कुल 169 लेख

  • 05 Mar
    Oyindrila Basu

    आप योग्य हैं, खुद से प्यार करिये, सब आपसे प्यार करेंगे।

    khud se pyar karoअगर आपको लग रहा है, कि सब कुछ खत्म हो गया है, आप एक नकारे हुए इंसान है, सबसे बुरे, सबसे बेकार, आपका इस दुनिया में कोई काम नहीं, तो एक बार फिर से सोचिये....

    हम सब दुनिया में आतें है, एक उद्देश्य लेकर। लोगों में ज्ञान बाँटने का उद्देश्य और लोगों को प्यार देने का उद्देश्य।

    सोचिये उन लम्हों के बारे में जब आपका किसी ने शुक्रिया माना, और खुद से प्यार कीजिये,

    सोचिये जब आपने किसी का शुक्रिया अदा किया, और खुद से प्यार कीजिये।

    सोचिये जब आप जीत गए थे, और खुद से प्यार कीजिये।

    आत्म तुष्टि, खुद से प्रेम होना, अति आवश्यक है। खुद का तोल-मोल करना ज़रूरी है।

    आत्मज्ञान, आत्मनिर्भरता आपको मानसिक रूप से स्वस्थ बनाएगा।

    आप अगर खुद का सम्मान कर सकते हैं, तभी औरों का सम्मान कर पाएंगे। अगर आप खुद से प्यार करते हैं, तो दूसरों  से प्यार कर पाएंगे।

    और तब आपसे लोग खुद ब खुद  प्यार करेंगे।

    1. आत्मविश्वास ज़रूरी है: अंदर का आत्मविश्वास आपके चेहरे पर, आपकी बातों में झलकता है। आपको पता है की आप क्या कर रहे हैं, तो आप सही बोलेंगे, और सही दिशा में कदम बढ़ाएंगे ।

    2. सकारात्मकता: खुद में अच्छी भावनाएं रखें। सकारात्मकता सिर्फ आप के लिए ही नहीं, दूसरों के लिए भी लाभदायक है। आपकी अच्छी सोच से प्रेरित हो कर लोग भी अच्छा ही सोचेंगे, और आपको पसंद करेंगे।

    3. ईमानदारी: हर काम में सत और ईमानदार होना ज़रूरी है। आप जो बोल रहे हैं, उसमें भी सच्चाई माइने रखती है। पूर्ण जीवन में अगर आप एक सच्चे इंसान बन कर जी सकें तो उससे बेहतर कारण और क्या हो सकता है, कि आप खुद से प्यार करेंगे, और लोग आप से।

    4. लगन से काम करें: अपने काम से प्रेम और लगन होगा, तो आप हमेशा व्यस्त रहेंगे। और ज्यादा काम यानी ज्यादा खुशहाली। खुद कुछ तैयार करने का आनंद ही अलग है। मानसिक संतुष्टि आत्म सम्मान जगाएगी ।

    5. साज-श्रृंगार: दूसरों को प्रभावित करने के लिए ना सजें, खुद को खुश करने के लिए साज-श्रृंगार करें। नए कपडे पहने, सैलून में मसाज करवाएं, खुद का ध्यान रखें, पर किसी को मोहित करने के लिए नहीं, किसी के मत पर नहीं, खुद की पसंद से करें, और आत्म संतुष्टि से करें, लोग खुद आपकी तरफ  की आकर्षित होंगे।

    6. हँसमुखता: हँसिये और लोगों को भी हंसाइए। हास्य बड़ी बड़ी समस्याओं का समाधान है। आपके चुटकुलों से दूसरों के जीवन का अँधेरा दूर हो सकता है। खुश रहने से दिल भी तंदुरुस्त रहता है।

    7. मुस्कुराहट: आपकी मुस्कान कीमती है। जीवन में मुसीबतें आएंगी, पर मुसकुराते हुए उनका सामना करेंगे, तो कोई खेद नहीं रहेगा। सबसे मुसकुराते हुए मिलेंगे, तो उनका दिन अच्छा हो जाएगा। मुस्कुराने  के लिए कीमत नहीं लगती, अपने दुखों को मुस्कान में बदल दीजिए।

