• 01 Feb
    Mandavi Pandey

    प्यार में हमें अच्छा क्यों लगता है?

    love

     

    प्यार में oxytocin की भूमिका :-

    प्यार एक भाव है। हम सब अक्सर इस भाव को अपने अंदर महसूस करते हैं। प्यार के संबंध में वह neurochemicals जिसकी बात सबसे ज्यादा की जाती है वह oxytocin है। जब हम किसी को(जिसे हम प्यार करते हैं ) गले लगाते या चुंबन लेते हैं तो यह काफी अधिक मात्रा में मस्तिष्क में प्रवाहित होती है, और मन में साहस का संचार करके हमें अच्छा महसूस कराता है, और उसके साथ हमारे संबंध को और मजबूत बनाती है।

     

    Dopamine और Serotonin की भूमिका :-

    हालाँकि प्यार सिर्फ एक भाव की अपेक्षा  न्यूरोकेमिकल का प्रभाव अधिक होता है। इसमें oxytocin के अलावा Dopamine और Serotonin केमिकल की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मस्तिष्क में 'इनाम देने की व्यवस्था में Dopamine कार्य करता है। जब हम कोई ऐसा कार्य करते हैं जो हमारे अस्तित्व के लिए आवश्यक होता है (विकास के क्रम में शिकार करना या वंशवृद्धि के लिए मिलन ) तो हमारा दिमाग इस व्यवहार को प्रोत्साहित करता है ताकि हम इस काम को  जारी रखें और आगे भी इस काम को करने की संभावना बनी रहे। 'प्यार' ऐसा ही व्यवहार है, जिसमे मिलन और फिर वंशवृद्धि की संभावना होती है। इसीलिए जब हम प्यार में होते हैं तो मस्तिष्क में Dopamine इस व्यवहार को फील गुड कराता है।

    Serotonin एक ऐसा केमिकल है जो किसी के मन को नियंत्रित करने में सक्षम होता है। जब किसी को प्यार का भाव आता है तो Serotonin का स्तर कम हो जाता है। (मन पर से नियंत्रण कम हो जाता है ) एक शोध ये बताता है कि, प्यार में होने पर इसका स्तर ओ सी डी  के मरीजों के बराबर स्तर तक कम हो जाता है जो अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नही रख पाते हैं। ऐसा क्यों होता है ? विकासवाद के अनुसार यदि हमारा मन नियंत्रण में रहेगा तो हम अपने साथी से आगे बढ़कर प्यार का इजहार नही कर पायेगे। प्यार का संबंध मजबूत नही होगा। और साथी के साथ मिलन की भावना भी प्रबल नही होगी। इसलिए यह जरूरी है कि प्यार में  मन पर से नियंत्रण हटा दिया जाय, और यही कार्य मस्तिष्क Serotonin की मात्रा कम करके हमारे लिए करता है।

     

    अभिलाषा का neurochemicals Adrenalin:-

    जब हमें प्यार होता है तब दूसरे हार्मोन्स जो प्रभावी हो जाते हैं वो हैं,- adrenalin और cortisol,  पर वास्तव में ये प्यार की अपेक्षा अभिलाषा को बढ़ाते हैं। और अभिलाषा प्यार को बढ़ाती है। अभिलाषा बढ़ने पर हम साथी को आकर्षित करने के लिए स्वयं को अच्छा दिखाने की कोशिश करते हैं।

    क्यों लोग प्यार और अभिलाषा एक ही साथ महसूस करते हैं :- प्यार और अभिलाषा मस्तिष्क के एक ही भाग में उत्पन्न भावना है, फिर भी दोनों में बहुत सूक्ष्म अंतर होता है। इसीलिए अक्सर लोग प्यार और अभिलाषा एक साथ महसूस करते हैं, और दो अलग लोगों के लिए भी इन भावनाओं को महसूस करते है। इसीलिए अक्सर अपने साथी के साथ अभिलाषा की भावना खत्म होने के बाद भी प्यार बना रहता है।

    कुल मिलाकर जब हम प्यार में होते हैं तो दिमाग में बहुत कुछ केमिकल लोचा हो रहा होता है। इसलिए ये कहना कि प्यार का कारण ये केमिकल हैं गलत नही होगा।

