कुल 169 लेख

  • 23 Mar
    Janhavi Dwivedi

    जॉब इंटरव्यू और salary negotiation के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव

    job interview

     

     

    कई बार नौकरी के लिए इंटरव्यू के समय आपको घबराहट होती है, और उस समय अपनी  बात कहना बहुत मुश्किल हो सकता है।  हालाँकि रिसर्च के अनुसार यदि आप अपनी बात (आय तय करने संबंधी ) कहने में सक्षम होते हैं, तो इसका मतलब है कि, आप अन्य भत्तों के साथ अच्छा पद और ज्यादा आय प्राप्त कर सकते हैं।

    जब आप साक्षात्कार के लिए जाते हैं, तो निश्चित रूप से साक्षात्कारकर्ता वहां ज्यादा अधिकार सम्पन्न पक्ष के रूप में होते हैं। इसलिए पहले उन्हें अपनी बात कहने दें, मतलब कि पहले उन्हें प्रश्न पूछ लेने दें। जब उनके प्रश्न और आपके उत्तर समाप्त हो जाते हैं तो वे आपको आपकी भूमिका, आपके वेतन और काम के अन्य पहलुओं के बारे में आपको बताएंगे। यही समय है, जब आप इस विषय  में बात कर सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी में नही, पहले उन्हें सुन लें।

    फिर, "यदि मैं सही समझ रहा हूँ" से शुरू करते हुए उनके द्वारा कही गयी बात को संक्षेप में दोहरा दें। इससे आपको जो बातें नहीं  समझ आ रही हैं, उनका स्पष्टीकरण भी हो जायेगा। इससे वे आश्वस्त होगें कि आपने उनकी बात सुनी, आपको इसमें रूचि है, और आप जो बात उन्होंने कही उसका सम्मान करते हैं।

    फिर उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए, अपनी बात भी  रखें। उदाहरण के लिए, कहिये कि,”मैं मानता हूँ कि, मैं अभी नया हूँ, और हो सकता है यह आपके लिए चिंता का विषय हो। लेकिन मैंने पढ़ाई के दौरान बढ़िया काम किया है, और आसानी से मैं यहाँ भी कर सकता हूँ। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि एक सफल कर्मचारी होने पर मुझे क्या फायदे मिल सकते हैं”।

    यदि आप बारीकी से देखें, तो आप ये पाएंगे कि इन वाक्यों में आपने ये मान लिया है कि, आप एक सफल कर्मचारी बनेगें और आपको लाभ मिलेगा। लेकिन आप सिर्फ ये पूछ रहें हैं, कि क्या और कितना लाभ मिलेगा। वे कुछ अस्पष्ट सा जवाब दे सकते हैं, जैसे 'आगे देखा जायगा', जिसपर आप कह सकते हैं, ओह, आपका मतलब appraisal? क्या आप बता सकते हैं, पहला appraisal कब होगा?

    इसलिए यह तरीका उन्हें कुछ भी अस्पष्ट छोड़ कर जाने नहीं  देगा, बल्कि कुछ हद तक एक वायदा देगा।  यदि आपको अभी वेतन वृद्धि नहीं मिल सकती, फिर भी salary या appraisal का वादा भी एक अच्छा सौदा है।

    संवाद विशेषज्ञ अपनी बात को अच्छी तरह से मनवाने और बातचीत करने के लिए निम्न सुझाव देते हैं :

