कुल 169 लेख

  • 08 Mar
    Oyindrila Basu

    नारी में है शक्ति

    naari divas

     

     

    मैं हूँ जो मैं सोचती हूँ कि मैं हूँ।

    समाज के द्वारा दिए जाने वाले दबावों से मैं नहीं रूकती

    समाज में पीड़ित होने का दबाव, बुरी माँ कहलाने का दबाव

    डायन कहलाने का दबाव, आलोचनात्मक होने का दबाव,

    तुम मुझे नहीं समझते तो ना सही,मैं उत्तर दाई नहीं हूँ।

    मैं फैसले कर सकती हूँ, मैं चुन सकती हूँ,

    मैं कमा सकती हूँ, और खिला भी सकती हूँ,

    मैं हूँ मैडोना, मैं हूँ मैरी,

    मैं हूँ कॉम और मैं हूँ केट,

    मैं वही हूँ, जो मैं जानती हूँ, मैं वही हूँ जो मैं चाहती हूँ।

     

    आज के जमाने में महिला को अबला नारी नहीं माना जा सकता। जीवन के हर क्षेत्र में वे अपना दायित्व स्फूर्ति से निभाती हैं, और समाज में सर ऊंचा करके चलती हैं।

    वह दिन गए जब हमें इतिहास के पन्नो में नारी के उपलब्धि की दास्ताँ ढूंढ़नी पड़ती थी। और इतिहास हमें केवल फ़ुटनोट में रख कर ठगता था।

    आज हम अपना इतिहास खुद लिखते हैं।

    अपनी दृढ़ता से, अपने काम से, महिला आज ऊंचाइयों को नाप रहीं हैं।

    2015 में भी  महिलाओं नें गिनीस में अपना नाम दर्ज कराया ।

    मलाला योसाफ्ज़ाई Malala Yousafzai जिन्हे सबसे कम उम्र में नोबेल प्राइज मिला है।

    जुलिआना बुहरिंग Juliana Buhring जो सबसे कम समय में साइकिल पर 24000 मील कवर कर चुकी हैं।

     

    आज ये साबित हो चुका है कि महिलाएं सारे काम बेहतर ढंग से कर सकती हैं। उसके कई कारण हैं।

    • उन में संगठन में कार्य करने की क्षमता है। सब का मत सुन कर वे फैसला लेती हैं, और खुद के ज्ञान को भी बाँटती हैं।

     

    • छोटे विषय पर भी महिलाएं निपुणता से विचार करती हैं।

     

    • मुश्किल वक़्त में महिलाएं शांत रहती हैं, इस लिए वे बेहतर सोच पाती है, काम के क्षेत्र में ख़ास कर।

     

    • महिलाएं अपने काम के बारे में खुले विचार और ईमानदारी का भाव रखती हैं।

     

    • दूसरों के प्रति सहानुभूति उन में ज्यादा है, तो वे किसी भी व्यक्ति से जल्द जुड़ जाती हैं, और उनकी बात समझ पाती हैं।

     

    इसी लिए आज महिला सब से बेहतर नेता और इंटरप्रेन्योर Entrepreneur मानी जाती हैं।

     

    पर और भी कई काम हैं जो सिर्फ महिला ही कर सकती है:

    • मातृत्व धारण करना: पुरुष और महिला का बराबर योगदान होता है इंसान के जन्म में, लेकिन गर्भ धारण का विशेषाधिकार महिला का है।
    • महिला मल्टीटास्किंग करने में माहिर है। खाना बनाने के साथ साथ वह फ़ोन पर बात भी करती है । इसी गुण की वजह से वे घर और बाहर दोनों जगह बराबर ईमानदारी से काम कर पाती है ।
    • महिला अपने सूरत के साथ कई एक्सपेरिमेंट्स कर सकती हैं। वे स्कर्ट और पैंट दोनों को अच्छे से पहन सकती हैं।

