काउंसलिंग के विषय में कुछ मिथकों का स्पष्टीकरण

Clarification of 19 myths about counselling

 

काउंसलिंग स्वयं को जानने और स्वस्थ होने का एक अनोखा मार्ग हो सकता है यदि यह सही काउंसलर के द्वारा सही तरीके से दी जाय। लेकिन यह दुर्भाग्य है कि, काउंसलिंग को लेकर  बहुत सी मिथक और गलतफहमियां हैं जिसे लोगों ने काउंसलिंग के प्रति अपनी सोच में पाल रखा है। हम उनमे कुछ भ्रांतियों को दूर करने के लिए स्पष्टीकरण दे रहें हैं ,कृपया जरूर पढ़ें :-

मिथक 1. कोई भी काउंसलर बन सकता है।

स्पष्टीकरण :ऐसा देखा गया है कि १-२ महीने का कोर्स करके लोग काउंसलर बन कर लोगों की काउंसलिंग करने लग जाते हैं। दुर्भाग्य से भारत में यह बहुत अधिक हो रहा है। लेकिन वास्तव में एक काउंसलर के पास human development या psychology में कम से कम मास्टर्स की डिग्री होनी चाहिए। यदि आपको काउंसलर के विषय में कोई अनिश्चितता हो तो आप उनसे उनकी योग्यता के विषय में पूछ सकते हैं यह आपका जानने का अधिकार है।

 

मिथक 2. यदि काउंसलिंग सस्ती है तो यह अच्छी नही है।

स्पष्टीकरण :यह सत्य नही है। बहुत से कम्युनिटी सेंटर और NGO  मुफ्त में ऐसी सेवाएं दे रहें हैं और अच्छे भी हैं।

 

मिथक 3. यदि कोई अधिक मूल्य ले रहा है तो वह जरूर अच्छा है।

स्पष्टीकरण: यह ऊपर वाले मिथक के समान है ।  बहुत से नीम हकीम भी ऊँचे दाम वसूलते है। इसलिए मूल्य गुणवत्ता का कोई मापदंड नही है।

 

मिथक 4. काउंसलर का काम है मुझे सलाह देना।

स्पष्टीकरण: काउंसलर का काम है आपकी भावनाओं को फिर से ठीक करके आपको योग्य बनाने में आपकी मदद करना ताकि आप स्वयं अपनी समस्याओं को हल कर सकें। काउंसलर आपको सलाह नही देते और यदि वे ऐसा करते हैं, तो यह गलत है।

 

मिथक 5. काउंसलर के पास सिर्फ पागल लोग जाते हैं।

 स्पष्टीकरण: काउंसलिंग सिर्फ मनोवैज्ञानिक समस्या से ग्रस्त लोगों के लिए नही है। काउंसलिंग रिश्तों को सुधारने ,ऑफिस में कार्य क्षमता बढ़ाने,शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्राप्त करने ,तनाव प्रबंधन आदि से भी संबंधित होती है।

 

मिथक 6. काउंसलिंग के लिए जाने का मतलब मैं कमजोर हूँ। 

 स्पष्टीकरण: क्या जुखाम की दवा लेने का मतलब आप कमजोर हैं ? नही ना।  यह होशियारी और समझदारी है कि स्वयं को सही समय पर बचाने के लिए मदद ली जाय।

 

मिथक 7. काउंसलिंग से आप काउंसलर के ऊपर निर्भर हो जाएंगे।

स्पष्टीकरण : नही, एक अच्छा काउंसलर आपको अधिक कुशल बनाने में आपकी मदद करता है,ताकि आप अपना जीवन स्वतंत्रता पूर्वक व्यतीत कर सकें ।

  

मिथक 8.काउंसलिंग या थेरेपी कई वर्षों तक जारी रहती है। 

स्पष्टीकरण : यह सत्य नही है। हालाँकि कुछ मन में गहराई तक बसी हुए भावनाओं को लम्बे समय तक काउंसलिंग की जरूरत होती है। लेकिन ज्यादातर मामले कम अवधि की थेरेपी से ही हल हो जाते हैं।

