कुल 169 लेख

  • 21 Mar
    Oyindrila Basu

    सुनें सबकी पर करें वह, जो आपको उचित लगे ।

    girl blowing bubble

     

     

    "प्रीती ये ड्रेस मुझ पर कैसा लगेगा। क्या इसका रंग ज्यादा  गाढ़ा है? मैं इसमें ख़ूबसूरत लगूँगी ना? या फिर....कहीं ऐसा तो नहीं कि, प्रियंका की ग्रुप कॉलेज में मुझ पर हँसेगी ? मैं कन्फ्यूज्ड हो गयी हूँ । "- एक साधारण लड़की मुंबई की मॉल में।

    हम सभी हमेशा इस दुविधा पूर्ण विचार से गुज़रते हैं। लोग क्या कहेंगे, लोग हमारे बारे में क्या सोच रहें हैं, ये विचार  हमारे दिमाग में हर वक़्त चलता रहता है।

    हम सामाजिक जीव हैं, और लोकप्रियता हम सब चाहते हैं। और यही हमें परेशान करती है, कि लोग हमारे बारे में क्या सोच रहे होंगे। हम डरते हैं कि वे हमारे काम पर निंदा और आलोचना कर रहे हैं।

    अगर हम रास्ते में गिर जाते हैं, तो लोग हम पर हँसते हैं, क्योंकि हम अलग व्यवहार कर रहे हैं, हमें चलना चाहिए था, पर हम गिर गए । समाज में नकारे जाने का डर, शर्म का डर अकसर लोगों को परेशान करता है।

    पर लोगों के मत पर अतिरिक्त सोच विचार हमारे मानसिक संतुलंत को बिगाड़ सकता है। हम चिंतित रहते हैं। इससे रक्त-चाप भी बढ़ सकता है। इससे कैसे मुक्त हों ?

     

    1. खुद को मेहरबान और उदार बनाये- आपकी यह खूबी सभी को पसंद आएगी, अगर आप दूसरों के प्रति उदार हैं, और सब से विनम्रता से पेश आते हैं।

    2. ऐसा काम करें जो आपको बेहद पसंद हो- जैसे पढ़ाई, इनसाइक्लोपीडिया से ज्ञान वृद्धि या फिर टेलिस्कोप के साथ तारे देखना.. ऐसे अनोखे काम को अंजाम देने से, आप में आत्म संतुष्टि होगी, और आप श्रेष्ठ महसूस करेंगे, और जब आप औरों से बेहतर काम करेंगे, तो दूसरे वैसे ही आपको पसंद करेंगे।

    3. अगर आपकी उदारता के बावजूद, लोग आपकी निंदा करते हैं, तो परेशान न हों। समझ जाइए कि निंदा करने वाला आपसे भी बुरे हाल में है। वह अपनी खामियों का ज़िम्मेदार आपको ठहराना चाहता है। आप अपने दोष की वजह से नकारे नहीं जा रहे, बल्कि, दूसरे खुद से परेशान हैं, तो आप की निंदा कर रहे हैं।

    4. आलोचना आपको बेहतर बनाती है - अगर आपको लगता है कि , लोगों के ताने और समालोचना आपके प्रति जायज़ हैं, तो चिंतित होने के बजाए, खुद को और बेहतर बनाने का प्रयास करें।

    थोड़ी सी निंदा चर्चा हम सब के लिए ज़रूरी है, ताकि हम खुद को पहचान पाएं और सुधार ला सकें।

    पर अतिरिक्त चिंता हानिकारक है। इससे आप अपने ऊपर कभी विश्वास नहीं कर पाएंगे ।

    दूसरों को खुश करने के लिए उनकी तरह बोलेंगे और करेंगे, तो धीरे धीरे आपका अपना अस्तित्व खोता जाएगा। हमेशा याद रखें, कोई भी ऐसे व्यक्ति को पसंद नहीं करता जिसकी अपनी पहचान नहीं ।

