• 04 Feb
    Oyindrila Basu

    बुलीइंग का मुक़ाबला कैसे करें!

    couple in romance vector

    हमारे  लेख में, हमनें बरखा मेघाणी जी का ज़िक्र किया था। कुछ महिलाएं, उन्हें ट्रेन में परेशान कर रही थीं, और उन पर हँस रही थीं और उनकी तस्वीरें खींच रही थीं। बरखा ने, हिम्मत करके रेलवे पुलिस को कांटेक्ट करने की कोशिश की, बात नहीं बनी, तो आलोक  बोहरा जी,(the Senior Divisional Security Commissioner of the Railway Protection force) से सहायता मांगी। अगले दिन, कुछ महिला पुलिस बरखा के साथ, साधारण कपड़ों में, उसी ट्रेन में चढ़ीं, और उन महिलाओं ने उनके साथ भी बदतमीज़ी करने की कोशिश की, और पकड़ी गयीं।

    हम सब को याद रखना है, चुप रहने से कुछ नहीं होगा। हर जुर्म के लिए कानून है, पर हमें सहायता तो मांगनी होगी।

    1.अगर स्कूल में, बच्चे को छेड़छाड़ से परेशानी हो रही है, तो माता-पिता को ये ज्ञात होना ज़रूरी है। अपने बच्चे पर ध्यान रखें, उससे पूछें, क्यों स्कूल नहीं जाना चाहते?

    उनको जाकर पहले कक्षा के शिक्षक से बात करना ज़रूरी है। अगर असर न हो, तो स्कूल के प्रिंसिपल से इस विषय पर चर्चा करें। और अगर शिक्षक द्वारा कोई परेशानी है, तो उसका भी डट कर विरोध करें। देश में एजुकेशन मिनिस्ट्री तो है ही।

     

    2.साइबर बुलीइंग, या इंटरनेट में हो रही छेड़खानी और बदमाशियों के लिए, हमारे देश में सख्त कानून है, जो साइबर स्पेस को सुरक्षित करने के लिए ख़ास बनायी गयी है। साइबर क्राइम के लिए पुलिस के दफ्तर में एक अलग डिपार्टमेंट है । हर विषय में जानकारी रखने से आपकी समस्याओं का जल्द समाधान होगा। इस प्रकार की घटनाओं में, दोस्तों की सहायता भी ले सकते हैं।

     

    3.सांसारिक जीवन में, हर पक्ष को यह बात समझना ज़रूरी है कि #सास भी कभी बहु थी और बहु भी याद रखें, की एक दिन वह भी सास बनेंगी। कमेंट करने से कड़वाहट बढ़ती है, एक दूसरे का साथ दें, न की दोष निकालें।

     

    अंदरूनी डर को मिटायें। साहस का प्रयोग करें। साधारण ज्ञान को बढ़ाएं। बुलीइंग का समाधान ढूंढ पाएंगे।

  • 04 Feb
    Oyindrila Basu

    बुलीइंग और उसके प्रभाव।

    bullying

    छेड़छाड़ या "बुलीइंग" के लम्बे दुष्प्रभाव होते हैं। दूसरों के दबाव और बदमाशी के आगे झुकना, इंसान को हार महसूस करवाता है, खुद पर उसे शर्मिंदगी होती है, और जल्द ही ऐसी परिस्थिति का समाधान ना हुआ, तो पीड़ित इंसान का मनोबल हमेशा के लिए टूट सकता है।

     

    1.स्कूल में bullying के शिकार हुए बच्चे का, अपने आप से विश्वास उठ जाता है। यह कच्ची उम्र हैं, जिसमें में उनके मानसिक विकास की शुरुआत होती है। ऐसे में, कुछ घटनाओं का बहुत गहरा असर हो सकता है। bullying के शिकार बच्चों को, स्कूल या कॉलेज से डर लगने लगता है,वह पढ़ाई से भी रुचि खो देता है। इससे उसके भविष्य पर असर पड़ सकता है।

     

    2."एथलेटिक बुलीइंग" या खेल क्षेत्र में छेड़छाड़ से खिलाड़ियों के विकास पर असर पड़ सकता है। बार बार नकारे जाने से, खिलाडी में हीन भावना पैदा हो सकती है, और वे खेल से रुचि खो सकते हैं।

     

    3.इंटरनेट द्वारा बुलीइंग की घटनाएं बहुत चर्चा में है, क्योंकि, इस क्षेत्र में बात सिर्फ मज़ाक तक सीमित नहीं होती, पीड़ित पर ऐसे बुलीइंग का गहरा प्रभाव होता है। कई बार, इससे थक कर पीड़ित आत्महत्या तक कर लेते हैं ।