    अगर सोचें, तो ऐसा कोई क्षेत्र  नहीं, जहाँ महिलाओं ने अपनी छाप न छोड़ी हो।

    अपनी लगन, मेहनत, और दृढ़ता से महिला खुद में साफ़ सोच लाती हैं, जिससे वह फैसला ले पाती है।

    तभी आज हमारे बीच इंद्रा नूई (सी इ ओ पेप्सिको),  हेलेन केलर, और बुला चौधरी जैसी महान महिलाएं हैं ।

    ऐसी महिलाएं हमें भविष्य में भी प्रेरित करती रहेंगी। हमारे सामने है एक और अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस, और ऐसे में हम आशा करते हैं, कि महिलाओं को और मनोबल मिले और वे आगे बढ़ती जाएँ। 

  • 06 Mar
    Oyindrila Basu

    रिश्ते क्यों टूटते हैं ?

    angoothi vaapas karna toote riste

     


    "नामित क्या तुम अपने पहने कपड़ों को सही जगह नहीं रख सकते? लांड्री बैग है, फिर क्यों सब बिखरा पड़ा है? मैं और कितना करूँगी!

    नामित कहता है, "अजीब बात है, मैं ऑफिस से थका हुआ घर आया हूँ, तो एक कप चाय पूछने के बजाए तुम कपड़ों को लेकर झगड़ रही हो! माँ सही कहती थी, तुम कभी मेरी सही पत्नी नहीं बन सकती!"

    ऐसे छोटे छोटे झगड़ों से ही रिश्ते में तनाव आता है। गौर करें 'सही' शब्द पर। आखिर 'सही' की परिभाषा क्या है? ये समझ ना पाने की वजह से ही रिश्ते टूटते हैं।


    1. हमारा साथी वैसा ही होगा जैसा हम चाहेंगे: समाज भी इसके लिए उत्तरदाई है। हम बचपन से सुनते रहते हैं, जिससे हमारी शादी होगी, वह सही इंसान होगा, और इस वजह से हम दिमाग में एक पूर्ण छवि बना लेते हैं, कि हमारा साथी वैसा ही होगा जैसा हम चाहेंगे, ये एक काल्पनिक चित्र है। एक इंसान पूरा सही या पूरा गलत नहीं होता। और इस छवि के टूटने से हमें लगता है, कि ये इंसान ही गलत है।



    2. पूर्णता की मूरत टूटने से, हम हताश हो जातें है, और उसे सुधारने के लिए, अपने साथी में खामियां ढूँढ़ते रहते हैं। काल्पनिक चित्र को सुधारने के बजाए, रिश्ते को सुधारें। सोच को अहमियत देने बजाए इंसानों को मोल दें।

     

    3. भरोसे की कमी: रिश्ते में भरोसा, विश्वास, सबसे एहम है। एक दूसरे पर भरोसा नहीं कर पाएंगे तो रिश्ता नहीं टिकेगा।

     

    4. वक़्त की कमी: एक दूसरे को वक़्त नहीं दे पाने से आपके रिश्ते पर बुरा असर पड़ता है। दोनों को लगता है, कि दूसरा ध्यान नहीं दे रहा है, उसके लिए रिश्ते का कोई मोल नहीं।


    5. अतिरिक्त अधिकार बोध आपके रिश्ते का गला घोट सकती है। साथी पर हक़ जताना अच्छा है, पर अगर ये सीमा के उपर हो, तो साथी के लिए घुटन और परेशानी बन सकती है।



    6. ईगो अगर बीच में आये, तो रिश्ता टूट जाता है।

     

    आप कैसे इससे बच सकते है?