    सीधी सोच, सीधा जवाब लोगों के बीच आपको कुछ क्षण के लिए अलोकप्रिय कर सकता है, पर मन ही मन सब आपको आपके  सत चरित्र के लिए सम्मान देंगे।

    खुद से प्यार करें, आत्मविश्वासी बनें, दूसरों की सुनें, पर करें वह जो आपको उचित लगे । 

     

    Responses 1

    • omesh upadhay
      omesh upadhay   Dec 27, 2015 08:29 PM

      मेरा बेटा ६ साल का है और वह हर बात पर चिड़चिड़ाता रहता है इसीलिए अक्सर ही मै गुस्से में आकर उसे मार देता हूँ । क्या करुँ कृपया कुछ सलाह दे । धन्यवाद

  • 19 Mar
    Mandavi Pandey

    जीवन में आगे बढ़ना है, तो वह करें जो आपको पसंद है ।

    Follow your passion

     

     

    वैसे तो हम कहते हैं कि हमें वही कार्य करना चाहिए, जो  पसंद हो, पर हम स्वयं इस बात का पालन नही करते। ऐसा क्यों?

    मनोवैज्ञानिक शोध के अनुसार आप जब, अपने मन का कार्य करते हैं, तो आप उसमें सफलता जरूर पाते हैं।

     

    मनपसंद काम करने के कुछ फायदे हम आपको बता रहे हैं, साथ ही इससे किस प्रकार burnout से छुटकारा मिलता है, यह भी बता रहे हैं।

     

    मष्तिष्क में हॉर्मोन का स्राव:

    जब आप अपना मनपसंद काम करते हैं, तो मस्तिष्क में डोपामाइन नामक केमिकल का स्राव होता है, जिससे आपको अच्छा लगता है, और आप काम करना जारी रखते हैं। यह आपको काम के दौरान होने वाले तनाव से बचाता है, और आप थकान नहीं महसूस करते।

     

    रोग प्रतिरोधक क्षमता 

    जब आप तनावग्रस्त होते हैं तो कार्य  करने के लिए अपने sympathetic nervous system पर जोर देते हैं, ज्यादा लम्बे समय तक ऐसा होने से आपकी इम्युनिटी(प्रतिरोधक क्षमता ) प्रभावित होती है। ऐसा तब होता है, जब आप सुबह से शाम तक वो काम करते हैं, जिसे आप पसंद नही करते।

    सार्थकता 

    मानव मन किसी भी कार्य में अर्थ की खोज करता है। जब आप कुछ ऐसा कार्य करते हैं, जो आपको बोरिंग लगता है जिससे आपको कार्य करने में आनंद नही आता, तो धीरे -धीरे समय के साथ-साथ आपका दिमाग थक जाता है, और आप अत्यधिक तनावग्रस्त हो जाते हैं। जब आप अपने मन का काम  करते हैं ,तो इसका विपरीत होता है। आप इसे अर्थपूर्ण पाते हैं और इसलिए आपका दिमाग सक्रिय रहता है।

     

    विकास

    चाहे यह कैरियर से संबंधित ग्रोथ हो या व्यक्तिगत ग्रोथ, यदि आप ऐसा कार्य करते हैं, जिसे आप नापसंद करते हैं, या बोरिंग समझते हैं तो यह नहीं मिल सकती ।ग्रोथ तभी होगी जब आप कार्य में मन लगाते हैं। इसलिए अपने मन का कार्य करें, और समय के साथ अपने विकास को होते हुए देखें।

     

    कौशल

    आपने अनगिनत मामलों के बारे में सुना होगा, जब माता-पिता ने बच्चे को ऐसे हॉबी क्लासेज में डालने की कोशिश की, जिसे बच्चा पसंद नही करता था, और परिणाम कुछ भी नही मिला। यदि एक बच्चा गिटार बजाना पसंद करता है, तो वह, उसी गिटार क्लास से बहुत सी स्किल सीख लेगा, जिसे एक दूसरा बच्चा दिल से नापसंद करता है। इसलिए, आप कौशल तभी सीखते हैं जब आपका मन उस काम से जुड़ाव महसूस करता है। सीखने के कौशल का मतलब है, आप पहले की तुलना में कम समय में अधिक कार्य को सीख सकते हैं। इसलिए आप जो भी कार्य करते हैं, उसमे और निपुण हो जाते हैं, जो आपको शारीरिक और मानसिक थकान से बचाता है।