    • दूसरे पक्ष के तर्कों को ध्यान से सुनें, और उनके मतलब को समझें।
    • जिन मुद्दों पर आप स्पष्ट नही हैं उन्हें कैसे, क्यों, कब, कहाँ और क्या प्रश्नों से स्पष्ट करें।
    • दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण सभी मुद्दों की सूची बनाएं और मुख्य मुद्दों की पहचान करें।
    • किसी भी व्यक्तिगत एजेंडे को पहचानें। उसके समाधान और आपत्ति (यदि हो ) के विषय बात करें।
    • एक समान क्षेत्रों को पहचाने।
    • किसी बाहरी दबाव को समझिए, जो समस्या को प्रभावित कर सकता है।
    • शांत रहिये और अपने व्यवहार में आक्रामकता की बजाय आत्मविश्वास लाइये।
    • तनाव को कम करने के लिए चतुराई और कूटनीति का प्रयोग करें।
    • याद रखें : 'ना' कहना एक छोटा-सा शब्द है, लेकिन इसमें बड़ी शक्ति है।
    • आपकी बॉडी लैंग्वेज सही होनी चाहिए।
    • ये जानिए कि कब समझौता करना है। लेकिन समझौता बहुत थोड़ी मात्रा में ही करना है।
    • अपनी जरूरतों को पहचानिये : ये मुख्य बिंदु हैं, जिन पर आप समझौता नही कर सकते।
    • और उन बातों में दिलचस्पी लें, जिन्हे आप स्वीकार कर सकते हैं।
    • यदि थोड़े समझौते आप स्वीकार कर सकते हैं, तो दूसरे पक्ष को नौकरी स्वीकार करने की सहमति दे दें।
    • ये सुनिश्चित करें की उन्होंने आपके प्रस्ताव की समय सीमा पर सहमति दी है।
    • कार्रवाई को निर्धारित करने के बाद समझौते पर आइये।
    • बातचीत के अंत में, अंतिम समझौता संक्षेप में, लिखित रूप में होना चाहिए।
    • यदि आप समझौते तक नही पहुंच सकते तो वैकल्पिक मार्ग के बारे में सोचें।

        

  • 22 Mar
    Janhavi Dwivedi

    इमोशनल ब्लैकमेलिंग से कैसे निपटें?

    How to avoid emotional blackmail

     

    जानू ! क्या तुम नही  चाहते, मैं पार्टी में सबसे अलग दिखूं ! मेरी सारी ड्रेसेस ओल्ड फैशन की हो गयीं हैं, तो प्लीज़! मेरे लिए नई ड्रेस ला दो। शीतल ने राहुल से प्यार भरे अंदाज़ में कहा। ऐसा अक्सर होता था, जब भी शीतल को अपनी कोई  बात मनवानी होती, तो वह किसी न किसी तरह से अपनी बात मनवा कर ही रहती, राहुल जानता था कि, एक बार शीतल की बात नहीं मानने पर उसने कई दिनों तक उससे बात नहीं की थी, इसलिए ना चाहते हुए भी उसे शीतल की बात माननी पड़ी।

    कहीं आप के साथ भी तो ऐसा नही होता? तो सचेत हो जाइये, क्योंकि भावनात्मक शोषण (Emotional blackmailing) को सहना किसी के लिए अच्छा नहीं है।

    इमोशनल ब्लैकमेलिंग को झेलना ख़ुशी की बात नहीं होती है। हममे से बहुत से लोग अक्सर जीवन के कुछ पड़ावों में इसके शिकार हो जाते हैं। वास्तव में, कुछ ऐसे चालाक लोग होते हैं, जो ख़ुशी के साथ इस प्रकार की गतिविधियों का मजा लेते रहते हैं, जिसमें उन्हें किसी ना किसी प्रकार से मानसिक और शारीरिक संतुष्टि मिलती है। ऐसे लोग सोचते हैं कि, शिकार हमेशा उनके जाल में फंस जायेगा।

    इमोशनल ब्लैकमेलिंग को कैसे परिभाषित करें?

    मनोचिकित्सक सुसान फॉरवर्ड ने इमोशनल ब्लैकमेलिंग को तीन शब्द भय, दायित्व और अपराध या FOG (fear, obligation and guilt) से परिभाषित किया है, जो की किसी ‘अपने’ के द्वारा किया जाता है। सिद्धांत यह है कि भय, दायित्व और अपराध के रूप में बदलते व्यवहार इमोशनल ब्लैकमेलिंग के समय इसके शिकार व्यक्ति के मन पर डाले जाते हैं।                    

    आपको इमोशनल ब्लैकमेलिंग का शिकार नहीं बनना चाहिए। और इसलिए आपको अपनी तरफ से इससे बचने की पूरी कोशिश करनी चाहिए, या उन लोगो से बचना चाहिए जो ये सोचते हैं कि, आप को वे इमोशनल ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसा लेंगे। आप सोच सकते हैं कि, आप तो पहले से ही ऐसी स्थिति में हैं, उस केस में जब आप पहले से ही इन स्थितियों का सामना कर रहें हैं, तो आपको इमोशनल ब्लैकमेलिंग के लक्षण को पहचानकर तुरंत इसे रोकें।

    इन बातों पर ध्यान दीजिये, जो ये निर्धारित कर सकती हैं कि कहीं आप इमोशनल ब्लैकमेलिंग की स्थिति में तो नही?