    1. पहले ये समझें, कि आपका साथी एक अलग इंसान हैं, वह आपकी तरह ना ही सोचेंगे, ना ही करेंगे। उनसे ज़रूरत से ज्यादा अपेक्षा न रखें।


    2. दोष हम सब में है, घर में कुछ सही नहीं है, तो उसे खुद ठीक करें, अपने साथी में खामियां निकालना अच्छा नहीं है।


    3. एक दूसरे को वक़्त दें और सांस लेने की जगह भी: आजके समय में, वक़्त की कमी है, लेकिन रिश्ते को स्वस्थ रखना है, तो वक़्त देना होगा। एक दूसरे से बात करें, जो जो समस्या आपको अंदर से परेशान कर रही है, उन सब को बात के माध्यम से बाहर निकालें।
    लेकिन ये ध्यान रहे, की आपका अपना वक़्त भी हो। पूरा दिन साथी के साथ बैठे रहना भी रोचक नहीं है। उनकी अपनी ज़िन्दगी है, आपकी भी।


    4. खुद को साथी की जगह पर रख कर सोचें: अगर आप ऐसा कर पाएं, तो आप उन्हें बेहतर समझ पाएंगे, और झगड़े कम हो जाएंगे।


    5. ईगो को बीच में ना आने दें: अगर गलती आपकी है, तो उसे स्वीकारें। इसमें आपके सम्मान को ठेस नहीं पहुंचेगी। समस्या का समाधान करें, ज़िद से बात बिगड़ती है।
    रिश्ता टूट जाने से हमें सबसे अधिक मानसिक तनाव से गुज़ारना पड़ता है। ये हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं। हमें खुद खुश रहना चाहिए और अपने साथी को भी खुश रखना चाहिए।

    Image source

    Responses 2

    • ajay mishra
      ajay mishra   Dec 25, 2015 11:43 AM

      मेरा नाम राकेश है और मै उ.प्र. बोर्ड के १० का क्षात्र हूँ ! मेरी परीक्षा फरवरी और मार्च में होने वाली है । परीक्षा की तैयारी करने के लिए बहुत ही कम समय बचे हुए है और मै जो कुछ रात में याद करता हूँ सुबह उठने पेरत कुछ भी याद नहीं रहता इससे मै बहुत परेशान हूँ क्या करू कृपया मेरी मदद करे । धन्यवाद |

    • mina s
      mina s   Dec 25, 2015 11:35 AM

      bahut hi acchi aur sikskhaprad articles hai ...dhannyabad@ ewellness

  • 05 Mar
    Oyindrila Basu

    आप योग्य हैं, खुद से प्यार करिये, सब आपसे प्यार करेंगे।

    khud se pyar karoअगर आपको लग रहा है, कि सब कुछ खत्म हो गया है, आप एक नकारे हुए इंसान है, सबसे बुरे, सबसे बेकार, आपका इस दुनिया में कोई काम नहीं, तो एक बार फिर से सोचिये....

    हम सब दुनिया में आतें है, एक उद्देश्य लेकर। लोगों में ज्ञान बाँटने का उद्देश्य और लोगों को प्यार देने का उद्देश्य।

    सोचिये उन लम्हों के बारे में जब आपका किसी ने शुक्रिया माना, और खुद से प्यार कीजिये,

    सोचिये जब आपने किसी का शुक्रिया अदा किया, और खुद से प्यार कीजिये।

    सोचिये जब आप जीत गए थे, और खुद से प्यार कीजिये।

    आत्म तुष्टि, खुद से प्रेम होना, अति आवश्यक है। खुद का तोल-मोल करना ज़रूरी है।

    आत्मज्ञान, आत्मनिर्भरता आपको मानसिक रूप से स्वस्थ बनाएगा।

    आप अगर खुद का सम्मान कर सकते हैं, तभी औरों का सम्मान कर पाएंगे। अगर आप खुद से प्यार करते हैं, तो दूसरों  से प्यार कर पाएंगे।

    और तब आपसे लोग खुद ब खुद  प्यार करेंगे।

    1. आत्मविश्वास ज़रूरी है: अंदर का आत्मविश्वास आपके चेहरे पर, आपकी बातों में झलकता है। आपको पता है की आप क्या कर रहे हैं, तो आप सही बोलेंगे, और सही दिशा में कदम बढ़ाएंगे ।