     

    सीखने की  चाहत 

    यदि आप अपने काम से प्यार करते हैं, तो आप खुले दिमाग के होते हैं,  और अपने आस -पास के लोगों से भी सीखते हैं। आप दूसरों से अधिक से अधिक सीखते हैं, जितना आपका दिमाग सीख सकता है,और अपना कौशल सुधारते हैं। जब आप अपनी रूचि का कार्य करते हैं तो आपके रिश्ते भी बेहतर होते हैं। इसके बारे में विचार कीजिये कि, 'कार्य करने के बाद आपको लगता है आपने अपना समय बर्बाद किया' या 'कार्य करने के दौरान आपने अपने समय का आनंद लिया'?

     

    खुशी

    क्यों अपने मन का कार्य  करने से आपको थकान नही लगती ?

    शायद इसका मुख्य कारण है कि इससे आपको ख़ुशी मिलती है। जब आप खुश होते हैं, तो आप कम दर्द और दुख महसूस करते हैं और आसानी से energized हो जाते हैं। इसके विपरीत जब आप उस काम को करते हैं,  जिसे आप नहीं पसंद करते हैं, तो आप अधिक नाराज और परेशानी महसूस करते हैं। हार्वर्ड के एक 75 साल के अध्ययन में पाया गया है कि, यदि खुश रहने वाले लोग बीमार हो जाते हैं, तो उन्हें दुखी लोगों की तुलना में, कम दर्द महसूस होता है, और वे आसानी से इसे सहन कर सकते हैं।

     

    पैसा

    ज़ाहिर है, सबसे बड़ा सवाल पैसे के बारे होता है। यदि मैं अपने पैशन को फॉलो करूंगा तो, क्या मैं ज्यादा कमा पाउँगा?.... हाँ, क्यों नही?...

    क्या आप जानते हैं, हाल ही में, भारत में इंजीनियरों ने, चपरासी के पद के लिए आवेदन किया है? हमारी मानसिकता (कि इंजीनियरिंग करने से अच्छी नौकरी और ज्यादा आय मिलती है) के कारण इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गयी है, और अब इंजीनियरों की संख्या अधिक, और जॉब की संख्या कम हो गयी है। इसलिए, जरूरी नहीं है कि किसी विशेष कैरियर में अधिक पैसा है। आपकी शुरुआत, धीमी या तेज हो सकती है, लेकिन अगर आप अपने मन का काम करते हैं, तो यह सबसे बेहतर होगा, और लक्ष्मी जी की कृपा भी होगी।

    ब्रेक 

    आपका अवचेतन मन तब भी काम करता है, जब आप ब्रेक लेते हैं। यदि आप अपने पसंदीदा काम को करते हैं, तो काम के दौरान ब्रेक ना सिर्फ आपको तरोताज़ा करेगा बल्कि ब्रेक में आपके अवचेतन मन में आप काम की समस्या  को भी हल कर सकते हैं।

    भीड़ से अलग

    यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैक्टर है। आपके मन का काम आपकी अपनी अलग पहचान बनाने में मदद करता है। जब आप अपने खास कार्य में अधिक महारथ प्राप्त कर लेते हैं, तो आप स्वयं में अधिक आत्मविश्वास का अनुभव करेंगे, और उसी समय, आपकी उस ख़ास कार्य की  अच्छी मार्केट वैल्यू भी होगी!

