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  • 28 Dec
    Shiva Raman Pandey

    ये 4 बातें आपके घर के बॉस जानना चाहते हैं?

    pati patni ke beech ke nokjhok

    अमन के मम्मी और पापा दोनों की दिनचर्या व्यस्त और दोनों ही वर्किंग थे । शाम को जब  वे घर आते, तो अमन से खाना खाकर सो जाने के लिए कहते क्योंकि दूसरे दिन फिर से सबको जल्दी काम पर जाना होता था । इन सब दिनचर्या के बीच अमन से बात करने का उनके पास समय ही नहीं  होता। एक  दिन  अमन की टीचर ने उन्हें स्कूल बुलाया और अमन की शिकायत करने लगीं, उन्होंने बताया कि अमन अपने सहपाठियों से ठीक ढंग से व्यव्हार नहीं करता है। अक्सर उनके साथ मार-पीट और अच्छा व्यव्हार नहीं करता ।

    आजकल इस तरह की समस्या बच्चों के साथ आम हो गई है, लेकिन क्या हमनें कभी ये जानने की कोशिश की है कि, क्या है बच्चों के इस व्यवहार का कारण ?

    छोटे परिवार जहाँ माता और पिता दोनों काम करते हैं, वहाँ घर में होने वाले टकराव को छोटे और विशेष तरीके से समझाने की जरूरत बढ़ रही है। टीचर माता-पिता को बच्चे की शरारतों के बारे में शिकायत तो कर देते हैं, परन्तु यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है कि अभिभावक अपने बच्चे का हमेशा भला ही चाहते हैं । उन्हें जरूरत है यह समझाने कि कैसे वे अपने तनाव पूर्ण जीवन का असर बच्चे पर न पड़ने दें । 

    इसलिए क्या माता -पिता और बच्चे घर पर प्यारभरी और खुशहाल जीवन के लिए मिलकर कोई कदम उठा सकते हैं ?

    निश्चित रूप से हाँ। मनोवैज्ञानिक शोध ये दिखाते हैं, कि बच्चो के लिए उनके खिलौने और गेम्स से ज्यादा जो चीज कीमती है वह है, उनके माता -पिता का 'समय', हालाँकि वे मॉल या दुकान पर आपसे किसी महंगे खिलौने के लिए जिद कर सकते हैं, पर यह इसलिए होता है क्योंकि बालमन चंचल होता है और खुद को नियंत्रित नहीं कर पाते ।  जैसे हम बड़े किसी ऐसी चीज को खरीद कर ठग जाते हैं जिसकी हमें ज्यादा जरूरत नहीं होती है।

    इस दिशा में सबसे पहला कदम यह होगा कि

    1. बच्चे से खुद मदद लें :

    समस्या को स्वीकार किया जाए और उसे हल करने के लिए बच्चे से भी बात करी जाए।  हाँ इतना जरूरी है कि जो भी कदम उठाया जाए वह बच्चे की आयु ध्यान में रखते हुए हो ,जिससे उसे बुरा भी ना लगे और बच्चे को समझ में भी आ जाये । नही तो दबाव में इसके उलटे परिणाम भी हो सकते हैं । जैसे  कि अगर आपका बच्चा तीन साल का है तो तीन साल के बच्चे से  आप कह सकते हैं ,"तुम्हारे और मेरे बीच बहुत सी कट्टी हो गई है हम कैसे इन्हे बट्टी में बदले।" बच्चे सहज और सरल होते हैं वे जो समाधान का सुझाव देते हैं उसे आसानी से लागू किया जा सकता है और यह बहुत सफल होता है।

    2.साथ समय बिताएं 

    अभिभावक को बच्चे के साथ समय बिताने के लिए एक टाइम टेबल बना लेना चाहिए, जैसे रोज़ रात का खाना पूरा परिवार साथ बैठ कर खाएंगे, इस समय कोई टी.वी नही (एक बार फिर यहां याद दिल दें कि बच्चे को आदेश न देकर दोस्ताना तरीके से ये बतायें कि क्यों ये कदम लिया गया है ) फिर हर व्यक्ति को इसका पालन करने  की जरूरत है। इसके साथ साथ एक चार्ट भी बना लें, जिसमें बच्चा रोज निशान लगा सके कि आज साथ में कितना वक्त बिताया गया । एक साथ इस तरह की गतिविधियों से सम्बन्ध बढ़ते हैं और बच्चा भी यह महसूस करता है कि घर में जो भी निर्णय लिए जाते हैं वह उसमें भागीदार होता है । 