    अब जब कभी आप किसी के प्रति प्यार महसूस करें तो घबराएं नही बल्कि इसे केमिकल का प्रभाव समझ कर प्यार का मजा लें और खुश रहें, और यदि आपको लगे की ये गलत प्यार है,तो सारा दोष केमिकल पर लगा कर अलग हो जाना बेहतर विकल्प है।  

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  • 31 Jan
    Shiva Raman Pandey

    सही कैरियर का चुनाव

     

    right career

    सही कैरियर का चुनाव

     

    अभी हाल ही में कोचिंग केन्द्रो में पढ़ने वाले छात्रों की आत्महत्या किये जाने की खबरें प्रकाशित हुई थी। इन खबरों से मन में स्वाभाविक  प्रश्न उठता है कि

    आखिर क्या वजह है, जिससे ये छात्र आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा रहें हैं?

    कहीं माता-पिता, कोचिंग संस्थानों और समाज के द्वारा उनके मन पर डाले जा रहे प्रतिकूल दबाव के कारण तो ऐसा नहीं हो रहा?

    हमें अपने होनहारों को उनके मन के अनुकूल कैरियर चुनने में मदद करनी चाहिए ना की समाज या दूसरों के दबाव में आकर।

     

    चलिए हम एक मछली, एक कुत्ता और एक चिड़िया के उदाहरण को देखते हैं, यदि तीनो से ही तैराक बनने के लिए कहा जाय, तो मछली वास्तव में बहुत अच्छी तैराक बनेगी, कुत्ता सिर्फ थोड़ा सा ही तैर पायेगा, और चिड़िया तो बेचारी पानी में घुस ही नही पायेगी और बेरोजगार ही रह जाएगी। तीनों की अपनी अलग-अलग शक्तियाँ  हैं और तीनो को हमें एक ही कैरियर चुनने के लिए नहीं कहना चाहिए।

    लेकिन आज के दौर में हम यही काम अपने बच्चों के साथ कर रहें हैं, हम सभी अपने बच्चों की रुचियाँ और विशेषताओं की परवाह किये बिना उन्हें इंजीनियर्, डॉक्टर और मैनेजर बनाना चाहते हैं।

    ये तीन बातें हमें हमारे निर्णय बदलने में हमारी मदद कर सकते हैं:-

    व्यक्तिगत स्वास्थ्य :-

    जब हम अपने मन की इच्छा के अनुसार कार्य करते हैं तो,चुनौतीपूर्ण कार्य होने के बावजूद हम उत्साह के साथ उस कार्य को करते हैं। जबकि यदि  ऐसा कार्य करने के लिए हम पर दबाव डाला जाता है, जिसे ना ही हम करना पसंद करते हैं और ना ही उसे करने के लिए हमारे पास योग्यता और मन है ,तब समय बीतने के साथ-साथ हम तनाव, उत्तेजना और अन्य समस्याएं महसूस करने  लगते हैं। अच्छा और मनपसंद काम हमारी ऊर्जा को बढ़ता है, लेकिन यदि हम ऐसा काम करते हैं, जिसे करने में हम ख़ुशी  महसूस नहीं करते बल्कि घबराहट महसूस करते हैं, तो हमें आत्मसम्मान में कमी होने का अहसास होता है। आजकल 5th या 6th क्लास में पहुंचते ही बच्चे को दिन के 14 या और अधिक घंटों के लिए व्यस्त(पहले school फिर tuition classes) कर देते हैं। बच्चे अपने मन से खेलने के लिए बिलकुल भी समय नही पाते हैं,ऐसे बच्चे बड़े होकर एक ऐसे वयस्क नागरिक बनते हैं, जो अपने कार्य से हमेशा असंतुष्ट और दुखी रहते हैं।

    इन सबके चलते बच्चे में

    स्कूल से संबंधित तनाव,

    एग्जाम से संबंधित तनाव

    और कार्य करने को लेकर तनाव में देखा जाता है। स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।

    उच्चरक्तचाप और ह्रदय संबंधी परेशानियां, मोटापा, शरीर के किसी भाग में लगातार दर्द या पीड़ा और खराब स्वास्थ्य के रूप में दिखाई देता है। यहां तक की मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों का भी कारण तनाव हो सकता है। इस तनाव को कम करने या इससे मन को भटकाने के लिए मादक द्रव्यों का सेवन इन बीमारियों को और बढ़ाता है। मनोवैज्ञानिक तौर पर उनमें अत्यधिक क्रोध, निराशा और मानसिक तनाव होता है।