     

    Responses 1

    • omesh upadhay
      omesh upadhay   Dec 25, 2015 11:25 AM

      मै ३० साल का व्यक्ति हूँ और मै भी  इस तरह के लक्षणों से ग्रसित था आपका बहुत बहुत धन्यवाद इस सामग्री के लिए नहीं तो मै कभी समझ ही नहीं पता की मुझे क्या हुआ है |

  • 16 Mar
    Oyindrila Basu

    अपनी चिंता या एंग्जायटी को शक्ति मुद्रा (पावर पोज़)  से दूर करें।

    power pose

     

     

    "मैं खुश हूँ, काम कर रही हूँ, पढ़ाई भी अच्छी चल रही है, अच्छा वेतन मिल रहा है, और संसार में भी शान्ति है, पर ये शान्ति कब तक रहेगी! क्या होगा अगर फिर मुझे ससुराल जा कर रहना पड़े ! क्या होगा अगर हमारी बैंगलोर वाली ज़िन्दगी बदल जाए! क्या अगर फिर से घर के झगड़े शुरू हो जाएँ! अरे बापरे! मैं साफ़ देख पा रही हूँ, मेरी सासुमा ताने मार रही है, मेरी शिक्षा को लेकर बात उठा रही है, और मैं चिल्ला रही हूँ, ठीक से खीर भी नहीं बना पा रही! हे भगवान! मैं थक गयी", (रेशमा मन ही मन सोचती है)- कहानी एक आम गृहवधू की

    अगर ये सवाल 'क्या अगर' आप के दिमाग में बार बार आ रहा है, तो इसका मतलब है, आप चिंता के शिकार हो रहे हैं जिसे हम एंग्जायटी भी कहते हैं।

    भविष्य के बारे में सोच सोच कर हम परेशान होते रहते हैं। इससे हम मानसिक तनाव के शिकार होते हैं। क्या हो सकता है इसकी फ़िक्र से हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, हमें पसीना आने लगता है, सेहत पर असर होता है।

    हम चिंता को दूर रख सकें तो काफी स्वस्थ रहेंगे।

    भविष्य की चिंता आपके वर्तमान को हानि पहुंचाएगी। जो होगा उसे आप रोक नहीं सकते, हाँ, आप कोशिश कर सकते हैं कि एक अच्छी ज़िन्दगी जियें, अच्छा काम करें, पर होनी को टालना मुश्किल है। भविष्य की फ़िक्र से आपका आज, आजकी ख़ुशी सब खराब हो सकती है।

    कहना आसान है पर करना मुश्किल। चिंता से आज़ादी एक असम्भव सा काम लगता है। अगर हम कुछ नहीं कर सकते तभी चिंता सताती है।

    पर एक  चीज़ है जो आप कर सकते हैं।

    'पावर पोज़', यानी सर को ऊंचा रख कर , बाज़ुओं को मोर कर कमर में तान कर, सीधा खड़ा होना, इसे अंग्रेजी में पावर पोज़ कहते हैं। ऐसा देखा गया है, कि अगर आप २ मिनट तक इस स्थिति में खड़े रहने का अभ्यास करेंगे, तो आप की शंका या चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी।

    सोशल साइकोलोजिस्ट एम्मी काडी, टेड वीडियो में बताती हैं, "पावर पोज़ धारण करने से इंसान के दिमाग में २०% तक टेस्टोस्टेरोन की वृद्धि  होती है, और २५ % तक कोर्टिसोल घटता है।"

    हार्वर्ड स्कूल ऑफ़ बिज़नेस में किये गए जांच द्वारा भी ये सिद्ध हो चुका है, कि सर को ऊँचा रख कर चलने वाले, उच्च-शक्ति का प्रदर्शन करने वाले, ज्यादा आत्मविश्वासी होते हैं, और उन पर  कोई भी शंका या चिंता का असर नहीं होता।

    हम जो भी कार्य करते है, उसका असर दिमागी जज़्बातों पर पड़ता है। जो लोग झुक कर चलते हैं, और वैसे ही दुर्बल और घबराये हुए घूमते है। ऐसे लोगों में एंग्जायटी का प्रभाव ज्यादा पाया जाता है।