    3.डांटे नहीं

    जब टीचर से बच्चे के बारे में कोई शिकायत मिले तो, किसी कल्पना के आधार पर बच्चे को तुरंत डाँटिए नहीं कि "तुमने किसी लड़के को क्यों मारा"? बल्कि इसके स्थान पर  आप कहिये कि "टीचर कह रही थीं कि तुम्हारे और किसी लड़के के बीच कोई लड़ाई  हुई थी, क्या हुआ था?" ऐसा कर के आप बच्चे को पूरी बात कहने का एक मौका देते हैं। जिसके बाद आप उससे इसमें उसकी भूमिका के बारे में बात कर सकते हैं, और उसे धीरे से क्लासमेट के साथ हुए मतभेद को सुलझाने का सही  तरीका समझाइये।

    4.जो कहें वह करें

    अंत में एक बात और  बच्चे वो सब कुछ नहीं सुनते जो हम बोलते हैं लेकिन वे सब देखते हैं जो काम  हम करते हैं। अगर आप उन्हें कोई सलाह दें और वास्तविक जीवन में आप खुद  उसका पालन नहीं करते तो वे परेशान हो जाते हैं और आपके बच्चे भी  इसका पालन करेंगे इसकी कम संभावना है। अगर आप उनसे कहते हैं कि "झूठ मत बोलो" और किसी गेस्ट से आप मिलना नहीं चाहते,और बच्चे से कहते हैं कि "अंकल से कह दो पापा घर पर नही हैं" जबकि आप घर पर हैं तो ये झूठ है। बच्चे जब बार-बार माता-पिता का उदाहरण देखते हैं कि वे अपनी बात का पालन नहीं करते हैं तो वे माता -पिता को गंभीरता से लेना बंद कर देते हैं।

    इन बताये गए सुझावों को अगर आप पालन करें तो जरूर आप अपने बच्चे के साध संबंधों को सुधर पाएंगे और उन्हें भी आपका प्यार मिलेगा ।

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  • 02 Jan
    Janhavi Dwivedi

    क्या है पैनिक अटैक Panic attack?

    panic attack

     

    श्रुति एक बहुत ही प्यारी और कोमल विचारों वाली लड़की थी  । वैसे तो शादी के पूर्व तक उसके स्वाथ्य को लेकर किसी ने इतनी चिंता नहीं की और सोचा कि समय के साथ यह ठीक हो जायेगा । उसकी शादी हुए कुछ ही दिन हुए थे कि एक दिन मेहमानों के स्वागत के चलते वह काफी व्यस्त थी और अचानक से उसे सांस लेने में दिक्कत , और सीने में भारीपन लगने लगा, और उसे अजीब सा महसूस होने लगा । उसके पति काफी सुलझे विचारों के थे , उन्होंने श्रुति के इस तरह अचानक हुए अटैक का डॉक्टर से सलाह लेकर मनोचिकित्सक से इलाज करवाया । आज वह खुल कर अपना जीवन संवारने में लगी है, क्योंकि उसे पता है कि उसका कोई अपना है जो इस दर्द में उसका साथ देगा । इस मनोविकार को लेकर समाज  में  काफी भ्रांतियां फैली हैं | लोग छुपाने की कोशिश करते हैं, जिससे उनके भविष्य में होने वाले संबंधों को लेकर कोई दिक्कत ना आये ।

     

    क्या है पैनिक अटैक Panic attack?