     

    4.घर में आई, नई बहु को अपने ससुराल वालों से ऐसे व्यवहार के चलते रिश्तों में दरार आती है। बार-बार की टिप्पणी या तानों से उन्हें भेद-भाव महसूस होता है, जो की एक नकारात्मक अहसास है, और यह उनके मस्तिष्क में बैठ जाता है, कि कोई उन्हें पसंद नहीं करता।

    बाद में रिश्ते सुधर भी जाए, तो भी वे खुद को, या अपनी धारणा को नहीं बदल पातीं, इससे उनके सांसारिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

     

    5.सड़क पर लड़कियों को, (आजकल लड़कों को भी) छेड़छाड़ की घटनाओं का सामना करना पड़ता है। ये शारीरिक रूप से उन्हें भले ही हानि ना पहुंचाएं, पर मानसिक रूप से,मस्तिष्क पर इसके गहरे प्रभाव होते हैं । लड़की जो छेड़छाड़ का विरोध नहीं कर पाती, हमेशा असुरक्षित महसूस करती है। कहीं भी अकेले जाने से डरती है।

     

    इससे लड़ने का कोई तो उपाय होगा?

  • 04 Feb
    Oyindrila Basu

    बदतमीजी और उसके भिन्न प्रकार।

    bullying

    बदतमीजी किसी भी रूप में कहीं भी हो सकती है।

    एक आम आदमी अगर केले के छिलके पर फिसल जाय तो उसपर हँसना बदतमीजी है।

    अपने सहपाठी जो होमवर्क करना या लाना भूल गया है, उसकी शिकायत शिक्षक से करना बदतमीजी  है।

    कॉर्पोरेट क्षेत्रों में,  किसी और का क्रेडिट  खुद लेना बदमाशी है।

    खेल के मैदान, में कोच के द्वारा एक एथलीट का ज्यादा पक्ष लेना ।

    बस स्टैंड पर, छोटे स्कर्ट में लेडी के बारे में गन्दी बातें करना ।

     

    Bullying बदमाशी बहुत प्रकार की होती हैं ।

     

    स्कूल में Bullying बदमाशी

    इस पर हमने विस्तार में बातचीत की है, की कैसे बच्चों को स्कूल में, दूसरे छात्रों से, छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ता है। सब के सामने मज़ाक बनता है उनका। इससे उनके आत्मविश्वास को ठेस पहुँचती है, और इसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर होता है।

    बस पर चढ़ते वक़्त, छोटेबच्चों को उनसे बड़े बच्चों से बुलीइंग  का शिकार होना पड़ता है, । कक्षा में, अगर कोई बच्चा शारीरिक तौर से दुर्बल है, तो उसका मज़ाक बनता है, दिखावट पर  भी मज़ाक बनाया जाता है, जैसे अगर कोई मोटा है तो उसका मज़ाक बनता है, ऐसा रीतिशा बासु बतातीं है, जो कि कलकत्ते की एक स्कूल की स्टूडेंट रह चुकी हैं।

     

    AthleticBullying

    खेल की दुनिया में भी बुलीइंग एक सामान्य बात है। इसे #AthleticBullying कहाँ जाता है। इस क्षेत्र में, खिलाड़ियों के बीच हाथापाई, किसी एक पर सब का झुण्ड बनाकर आक्रमण करना, खेल में शामिल न होने देना ये आम बातें होती है। आपसी मतभेद पर किसी खिलाड़ी को आगे बढ़ने न देना ये भी इस क्षेत्र में देखा जाता है।

     

    CorporateBullying

    कर्म क्षेत्र में "बुलीइंग” या छेड़छाड़ के नमूने काफी सामान्य है। बॉस का किसी एक व्यक्ति पर ज्यादा ध्यान देने से वे उसे ज्यादा काम सौंपते हैं, सब के सामने दूसरों को नीचा भी साबित कर सकते हैं। इसे "CorporateBullying" कहते हैं। लोकल ट्रेन में छेड़छाड़ की घटना पहले भी हो चुकी हैं। हाल ही में, सुनने में आया था, कि बरखा मेघाणी नाम की, २३-वर्षीय महिला ने, डट कर, ऐसे छेड़छाड़ का विरोध किया है।

     