 

मिथक 9. थेरेपी में आपको दवाइयाँ लेनी पड़ती हैं।   

स्पष्टीकरण : थेरेपी में कोई भी कार्य जबरन नही करना होता है। और यही इसकी खूबसूरती है। चयन आपके ऊपर होता है। काउंसलर एक डॉक्टर के सहायक के रूप में कार्य कर सकता है, जो आपको सिर्फ दवाइयाँ लिख कर दे सकते हैं। लेकिन यह आपके ऊपर है कि आप दवाएं लें या नही।

मिथक 10. काउंसलर दवाएं लिख सकता है।

स्पष्टीकरण : जबतक काउंसलर के पास मेडिकल की डिग्री नहीं होती वे ऐसा नहीं कर सकते।

 

मिथक 11. थेरेपी की प्रक्रिया के दौरान थेरेपी लेने वाला निष्क्रिय रहता है।

स्पष्टीकरण : थेरेपी लेने वाले व्यक्ति को थेरेपी के दौरान बहुत ज्यादा सक्रिय रहना चाहिए, क्योंकि वे स्वयं के लिए लगातार कौशल का विकास कर रहें हैं।

 

मिथक 12.केवल महिला काउंसलर ही अच्छी होती हैं।

स्पष्टीकरण : हालाँकि इस व्यवसाय में बहुत सी महिला काउंसलर्स दिखाई देती हैं। यदि एक व्यक्ति के पास सही कौशल, योग्यता और अनुभव है तो फिर वह चाहे पुरुष हो, अच्छा होता है।

 

मिथक13. ज्यादा उम्रदराज़ काउंसलर अच्छे होते हैं। 

स्पष्टीकरण : हालाँकि अनुभव जरूरी होता है, लेकिन कभी कभी उम्र लोगो को कठोर भी बना देती है। इसलिए यहां ऐसा कोई नियम नहीं है।

 

मिथक 14. काउंसलर थेरेपी के बाद हमारे मित्र बन सकते हैं।

स्पष्टीकरण : सही यही होगा कि काउंसलिंग के संबंधों से अलग दोस्ती का संबंध ना बनाया जाय, क्योंकि थेरेपी को प्रभावी बनाने के लिए सीमाओं का होना जरूरी है।

 

मिथक 15.  काउंसलिंग सिर्फ बात करना है।

स्पष्टीकरण : व्यक्ति की मानसिक शुद्धि और समस्या के निदान के लिए  भावनात्मक समस्या को पहचानकर उसे फिर से व्यवस्थित करने की गंभीर प्रक्रिया काउंसलिंग है।

 

मिथक 16. मित्र और परिवार के सदस्य एक दूसरे की काउंसलिंग कर सकते हैं।

 स्पष्टीकरण : मित्र और परिवार के सदस्य एक दूसरे की सामर्थ्य और कमजोरियों को उतनी निष्पक्षता पूर्वक नही देख सकते जितना की काउंसलर देख सकता है। और उनके पास कोई ट्रेनिंग भी नहीं है, इसलिए उन्हें आधिकारिक तौर पर परामर्श नही देना चाहिए।

 

मिथक 17.ऑनलाइन काउंसलिंग भरोसेमंद नही होती।

 स्पष्टीकरण :बहुत से भरोसेमंद ऑनलाइन काउंसलिंग के विकल्प हैं, जो मजबूत और सुरक्षित हैं।

मिथक  18. काउंसलिंग सिर्फ विकारग्रस्त और बीमार व्यक्तियों के लिए है।    

स्पष्टीकरण :आप भी अपनी दक्षता बढ़ाने के लिए काउंसलिंग का उपयोग कर सकते हैं। जैसे - अलग सोच की दक्षता।

 

मिथक19. काउंसलर क्या मेरे राज को मेरे खिलाफ इस्तेमाल करेगा ?

स्पष्टीकरण :एक अच्छा काउंसलर थेरेपी के दौरान हुई बातों को थेरेपी तक ही रखता है, और कभी आपके खिलाफ नही इस्तेमाल करता है।