    2. सकारात्मकता: खुद में अच्छी भावनाएं रखें। सकारात्मकता सिर्फ आप के लिए ही नहीं, दूसरों के लिए भी लाभदायक है। आपकी अच्छी सोच से प्रेरित हो कर लोग भी अच्छा ही सोचेंगे, और आपको पसंद करेंगे।

    3. ईमानदारी: हर काम में सत और ईमानदार होना ज़रूरी है। आप जो बोल रहे हैं, उसमें भी सच्चाई माइने रखती है। पूर्ण जीवन में अगर आप एक सच्चे इंसान बन कर जी सकें तो उससे बेहतर कारण और क्या हो सकता है, कि आप खुद से प्यार करेंगे, और लोग आप से।

    4. लगन से काम करें: अपने काम से प्रेम और लगन होगा, तो आप हमेशा व्यस्त रहेंगे। और ज्यादा काम यानी ज्यादा खुशहाली। खुद कुछ तैयार करने का आनंद ही अलग है। मानसिक संतुष्टि आत्म सम्मान जगाएगी ।

    5. साज-श्रृंगार: दूसरों को प्रभावित करने के लिए ना सजें, खुद को खुश करने के लिए साज-श्रृंगार करें। नए कपडे पहने, सैलून में मसाज करवाएं, खुद का ध्यान रखें, पर किसी को मोहित करने के लिए नहीं, किसी के मत पर नहीं, खुद की पसंद से करें, और आत्म संतुष्टि से करें, लोग खुद आपकी तरफ  की आकर्षित होंगे।

    6. हँसमुखता: हँसिये और लोगों को भी हंसाइए। हास्य बड़ी बड़ी समस्याओं का समाधान है। आपके चुटकुलों से दूसरों के जीवन का अँधेरा दूर हो सकता है। खुश रहने से दिल भी तंदुरुस्त रहता है।

    7. मुस्कुराहट: आपकी मुस्कान कीमती है। जीवन में मुसीबतें आएंगी, पर मुसकुराते हुए उनका सामना करेंगे, तो कोई खेद नहीं रहेगा। सबसे मुसकुराते हुए मिलेंगे, तो उनका दिन अच्छा हो जाएगा। मुस्कुराने  के लिए कीमत नहीं लगती, अपने दुखों को मुस्कान में बदल दीजिए।

    खुद खुश रहेंगे, तो दूसरों को ख़ुशी दे पाएंगे, और सब आपसे प्यार करेंगे ।

    Image source

    Responses 1

    • sapna sahi
      sapna sahi   Dec 25, 2015 04:27 PM

      मुझे तो सुई से बहुत ज्यादा डर लगता है । अपनी भावनाओ और बिचारो को व्यक्त करने के लिए और भी कई तरीके है आप उन्हें भी अपना सकते है । टैटू बनवाना तो दूर जब उसके बारे में सोचता हूँ तब भी मुझे डर लगता है |

  • 04 Mar
    Mandavi Pandey

    इंतजार का फल मीठा होता है।

     

    intjaar ka phal meetha hota hai

     

     

    शायद ही आपने Walter Mischell का नाम सुना होगा, लेकिन उन्होंने मनोविज्ञान के सबसे प्यारे परीक्षण के द्वारा हमारे व्यवहार के बारे में कुछ बहुत महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उन्होंने बच्चों के साथ ‘marshmellow test’ किया। जिसमें  बच्चे को कमरे में marshmellow के सामने बैठाकर परीक्षक ये कहकर चला जाता है कि, मैं थोड़ी देर में आता हूँ…

