एक नन्हा सा मन एक नन्ही सी जान जितना ही ज़रूरी है।

cute beti ladki

 

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना हम सब का कर्तव्य है। बच्चे देश के भविष्य माने जातें है।

उनके बढ़ने में, उनके व्यक्तित्व के विकास में, मानसिक स्वास्थ्य अहम होता है।

एक बच्चा अगर अच्छी संगत में रहेगा, स्वस्थ वातावरण देखेगा, तो उसका मानसिक विकास जल्द होगा, वह तेज़ सोचेगा, और उन्नति करेगा।

बचपन के बुरे अनुभव, पीड़ा, परेशानी, का असर उम्र के साथ- साथ और बढ़ सकता है, और तब वह रोग बन जाता है।

इसलिए, माता पिता पर जिम्मेदारी है, की वे अपने बच्चे को सही तरीके से समझें।

1.आप उनसे कैसे बात करते हैं, ये ज़रूरी है:

एक साथ ज़्यादा बात न करें।

इंसानी दिमाग, 30 सेकंड में सिर्फ दो पंक्तियों को ही सुन और समझ सकता है। एक साथ ज्यादा बात करने से, आपका बच्चा थक जायेगा और कौन सी बात ज़रूरी है, समझ नहीं पायेगा, छोटे शब्दों में उसे बात बताएं।

 

2. अपने काम की परेशानी को उन पर ना निकालें:

बच्चे आप के तनाव को नहीं समझते, उनमें वह क्षमता नहीं है, तो अगर वे कुछ करना भूल गए हैं, तो उन्हें याद दिलाएं, ना कि उन्हें कोसें।

 

3. उन्हें बार बार तंग करने से वह नहीं सीखेंगे: अगर उन्हें नींद से उठना है और तैयार होना है, तो बस वक़्त बता दें, और वक़्त पर काम न होने पर उसके बुरे प्रभाव के बारे में समझाएं ।

उसे खुद समझ कर काम करने दें। बार बार उनके पीछे पड़े रहने की ज़रूरत नहीं।

 

4. उनकी चुप्पी को समझें: बच्चे अकसर चुप रहतें है, अपनी समस्या किसी को बता नहीं पातें। स्कूल में अगर छेड़खानी हो रही है, या उनका किसी से झगड़ा हुआ है, तो आपको कैसे पता चलेगा। अपने बच्चे के साथ दोस्ती करें, ताकि वह आपको सब कुछ बता पाये।

 

5. उनकी बातों को नज़रअंदाज़ करने के बजाए, उनपर अमल करें। वह काल्पनिक बातें भी कर रहे हैं, तो उन्हें सुने और प्रोत्साहन दें।

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का असर उनके युवा जीवन पर भी पड़ता है।इसलिए बच्चे मन से खुश रहे, दिमाग से तंदुरुस्त रहे, तो ही शारीरिक तौर पर स्वस्थ रहेंगे।

उनका मन उतना ही ज़रूरी है, जितना उनका शरीर।

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