    साइबर बुलीइंग

    "साइबर बुलीइंग" एक नए प्रकार की समस्या है, जो हमारे युवा पीढ़ी पर के मन पर अजीब तरह से  फैलती दिखाई दे रही है। इंटरनेट के द्वारा किसी को शर्मिंदा करना, अश्लील संदेश भेजना, अजीब फोटोज पोस्ट करना, ये सब इंटरनेट द्वारा बदमाशी bullying  में होता है। गंभीर बात तो ये है, कि ऐसे में, बदमाश की पहचान अकसर गुप्त रहती है।

     

    बुलीइंग और रैगिंग में एक प्रकार फर्क है। रैगिंग हमारे समाज में और भी ज्यादा गंभीर समस्या माना जाता है, इसलिए, उसके खिलाफ सख्त कानून है, पर छेड़छाड़, बुलीइंग,या बदमाशी को हल्के प्रकार से लिया जाता है, तो हमारे संविधान में, इनके खिलाफ कम ही धाराएं है।

    रैगिंग, हमेशा बड़े उम्र वाले, अपने से छोटे उम्रवालों पर करते हैं, जैसे की सीनियर्स, कॉलेज में करते हैं। पर bullying एक सबल की निर्बल पर मानसिक पीड़ा है, जो हमउम्र में भी होता है।

    किस प्रकार इसका मुक़ाबला किया जाये, यह हम आगे बताएंगे।

     

  • 03 Feb
    Oyindrila Basu

    Bullying-असली ज़िन्दगी की कहानियाँ।

    cyber bullying

     

    "Bullying पहली कक्षा से शुरू हो गयी थी। कोई मेरे दोस्त नहीं थे। सब मुझ पर हँसते थे। मैं उनसे घुल मिलने की कोशिश करती थी, पर वे मुझे दूर कर देते थे। दूसरी कक्षा में परिस्थिति और गंभीर हो गया। मेरे दो नए दोस्त बने, पर जब उन्होंने भी मेरा मज़ाक उड़ाना शुरू किया तो........... " (सु का कथन , नेशनल बुलीइंग प्रिवेंशन सेंटर को )

     

    ज्यादातर यही होता है, bullying से जुडी समस्याओं का कोई समाधान न मिलने पर, हम उदासी में दिन बिताते है, या फिर जल्दी में, कुछ गलत कदम उठाते हैं।

     1. सारा लीन बटलर, आर्कान्सास् की एक प्रतिभाशाली महिला ने कुछ ही समय पहले आत्महत्या जैसे जघन्य रास्ते का सहारा लिया क्योंकि, इंटरनेट पर उस पर होने वाले अभद्र कमेंट, चित्र से वह बहुत परेशान थी, और डर गयी थी, कि समाज में उसकी छवि , इज़्ज़त, सब खराब होने वाली है। घरवालों को भी बता नहीं पा रही थी, #MySpace पेज पर कोई उसे अश्लील मेसेज भेज रहा था।

     2. लंदन में, एनाया नाम की लड़की को भी bullying का शिकार होना पड़ा अपने स्कूल में। वह किसी से शिकायत नहीं कर सकती थी। चुपचाप रहती थी।

     

    पर अगर प्रशासन में उपस्थित लोग भी इस दबी रैगिंग के पक्ष में हो तो?

     

    3. कलकत्ते में पढ़ने वाली एक पांचवी कक्षा कि लड़की ने हाल ही में कथन दिया है, कि जब शिक्षक के मत से उसका मत अलग था, तो शिक्षक जान बूझकर दूसरे बच्चों को उस लड़की से मिलने, या उसे पढ़ाई में दूसरे बच्चो से मदद की अनुमति नहीं देतीं थी। अगर कोई बताता, तो उसे भी डांट-फटकार मिलती, या फिर परीक्षा में कम नंबर।

    ये क्या है?  कैसे समाज में जी रहे हैं हम, जहां, शिक्षक अपने छात्रों से बैर निकाल रहे हैं?

     

    4. लोकल ट्रेन में bullying तो आम बात है। जैसे सीट को लेकर । पद्मा शुक्रे, मुंबई की लोकल ट्रेन में सफर करने वाली एक यात्री ने बताया, कि रोज़ दूर सफ़र के वक़्त, जब इतनी भीड़ होती है, कुछ लोग हमेशा सीट कब्ज़ा करके रखते हैं। कोई थका इंसान बैठने भी जाए तो उसे, धमका कर या परेशान करके वहां से उठने पर मजबूर कर देते हैं।

    पर इस का क्या समाधान है? कैसे इसका प्रतिरोध किया जाये?