    पावर पोज़ के अभ्यास से हमें अंदरूनी ताक़त मिलती है, खुद पर काबू आता है, और चिंता दूर भाग जाती है।

    ऐसे ही योगा या प्राणायाम करने से भी आप में शंका काफी हद तक कम हो सकता है।

    एंग्जायटी हर परिस्थिति को आपातकालीन या संकटमय बना देती है। अगर आप चिंतित महसूस कर रहे हैं, तो ५ मिनट की नींद लें, दिमाग में सब कुछ शांत होने दें। हर रोज़ के योगा और व्यायाम से आप ज्यादा स्वस्थ रह सकते हैं, और मिज़ाज को चिंतामुक्त भी कर सकते हैं।

    सोशल साइकोलोजिस्ट एम्मी काडी, टेड वीडियो 

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  • 15 Mar
    Oyindrila Basu

    अपनी शादी को बचाईये आज ही!

    Save your Marriage

     

     

    सरिता: तुम्हारे घर में, हम बिल्कुल टीवी नहीं देख पाते थे, आप लोग हमेशा न्यूज़ देखते रहते थे, और आपके पिताजी...

    रविकांत: हाँ हाँ तुम्हें तो हमेशा शिकायत ही रहती है। हमारे घर में तुम्हें ३ महीने में इतना कष्ट हुआ, कि तुम्हारी शिकायतें थमती ही नहीं।

     

    "3 महीना" सुनते ही सरिता अचानक क्रोधित हो गयी।

     

    सरिता: तुम्हें क्या लगता है, कि अगर मैं शादी के १२ साल बाद शिकायत करती तो सती सावित्री कहलाती? और क्योंकि मैं साफ़ साफ़ समस्या बता रही हूँ, तो मैं डायन हूँ। तुम्हारे घरवाले मुझे कभी समझ नहीं पाएंगे। तुम्हारे घरवाले सही हैं कहाँ?

    रविकांत: मैंने कुछ नहीं कहा, मैं बात नहीं करना चाहता।

    सरिता: नहीं, बताओ, क्या मैंने कम सही कहा है? मैंने एडजस्ट करने की कोशिश नहीं की क्या?

    ये झगड़ा चलता रहा, और सरिता गुस्से से लाल हो कर रोने लग गयी, और रविकांत दूसरे कमरे में चला गया।

    शादी के बाद से, सरिता की उसकी सास के साथ नहीं बनती थी। वह उस घर में खुश महसूस नहीं करती थी, और अकसर अपने पति रविकांत से खुलकर इस पर विचार करती। फिर वे दोनों  अमरीका चले गए, और किसी न किसी बात पर घर की बात आती, तो उन में बहस छिड़ जाती।

     

    आज सरिता को लग रहा था, "रवि हमेशा अपने घरवालों को ही सपोर्ट करते हैं, उनके लिए मैं कोई भी माइने नहीं रखती, वह घर के बेटे हैं, और मैं कुछ भी नहीं, मुझे इस रिश्ते में नहीं रहना चाहिए, ये शादी तोड़ देना चाहिए"

    इंसान क्यों शादी जैसे पाक रिश्ते को तोड़ना चाहता है, और कैसे हम इसे बचा सकते हैं?

     

    1. क्रोध बुरा है : अपने गुस्से को खुद पर हावी न होने दें। मतभेद होंगे, झगड़ा होगा, एक दूसरे पर कभी कभी गुस्सा भी आएगा, पर अपने गुस्से से अपने प्यार को मिटने न दें।

     

    2. बात करना ज़रूरी है: अगर आप बात नहीं करेंगे, तो एक दूसरे के नज़रिये को समझ नहीं पाएंगे, और इससे, गलतफहमियां बढ़ सकती है। इसलिए, समस्या जो भी है, गुस्सा है, मलाल है, तो बता दीजिये। बैठ कर उस पर विचार करें, तो मन हल्का हो जाएगा, और मुश्किलें आसान हो जाएँगी।