     

    कार्यक्षेत्र में प्रदर्शन :-

    जब आप मन लगाकर किसी कार्य को नहीं करते हैं तो इसकी संभावना अधिक है कि आपका कार्य भी अच्छा नहीं होता और आपका प्रदर्शन भी अच्छा नही होता है। इसका असर आपके कार्यक्षेत्र में, रिश्तों में, आत्मसम्मान में और आपके व्यवहार में झलकता है। अगर किसी तरह आप अपने को औसत या कुछ अच्छे प्रदर्शन के लिए फ़ोर्स भी कर लेते है, लेकिन आपका मन यहाँ नही है जिससे आप लगातार अपनी योग्यता के बारे में असुरक्षित महसूस करते हैं।

     

    धन /आय :-

    ज्यादातर लोग विशेष रूप से माता -पिता ऐसा सोचते हैं कि आमदनी अच्छी है तो सब सही है। प्रोफेशनल संस्थानों में प्रवेश लेने वालों की संख्या बढ़ने से शिक्षा का मूल्य तो बढ़ गया है लेकिन इसकी गुणवत्ता में कमी आई है, परिणाम स्वरूप प्रति वर्ष ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है जो इंजीनियरिंग, प्रबंधन और मेडिकल  की पढ़ाई करके भी बेरोजगार हैं। हाल ही में 7500 इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स ने चपरासी की job के लिए आवेदन दिया। क्या माता -पिता वास्तव  में अपने बच्चे को ऐसी स्थिति में देखना  चाहते हैं?

    माता -पिता दूसरे के बच्चे क्या कर रहे हैं, इस बात से प्रभावित हुए बिना अपने बच्चे को बचपन में पर्याप्त खेलने के अवसर दें ताकि उसके व्यक्तित्व का अच्छे से विकास हो सके, और उसकी रुचियों और रुझानों के बारे में जानकर हम उसे उसके मनपसंद क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करें, आप स्वयं देखेंगे की कैसे आपके बच्चे एक खुशहाल, स्वस्थ और आर्थिक रूप  से सक्षम नागरिक बनेगें।

    आइये देखते हैं संदीप माहेश्वरी की इस बारे में राय :

     

  • 17 Dec
    eWellness Expert

    मिलनसार इंसान का मनोविज्ञान

    introvert extrovert

     

    अगर आपका कोई दोस्त मिलनसार या एक्सट्रोवर्ट(बहिर्मुखी )स्वभाव का है, तो इसका मतलब आप बड़े खुशकिस्मत हैं ।  वह बहुत जल्द लोगों से घुल मिल जाएगा, और गर्मजोशी से लोगों से दोस्ती बना लेगा।

    अगर आप ऐसे इंसान के साथ है, तो अनजान लोगों से मिल कर बात करने की पीड़ा आप को उठानी ही नहीं पड़ेगी, आप का दोस्त अनजान इंसान को भी झट से अपना बना लेगा। इस प्रकार, वे सबसे निर्लिप्त सेल्स पर्सन से भी बात कर पाएंगे, और उच्च पद में कार्यरत मैनेजर से भी।

    ऐसे लोगों में बहुत ज्यादा एनर्जी और उत्साह होता है। जिसे सही रूप से, सही दिशा में खर्च ना किया जाए, तो उलझन पैदा कर सकता है। काम बिगाड़ सकता  है।

     

    तो ऐसे मिलनसार इंसान से कैसे काम करवाएंगे?

     

    १. उनसे बात कैसे करना है ये पता होना चाहिए- मिलनसार इंसान से उसकी जन्म भाषा में बात करें। इससे वे खुल कर बात करेंगे, और बातों बातों में आपके काम की बात पर काफी मुख्य इन्फार्मेशन देंगे, इस प्रकार आप उससे बेहतर घुल-मिल जाएंगे। अगर आप कोई ऑफिसियल या बिज़नेस की भाषा में बात करते हैं तो वे जल्द ही आप से ऊब जाएंगे।

     