     

  • 02 Feb
    Oyindrila Basu

    छेड़-छाड़-एक सामाजिक कलंक

    bullying

    तस्वीर से मेल पा रहे हैं आप, जी हाँ सही समझे।

    अगली बार जब #सावधानइंडिया के एपिसोड में आप देखें की एक मासूम लड़की इंटरनेट पर छेड़छाड़ का शिकार हो रही है, तो अपने हाथ उठाएं, ज़ोर से इस बदमाशी को "ना" बोलें।

    एक वक़्त था, जब #खिलाडीकुमार की छेड़छाड़ वाली हरकतों पर हमें खूब मज़ा आता था, कि वे कैसे अपने जोश से फिल्मों में, कॉलेज की सारी लड़कियों को मोहित कर रहे हैं।

    पर आज इस छेड़खानी वाली हरकतों को हम हलके मिज़ाज से नहीं ले सकते, क्योंकि यह समाज में एक बीमारी की तरह फ़ैल रही है।

    अकसर बच्चे स्कूल से रोते हुए वापस आतें हैं, और बताते हैं, कि कैसे उसके पीछे बैठे स्टूडेंट ने उसके बाल खींचे, या फिर पूरी कक्षा के सामने उनका मज़ाक बनाकर उनकी खिचाई की।

    ये आम बातें होती है। हम सब के साथ हुआ है कभी न कभी।

    क्लास में कुछ सक्षम सहपाठियों का, हमारा टिफ़िन छीन लेना, या फिर हमारी कमज़ोरियों का मज़ाक बनाना, ये छेड़छाड़ और बदमाशी के किस्से हैं। ऐसी परिस्थिति में हम अकसर उदास हो जाते हैं, डर जाते हैं, कि हम किसी को बताएंगे, तो अगले दिन वह सहपाठी हमारा मुंह तोड़ देंगे, और फिर हमें पूरे स्कूल में ये सूजा हुआ मुंह ले कर घूमना होगा।

    ऐसे हादसे मानसिक रूप से हमें दुर्बल कर देते है। पर स्कूल बदल लेना, या क्लास का सेक्शन बदल लेना इसका समाधान नहीं है।

    अपने डर का सामना करें।

    छेड़छाड़ के बारे में अपने माता -पिता या शिक्षक से विचार करें।

    उन्हें बताएं, कि आपके साथ क्या हो रहा है।

    क्लास में हो रहे छेड़छाड़ के बारे में, अपने क्लास टीचर को सूचित करें।

    स्कूल में हुई छेड़खानी, बच्चों के मानसिक विकास को धीमा कर सकती है।

     

    "हिम्मत आग है, बदमाशी धुआं"- बेंजामिन इसराइल ।

     

    जैसा हमने पहले भी कहाँ है, बदमाशों को हिम्मत नहीं मिलेगी तो वे बदमाशी नहीं करेंगे।

    आखिर, बदमाशी करने वाले ऐसा क्यों करते हैं? दूसरों को परेशान करने कि मानसिकता आती कहाँ से  है?

    मवैज्ञानिकों के अनुसार उनका अतीत इस मानसिकता के लिए ज़िम्मेदार है। कॉलेज में, सीनियर विद्यार्थी अपने से नीची कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की, रैगिंग के नाम पर खिचाई करते हैं। क्योंकि अतीत में उनके साथ भी ऐसा ही हुआ था। ये हम सास-बहु के रिश्ते में भी देखते है, कि सास बहु को हमेशा सिखाने की कोशिश करती है कि घर कैसे चलता है, उसके हर काम में रोक टोक कर रहीं है।

     

     पर कभी कभी इंसान का व्यक्तिगत चरित्र ही हिंसक होता है। वे खुद को ज्यादा बलवान साबित करने के लिए दूसरे को परेशान करते रहते है। इंसान या तो प्यार से लोकप्रिय होते है, या फिर डर के प्रयोग से। इंसान जो बदमाशी या बदतमीजी करते है, वे असल में, लोगों में अपना डर बनाकर लोकप्रियता, और क्षमता पाना चाहते हैं।

    पर कोई हमें तभी छेड़ सकता है, जब हम उसे बढ़ावा दें। छेड़छाड़ का विरोध शुरू से ही करें।

    चुप्पी साधने से कोई ज़रूरी नहीं, कि कोई आपको फिर से परेशान नहीं करेगा।

    अगर कोई और इस घ्रिन्न मानसिकता का शिकार हो रहा है, उसकी मदद करें, छेड़खानी के खिलाफ आवाज़ उठाएं।

     

     

     

     

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