    ऐसी स्थितियां जिनमे आप जरूर खतरे में हैं:-

    1. हालाँकि आपने कुछ भी गलत नही किया है, लेकिन अंत में आपको ही अपनी गलती माननी पड़ती है।

    2. यदि आपका जीवनसाथी कभी भी किसी बात की जवाबदेही नही लेता, भले ही उसने कोई मूर्खतापूर्ण कार्य किया हो।

    3. यदि मन ना होते हुए भी आपको ही अपने खर्च पर अपने साथी की इच्छा पूरी करनी पड़ती हो।

    4. यदि आप अपने साथी के लिए उसकी तुलना में अधिक बार त्याग करते हैं।

    5. यदि आपको अपने साथी की इच्छाओं को मानने के लिए धमकाया जाता हो।

    इमोशनल ब्लैकमेलिंग के तरीके:-

    मनोचिकित्सक Susan Forward और Donna Frazier की लिखी किताब "इमोशनल ब्लैकमेल" में बताया गया है, कि जो लोग इमोशनल ब्लैकमेलिंग करते हैं, वे भय -->भावना। ---->अपराध के तरीके का इस्तेमाल करते हैं।

    सबसे पहले इमोशनल ब्लैकमेलर नुकसान होने की आशंका, दबाव या भ्रम पैदा करता है। इस प्रकार से ‘नुकसान’ उनके अनुरोध को मानने के लिए विवश कर देता है। 

    यदि  आप  नुकसान को नजरंदाज करके आगे बढ़ जाते हैं, तो उसके परिणामस्वरूप आपके ऊपर भावनात्मक दोषारोपण लगाया जाता है कि, आपने उनकी बात नहीं मानी। ये सब बड़ी चतुराई से किया जाता है। चतुर व्यक्ति आपकी भावुकता को प्रभावित करने वाले तरीके का उपयोग करता है। वे ऐसा अहसास कराते हैं, कि उनकी मांगे उचित हैं, और  आपको ये लगने लगता है, कि, यदि आपने उनकी मांग पूरी नही की तो, आप स्वार्थी माने जायेंगे।

    यदि आपको लगता है, कि आप अपने साथी के द्वारा ब्लैकमेलिंग का शिकार हुए हैं तो, किसी अन्य से इस विषय में बात करिये, और अपने रिश्ते को अलग नजरिये से देखने का विकल्प चुनिए।

    कमजोर व्यक्ति :-

    वे लोग जो किसी को 'ना' बोलने में कठिनाई का अनुभव करते हैं,इमोशनल ब्लैकमेलिंग के सबसे अधिक शिकार होते हैं। इसलिए यदि आप समझते हैं, कि आप उनमे से एक हैं तो आपको उन कामों का विरोध या खंडन करने की आदत सीखनी होगी, जिन्हे आप नहीं करना चाहते। ना बोलने के लिए ऐसे सटीक शब्दों का चयन करिये, जो  छोटे  होने  के साथ ही आपकी मजबूती को दर्शाएं, साथ ही जिस परिस्थिति का आप सामना कर रहे हैं उसे आपके नियंत्रण में होने का अहसास कराएं।

    इमोशनल ब्लैकमेलिंग को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका :-

    1. अपनी इच्छाओं और शौक को अपने साथी की इच्छाओं और शौक से पहले रखें।

    2. हर बात की एक सीमा निर्धारित करिये जो किसी भी स्थिति में पार नहीं होनी चाहिए।

    3. इस बात को समझिए कि आप अपने साथी से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं, इसके बावजूद आपकी अपनी ख़ुशी का भी महत्व है। अपनी जरूरतों की बातें साझा कीजिये और जरूरत के अनुसार उन्हें पहले पूरा कीजिये।

    4. याद रखिये इमोशनल ब्लैकमेलिंग में फंसने से आपकी हालत बदतर ही होगी। उस स्थिति में जब आपके साथी द्वारा आपको शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा हो, तो तुरंत अलग हो जाइये क्योंकि यह खतरे का अलार्म है।