    २. उनके उत्साह को बढ़ावा दें- उनके अंदर, कुछ नया कर दिखाने का जोश भरा होता है, पर आपका काम है उसे सही तरह से सम्हालना। उनके जोश और जज़्बे को बढ़ावा दें। हर विषय पर वे मत देना चाहेंगे, उन्हें रोकिये मत। उनकी बात सुने, समझें, और प्रशंसा करें, भले वह परिस्थिति से मेल ना खाती हो। "तुम्हें हर बात में अपनी विशेष टिपणी बताने की ज़रुरत नहीं", अगर इस प्रकार तिरस्कार करेंगे, तो इंसान दब जाएगा, और जब उत्साह ज़रूरी होगा तब भी नहीं दिखा पायेगा।

     

    ३. उनसे काम करवाना है, तो उन्हें कायदे से झूठ बोलें- एक बहिर्मुखी इंसान के लिए ये विश्व इंसानों के रिश्ते पर आधारित है। इसलिए उसके लिए ये मानना कठिन होता है, कि कोई इंसान अकेले भी रहना पसंद करते हैं। लेकिन वे यह  आसानी से मान लेंगे कि, दूसरे इंसान की ख़ुशी आप पर निर्भर है।

    इसलिए उनको काम करवाना हो तो सिर्फ इतना बताएं "ये काम हो जाना ज़रूरी है, एक ख़ास इंसान की ज़रुरत के लिए", वे फौरन उस पर लग जाएंगे।

     

    ४. उनको मल्टीटास्किंग करने दें- बहिर्मुखी व्यक्ति एक प्रकार के काम पर ज्यादा देर तक, अपना ध्यान नहीं रख पाते। वे थक जाते हैं। वे एक साथ कई चीज़ों पर विचार करते हैं। इसलिए उन्हें साथ में २-३ काम दे दें और भरोसा रखें कि, वे अपने समय का सदुपयोग करेंगे और हर काम को वक़्त पर पूरा करेंगे।

     

    ५. उन्हें बोलते रहना चाहिए- बहिर्मुखी इंसान बात नहीं करेंगे तो वे सोच भी नहीं पाएंगे। उन्हें बात करने दें, आप अगर उनकी लम्बी कहानियों से परेशान भी हो रहे हैं, तो उसे ज़ाहिर होने ना दें। क्योंकि वह एक ज़रूरी विषय पर ही बात कर रहे हैं, जिसे आप समझेंगे, पर उस प्रक्रिया में वे कई विभिन्न चीज़ों पर भी आलोचना करना चाहते हैं।

     

    ६. वे स्वतंत्रता से काम करना चाहते है और उन्हें ऐसा करने दें- उनको सिर्फ टॉपिक बता दें, और उन्हें खुद से उस में कूदने दें। आपको उन्हें शुरुआत में गाइड करने की ज़रुरत नहीं। उन्हें अपने हिसाब से सोचने दें, और बाद में आप उनके काम पर मत प्रदान करें। उनके स्वतंत्र सोच को दबने ना दें। इससे वे और बेहतर काम करेंगे, और सफलता से ज़िम्मेदारी को सम्हालेंगे।

  • 30 Jan
    Oyindrila Basu

    खुद में करिश्माई व्यक्तित्व विकसित करें।

    charismatic personality

     

    आपने अकसर लोगों को कहते सुना होगा, "उस लड़के में एक करिश्मा है", या "वे एक  करिश्माई व्यक्तित्व वाले इंसान हैं।“

    इससे साफ़ होता है, की 'करिश्मा' जिसे हम नाम दे रहे हैं, वह एक व्यक्तित्व गुण विशेष है, एक विशेष प्रतिभा, जिससे दूसरे प्रभावित हो जातें है।

    हम सभी में, व्यक्तित्व का विकास अलग अलग होता है। कुछ लोग होते हैं, जो अपनी बोलचाल से सब को मोहित कर सकते हैं।  ऐसा हम कई बार नौकरी के इंटरव्यू के दौरान देखते हैं, कि पढ़ाई और योग्यता में आगे होने के बावजूद, किसी को नौकरी नहीं मिलती, पर उसी के सामने, किसी कम योग्य इंसान को, सिर्फ अपनी बातचीत की अदाओं की वजह से तारीफें हासिल होती है, (और नौकरी भी)

     

    लोग कहेंगे, "उसने इंटरव्यू के लिए अच्छे से रटा होगा", या "वह काफी स्मार्ट है"