    Panic attack पड़ने पर अचानक कुछ मिनटों के लिए साँस लेने में परेशानी और भारीपन के साथ विशेष प्रकार की अनुभूति होती है।

    Panic attack या तो अकेले हो सकता है या फिर अन्य मनोविकार के साथ मिल कर हो सकता है ।

    पैनिक डिसॉर्डर की पहचान निम्न तरीकों से होती हैं :

    1. बार -बार और अचानक से होना
    2. सभी अटैक एक प्रकार के हों
    3. कई panic attack कुछ ही मिनटों में

    इसके अलावा निम्न में से चार लक्षण अगर हैं तो यह panic attack हो सकता है :

    1. घबराहट /दिल का तेजी से धड़कना
    2. बढ़ी हुई दिल की धड़कन
    3. पसीना आना
    4. कंपकंपी
    5. जल्दी -जल्दी सांस चलना
    6. घुटन का अहसास
    7. सीने में दर्द /असहजता
    8. जी मिचलाना /पेट दर्द
    9. कभी -कभी निम्न लक्षण भी इसके साथ दिखाई देते हैं :
    10. अत्यधिक डर का एकाएक आवेग /बहुत ज्यादा बेचैनी
    11. चक्कर आना
    12. ठंडे /गर्म चकत्ते
    13. संज्ञाहीनता /सिहरन का अहसास
    14. अवास्तविकता का अहसास (स्वयं की अनुभूति खोना और वास्तविकता से अलग महसूस करना
    15. नियंत्रण खोने का डर
    16. मृत्यु होने का डर
    17. एक माह में कम से कम एक अटैक होने पर -

    लगातार चिंता करना

    जिन्हे यह panic attack होता है, वे इससे बचने के लिए अलग तरह से व्यवहार करने लगते हैं । वे अक्सर इस बात से परेशान रहते हैं कि panic attack होने पर दूसरे उनकी आलोचना करेंगे, इससे निपटने  के लिए वे नजरंदाज करने वाले व्यवहार करते हैं।

     

    रात के समय panic attack काफी आम होते हैं। panic attack आमतौर पर असामान्य घटना है, लेकिन इसके लक्षण अक्सर फिर से दिखाई देने लगते हैं, और बहुत कम लोगों को इससे पूरी तरह से छुटकारा मिलता है। आमतौर पर बीस की उम्र के आसपास यह पहली बार होता है। बचपन के बारे में जानकारियां इसके कारणों को समझने में मदद कर सकती हैं। इसके दुष्प्रभावों में ह्रदय गति का रुकना, भावनात्मक शोषण और यौन शोषण होने का खतरा, और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है।

    प्रायः इसका कोई कारण अवश्य होता है, कोई तनावपूर्ण घटना जो व्यक्ति को तनाव की स्थिति में ला देती है ।

    इस प्रकार के व्यक्तित्व वाले लोग  panic attack के दुबारा होने को  लेकर  अत्यधिक परेशान रहतें हैं। उनको यह चिंता रहती है की वो एक ऐसी बीमारी से जूझ रहे हैं जो  कभी भी अचानक से हो सकती है और वे इसके लिए कुछ नहीं कर सकते,  इसलिए हर बार जब शरीर की प्रतिक्रिया थोड़ी सी भी  अलग होती है तो पीड़ित व्यक्ति  इसका गलत अर्थ निकलते हैं । और थोड़ा सा  भी दर्द उन्हें panic attack ला सकता है , क्योंकि वे और भी डर जाते हैं ।   

    हालाँकि ,अच्छी खबर यह है कि panic attack को संभाला जा सकता है शरीर में कुछ निश्चित संकेत होते हैं, जिनसे लोगों को लगने लगता है कि उन्हें panic attack हुआ है,और यह उन्हें वास्तव में panic attack की ओर ले जाता है।  मनोचिकित्सा  इन संकेतों के प्रति  मरीज की चिंता को थेरेपी के द्वारा काम करते हैं ।  साथ ही मनोचिकित्सक panic attack से संबंधित जो भी विचार मरीज के मन में आ रहे हैं उन्हें समझ कर, और उनकी सोचने के तरीके में बदलाव लाकर उसे सकारात्मक दिशा देते हैं । इसके साथ-साथ दवाएं (चिंता निवारक /अवसाद निवारक ) इत्यादि कुछ लक्षणों को रोकने में मदद कर सकती हैं।

    इसलिये अगर आप या अपना कोई जिसे  panic attack के दौरे पड़ते हैं तो मनोचिकित्सक से अवश्य सहायता लें। मदद लेने में कभी न हिचकिचाये। जीवन अनमोल है, उसे खुल कर जियें ।