    5. अपने आसपास के समाजसेवकों से मिलें, और आवश्यकता होने पर किसी प्रोफेशनल की मदद लें।

    Original English article

  • 21 Mar
    Oyindrila Basu

    सुनें सबकी पर करें वह, जो आपको उचित लगे ।

    girl blowing bubble

     

     

    "प्रीती ये ड्रेस मुझ पर कैसा लगेगा। क्या इसका रंग ज्यादा  गाढ़ा है? मैं इसमें ख़ूबसूरत लगूँगी ना? या फिर....कहीं ऐसा तो नहीं कि, प्रियंका की ग्रुप कॉलेज में मुझ पर हँसेगी ? मैं कन्फ्यूज्ड हो गयी हूँ । "- एक साधारण लड़की मुंबई की मॉल में।

    हम सभी हमेशा इस दुविधा पूर्ण विचार से गुज़रते हैं। लोग क्या कहेंगे, लोग हमारे बारे में क्या सोच रहें हैं, ये विचार  हमारे दिमाग में हर वक़्त चलता रहता है।

    हम सामाजिक जीव हैं, और लोकप्रियता हम सब चाहते हैं। और यही हमें परेशान करती है, कि लोग हमारे बारे में क्या सोच रहे होंगे। हम डरते हैं कि वे हमारे काम पर निंदा और आलोचना कर रहे हैं।

    अगर हम रास्ते में गिर जाते हैं, तो लोग हम पर हँसते हैं, क्योंकि हम अलग व्यवहार कर रहे हैं, हमें चलना चाहिए था, पर हम गिर गए । समाज में नकारे जाने का डर, शर्म का डर अकसर लोगों को परेशान करता है।

    पर लोगों के मत पर अतिरिक्त सोच विचार हमारे मानसिक संतुलंत को बिगाड़ सकता है। हम चिंतित रहते हैं। इससे रक्त-चाप भी बढ़ सकता है। इससे कैसे मुक्त हों ?

     

    1. खुद को मेहरबान और उदार बनाये- आपकी यह खूबी सभी को पसंद आएगी, अगर आप दूसरों के प्रति उदार हैं, और सब से विनम्रता से पेश आते हैं।

    2. ऐसा काम करें जो आपको बेहद पसंद हो- जैसे पढ़ाई, इनसाइक्लोपीडिया से ज्ञान वृद्धि या फिर टेलिस्कोप के साथ तारे देखना.. ऐसे अनोखे काम को अंजाम देने से, आप में आत्म संतुष्टि होगी, और आप श्रेष्ठ महसूस करेंगे, और जब आप औरों से बेहतर काम करेंगे, तो दूसरे वैसे ही आपको पसंद करेंगे।

    3. अगर आपकी उदारता के बावजूद, लोग आपकी निंदा करते हैं, तो परेशान न हों। समझ जाइए कि निंदा करने वाला आपसे भी बुरे हाल में है। वह अपनी खामियों का ज़िम्मेदार आपको ठहराना चाहता है। आप अपने दोष की वजह से नकारे नहीं जा रहे, बल्कि, दूसरे खुद से परेशान हैं, तो आप की निंदा कर रहे हैं।

    4. आलोचना आपको बेहतर बनाती है - अगर आपको लगता है कि , लोगों के ताने और समालोचना आपके प्रति जायज़ हैं, तो चिंतित होने के बजाए, खुद को और बेहतर बनाने का प्रयास करें।

    थोड़ी सी निंदा चर्चा हम सब के लिए ज़रूरी है, ताकि हम खुद को पहचान पाएं और सुधार ला सकें।

    पर अतिरिक्त चिंता हानिकारक है। इससे आप अपने ऊपर कभी विश्वास नहीं कर पाएंगे ।

    दूसरों को खुश करने के लिए उनकी तरह बोलेंगे और करेंगे, तो धीरे धीरे आपका अपना अस्तित्व खोता जाएगा। हमेशा याद रखें, कोई भी ऐसे व्यक्ति को पसंद नहीं करता जिसकी अपनी पहचान नहीं ।