    खुद खुश रहेंगे, तो दूसरों को ख़ुशी दे पाएंगे, और सब आपसे प्यार करेंगे ।

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    • sapna sahi
      sapna sahi   Dec 25, 2015 04:27 PM

      मुझे तो सुई से बहुत ज्यादा डर लगता है । अपनी भावनाओ और बिचारो को व्यक्त करने के लिए और भी कई तरीके है आप उन्हें भी अपना सकते है । टैटू बनवाना तो दूर जब उसके बारे में सोचता हूँ तब भी मुझे डर लगता है |

  • 04 Mar
    Mandavi Pandey

    इंतजार का फल मीठा होता है।

     

    intjaar ka phal meetha hota hai

     

     

    शायद ही आपने Walter Mischell का नाम सुना होगा, लेकिन उन्होंने मनोविज्ञान के सबसे प्यारे परीक्षण के द्वारा हमारे व्यवहार के बारे में कुछ बहुत महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उन्होंने बच्चों के साथ ‘marshmellow test’ किया। जिसमें  बच्चे को कमरे में marshmellow के सामने बैठाकर परीक्षक ये कहकर चला जाता है कि, मैं थोड़ी देर में आता हूँ…

     यदि तुम मेरे वापस आने तक इंतजार करते हो तो तुम्हे दो marshmellow मिलेंगे और

    यदि तुम  इंतजार नही कर सकते तो एक बेल बजा देना मैं वापस आ जाऊंगा लेकिन तब तुम्हे सिर्फ एक  marshmellow मिलेगा।

    यह बच्चो के सब्र का इम्तिहान था। हाँ, बेशक यह हमारे खाने की तीव्र इच्छा पर हमारी धैर्य रखने की शक्ति पर लागू होता है, लेकिन यह नियम जीवन में भी उसी प्रकार लागू होता है। जब हमारी इच्छा  शक्ति हार जाती है तो हमारे शांत मन (जो यह कहता है कि इंतजार का फल मीठा होता है) के ऊपर बेसब्र  मन हावी हो जाता है जो कुछ नही सोचता सिर्फ फल पाना चाहता है।

    जिन बच्चों के साथ यह परीक्षण किया गया, बड़े होने पर उनके आत्म नियंत्रण का विश्लेषण करने पर देखा  गया कि जिन बच्चों ने marshmellow के लिए इंतजार नही किया वे बड़े होने पर भी खुद पर कमजोर नियंत्रण  वाले थे। और देखा गया कि इसका कारण उनके मस्तिष्क के किसी विशेष भाग की सक्रियता थी। इसलिए हम कह सकते हैं की हमारी बेसब्र इच्छाओं का neurobiological कारण होता है।

    इसके साथ ही जिन बच्चों में बेहतर नियंत्रण था वे बच्चे स्कूल- कॉलेज में अच्छी उपलब्धि प्राप्त करते हैं और उनके दूसरों से अच्छे संबंध होते हैं, उनका स्वास्थ्य अच्छा होता है, और वे तनावग्रस्त भी नही होते।  

    जल्दबाजी में किये गए कार्य हमेशा विपरीत परिणाम वाले होते है,जबकि धैर्य और सूझ बूझ के साथ किये जाने वाले कार्य हमेशा अच्छे परिणाम देते हैं।

     

    इसलिए यदि आप में धैर्य की कमी है, तो निम्न आदतों को अपना कर आप स्वयं को धैर्यवान बना  सकते हैं:-

     

    Delaying gratification

     

    1. अपने ध्यान को किसी अन्य बात में लगाएं  

    यदि आप अपनी इच्छाओं पर से ध्यान हटाने की आदत बना लेंगे तो आप स्वयं पर नियंत्रण कर सकने में सक्षम हो सकते हैं। मन को किसी अन्य जगह पर व्यस्त कर लेने की अच्छी योग्यता आपको धैर्यवान बनाने में मदद करती है।

     

    2. खुद से बातें करें, अपने मन से बात करें, जैसे-

    मैं क्यों ऐसा करना चाहता हूँ ?

