कर लें, अपने बचपन की, या अपने खूबसूरत रिश्ते की, तो आपका दिन बन जाएगा।

    आज कुछ ख़ास करें , जिसमें, दोनों का सहयोग हो। जैसे, दोनों मिलकर

    घर को नई तरह से सजाएं।

    या फिर आप साथ में दोपहर को एक फिल्म भी देख सकते हैं।

    कोई जासूसी किताब का साथ में विश्लेषण करें,

    या फिर साथ में शतरंज भी खेल सकते हैं।

    अगर कहीं यात्रा का सोच रहें हैं, तो उसकी योजना भी साथ बैठ कर आज ही बनाएं।

  • 29 Jan
    Oyindrila Basu

    मौसम को मात दें-घर पर ही समय का सदुपयोग करें।

    boy reading at home

    दोस्तों,सर्दियों का मौसम है, और बाहर सर्द हवाओं की कँपकँपी मची हुयी है। दरअसल, क्रिसमस के बाद से ही, हमारे देश, और कईं बाहरी देशों में, तापमान के घट जाने से, मौसम घूमने फिरने, या पिकनिक मनाने के लिए सही नहीं रहता। इसी साल, दिल्ली और कलकत्ता में ठंड के प्रकोप को याद कर के ही रोंगटे खड़े हो रहे हैं, तो ऐसे में कोई अपनी मरज़ी से सज-संवर कर कहाँ जाये? सर्द के साथ साथ, धुंधला आसमान और बरसाती दिनों से मन उदास हुआ जा रहा है।

    हाल ही में, अमेरिका के कई जगहों में #स्नोज़िल्ला के दबाव से, घर से निकलना तो क्या, बाहर देखना तक मुश्किल हो रहा है, तो ऐसे में, आपकी शॉपिंग या लम्बी ड्राइव की इच्छाएं धरी की धरी रह जाती हैं।

    तो क्या करेंगे आप? अपने वीकेंड को व्यर्थ भी तो नहीं जाने दे सकतें। एक समय था, जब सर्दियों का मौसम सब से रोचक मौसम था । मज़ा, मस्ती, साज-श्रृंगार, भोजन और भ्रमण के लिए। पर अब बदलते वैश्विक मौसम ने ऐसी कहावतों को झुठला दिया है। आजकल, अजब मौसम की गज़ब कहानी, साल भर हमें परेशान करती है।

    पर आप परेशान न हों, जब हम हैं, तो क्या ग़म है।:P

     

    अगर आप घर परअकेले हैं, और मम्मी पापा, चाचा-चाची, या मामा-मामी के घर गयें है, तो भी बोर होने की ज़रूरत नहीं है। कुछ नया और अच्छा करें।

    जिस किताब को बीच में ही छोड़ दिया था, उसे पूरा करें।

    या फिर कोई नए चित्र की शुरुआत करें,(अगर आप आर्टिस्ट हैं तो)

    खुद के लिए कुछ ख़ास बनाएं, और अकेले ही उस खाने का मज़ा लें, कोई अच्छी फिल्म के साथ।

    अच्छा गाना भी सुन सकते हैं,

    या फिर अकेले अकेले एक लम्बी नींद का मज़ा लें।

  • 26 Jan
    Shiva Raman Pandey

    7 सुझाव कि कैसे तानाशाह बॉस के साथ काम करके खुश रहें।

     

    suffocating boss

     

    दीपक जैसे ही ऑफिस पहुँचा, बॉस ने उसे अपने केबिन में बुला लिया । बॉस के केबिन से बाहर निकलकर दीपक मन ही मन बड़बड़ाते हुए अपनी सीट तक आया...उफ़! ये बॉस रोज कोई न कोई गलती मेरे काम में निकाल ही लेते हैं, समय पर काम न हो तो धमकियां अलग देते हैं, खुद तो सिर्फ आदेश देना जानते हैं, हिटलर कहीं के...और भी न जाने कितनी बातें। सहकर्मी भी उसकी हाँ में हाँ मिला रहे थे।

    क्या ऐसा हो सकता है कि, बॉस और कर्मचारी के बीच अच्छे संबंध हो जाएँ और ऑफिस का माहौल खुशनुमा और सहयोगात्मक हो जाये?

    बहुत से लोग दीपक की ही तरह ऑफिस में अपने बॉस की बुराइयां और उनके रूखे व्यवहार की बातें करते हैं, उनका ज्यादातर समय खडूस बॉस और उनके बुरे व्यवहार की बातें सोचने में ही गुजर जाता है। क्या हम ऐसे बॉस को संभाल सकते हैं? हाँ जरूर ! आइये जानते हैं कैसे...