    सीधी सोच, सीधा जवाब लोगों के बीच आपको कुछ क्षण के लिए अलोकप्रिय कर सकता है, पर मन ही मन सब आपको आपके  सत चरित्र के लिए सम्मान देंगे।

    खुद से प्यार करें, आत्मविश्वासी बनें, दूसरों की सुनें, पर करें वह जो आपको उचित लगे । 

     

    Responses 1

    • omesh upadhay
      omesh upadhay   Dec 27, 2015 08:29 PM

      मेरा बेटा ६ साल का है और वह हर बात पर चिड़चिड़ाता रहता है इसीलिए अक्सर ही मै गुस्से में आकर उसे मार देता हूँ । क्या करुँ कृपया कुछ सलाह दे । धन्यवाद

  • 19 Mar
    Mandavi Pandey

    जीवन में आगे बढ़ना है, तो वह करें जो आपको पसंद है ।

    Follow your passion

     

     

    वैसे तो हम कहते हैं कि हमें वही कार्य करना चाहिए, जो  पसंद हो, पर हम स्वयं इस बात का पालन नही करते। ऐसा क्यों?

    मनोवैज्ञानिक शोध के अनुसार आप जब, अपने मन का कार्य करते हैं, तो आप उसमें सफलता जरूर पाते हैं।

     

    मनपसंद काम करने के कुछ फायदे हम आपको बता रहे हैं, साथ ही इससे किस प्रकार burnout से छुटकारा मिलता है, यह भी बता रहे हैं।

     

    मष्तिष्क में हॉर्मोन का स्राव:

    जब आप अपना मनपसंद काम करते हैं, तो मस्तिष्क में डोपामाइन नामक केमिकल का स्राव होता है, जिससे आपको अच्छा लगता है, और आप काम करना जारी रखते हैं। यह आपको काम के दौरान होने वाले तनाव से बचाता है, और आप थकान नहीं महसूस करते।

     

    रोग प्रतिरोधक क्षमता 

    जब आप तनावग्रस्त होते हैं तो कार्य  करने के लिए अपने sympathetic nervous system पर जोर देते हैं, ज्यादा लम्बे समय तक ऐसा होने से आपकी इम्युनिटी(प्रतिरोधक क्षमता ) प्रभावित होती है। ऐसा तब होता है, जब आप सुबह से शाम तक वो काम करते हैं, जिसे आप पसंद नही करते।

    सार्थकता 

    मानव मन किसी भी कार्य में अर्थ की खोज करता है। जब आप कुछ ऐसा कार्य करते हैं, जो आपको बोरिंग लगता है जिससे आपको कार्य करने में आनंद नही आता, तो धीरे -धीरे समय के साथ-साथ आपका दिमाग थक जाता है, और आप अत्यधिक तनावग्रस्त हो जाते हैं। जब आप अपने मन का काम  करते हैं ,तो इसका विपरीत होता है। आप इसे अर्थपूर्ण पाते हैं और इसलिए आपका दिमाग सक्रिय रहता है।

     

    विकास

    चाहे यह कैरियर से संबंधित ग्रोथ हो या व्यक्तिगत ग्रोथ, यदि आप ऐसा कार्य करते हैं, जिसे आप नापसंद करते हैं, या बोरिंग समझते हैं तो यह नहीं मिल सकती ।ग्रोथ तभी होगी जब आप कार्य में मन लगाते हैं। इसलिए अपने मन का कार्य करें, और समय के साथ अपने विकास को होते हुए देखें।

     

    कौशल

    आपने अनगिनत मामलों के बारे में सुना होगा, जब माता-पिता ने बच्चे को ऐसे हॉबी क्लासेज में डालने की कोशिश की, जिसे बच्चा पसंद नही करता था, और परिणाम कुछ भी नही मिला। यदि एक बच्चा गिटार बजाना पसंद करता है, तो वह, उसी गिटार क्लास से बहुत सी स्किल सीख लेगा, जिसे एक दूसरा बच्चा दिल से नापसंद करता है। इसलिए, आप कौशल तभी सीखते हैं जब आपका मन उस काम से जुड़ाव महसूस करता है। सीखने के कौशल का मतलब है, आप पहले की तुलना में कम समय में अधिक कार्य को सीख सकते हैं। इसलिए आप जो भी कार्य करते हैं, उसमे और निपुण हो जाते हैं, जो आपको शारीरिक और मानसिक थकान से बचाता है।