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  • 04 Jan
    Shiva Raman Pandey

    स्टार्टअप फील्ड में मोटिवेशन के 5 लेवल

    motivation level in startups

    शर्मा जी ने  नए साल के शुरुआत में ही उन्होंने बड़े जोश के साथ अपने बढ़ते मोटापे को लेकर चिंता हुई तो उन्होंने ठान ली कि वे पहले दिन से ही एक्सरसाइज और खान-पान के द्वारा अपना वजन कम करेंगे । बस फिर क्या था उन्होनें एक्सरसाइज करना शुरू किया,एक हफ्ते तो सब ठीक रहा, फिर धीरे-धीरे उनका जोश ठंडा सा होने लगा, आलस आने लगा कि सुबह की नींद कौन ख़राब करे, फिर क्या भरोसा कि इतना सब करने के बाद वजन कम हो या न हो ।

    चाहे वजन कम करने की बात हो, या किसी नई आदत को अपनाने की कोशिश या फिर किसी बुरी आदत को छोड़ने की कोशिश : आपने एक बात जरूर गौर की होगी, कि आप जिस लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, उसके लिए आपका जोश का लेवल और दूसरे के जोश का लेवल अलग-अलग होता है ।

    • कुछ लोग बड़ी धूमधाम और जोर-शोर से शुरुआत करते हैं, लेकिन रास्ते में ही कहीं असफल हो जाते हैं।
    • दूसरे शुरुआत धीमे करते हैं, फिर रफ़्तार पकड़ते हैं।
    • कुछ दूसरे धीमे शुरुआत करते हैं लेकिन जैसे हे वे सफलता प्राप्त करने लगते हैं, वास्तव में बहुत उत्साही हो जाते हैं।
    • इन में कुछ ऐसे भी हो सकते हैं जो इसे आधे अधूरे मन से शुरू करते हैं और अगले मोड़ पर छोड़ देते हैं।

    अतः लोगों के अलग प्रकार से प्रेरणा प्राप्त होने का क्या कारण है?

    क्या किसी शुरुआत के लिए अलग तरह की प्रेरणा होती है?

    और इसे बनाये रखने के लिए अलग तरह की?

    मनोविज्ञान के क्षेत्र में प्रेरणा के ऊपर बहुत सारे शोध हुए हैं। उनसे ये पता चला है कि, कम या ज्यादा प्रेरणा के स्तर, और शुरुआत या बनाये रखने की प्रेरणा के बहुत सारे कारण होते हैं। ये इस बात पर ज्यादा होता है कि

    हम खुद कितना motivate होते हैं:

    अगर खुद के motivation की बात करे तो यह इस बात पर निर्भर करता है कि, हमारा स्वभाव कैसा हैं, हमारे शरीर की बनावट के ऊपर, और सोसाइटी से आप कितना प्रभावित होते है, इस के साथ-साथ आपकी personality भी आपके motivation के लेवल पर असर डालती है ।  यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप नए ज़माने की नई technology को कितना जानते समझते और use करते हैं ।

    ये सभी बातें आपके motivation level पर असर डालती हैं, जैसे अगर आपको eating disorder है, और आप दुबले हैं, तो आपको खिलाडी बनने के सपने में दिक्कत आ सकती है । 

    हमारे चारो तरफ का माहौल कैसा है:

    आपके चारो तरफ अगर junk food की दुकान है और आपको आसानी से ये मिल जाते हैं तो आप के weight loss के आपके target में problem आ सकती है । परन्तु यही situation उन कंपनीज़ के लिए अच्छी है जो उसके  employee को motivate करती है । और उन्हें अच्छा काम करने के लिए promote करती है ।  

    और ये स्थिति बदलती भी रहती हैं, और आप खुद भी इन स्थिति को बदल सकते हैं ।

    हमारे साथ के लोग हमें कितना motivate करते हैं ।

    इसके अलावा आप का self confidence तब और बढ़ जाता है जब आपका परिवार, दोस्त आप का मनोबल बढ़ाते हैं, और आपके द्वारा किये अच्छे कार्य की सराहना करते हैं और जिसकी वजह से आप अपने target को achieve करने में ज्यादा problem नहीं महसूस करते, उत्साही रहते हैं । मन में दुःख नहीं रहता ।

