परीक्षा देने से कभी मत डरिये

pareeksha narendra modi

 


परीक्षा के नाम से ही अकसर हमारे दिमाग में डर पैदा हो जाता है। हमें पसीना आने लगता है। परीक्षा के समय मानसिक तनाव का होना स्वाभाविक है । पर ऐसा क्यों होता है?


हम अकसर दूसरों की उम्मीदों के बोझ तले दब जातें है। बच्चों पर माता-पिता, परिवार और दोस्तों की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव होता है।

हमारी वार्षिक परीक्षा निर्णय करती है, कि हम अगली कक्षा में जाएंगे या नहीं। ऐसे प्रेशर के कारण बच्चों के शारीरिक विकास पर भी असर होता है, जैसे नींद न आना, भूख न लगना, अधिक परेशानी, यह सब मानसिक दबाव का असर है....

और दबाव से तनाव होता है, और मानसिक स्वस्थ बिगड़ जाता है....नतीजा-परीक्षा से डर, परीक्षा में गलतियां।


इस लिए नरेंद्र मोदी जी ने इस साल के विद्यार्थियों के लिए 'मन की बात' पर एक प्रेरणा सूचक सन्देश दिया हैं, और आशा करते हैं, कि बच्चों को इससे ज़रूर लाभ होगा।


उनके साथ भारत रत्न सचिन तेंदुलकर जी भी हैं, जो बताते हैं.... "अपना लक्ष्य खुद बनाओ। लक्ष्य वही बनाओ, जो आप हासिल कर सकते हो। दूसरों की उम्मीदों के दबाव में मत आओ। मैं जब खेलता था, मुझ पर भी दबाव था, कभी अच्छे वक़्त थे, कभी बुरे, पर लोगों की उम्मीदें हमेशा थी, और वह बढ़ती गयी, लेकिन मेरा ध्यान सिर्फ गेंद पर होता था, मैंने खुद का लक्ष्य खुद बनाया, और सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ता गया"


आपकी सोच सकारात्मक होना ज़रूरी है, पॉजिटिव सोच के फल अच्छे ही होते हैं।


ये एक अहम बात है। हम अकसर सर्वश्रेष्ठ बनने के चक्कर में, खुद के लिए काल्पनिक लक्ष्य बना लेते है, और बाद में उनके पूरे न होने पर निराश हो जातें है।


इसी बात पर गौर करते हुए मोदी जी कहते हैं, "प्रतिस्पर्धा क्यों, अनुस्पर्धा क्यों नहीं... दूसरों से स्पर्धा करके वक़्त क्यों बर्बाद करें, क्यों न खुद से ही स्पर्धा करें, और अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने का संकल्प करें। जब आप खुद की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे, तो आत्म संतुष्टि के लिए आपको दूसरे की अपेक्षा नहीं होगी"


उनका यह मानना है, की परीक्षा से सिर्फ यह पता चलता है कि हम सही दिशा में जा रहे हैं या नहीं, उसमें आये अंक को अपने जीवन का आधार मान लेना गलत होगा। खुले मन से परीक्षा को स्वीकारने से, उसके प्रति डर चला जायेगा।


ऐसे में लोकप्रिय शतरंज खिलाडी विश्वनाथन आनंद भी बच्चों के लिए कुछ विशेष टिपणी रखतें है:


"अच्छी नींद ज़रूरी है, पेट भर खाना ज़रूरी है, आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, तभी आप परीक्षा के लिए पूर्ण रूप से तैयार होंगे। जैसे शतरंज में खेलते वक़्त कौन सी चाल कब आएगी ये पता नहीं होता, वैसे ही परीक्षा में क्या सवाल आएंगे ये पता नहीं होता, इसलिए अगर आप पेट से परितृप्त हैं, और अच्छी नींद पूरी करके आएं हैं, तो आप शांति से सोच समझकर सवाल के सही जवाब लिख पाएंगे, खुद को शांत रखना सबसे ज़रूरी है"


ये तो मोदी जी भी मानते हैं, कि अनुशासन अच्छे फल के लिए बेहद ज़रूरी है। वक़्त पर खाना, वक़्त पर सोना, आपको स्वस्थ रखेगा।

मन की शान्ति भी ज़रूरी है, बौखलाया हुआ इंसान, कुछ सही से समझ नहीं पाता, इसलिए अगर पूरे वर्ष में आपने बहुत पढ़ाई की है, और आप में ज्ञान का सागर भी है, तो भी जल्दीबाजी में आप को कुछ याद नहीं आएगा।


घबराइये नहीं, आप जितना डरते हैं, उतनी मुश्किल परीक्षा नहीं है।


वे हमें योगा और मेंडिटेशन करने के लाभ के बारे में भी बतातें है। मेंडिटेशन हमारे मानसिक स्थिति को बनाये रखने में मदद करता है।


"ये एक अभ्यास है, मैं आज बोलूंगा तो आप कल से नहीं कर पाएंगे, लेकिन परीक्षा के वक़्त योग हमेशा काम आता है", मोदी जी का कहना है।


ज्यादा तनाव में न रहें। हँसी मज़ाक में परीक्षा को पार करें। दोस्तों के साथ हँसे, बातें करें, तो सब आसान हो जाएगा।


वे ये भी बताते हैं, परीक्षा के बाद कितने नंबर आएंगे, ये ना सोचें, परिवार के साथ दूसरे चीज़ों पर गप्पे लड़ायें। "जो हो गया सो हो गया", आगे देखते हुए अगली परीक्षा की तैयारी करें।

विद्यार्थियों के लिए कुछ साधारण टिप्पणी:


परीक्षा के केंद्र में वक़्त पर या उससे पहले पहुंचे ताकि देर होने का डर न हो।
पूरी नींद लें और जल्द जाग कर पुर्नभयास करें।
सब्जेक्ट में जो ज़रूरी बातें हैं, उन पर आखिरी वक़्त में थोड़ी सी चर्चा कर लें, तो लिखते वक़्त सब दिमाग में ताज़ा रहेगा।
निष्ठा, लगन और कठोर मंशा से ही जीत हासिल होगी।


"अगर आप डटे रहोगे, तो डर भी दूर हो जायेगा।", मोदी जी कहते हैं।


सकारात्मक चिंता से बड़ी ताक़त और प्रेरणा, और कुछ भी नहीं।

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