    मैंने इसके पहले भी जल्दबाजी में काम बिगाड़ दिया था, और फिर पछताया था।

    लेकिन इस बार मैं ऐसा फिर से नहीं करूंगा।

    चलो देखते हैं, इस बार मैं इंतजार कर सकता हूँ, या  नही?

    इस प्रकार स्वयं से बातें करने से ये पता चलेगा कि आप जल्दबाजी से बचना चाहते हैं।

     

    3. अपने इंतजार के पलों को धीरे धीरे बढाइये :-

    यदि आपको लगता है कि मैं इतनी देर इंतजार नही  कर सकता तो समय को छोटे छोटे हिस्सों में कर दीजिये। जैसे सामने कुकीज़ रखी है और आप उसे  खाने से अपने को नहीं रोक पा रहे हैं, तो स्वयं से कहें, की तुम्हे पांच या दस सेकेंड्स के बाद कुकीज़ मिलेगी....और फिर धीरे धीरे उन पलों को बढ़ाते जाइये जब तक आप के इंतजार का समय खत्म न हो जाये।

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    • sapna sahi
      sapna sahi   Dec 25, 2015 03:47 PM

      बहुत ही अच्छा और सहायतापूर्ण आर्टिकल्स है । आगे भी आपसे ऐसे ही आर्टिकल्स की अपेक्षा है । बहुत बहुत धन्यबाद|

  • 04 Mar
    Oyindrila Basu

    एक नन्हा सा मन एक नन्ही सी जान जितना ही ज़रूरी है।

    cute beti ladki

     

    बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना हम सब का कर्तव्य है। बच्चे देश के भविष्य माने जातें है।

    उनके बढ़ने में, उनके व्यक्तित्व के विकास में, मानसिक स्वास्थ्य अहम होता है।

    एक बच्चा अगर अच्छी संगत में रहेगा, स्वस्थ वातावरण देखेगा, तो उसका मानसिक विकास जल्द होगा, वह तेज़ सोचेगा, और उन्नति करेगा।

    बचपन के बुरे अनुभव, पीड़ा, परेशानी, का असर उम्र के साथ- साथ और बढ़ सकता है, और तब वह रोग बन जाता है।

    इसलिए, माता पिता पर जिम्मेदारी है, की वे अपने बच्चे को सही तरीके से समझें।

    1.आप उनसे कैसे बात करते हैं, ये ज़रूरी है:

    एक साथ ज़्यादा बात न करें।

    इंसानी दिमाग, 30 सेकंड में सिर्फ दो पंक्तियों को ही सुन और समझ सकता है। एक साथ ज्यादा बात करने से, आपका बच्चा थक जायेगा और कौन सी बात ज़रूरी है, समझ नहीं पायेगा, छोटे शब्दों में उसे बात बताएं।

     

    2. अपने काम की परेशानी को उन पर ना निकालें:

    बच्चे आप के तनाव को नहीं समझते, उनमें वह क्षमता नहीं है, तो अगर वे कुछ करना भूल गए हैं, तो उन्हें याद दिलाएं, ना कि उन्हें कोसें।

     

    3. उन्हें बार बार तंग करने से वह नहीं सीखेंगे: अगर उन्हें नींद से उठना है और तैयार होना है, तो बस वक़्त बता दें, और वक़्त पर काम न होने पर उसके बुरे प्रभाव के बारे में समझाएं ।

    उसे खुद समझ कर काम करने दें। बार बार उनके पीछे पड़े रहने की ज़रूरत नहीं।

     

    4. उनकी चुप्पी को समझें: बच्चे अकसर चुप रहतें है, अपनी समस्या किसी को बता नहीं पातें। स्कूल में अगर छेड़खानी हो रही है, या उनका किसी से झगड़ा हुआ है, तो आपको कैसे पता चलेगा। अपने बच्चे के साथ दोस्ती करें, ताकि वह आपको सब कुछ बता पाये।

     

    5. उनकी बातों को नज़रअंदाज़ करने के बजाए, उनपर अमल करें। वह काल्पनिक बातें भी कर रहे हैं, तो उन्हें सुने और प्रोत्साहन दें।

    बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का असर उनके युवा जीवन पर भी पड़ता है।इसलिए बच्चे मन से खुश रहे, दिमाग से तंदुरुस्त रहे, तो ही शारीरिक तौर पर स्वस्थ रहेंगे।