     

    सीखने की  चाहत 

    यदि आप अपने काम से प्यार करते हैं, तो आप खुले दिमाग के होते हैं,  और अपने आस -पास के लोगों से भी सीखते हैं। आप दूसरों से अधिक से अधिक सीखते हैं, जितना आपका दिमाग सीख सकता है,और अपना कौशल सुधारते हैं। जब आप अपनी रूचि का कार्य करते हैं तो आपके रिश्ते भी बेहतर होते हैं। इसके बारे में विचार कीजिये कि, 'कार्य करने के बाद आपको लगता है आपने अपना समय बर्बाद किया' या 'कार्य करने के दौरान आपने अपने समय का आनंद लिया'?

     

    खुशी

    क्यों अपने मन का कार्य  करने से आपको थकान नही लगती ?

    शायद इसका मुख्य कारण है कि इससे आपको ख़ुशी मिलती है। जब आप खुश होते हैं, तो आप कम दर्द और दुख महसूस करते हैं और आसानी से energized हो जाते हैं। इसके विपरीत जब आप उस काम को करते हैं,  जिसे आप नहीं पसंद करते हैं, तो आप अधिक नाराज और परेशानी महसूस करते हैं। हार्वर्ड के एक 75 साल के अध्ययन में पाया गया है कि, यदि खुश रहने वाले लोग बीमार हो जाते हैं, तो उन्हें दुखी लोगों की तुलना में, कम दर्द महसूस होता है, और वे आसानी से इसे सहन कर सकते हैं।

     

    पैसा

    ज़ाहिर है, सबसे बड़ा सवाल पैसे के बारे होता है। यदि मैं अपने पैशन को फॉलो करूंगा तो, क्या मैं ज्यादा कमा पाउँगा?.... हाँ, क्यों नही?...

    क्या आप जानते हैं, हाल ही में, भारत में इंजीनियरों ने, चपरासी के पद के लिए आवेदन किया है? हमारी मानसिकता (कि इंजीनियरिंग करने से अच्छी नौकरी और ज्यादा आय मिलती है) के कारण इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गयी है, और अब इंजीनियरों की संख्या अधिक, और जॉब की संख्या कम हो गयी है। इसलिए, जरूरी नहीं है कि किसी विशेष कैरियर में अधिक पैसा है। आपकी शुरुआत, धीमी या तेज हो सकती है, लेकिन अगर आप अपने मन का काम करते हैं, तो यह सबसे बेहतर होगा, और लक्ष्मी जी की कृपा भी होगी।

    ब्रेक 

    आपका अवचेतन मन तब भी काम करता है, जब आप ब्रेक लेते हैं। यदि आप अपने पसंदीदा काम को करते हैं, तो काम के दौरान ब्रेक ना सिर्फ आपको तरोताज़ा करेगा बल्कि ब्रेक में आपके अवचेतन मन में आप काम की समस्या  को भी हल कर सकते हैं।

    भीड़ से अलग

    यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैक्टर है। आपके मन का काम आपकी अपनी अलग पहचान बनाने में मदद करता है। जब आप अपने खास कार्य में अधिक महारथ प्राप्त कर लेते हैं, तो आप स्वयं में अधिक आत्मविश्वास का अनुभव करेंगे, और उसी समय, आपकी उस ख़ास कार्य की  अच्छी मार्केट वैल्यू भी होगी!

     

    Responses 1

    • omesh upadhay
      omesh upadhay   Dec 25, 2015 11:25 AM

      मै ३० साल का व्यक्ति हूँ और मै भी  इस तरह के लक्षणों से ग्रसित था आपका बहुत बहुत धन्यवाद इस सामग्री के लिए नहीं तो मै कभी समझ ही नहीं पता की मुझे क्या हुआ है |

  • 16 Mar
    Oyindrila Basu

    अपनी चिंता या एंग्जायटी को शक्ति मुद्रा (पावर पोज़)  से दूर करें।

    power pose

     

     