    बहुत लोग यह कहते हैं कि आपका भाग था जो आप यहाँ तक पहुंचे, क्या ये सही है ? आपकी सफलता, असफलता आपका भाग्य नहीं आपका motivation level तय करता है ।

    जाने माने मनोवैज्ञानिक मिलर और रोलनिक ने अपनी रिसर्च में यह पाया कि  ने बड़े पैमाने पर उन लोगों के साथ काम किया है, जिन्हे ड्रग्स छोड़ने के लिए motivate करना था । उनके अनुसार किसी भी नए कार्य को करने के लिए हमें 5 stages से गुजरना होता है ।

    statups motivation

    ये stages of motivation निम्न हैं :

    1. कार्य शुरू करने के पहले उसके बारे में सोचना
    2. कार्य शुरू करने के लिए उसके बारे में सोचना
    3. कार्य शुरू करने का निर्णय लेना
    4. कार्य को आगे बढ़ाने के लिए hard work करना
    5. कार्य पर बने रहना

    ये stages अगर आप एक के बाद एक cross करते रहें तो ठीक है, परन्तु जब भी आपके अंदर दुविधा आती है आप किसी एक stage पर आकर अटक जाते हैं । और आप इस दुविधा की स्थिति में बने रहना चाहते हैं । आप वहां रहना इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि उसके कुछ फायदे हैं। आप को वहाँ कम जोखिम लगता है । 

    तो फिर सवाल यह है की इसका हल क्या है ?

    इसका हल है : दोहरे विचार को हल करें,अपने आपको लगातार समझाएं कि यथास्थिति से परिवर्तन बेहतर है-सिर्फ शुरुआत में ही नही, बल्कि हर दिन और हर stage पर । आपकी यही सोच आपको बुलंदियों तक ले जायेगी ।

    स्वयं के अंदर आत्मविश्वास उत्पन्न करने के लिए और उसे बनाये रखने के लिए आप eWellness Expert के Quotes visit करिये ।

     

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  • 05 Jan
    Janhavi Dwivedi

    नई मदर को होने वाले depression,anxiety और OCD के मिले जुले रूप की चर्चा

    delivery hone ke bad aurato me hone wali depreesionaur anxiety

     

    पिंकी के परिवार को जब उसके pregnent होने की खबर मिली तो सभी  बहुत खुश थे । आखिर घर में कई साल बाद किसी नन्हे बच्चे की किलकारियाँ गूंजने वाली थीं । सभी ने पिंकी की देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी, परन्तु बच्चे के जन्म के एक हफ्ते  बाद से पिंकी के व्यवहार में काफी बदलाव सा आ गया ।  पिंकी खुद नहीं पहचान पा रही थी कि वह अब पहले जैसी नहीं थी । हर बात पर गुस्सा करना, सभी के ऊपर  शक करना, बच्चे को लेकर बेवजह चिंता करना, ज्यादा साफ़ सफाई पर ध्यान देना । इन सब कारणों की वजह से घर का खुशनुमा माहौल बेरंग हो गया ।

    बच्चे के जन्म के बाद new mother को depression  होना एक आम बात है, परन्तु depression के साथ-साथ चिंता और ocd अगर साथ में होते हैं, तो यह और भी कठिन स्थिति हो जाती है । इस लेख के द्वारा हम आपको बच्चे के जन्म के बाद नई मदर को होने वाले depression,anxiety और OCD के मिले जुले रूप की चर्चा करेंगे । जिससे आप जानकारी हासिल कर सके और उन new mother और उनके परिवार की  मदद कर सके जो इस स्थिति से जूझ रहे हैं, और इस स्थिति की जानकारी न होने से पारिवारिक संबंधों में खटास आने से बचा सकें ।  

    हालाँकि यह मानसिक विकार काफी कम होता है 1000 लोगों में से 1 या 2 % को होता है । और इसके लक्षण बच्चे के जन्म के एक या दो हफ्ते के अंदर दिख जाते हैं ।