     यदि तुम मेरे वापस आने तक इंतजार करते हो तो तुम्हे दो marshmellow मिलेंगे और

    यदि तुम  इंतजार नही कर सकते तो एक बेल बजा देना मैं वापस आ जाऊंगा लेकिन तब तुम्हे सिर्फ एक  marshmellow मिलेगा।

    यह बच्चो के सब्र का इम्तिहान था। हाँ, बेशक यह हमारे खाने की तीव्र इच्छा पर हमारी धैर्य रखने की शक्ति पर लागू होता है, लेकिन यह नियम जीवन में भी उसी प्रकार लागू होता है। जब हमारी इच्छा  शक्ति हार जाती है तो हमारे शांत मन (जो यह कहता है कि इंतजार का फल मीठा होता है) के ऊपर बेसब्र  मन हावी हो जाता है जो कुछ नही सोचता सिर्फ फल पाना चाहता है।

    जिन बच्चों के साथ यह परीक्षण किया गया, बड़े होने पर उनके आत्म नियंत्रण का विश्लेषण करने पर देखा  गया कि जिन बच्चों ने marshmellow के लिए इंतजार नही किया वे बड़े होने पर भी खुद पर कमजोर नियंत्रण  वाले थे। और देखा गया कि इसका कारण उनके मस्तिष्क के किसी विशेष भाग की सक्रियता थी। इसलिए हम कह सकते हैं की हमारी बेसब्र इच्छाओं का neurobiological कारण होता है।

    इसके साथ ही जिन बच्चों में बेहतर नियंत्रण था वे बच्चे स्कूल- कॉलेज में अच्छी उपलब्धि प्राप्त करते हैं और उनके दूसरों से अच्छे संबंध होते हैं, उनका स्वास्थ्य अच्छा होता है, और वे तनावग्रस्त भी नही होते।  

    जल्दबाजी में किये गए कार्य हमेशा विपरीत परिणाम वाले होते है,जबकि धैर्य और सूझ बूझ के साथ किये जाने वाले कार्य हमेशा अच्छे परिणाम देते हैं।

     

    इसलिए यदि आप में धैर्य की कमी है, तो निम्न आदतों को अपना कर आप स्वयं को धैर्यवान बना  सकते हैं:-

     

    Delaying gratification

     

    1. अपने ध्यान को किसी अन्य बात में लगाएं  

    यदि आप अपनी इच्छाओं पर से ध्यान हटाने की आदत बना लेंगे तो आप स्वयं पर नियंत्रण कर सकने में सक्षम हो सकते हैं। मन को किसी अन्य जगह पर व्यस्त कर लेने की अच्छी योग्यता आपको धैर्यवान बनाने में मदद करती है।

     

    2. खुद से बातें करें, अपने मन से बात करें, जैसे-

    मैं क्यों ऐसा करना चाहता हूँ ?

    मैंने इसके पहले भी जल्दबाजी में काम बिगाड़ दिया था, और फिर पछताया था।

    लेकिन इस बार मैं ऐसा फिर से नहीं करूंगा।

    चलो देखते हैं, इस बार मैं इंतजार कर सकता हूँ, या  नही?

    इस प्रकार स्वयं से बातें करने से ये पता चलेगा कि आप जल्दबाजी से बचना चाहते हैं।

     

    3. अपने इंतजार के पलों को धीरे धीरे बढाइये :-

    यदि आपको लगता है कि मैं इतनी देर इंतजार नही  कर सकता तो समय को छोटे छोटे हिस्सों में कर दीजिये। जैसे सामने कुकीज़ रखी है और आप उसे  खाने से अपने को नहीं रोक पा रहे हैं, तो स्वयं से कहें, की तुम्हे पांच या दस सेकेंड्स के बाद कुकीज़ मिलेगी....और फिर धीरे धीरे उन पलों को बढ़ाते जाइये जब तक आप के इंतजार का समय खत्म न हो जाये।