    उनका मन उतना ही ज़रूरी है, जितना उनका शरीर।

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    • sapna sahi
      sapna sahi   Dec 25, 2015 01:53 PM

      paanee pee kar ham apane aap ko svasth aur sundar banaaye rakh sakate hai . bahut bahut dhanyavaad aisee shikshaaprad aartICLES ke lie krpaya aise hee aur bhee aartikals hame dete rahiye mujhe aap ke dvaara post kiye gae saare aartikals bahut hee pasand aate hai

    • ajay mishra
      ajay mishra   Dec 25, 2015 12:05 PM

      बहुत सत्य |  “जल ही जीवन है"|

  • 02 Mar
    Oyindrila Basu

    जम्हाई और इसके संक्रामक प्रभाव

    jamhaai yawning

     

     

    दर्शनशास्त्र का दूसरा पीरियड चल रहा था। लगातार इस बोरिंग सब्जेक्ट को दो पीरियड तक पढ़ना कोई मजाक नहीं ! लेकिन इसमें चूक होने पर इसका मुआवजा मुझे देना पड़ा, अचानक एक चाक का टुकड़ा मेरे मुँह में घुस कर मेरी जीभ से टकराया, और पूरी क्लास जोर-जोर से ठहाके लगा कर हँसने लगी.... हा हा हा हा। ....हे भगवान! क्या यही आपका न्याय है। आपने मिसेज चढ्ढा को इतनी तेज नजरें क्यों दी!!! क्यों ? क्यों?#TheNationWantsToKnow! क्या मुझे एक ऐसा एक्शन जिस पर मेरा कोई नियंत्रण नही है, उसके लिए इतनी क्रूरता से दंडित किया जाना चाहिए? कल्पना कीजिये !मैंने सिर्फ जम्हाई ली और चढ्ढा ने मेरे मुँह में चाक को निशाना लगा कर दे मारा!!! और वो भी पूरी क्लास के सामने!!! हे भगवान ! धरती फट जाये,और मैं उसमे समा जाऊं ”

    हा हा हा….ज्यादातर क्लासरूम में ये एक सामान्य सिनेरियो होता है। जहां कुछ छात्र अक्सर जम्हाई लेते हुए पाए जाते हैं, और टीचर उन बेचारे छात्रों के लिए क्रूर हो जाते हैं ।

    इस दोष के साथ की वे क्लास में सजग नहीं थे और मेरे लेक्चर की अनदेखी कर रहे थे।

    लेकिन जम्हाई अधिकतर अनैच्छिक क्रिया होती है इसमें हमारा कोई वश नही होता है।

    आमतौर पर जब हम थके हुए या बोर हो रहे होते हैं, तो हम जम्हाई लेते हैं।

    वैज्ञानिक कभी कभी इसका कारण फेफड़ों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की कमी बताते हैं, यह सिद्धांत पूरी तरह से नकार दिया नहीं जा सकता, क्योंकि श्वास लेने में आक्सीजन की कमी एक कारण हो सकता है, लेकिन वास्तव में जम्हाई विभिन्न कारणों की वजह से हो सकती है।

    अत्यधिक जम्हाई का कारण निम्न हो सकते हैं:-

    • सामान्य थकान
    • Sleep apnea या दिन के दौरान लंबे समय तक सोने के कारण साइड इफेक्ट
    • वैसोवेगाल संक्रमण (जो भी कभी कभी दिल के दौरे का कारण हो सकता है)
    • या सिर्फ इसलिए कि आपकी नाक बंद है जिससे आप ठीक से साँस नही ले पा रहे हैं।

    जम्हाई बोरियत के कारण अधिक आती है, जो 1986 में एक अध्ययन से सिद्ध किया गया था, जहां कॉलेज के छात्रों को रंगों का एक पैटर्न दिखाए जाने पर अधिक जंभाई आई उसकी तुलना में जब एक 30 मिनट रॉक वीडियो दिखाया गया।