     

    सबसे पहले ये तय करें कि क्या वाकई में आपके बॉस बुरे हैं, या सुनी सुनाई बातों पर आपने ये धारणा बना रखी है। क्या सच में पिछले हफ्ते या पिछले महीने में उन्होंने कोई ऐसा काम किया है, जिससे आपको तनाव का अहसास हुआ। यदि आप ये बातें याद नहीं कर पा रहें तो एक हफ्ते में कितनी बार उनके व्यवहार से आपने तनाव महसूस किया, और यह किस प्रकार का है, इसे नोट कर लीजिये।  

    बॉस के प्रकार :-

    बुरे बॉस के भी कई टाइप होते हैं :)

    Bully type: इस प्रकार के बॉस आपको छोटा और बेकार का होने का अहसास कराएंगे।

    Bad communicator: इस प्रकार के बॉस काम को कैसे करना है, ये मुश्किल से ही समझायेंगे।

    Micromanager: इस प्रकार के बॉस छोटी से छोटी हर बात आपसे जानना चाहेंगे।

    Saboteur: इस प्रकार के बॉस अच्छे कामों का श्रेय स्वयं लेंगे और बुरे कामों का दोष आपके ऊपर लगा देंगे।   

    Fickle boss: इस प्रकार के बॉस का मूड कब कैसा हो, नहीं कहा जा सकता।

    चलिए ,हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देते हैं, जिनपर अमल करके आप हर प्रकार के बॉस के साथ सहज हो सकेंगे :-

    1.सूचना देना :-कार्य के प्रत्येक कदम की सूचना दें और साथ ही उसकी एक फाइल भी अवश्य  बनाएं ताकि आप micromanager का विश्वास और saboteur मैनेजर को फाइल के रूप में एक सबूत भी दे सकें और उनका विश्वास जीत सकें।

    2.अपनी बात स्वयं रखें :- bully type के या अन्य प्रकार के बॉस भी manage किये जा सकते हैं, यदि आपको ये पता हो कि कैसे खुद के प्रति विश्वास के साथ अपनी बात रखनी है। आपको बिना क्रोध या तेज आवाज के शांत होकर सिर्फ अपनी बात कहना है। यदि आप ऐसा नहीं करते तो बॉस का bullying व्यवहार और अधिक बढ़ सकता है।

    3.इसे सिर्फ पेशे तक ही रखें:- दिल पे मत ले यार ! बॉस के नखरे और मिजाज को दिल से नही लेना चाहिए। बॉस ये बात ना भी कहें तो भी आप को स्वयं ये बात समझनी चाहिए कि ये आलोचनाएं एक जॉब या कार्य के बारे में हैं, न की आपके बारे में।

    4.पहले से समझ लेना :- बॉस के साथ कैसे बात करना है ,या बात जानते हुए समस्या को पहले से समझ कर उसके समाधान करने में आप इसका इस्तेमाल अच्छी तरह से करें। बेहतर होगा यदि इस बारे में पहले से बॉस से बात कर लें,कहीं किसी कार्य के प्रति उन्होंने ज्यादा उम्मीद तो नहीं पाल रखी है।

    5.थोड़ा हँस लें :-हंसना या किसी अन्य प्रकार का मनोरंजन आपको कार्य और उसके तनाव से बहुत जरूरी ब्रेक देता है। जिससे आप तनाव पूर्ण स्थिति को अच्छे से सम्भाल सकते हैं।

    6.उलझें नही :-यदि बॉस के सामने किसी स्थिति में क्या करना है, ये आप नही समझ पा रहें हैं तो उनसे उलझने की बजाय आप यह कहकर कि मुझे कोई दूसरा जरूरी काम पहले करना है या अभी मेरी तबियत ठीक नही है कहकर वहां से हट जाएँ। और फिर कार्य की बेहतर रणनीति के साथ वापस आएं।

    7.नजरिया बदलें :-कभी कभी अपनी छोटी सोच के कारण हम दूसरों के अंदर कमियां ही निकलते हैं, एक बार अपना नजरिया बदलकर देखिये कि आपके जॉब, आपके सहकर्मियों और यहां तक कि आपके बॉस (जब वो गुस्से में ना हों ) कि कौन सी अच्छी बात को आप पसंद करते हैं। सोच कर देखिये ,चीजें बदल जाएँगी।

    8.छोड़ दें :-यदि ऊपर के कोई भी उपाय आपके और आपके बॉस के बीच के संबंध को नही सुधार पा रहें हैं और आपके शरीर और मन पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है, तो बेहतर होगा कि अधिक हानि होने के पहले आप इस कार्य क्षेत्र को छोड़ दें।

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