व्यसन या आसक्ति को जड़ से मिटाया जा सकता है।


vyasan ya aasakti ko kaise door karein

"आदत जब हद से ज्यादा बढ़ जाए तो नशा बन जाती है", (वैसे याद नहीं आ रहा है, किस फिल्म की लाइनें हैं ये) पर हम सब किसी न किसी आसक्ति से जुड़े होते हैं।

"मेरे पति शराब के आदी हो चुके थे। वे खुद रोज़ सोचते थे कि आज छोड़ दूंगा,कल छोड़ दूंगा, लेकिन उनका मनोबल टूट जाता था, किसी न किसी बहाने से वे अपने नशा को अपना ही लेते थे, पर मेरे पिताजी को देखने के बाद, मैं निश्चित थी कि शराब की आदत उन्हें छोड़नी ही पड़ेगी, ये जान लेवा हो सकती है। 31 दिसंबर के बाद, उन्होंने शराब को हाथ नहीं लगाया, तारीख को अपनी ढाल बना ली। "-(Anonymous)

सिर्फ नशीले पदार्थ ही नहीं, कई और चीज़ें हैं, जो हमें आसक्ति से बांधे रखती हैं। जैसी ज्यादा खरीदारी करना भी आसक्ति है, फ़ोन पर हमेशा मेसेज देखना एक आसक्ति है।

सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर खुद को व्यस्त रखना भी एक आसक्ति है, और धीरे धीरे ये इतने प्रभावशाली हो जातें है, कि हम इन्हें आसानी से छोड़ नहीं पाते। इससे हमारा वक़्त, पैसा, और स्वास्थ्य, सब बर्बाद होता है।

हम दिन में 10-12 घंटे काम कर सकते हैं, जिनमें 4-5 घंटे आसक्ति को अंजाम देने में व्यर्थ हो जाता है।

इंटरनेट शॉपिंग की आसक्ति हो, तो Jabong से Flipkart से Amazon तक, ढूंढ़ते ढूंढते,शाम हो जाती है, पर हमारे मन को कुछ पसंद का नहीं मिलता। हम कुछ नहीं खरीदते, लेकिन घंटों जाया हो जाते हैं।

काम के बीच बार-बार फ़ोन पर मैसेज चेक करने से, ना सिर्फ काम खराब होता है, बल्कि दिमागी संतुलन बिगड़ सकता है, क्योंकि आप एक समय पर दो या उससे ज्यादा काम पर समान ध्यान लगाने कि कोशिश करते हैं।

कंप्यूटर पर वीडियो गेम्स, बच्चों के लिए एक अद्भुत आसक्ति है, जिससे माता-पिता परेशान हो कर, कंप्यूटर को लॉक कर देते हैं। वीडियो गेम्स बुरे नहीं हैं, पर प्यारे बच्चों ज्यादा देर तक खेलते रहने से, आपकी आँखें खराब हो सकती हैं, आपका शरीर मशीनी हो जाता है, और तार्किक चेतना (लॉजिकल रॅशनॅलिटी) घटने लगता है।

बच्चों के लिए, ये वक़्त का दुरुपयोग है, क्योंकि, जीवन के इस व्यस्त समय में, उनको पढ़ाई पर ध्यान देना आवश्यक है, पर गेम के लिए आसक्ति से, उनका पढ़ाई पर ध्यान नहीं होता है, और अकसर रोज़ के अभ्यास बाकी रह जाते हैं।

ऐसे ही नाखून चबाना, सर खुजाना, नाक कुरेदना भी आदतें है, जो समाज में हमारी छवि खराब कर सकती हैं।

पर हम तो हम हैं, और गाते रहते हैं, "क्या करूँ ओ...... मैं हूँ आदत से मजबूर"

पर ये आदतें, कई बार हम पर हावी हो जाते हैं, और हम खुद इसे छोड़ना चाहते हैं। पर छूटता नहीं।

सही तरीके से कोशिश करना ज़रूरी है।

  1. दृढ़ निश्चय बनें। आपको अपनी बुरी आदत छोड़नी है, ये पहले तय कर लें। उसके दुष्प्रभाव को समझें, और क्षणिक ख़ुशी को नज़रअंदाज़ करें।

 

  1. आसक्ति छोड़ने के लिए एक तारीख तय करें, कि उस दिन के बाद आप इस आदत को दुबारा नहीं होने देंगे।

 

  1. खुद से खुद के वादे पर कायम रहें ।

 

  1. अपने दिमाग की आवाज़ न सुने। अकसर आपको लगेगा कि एक बार और अपनी पुरानी आदत को अभ्यास कर लेने से कोई हानि नहीं है, दुनिया पर आफत नहीं आएगा। वह इसलिए, क्योंकि जब हम थके हुए होते हैं, मस्तिष्क में #PrefrontalCortex काम करना बंद कर देता है, जब ऐसा लगे, खुद को नकारें। अपनी समझदारी आसक्ति से दूर होने में लगाएं। एक क्षण कि कमज़ोरी को, आपकी लम्बी कोशिश को व्यर्थ न करने दें।

 

  1. जो लोग या जगह, आपको अपनी आसक्ति की तरफ खींचती है, उनसे दूर रहे।

 

  1. अगर कुछ काम न आये, तो विशेषज्ञों की मदद लें।

 

अपनी कमज़ोरी पर जीत हासिल करने से, आप अंदर से मज़बूत महसूस करेंगे, आपके स्वास्थ्य में सुधार आएगा। आपका वक़्त और पैसा दोनों बचेगा।

आपकी आसक्ति में साथ देने वाले भागीदारों को शायद, शुरुआत में, ये बदलाव अच्छा न लगे, पर आसक्ति को मिटा कर आप उनके लिए भी उदाहरण बनेंगे, और उन्हें ये छोड़ने में मदद कर पाएंगे।

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