    डिलीवरी के बाद होने वाले mental disorder के लक्षण निम्न हैं :

    • भ्रम या अजीब विश्वास
    • मतिभ्रम (ऐसी चीजों को देखना या सुनना जो वहां नही हैं)
    • बहुत चिढ़ महसूस करना
    • सक्रियता
    • सोने की कम आवश्यकता महसूस करना या सोने में  अक्षमता
    • व्यामोह और शक्कीपन
    • तेजी से मिजाज बदलना
    • कई बार संवाद  करने में कठिनाई

    इसके साथ साथ अगर मरीज के परिवार में किसी को मानसिक विकार रहा है तो वह भी कारण हो सकते हैं ।delivery time में जन्म देने की प्रक्रिया में हार्मोन्स अतिसक्रिय हो जाते हैं जिससे brain की neurochemistry बदल जाती है ,जो अशांति  का मुख्य कारण है।

    delivery के बाद anxiety:

    लगभग ६% pregnent महिलाओं और १०% महिलाओं में डिलीवरी के बाद anxiety की प्रॉब्लम आती है ।  कभी -कभी उन्हें सिर्फ anxiety का  अनुभव होता है  और कभी -कभी depression भी साथ में होता है । 

    pregnency के दौरान anxiety के निम्न लक्षण हो सकते हैं :

    • लगातार चिंता करना
    • ऐसा लगना कि कुछ बुरा होने जा रहा है
    • नींद और भूख में कमी
    • शांतिपूर्वक बैठने में असमर्थता
    • शारीरिक लक्षण जैसे चक्कर आना, गर्मी के लाल चकत्ते, और जी मचलाना

    प्रेग्नेंसी टाइम में anxiety और डर का कारण जानने के लिए patient के  परिवार का इतिहास जानना, और यह जानना कि पहले भी उसे यह हुआ है की नहीं ? इसके साथ -साथ थायरायड में असंतुलन भी इस disorder में काफी योगदान देता है ।

    कभी-कभी प्रसवपश्चात, पैनिक डिसऑर्डर जिसके लक्षण पैनिक अटैक के समान हैं, भी हो सकता है।

     कभी-कभी नई माँ को OCD की प्रॉब्लम भी होती है जिसमे वह चीजों को बिनावजह सेट करना, ज्यादा सफाई पर ध्यान देना हो सकता है । जो बच्चे और माँ दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है ।

    इस चिंता का निदान जितना जल्द, समय पर हो उतना अच्छा रहता है ।

  • 06 Jan
    Janhavi Dwivedi

    हम आकर्षक चेहरा देखना क्यों पसंद करते हैं? why do we like to see attractive faces?

    aakarshak chehara kyo pasand karte hai log

     

     जब भी आप से beauty contest में भाग लेने वाले participants में से कौन विनर होगा चुनने को कहा जाए, तो जाहिर सी बात होगी की आप उसी को चुनेंगे जो बहुत बोल्ड और सुंदर होगा ।

    और यह सही भी है कि वही प्रतियोगी जीतता है जो बोल्ड और ब्यूटीफुल होता है ।

    हम उन्हें इसलिए चुनते हैं क्योंकि, हम उन पर ज्यादा विश्वास करते हैं, उन्हें ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं ।

    आखिर ऐसा क्यों होता है ?

    हाल के रिसर्च में यह पाया गया कि जब रिसर्च में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को एक ऐसी दवा दी गई जो दिमाग में MOR or μ-opiod receptors का स्राव  बढ़ा देती है तो प्रतिभागी आकर्षक चेहरे को ज्यादा देर तक देखते रहे । और इसका उल्टा हुआ जब उन्हें MOR घटाने की दवा दी गई ।

    हालाँकि यह बहुत आश्चर्य की बात नहीं है, कुछ रिसर्च में यह सवाल उठाये गए हैं कि यह एक जन्मजात गुण है जब MOR के स्राव को घटाने वाली दवा का इंजेक्शन दिया गया तो इसके उलटे परिणाम देखे गए।

    हालाँकि, इस रिपोर्ट के परिणाम बिलकुल नए और चकित करने वाले नही हैं, कुछ शोधकर्ताओं से यह प्रश्न पूछे गए कि, क्या यह जन्मजात लक्षण है? अथवा हमने आकर्षक चेहरे वालों को पसंद करने का गुण सीख लिया है । क्योंकि  हम अपने चारों तरफ ऐसी  फिल्मों, मीडिया और अन्य संदेशों को देखते हुए बड़े हुए हैं जो आकर्षक चेहरों के लिए वरीयता और ग्लैमर का सुझाव देते हैं।

    आकर्षक चेहरा देखना क्या जन्मजात प्रवृत्ति है ?