    जम्हाई का हमारे रोजमर्रा के सामाजिक संबंधों पर कुछ गंभीर प्रभाव हो सकता है।

    *जब कोई बोल रहा है,उस समय जम्हाई आना बुरी आदत है, इससे ऐसा संकेत जाता है कि आपको उसकी बातों में दिलचस्पी नहीं है।

    *कक्षा में जम्हाई आप पर भारी साबित हो सकता है! और कभी कभी आपकी जीभ पर, जैसा कि आपने ऊपर  कहानी में देखा है।

    *आपके कार्यस्थल में,  जम्हाई से आपका ध्यान कभी कभी कुछ गंभीर discussions से हट सकता है, और यह आपके काम के performance को प्रभावित कर सकता है। कुछ नहीं तो एक बैठक के बीच में जम्हाई अनुचित है और एक कर्मचारी के रूप में आप पर बहुत बुरा निशान लग सकता है।

    *तो यह न केवल #MrBean हैं जिनका जम्हाई लेने पर मज़ाक उड़ाया जाता है,यह आप भी हो सकते हैं।

    अभी पिछले दिनों, एक लड़की बस स्टैंड में खड़े होकर  जम्हाई ले रही थी जब पूरे कतार के लोग ९ बजे की बस का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे ,लगभग एक घंटे बाद बस रुकी, तो आप कल्पना कर सकते हैं,  भीड़ कितनी नाराज होगी, और यह आलसी छोटी लड़की धक्के से  लगभग गिर सी गयी, क्योंकि वह चौकस नहीं थी और जम्हाई ले रही थी। लेकिन सौभाग्य से ऐसा नहीं हुआ, इसके विपरीत, भीड़ ने उसे बस की ओर धकेल दिया। और उसने महसूस किया, कि उसने बस को मिस नहीं किया। जय हिंद मुंबई", ये इस शहर की विशेषता है।

    वैसे भी, तो अब हम जानते हैं, कि जम्हाई कभी कभी गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का कारण हो सकती है यहां तक कि मुंबई, दिल्ली या बेंगलुरु जैसे शहर में आप अपने स्कूल की बस भी मिस कर सकते हैं ! उह! अब वास्तव में यह एक चिंता का विषय है।

    लेकिन कुछ हद तक जम्हाई #ContagiousSyndrome (संक्रामक रोग ) होती है। जब एक जम्हाई लेता है, तो उसके सामने का दूसरा भी जम्हाई लेने लगता है। एक सामान्य अध्ययन से पता चला है कि जब जम्हाई का वीडियो दर्शकों को दिखाया गया,तो 50%  दर्शकों ने भी जम्हाई लेना शुरू कर दिया। यह विशेषता चिम्पांजी और कुत्तों की तरह के जानवरों के लिए भी सच है।

    जम्हाई बेस्ट फ्रेंड्स के बीच और अधिक संक्रामक हो सकती है।

    कई बार, सिर्फ सुनने या उसके बारे में पढ़ने से ही आप जंभाई लेने लगते हैं। हँसी और कई अन्य भावनात्मक प्रतिक्रियाओं की तरह, जम्हाई का भी अपना ही संक्रामक प्रभाव है। इसका कारण हो सकता है कि मजबूत भावनात्मक प्रतिक्रियाएं कभी कभी बहुत जल्दी एक व्यक्ति के दिमाग से अन्य के बीच एक साथ होने लगती हैं। तो कोई आश्चर्य नहीं, कि #HuffPostScience की रिपोर्ट, कि आप जितना किसी से भावनात्मक या आनुवंशिक रूप से करीब होते हैं,एक ही समय में जम्हाई आने की उतनी संभावना होती है।

    यहाँ जम्हाई के बारे में कुछ हास्यजनक तथ्य हैं:

    • भ्रूण, गर्भाधान के बाद 11 सप्ताह में ही जम्हाई लेना जानता है।
    • औसत एक जम्हाई को लेने में 6 सेकंड लगते हैं, और इस समय के दौरान हृदय की धड़कन बहुत तेजी से बढ़ जाती है।
    • पुरुष महिलाओं की तुलना में ज्यादा देर तक जम्हाई लेते हैं।
    • दरियाई घोड़ा की दुनिया में सबसे बड़ी जंभाई है।
    • तस्मानियाई शैतान हमेशा अपनी दुश्मन की ओर जंभाई लेता है।