    "मैं खुश हूँ, काम कर रही हूँ, पढ़ाई भी अच्छी चल रही है, अच्छा वेतन मिल रहा है, और संसार में भी शान्ति है, पर ये शान्ति कब तक रहेगी! क्या होगा अगर फिर मुझे ससुराल जा कर रहना पड़े ! क्या होगा अगर हमारी बैंगलोर वाली ज़िन्दगी बदल जाए! क्या अगर फिर से घर के झगड़े शुरू हो जाएँ! अरे बापरे! मैं साफ़ देख पा रही हूँ, मेरी सासुमा ताने मार रही है, मेरी शिक्षा को लेकर बात उठा रही है, और मैं चिल्ला रही हूँ, ठीक से खीर भी नहीं बना पा रही! हे भगवान! मैं थक गयी", (रेशमा मन ही मन सोचती है)- कहानी एक आम गृहवधू की

    अगर ये सवाल 'क्या अगर' आप के दिमाग में बार बार आ रहा है, तो इसका मतलब है, आप चिंता के शिकार हो रहे हैं जिसे हम एंग्जायटी भी कहते हैं।

    भविष्य के बारे में सोच सोच कर हम परेशान होते रहते हैं। इससे हम मानसिक तनाव के शिकार होते हैं। क्या हो सकता है इसकी फ़िक्र से हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, हमें पसीना आने लगता है, सेहत पर असर होता है।

    हम चिंता को दूर रख सकें तो काफी स्वस्थ रहेंगे।

    भविष्य की चिंता आपके वर्तमान को हानि पहुंचाएगी। जो होगा उसे आप रोक नहीं सकते, हाँ, आप कोशिश कर सकते हैं कि एक अच्छी ज़िन्दगी जियें, अच्छा काम करें, पर होनी को टालना मुश्किल है। भविष्य की फ़िक्र से आपका आज, आजकी ख़ुशी सब खराब हो सकती है।

    कहना आसान है पर करना मुश्किल। चिंता से आज़ादी एक असम्भव सा काम लगता है। अगर हम कुछ नहीं कर सकते तभी चिंता सताती है।

    पर एक  चीज़ है जो आप कर सकते हैं।

    'पावर पोज़', यानी सर को ऊंचा रख कर , बाज़ुओं को मोर कर कमर में तान कर, सीधा खड़ा होना, इसे अंग्रेजी में पावर पोज़ कहते हैं। ऐसा देखा गया है, कि अगर आप २ मिनट तक इस स्थिति में खड़े रहने का अभ्यास करेंगे, तो आप की शंका या चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी।

    सोशल साइकोलोजिस्ट एम्मी काडी, टेड वीडियो में बताती हैं, "पावर पोज़ धारण करने से इंसान के दिमाग में २०% तक टेस्टोस्टेरोन की वृद्धि  होती है, और २५ % तक कोर्टिसोल घटता है।"

    हार्वर्ड स्कूल ऑफ़ बिज़नेस में किये गए जांच द्वारा भी ये सिद्ध हो चुका है, कि सर को ऊँचा रख कर चलने वाले, उच्च-शक्ति का प्रदर्शन करने वाले, ज्यादा आत्मविश्वासी होते हैं, और उन पर  कोई भी शंका या चिंता का असर नहीं होता।

    हम जो भी कार्य करते है, उसका असर दिमागी जज़्बातों पर पड़ता है। जो लोग झुक कर चलते हैं, और वैसे ही दुर्बल और घबराये हुए घूमते है। ऐसे लोगों में एंग्जायटी का प्रभाव ज्यादा पाया जाता है।

    पावर पोज़ के अभ्यास से हमें अंदरूनी ताक़त मिलती है, खुद पर काबू आता है, और चिंता दूर भाग जाती है।

    ऐसे ही योगा या प्राणायाम करने से भी आप में शंका काफी हद तक कम हो सकता है।

    एंग्जायटी हर परिस्थिति को आपातकालीन या संकटमय बना देती है। अगर आप चिंतित महसूस कर रहे हैं, तो ५ मिनट की नींद लें, दिमाग में सब कुछ शांत होने दें। हर रोज़ के योगा और व्यायाम से आप ज्यादा स्वस्थ रह सकते हैं, और मिज़ाज को चिंतामुक्त भी कर सकते हैं।

    सोशल साइकोलोजिस्ट एम्मी काडी, टेड वीडियो 

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