     

    असल में, बात स्मार्टनेस की नहीं है, यह सभी  की नजर अपनी ओर करने की क्षमता है, जो सब को भा जाती है, और जल्दी सफलता मिल जाती है।

     

    बॉलीवुड और क्रिकेट के क्षेत्र में भी हमने देखा है, कि कुछ सितारों को बहुत जल्द लोकप्रियता मिलती है । यही एक्स-फैक्टर सफलता के लिए हम सब के व्यक्तित्व में होना ज़रूरी है, क्योंकि भाग दौड़  की ज़िन्दगी में, समय कम है, और पहला प्रभाव ही आखिरी हो जाता है।

     

    अपने व्यवहार से ही आप लोगों को खुद के व्यक्तित्व का अहसास दिला सकते हैं। 

     

    अपने अंदर के करिश्माई व्यक्तित्व को उभारने के लिए निम्न बातों को समझना होगा ।

     

    1.पहले अपनी कमज़ोरियों को पहचानें, उनको समझें, और मिटाने और उनमें सुधार लाने की कोशिश करें ।

     

    2.अगर आपको सबके सामने बोलने में हिचक होती है, या आप हकलाते हैं तो शर्माएं नहीं, तुरंत मनोचिकित्सक की सहायता से अपनी कमज़ोरियों का इलाज करवाएं । खुद की उन्नति के लिए मनोचिकित्सक से परामर्श लेने में कभी न हिचकें ।

      

    3. अगर आपकी शारीरिक समस्या जन्मजात है, और पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकती, तो अपनी कमज़ोरी को अपनी ताकत बनाएं। आपकी आँखें, कमज़ोर है, तो घबराने की बजाए, इस बात का फायदा उठाएं, और लेंस का प्रयोग करें।  रंगीन आँखों से आप खूबसूरत भी लगेंगे और आपके व्यक्तित्व को गंभीरता मिलेगी।

    या अगर आप हकलाते हैं, शर्माने की बजाए, हकलाहट को अपनी बातचीत के दौरान, हास्य  का हथियार बनाएं, लोग आपसे खुश भी होंगे, और आपसे ज्यादा घुल मिल जाएंगे। यकीन नहीं आता, तो याद करें वह विख्यात लाइन, " आई लव यू क्क्क्क्क्क्क किरण ", जो प्रेमियों का आदर्श बन गया था।

     

    4.अपने आत्मविश्वास को मजबूत करें। जैसा हमने कहा, व्यवहार से ही हम सर्वप्रथम लोगों के दिलों तक पहुँचते हैं। इसीलिए बातचीत, चाल चलन, सोच, आपके हर चीज़ में आत्मविश्वास की झलक ज़रूरी है।

     

    5. अपना साधारण ज्ञान बढ़ाएं। खबरों को सुनें, विभिन्न विषयों पर पढ़ाई जारी रखें, जिससे आपको पता रहे, कि कहाँ क्या हो रहा है। जब आपको ज्ञान होगा, तब आप अंदर से आत्मविश्वास का अनुभव कर पाएंगे। प्रतिभा, आत्मविश्वास के बिना अधूरी है, अगर स्टेज पर गाते समय आप खुद घबराएंगे, तो दर्शक भी आपका गाना सुनने में उत्सुक नहीं होंगे।

     

    6. अपने शारीरिक हाव-भाव में एक अच्छी सुधार लाने की कोशिश करें। आप अच्छा बोल रहें है, पर सुनने वाले को आकर्षित करने के लिए, सही हावभाव ज़रूरी है। जैसे हाथ कैसे हिला रहें है... किस तरफ देख रहें हैं... मुसकुरा रहें है या नहीं... यह सब दूसरे को प्रभावित करने के लिए जरूरी है।

     

    तो हमारी टिप्पणियों को ध्यान में रखें, और अपने अंदर उस 'करिज्मा' को जगाएं, फिर करिश्मा कपूर भी आपको हरा नहीं पाएंगी :) 

  • 29 Jan
    Shiva Raman Pandey

    आपके निगेटिव में क्या पॉजिटिव है?


    positive thinking

     