    अब अगर आपने भी अपने चौड़े मुंह के साथ जम्हाई लेना शुरू कर दिया है, तो मुझे अपना 'ज्ञान मंत्र "बंद कर देना चाहिए, लेकिन कुछ बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए:-

    • नींद से जुड़ी समस्याओं की वजह से जंभाई को नींद के दौरान, एयरवे प्रेशर मशीन से ठीक किया जा सकता है।
    • अपने डॉक्टर से परामर्श करके पता करें कि क्या इस अत्यधिक जम्हाई का कारण किसी दवा का असर है क्या ?
    • उथले श्वास से बचने के लिए, फेफड़ों में अधिक ऑक्सीजन को अवशोषित करने के लिए जॉगिंग या साइकिल की तरह के कुछ कार्डियो व्यायाम नियमित रूप से कीजिये  ।
    • पौष्टिक आहार के साथ एक सामान्य स्वस्थ जीवन शैली, अक्सर इन समस्याओं को दूर रखती है। या फिर आप भी तेंदुलकर की तरह #BoostIsTheSecretOfOurEnergy की कोशिश कर सकते हैं।

    Responses 1

    • ajay mishra
      ajay mishra   Dec 25, 2015 12:02 PM

      बहुत ही शिक्षाप्रद सामग्री है । कृपया इसी तरह के और सामग्रियाँ उपलब्ध कराये । धन्यवाद

  • 01 Mar
    Oyindrila Basu

    परीक्षा देने से कभी मत डरिये

    pareeksha narendra modi

     


    परीक्षा के नाम से ही अकसर हमारे दिमाग में डर पैदा हो जाता है। हमें पसीना आने लगता है। परीक्षा के समय मानसिक तनाव का होना स्वाभाविक है । पर ऐसा क्यों होता है?


    हम अकसर दूसरों की उम्मीदों के बोझ तले दब जातें है। बच्चों पर माता-पिता, परिवार और दोस्तों की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव होता है।

    हमारी वार्षिक परीक्षा निर्णय करती है, कि हम अगली कक्षा में जाएंगे या नहीं। ऐसे प्रेशर के कारण बच्चों के शारीरिक विकास पर भी असर होता है, जैसे नींद न आना, भूख न लगना, अधिक परेशानी, यह सब मानसिक दबाव का असर है....

    और दबाव से तनाव होता है, और मानसिक स्वस्थ बिगड़ जाता है....नतीजा-परीक्षा से डर, परीक्षा में गलतियां।


    इस लिए नरेंद्र मोदी जी ने इस साल के विद्यार्थियों के लिए 'मन की बात' पर एक प्रेरणा सूचक सन्देश दिया हैं, और आशा करते हैं, कि बच्चों को इससे ज़रूर लाभ होगा।


    उनके साथ भारत रत्न सचिन तेंदुलकर जी भी हैं, जो बताते हैं.... "अपना लक्ष्य खुद बनाओ। लक्ष्य वही बनाओ, जो आप हासिल कर सकते हो। दूसरों की उम्मीदों के दबाव में मत आओ। मैं जब खेलता था, मुझ पर भी दबाव था, कभी अच्छे वक़्त थे, कभी बुरे, पर लोगों की उम्मीदें हमेशा थी, और वह बढ़ती गयी, लेकिन मेरा ध्यान सिर्फ गेंद पर होता था, मैंने खुद का लक्ष्य खुद बनाया, और सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ता गया"


    आपकी सोच सकारात्मक होना ज़रूरी है, पॉजिटिव सोच के फल अच्छे ही होते हैं।


    ये एक अहम बात है। हम अकसर सर्वश्रेष्ठ बनने के चक्कर में, खुद के लिए काल्पनिक लक्ष्य बना लेते है, और बाद में उनके पूरे न होने पर निराश हो जातें है।


    इसी बात पर गौर करते हुए मोदी जी कहते हैं, "प्रतिस्पर्धा क्यों, अनुस्पर्धा क्यों नहीं... दूसरों से स्पर्धा करके वक़्त क्यों बर्बाद करें, क्यों न खुद से ही स्पर्धा करें, और अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने का संकल्प करें। जब आप खुद की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे, तो आत्म संतुष्टि के लिए आपको दूसरे की अपेक्षा नहीं होगी"