    3. सुनने और समझने की कोशिश करें: रवि वैसे तो शांत इंसान था, लेकिन हर दिन घरवालों की शिकायत से वह तंग आ गया था। वह अपने घरवालों को जानता था, उनसे जुड़ी समस्या को भी समझता था, पर सरिता की बात को सुनना नहीं चाहता था। समस्या से मुंह फेरना, समस्या का हल नहीं है। सरिता गलत नहीं थी। वह घर में नई थी, और उसे कई नई परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था, और ऐसे में वह रवि को छोड़ किसे बताती? इसलिए अपने साथी की बात को सुने, उनका सहारा बने।

    उनसे बहस करना ज़रूरी नहीं है, समझाया बाद में भी जा सकता है।

    4. खुद को उनकी जगह रख कर सोचें: ये पति पत्नी दोनों पर लागू होता है, कि बहस के वक़्त, वे खुद को एक दूसरे की जगह रख कर सोचें। अगर सरिता ऐसा करती तो वह समझ पाती कि घरवालों की निंदा हमेशा रवि को सुनना पसंद नहीं होगा।

    5. अपने साथी पर का दबाव न डालें: हम अकसर अपने साथी को सर्वोत्तम समझने लगते हैं, और चाहते हैं, की वह हमारी तरह सोचें और करें, पर सब अलग व्यक्ति है, मत अलग है, तो ये आशा न करें कि आपका साथी आपकी तरह सोचेगा।

    6. साथी बने, अभिभावक नहीं: पत्नियां सोचती हैं, कि वे अपने पति को बदल देंगी, पर इसकी ज़रूरत क्या है? मोबाइल चेक करना, हर बात पर टोकना, घर से बाहर जाते वक़्त रोकना, ये हरकतें, आपको उनके दिल से  दूर कर सकती हैं । उन्हें अपनी ज़िन्दगी जीने दें, अगर कोई आदत उनके लिए हानिकारक है, तो उन्हें सही तरह से समझाएं।

    पति को भी समझना चाहिए की उनकी पत्नी एक पूर्ण महिला हैं, और उन्हें अपनी जिम्मेदारी और फैसले लेना आता है। तो उनके साथी बने, अभिभावक नहीं।

    7. साथ में फैसले करें: इससे हर साथी खुद को ख़ास और महत्वपूर्ण महसूस करेगा, और आपके रिश्ते पर अच्छा असर पड़ेगा।

    8. ईगो को छोड़ दें: "मैं क्यों आगे जा कर बात करूँ, उसने झगड़ा किया है, उसे माफ़ी मांगनी चाहिए, अगर उसे परवाह नहीं, तो मुझे भी नहीं", ऐसी मनोवृत्ति रखने का कोई फायदा नहीं। उन्हें हो न हो, आपको उनकी ज़रूरत है, ये आप समझें, अगर आप कहते हैं, "परवाह नहीं", तो आप खुद को धोखा  दे रहे हैं।

    इस लिए ईगो को छोड़ दें, और खुद आगे बढ़ कर रिश्ते में सुधार लाएं, और अपनी शादी को बचाएं।

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  • 12 Mar
    Oyindrila Basu

    काम और निजी ज़िन्दगी में संतुलंत कैसे बनाएँ?

    housewife managing home and office

     

    मैं एक गृहिणी हूँ और एक प्रोफेशनल भी। मैं सुबह 7 बजे उठती हूँ। पति के लिए चाय बनाती हूँ, और फिर अपने ऑफिस के काम पर लग जाती हूँ,। मैं लेखिका हूँ और हर सुबह एक भाग का काम मैं ब्रेकफास्ट से पहले कर लेती हूँ। 10 बजे नाश्ता करने के बाद फिर से काम पर लग जाती हूँ।


    मैं आपको अपनी डेली रूटीन बता रही हूँ, क्योंकि मैंने दोस्तों को कहते सुना है, कि वे काम और घर में बराबर ध्यान नहीं दे पा रहीं हैं , और शायद ये आपकी भी समस्या हो सकती है, इसलिए निराश ना हों।