    एक युवा महिला अपनी डाइनिंग टेबल पर बैठी थी और चिंतित थी, इस बात से परेशान थी कि, इनकमटैक्स देना पड़ता है। घर का ढेरों काम करना होता है और ऊपर से कल त्यौहार के दिन लंच पर बहुत से रिश्तेदार भी आने वाले हैं।

    कुल मिलाकर वो बहुत परेशान थी।

     

    करीब ही उसकी 10 साल की बिटिया अपनी स्कूल नोटबुक लिए बैठी थी।माँ के पूछने पर वो बोली---" टीचर ने होमवर्क दिया है (Negative Thanks giving) और कहा है कि, उन चीजों पर एक पैरेग्राफ लिखो जो प्रारम्भ में हमें अच्छी नहीं लगतीं, लेकिन बाद में वो अच्छी ही होती हैं। मैंने एक पैरेग्राफ लिख लिया है। "

     

    उत्सुकतावश माँ ने बेटी से नोटबुक ली और पढ़ने लगी कि, उसकी बेटी ने क्या लिखा है।

    बेटी ने लिखा था,

     

     

    “ मैं अपनी फाइनल एग्जाम को धन्यवाद देती हूँ क्योंकि इसके बाद स्कूल बंद होकर छुट्टियाँ लग जाती हैं। "

     

    " मैं उन कड़वी खराब स्वाद वाली दवाइयों को धन्यवाद देती हूँ जो मेरे स्वस्थ होने में सहायक होती हैं। "

     

    " मैं सुबह सुबह जगाने वाली उस अलार्म क्लॉक को धन्यवाद देती हूँ जो सबसे पहले मुझे बताती है कि, मैं अभी जीवित हूँ। "

     

    पढ़ते पढ़ते माँ ने महसूस किया कि, उसके खुद के पास भी तो बहुत कुछ ऐंसा है जिसके लिए वो भी धन्यवाद कह सकती है।

     

    उसने फिर सोचा,

     

    " उसे इनकमटैक्स देना होता है, इसका मतलब है कि वो सौभाग्यशाली है कि, उसके पास एक अच्छी सैलरी वाली बढ़िया नौकरी है। "

     

    " उसे घर का बहुत काम करना पड़ता है, इसका मतलब है कि उसके पास एक घर है, एक आश्रय है। "

     

    " उसे परिवार के बहुत से सदस्यों के लिए खाना बनाना होगा, इसका मतलब है कि उसके पास एक बड़ा परिवार है जिनके साथ वो त्योहारों पर सेलिब्रेट करती है। "

     

    मॉरल :

     

    हम निगेटिव बातों या चीजों को लेकर बहुत शिकायतें करते हैं लेकिन उनके पॉजिटिव पक्ष को समझने, देखने में असमर्थ रहते हैं।

    आपके निगेटिव में क्या पॉजिटिव है, उसे समझिए और अपने हर दिन को एक बेहतरीन दिन बना लीजिए।

    क्योंकि ये नेगेटिविटी भी एक शक्ति है, जो हमारे अंदर, घुस जाती है, और हम उसके आदी हो जाते है।

    'सकारात्मकता' या 'पाजिटिविटी' भी एक प्रकार कि अंदरूनी शक्ति, या ऊर्जा है।

    मरियम वेबस्टर के अनुसार सकारात्मकता एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हम मानसिक रूप से अच्छा महसूस करते हैं।

    नकारात्मकता को सकारात्मकता से ही जीता जाता है।  

    • अपने अंदर कि पाजिटिविटी को बाहर निकालिये । और सकारात्मक सोच को विकसित करने के लिए ऐसे लोगों के साथ अपना वक़्त बिताएं जो हमेशा सही और सकारात्मक सोच रखते हों । 
    • अच्छा गाना सुने, जो आपको पसंद हो ऐसी चीज़ों में खुद को व्यस्त रखें।
    • दिल से जलन, गुस्सा जैसी भावनाओं को कम करने की कोशिश करें।
    • अगर कुछ नकारात्मक बात आपको परेशान कर रही है, तो दोस्तों से या किसी निकट इंसान से बात करें। नेगेटिविटी घट कर आधी हो जाएगी, और आप में पाजिटिविटी दुगनी हो जायेगी। 

    पाजिटिविटी या सकारात्मकता हमें, कठिन समय का सामना करने की ताकत  देता है।

    हमारा मनोबल बढ़ाता है।

     

     

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