    उनका यह मानना है, की परीक्षा से सिर्फ यह पता चलता है कि हम सही दिशा में जा रहे हैं या नहीं, उसमें आये अंक को अपने जीवन का आधार मान लेना गलत होगा। खुले मन से परीक्षा को स्वीकारने से, उसके प्रति डर चला जायेगा।


    ऐसे में लोकप्रिय शतरंज खिलाडी विश्वनाथन आनंद भी बच्चों के लिए कुछ विशेष टिपणी रखतें है:


    "अच्छी नींद ज़रूरी है, पेट भर खाना ज़रूरी है, आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, तभी आप परीक्षा के लिए पूर्ण रूप से तैयार होंगे। जैसे शतरंज में खेलते वक़्त कौन सी चाल कब आएगी ये पता नहीं होता, वैसे ही परीक्षा में क्या सवाल आएंगे ये पता नहीं होता, इसलिए अगर आप पेट से परितृप्त हैं, और अच्छी नींद पूरी करके आएं हैं, तो आप शांति से सोच समझकर सवाल के सही जवाब लिख पाएंगे, खुद को शांत रखना सबसे ज़रूरी है"


    ये तो मोदी जी भी मानते हैं, कि अनुशासन अच्छे फल के लिए बेहद ज़रूरी है। वक़्त पर खाना, वक़्त पर सोना, आपको स्वस्थ रखेगा।

    मन की शान्ति भी ज़रूरी है, बौखलाया हुआ इंसान, कुछ सही से समझ नहीं पाता, इसलिए अगर पूरे वर्ष में आपने बहुत पढ़ाई की है, और आप में ज्ञान का सागर भी है, तो भी जल्दीबाजी में आप को कुछ याद नहीं आएगा।


    घबराइये नहीं, आप जितना डरते हैं, उतनी मुश्किल परीक्षा नहीं है।


    वे हमें योगा और मेंडिटेशन करने के लाभ के बारे में भी बतातें है। मेंडिटेशन हमारे मानसिक स्थिति को बनाये रखने में मदद करता है।


    "ये एक अभ्यास है, मैं आज बोलूंगा तो आप कल से नहीं कर पाएंगे, लेकिन परीक्षा के वक़्त योग हमेशा काम आता है", मोदी जी का कहना है।


    ज्यादा तनाव में न रहें। हँसी मज़ाक में परीक्षा को पार करें। दोस्तों के साथ हँसे, बातें करें, तो सब आसान हो जाएगा।


    वे ये भी बताते हैं, परीक्षा के बाद कितने नंबर आएंगे, ये ना सोचें, परिवार के साथ दूसरे चीज़ों पर गप्पे लड़ायें। "जो हो गया सो हो गया", आगे देखते हुए अगली परीक्षा की तैयारी करें।

    विद्यार्थियों के लिए कुछ साधारण टिप्पणी:


    परीक्षा के केंद्र में वक़्त पर या उससे पहले पहुंचे ताकि देर होने का डर न हो।
    पूरी नींद लें और जल्द जाग कर पुर्नभयास करें।
    सब्जेक्ट में जो ज़रूरी बातें हैं, उन पर आखिरी वक़्त में थोड़ी सी चर्चा कर लें, तो लिखते वक़्त सब दिमाग में ताज़ा रहेगा।
    निष्ठा, लगन और कठोर मंशा से ही जीत हासिल होगी।


    "अगर आप डटे रहोगे, तो डर भी दूर हो जायेगा।", मोदी जी कहते हैं।


    सकारात्मक चिंता से बड़ी ताक़त और प्रेरणा, और कुछ भी नहीं।

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    Responses 1

    • dinesh singh
      dinesh singh   Dec 27, 2015 08:48 PM

      मुझे  अपने दोस्तों के साथ या परिवार का साथ बहुत पसंद है लेकिन  जब भी मुझे कही किसी अनजान  लोगो के साथ बात करता हूँ तो मुझे एक अजीब  सा  डर लगता है क्या यह भी  सोशल फोबिया हो सकता है |