    1. अगर काम और घर के बीच सामंजस्य सम्भव नहीं है, तो खुद को अपराधी मानने की जरूरत नहीं। आप काम कर रहे हैं यह कोई गलत बात नहीं है, इसके लिए सबसे पहले आप घर में हो रही समस्याओं के लिए खुद को दोषी मानना बंद करें।


    2.. खुद के लिए एक टाइम टेबल बनाएं। दिन में २४ घंटे होते हैं, और अगर आप सही तरीके से टाइम-टेबल के हिसाब से चलेंगे, तो सारे काम आराम से हो जाएंगे। पर एक समय सीमा के हिसाब से चलना ज़रूरी है, अगर किसी एक काम पर आप ज़रुरत से ज़्यादा वक़्त जाया करेंगे, या सुस्ती दिखाएँगे, तो संतुलंत कभी नहीं बना पाएंगे।


    3. जो काम ज्यादा ज़रूरी हैं, उसे पहले करें। अगर सुबह आपको ऑफिस में प्रोजेक्ट सबमिट करना है, तो पहले उसका काम खत्म करें, क्योंकि आप वर्किंग वुमन हैं, अगर बच्चों को ऐसी स्थिति में आप कम समय दे पा रहीं हैं तो, घर के सदस्यों के मदद लें, और प्यार और सहयोग के साथ अपना कार्य पूर्ण करने के बाद बच्चों और परिवार के साथ समय व्यतीत करें। हाँ एक बात का ध्यान रखें, कार्य बढ़ने की स्थिति में अपने परिवार के जिम्मेदार लोगों को सूचित करें, और आपसी समझ से घर परिवार की जिम्मेदारी निभाएं।

    4. आपको क्या चाहिए ये तय करें। ज्यादा पैसों के लिए ज्यादा काम करना पड़ता है, ऐसी स्थिति में आप जो काम पसंद से कर रही हैं वही करें। अगर घर में ज्यादा वक़्त देने से आप को ख़ुशी मिल रही है, तो उसे अधिक महत्व दें।


    5. काम से प्रेम होना बहुत ज़रूरी है। कम काम करें लेकिन अच्छा काम करें, तो आप खुश रहेंगी, मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगी।


    6. खुद के लिए समय रखें। अपने लिए समय होना भी ज़रूरी है, इस वक़्त में आप सिर्फ वह करें, जो आपको अच्छा लगता हो। ये आराम का वक़्त भी हो सकता है । इस समय अन्य कोई कार्य न करें ।

    7. यह ध्यान रखें, की आप वर्किंग होते हुए सभी जिम्मेदारियों को नहीं निभा सकती, ऐसी स्थिति में आप वही जरूरी कार्य करें जो आप के अलावा और दूसरा नहीं कर सकता, आधुनिकता के दौर में ऑनलाइन शॉपिंग का महत्त्व समझें, घर के समान आर्डर करना, कपडे खरीदना, बिल जमा करना आदि कार्य आप ऑनलाइन भी कर सकती हैं । इससे आप थकेंगी कम, और वही समय आप परिवार को दे सकती हैं ।

    खुद खुश रहेंगी, तभी दूसरों को खुश रख पाएंगी । अपनी सोच समझ पर टिके रहे। इस तरह से आप अपनी सभी जिम्मेदारियों को सही से निभा पाएंगी ।

    Responses 3

    • omesh upadhay
      omesh upadhay   Dec 27, 2015 08:35 PM

      सेल्फ़ी को आजकल हम लोग अपनी जिंदगी का ही एक हिस्सा जैसे मन लिए है

    • sapna sahi
      sapna sahi   Dec 25, 2015 01:48 PM

      सेल्फ़ी लेना आज कल हम लोगो का पागलपन होता जा रहा है । अगर  किसी सेल्फ़ी लेते हुए देखते है या किसी की सेल्फ़ी को देखते है तो तुरंत ही हमारा मन भी सेल्फ़ी खींचने को करता है चाहे हम जिस जगह पर हो |