    Image source

    Responses 1

    • sapna sahi
      sapna sahi   Dec 25, 2015 03:47 PM

      बहुत ही अच्छा और सहायतापूर्ण आर्टिकल्स है । आगे भी आपसे ऐसे ही आर्टिकल्स की अपेक्षा है । बहुत बहुत धन्यबाद|

  • 04 Mar
    Oyindrila Basu

    एक नन्हा सा मन एक नन्ही सी जान जितना ही ज़रूरी है।

    cute beti ladki

     

    बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना हम सब का कर्तव्य है। बच्चे देश के भविष्य माने जातें है।

    उनके बढ़ने में, उनके व्यक्तित्व के विकास में, मानसिक स्वास्थ्य अहम होता है।

    एक बच्चा अगर अच्छी संगत में रहेगा, स्वस्थ वातावरण देखेगा, तो उसका मानसिक विकास जल्द होगा, वह तेज़ सोचेगा, और उन्नति करेगा।

    बचपन के बुरे अनुभव, पीड़ा, परेशानी, का असर उम्र के साथ- साथ और बढ़ सकता है, और तब वह रोग बन जाता है।

    इसलिए, माता पिता पर जिम्मेदारी है, की वे अपने बच्चे को सही तरीके से समझें।

    1.आप उनसे कैसे बात करते हैं, ये ज़रूरी है:

    एक साथ ज़्यादा बात न करें।

    इंसानी दिमाग, 30 सेकंड में सिर्फ दो पंक्तियों को ही सुन और समझ सकता है। एक साथ ज्यादा बात करने से, आपका बच्चा थक जायेगा और कौन सी बात ज़रूरी है, समझ नहीं पायेगा, छोटे शब्दों में उसे बात बताएं।

     

    2. अपने काम की परेशानी को उन पर ना निकालें:

    बच्चे आप के तनाव को नहीं समझते, उनमें वह क्षमता नहीं है, तो अगर वे कुछ करना भूल गए हैं, तो उन्हें याद दिलाएं, ना कि उन्हें कोसें।

     

    3. उन्हें बार बार तंग करने से वह नहीं सीखेंगे: अगर उन्हें नींद से उठना है और तैयार होना है, तो बस वक़्त बता दें, और वक़्त पर काम न होने पर उसके बुरे प्रभाव के बारे में समझाएं ।

    उसे खुद समझ कर काम करने दें। बार बार उनके पीछे पड़े रहने की ज़रूरत नहीं।

     

    4. उनकी चुप्पी को समझें: बच्चे अकसर चुप रहतें है, अपनी समस्या किसी को बता नहीं पातें। स्कूल में अगर छेड़खानी हो रही है, या उनका किसी से झगड़ा हुआ है, तो आपको कैसे पता चलेगा। अपने बच्चे के साथ दोस्ती करें, ताकि वह आपको सब कुछ बता पाये।

     

    5. उनकी बातों को नज़रअंदाज़ करने के बजाए, उनपर अमल करें। वह काल्पनिक बातें भी कर रहे हैं, तो उन्हें सुने और प्रोत्साहन दें।

    बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का असर उनके युवा जीवन पर भी पड़ता है।इसलिए बच्चे मन से खुश रहे, दिमाग से तंदुरुस्त रहे, तो ही शारीरिक तौर पर स्वस्थ रहेंगे।

    उनका मन उतना ही ज़रूरी है, जितना उनका शरीर।

    Image source

     

    Responses 2

    • sapna sahi
      sapna sahi   Dec 25, 2015 01:53 PM

      paanee pee kar ham apane aap ko svasth aur sundar banaaye rakh sakate hai . bahut bahut dhanyavaad aisee shikshaaprad aartICLES ke lie krpaya aise hee aur bhee aartikals hame dete rahiye mujhe aap ke dvaara post kiye gae saare aartikals bahut hee pasand aate hai

    • ajay mishra
      ajay mishra   Dec 25, 2015 12:05 PM

      बहुत सत्य |  “जल ही जीवन है"|