    शिशुओं पर हुए अध्य्यन से इस प्रश्न का उत्तर मिलता है ,बहुत से अध्य्यन में ये पाया गया है  कि शिशु भी आकर्षक चेहरों को ज्यादा देर तक देखते और मुस्कुराते रहे। इससे इस बात की पुष्टि होती है कि इसमें समाज का अधिक प्रभाव नही होता है, बल्कि यह जन्म जात प्रकृति होती है। और जैसा कि हाल के रिसर्च में कहा गया है कि, हमारे मस्तिष्क की ऐसी ही रासायनिक संरचना है।

    हम आकर्षक चेहरे को ही प्राथमिकता क्यों देते हैं?

    हमारा विकास का क्रम इस बात का उत्तर देता है। जैसे-जैसे हमारा विकास हुआ, एक सवाल पैदा होता गया कि, हम किस पर विश्वास करें? क्योंकि गलत व्यक्ति से दोस्ती, या गलत जीवन साथी का चयन, हमारे आगे विकास के अवसर और पृथ्वी पर हमारे वंश की वृद्धि के लिए हानि कारक हो सकती थी। इसलिए अगर कोई आकर्षक और सुंदर दिखता था, तो वह आसानी से विश्वास योग्य होता था, और इस प्रकार धोखा खाने के बजाय आकर्षणशीलता हमारे दिमाग की प्राथमिकता के रूप में बस गई ।

    आकर्षक का सही मतलब क्या है?

    इसका मतलब सिर्फ गोरा रंग ही आवश्यक नही है।  इसका मतलब है एक चेहरा जिसकी अच्छी समरूपता और आकार हो। इसका मतलब यह भी है कि व्यक्ति खुश स्वस्थ और प्रभावकारी दिखता है। स्वस्थ रक्त संचरण वाले लोगों की त्वचा साफ होती है, और इसलिए हम साफ त्वचा को वरीयता देतें हैं। इसलिए संक्षेप में हम आकर्षक शीलता की तलाश करते हैं क्योंकि समरूपता आदि जैसी विशेषतायें यह इशारा करती हैं कि स्वस्थ, खुश व्यक्ति अच्छा जीवन साथी या अच्छा साथी बन सकता है।

    हालाँकि आकर्षणशीलता की  meaning  इससे काफी अलग हैं।

    एक के बाद एक अध्ययन यह दिखाते हैं कि कुछ विशेष प्रकार के व्यक्तियों को चुनाव ,साक्षात्कार और रोमांटिक साथी के रूप में भी, वरीयता दी जाती है। यह लोग आकर्षक होते हैं लेकिन सिर्फ दिखावे से ज़्यादा, उनके पास निम्न विशेषतायें होती हैं:

    • साफ त्वचा
    • स्वस्थ बाल
    • खुश और बड़ी मुस्कान
    • खुद को लोगों के सामने पेश करने का अंदाज
    • और qualification

    व्यक्ति के यह सभी गुणों के होने से हम उसकी परिभाषा एक आकर्षक व्यक्तित्व के रूप में कर लेते हैं ।

    इसलिए ऊपर के बहुत से संकेत दिखाते हैं कि आप कैसे दिखते हैं इसके बावजूद आप स्वयं के ऊपर कार्य करके अपनी आकर्षणशीलता के स्तर को बढ़ा सकते हैं।

    इस आर्टिकल के द्वारा आप भी अपनी पर्सनालिटी में निखार लाइए, और इन बातों को ध्यान में रख कर आप  जीवन के हर क्षेत्र में बदलाव ला सकते हैं ।