अपनी शादी को बचाईये आज ही!

Save your Marriage

 

 

सरिता: तुम्हारे घर में, हम बिल्कुल टीवी नहीं देख पाते थे, आप लोग हमेशा न्यूज़ देखते रहते थे, और आपके पिताजी...

रविकांत: हाँ हाँ तुम्हें तो हमेशा शिकायत ही रहती है। हमारे घर में तुम्हें ३ महीने में इतना कष्ट हुआ, कि तुम्हारी शिकायतें थमती ही नहीं।

 

"3 महीना" सुनते ही सरिता अचानक क्रोधित हो गयी।

 

सरिता: तुम्हें क्या लगता है, कि अगर मैं शादी के १२ साल बाद शिकायत करती तो सती सावित्री कहलाती? और क्योंकि मैं साफ़ साफ़ समस्या बता रही हूँ, तो मैं डायन हूँ। तुम्हारे घरवाले मुझे कभी समझ नहीं पाएंगे। तुम्हारे घरवाले सही हैं कहाँ?

रविकांत: मैंने कुछ नहीं कहा, मैं बात नहीं करना चाहता।

सरिता: नहीं, बताओ, क्या मैंने कम सही कहा है? मैंने एडजस्ट करने की कोशिश नहीं की क्या?

ये झगड़ा चलता रहा, और सरिता गुस्से से लाल हो कर रोने लग गयी, और रविकांत दूसरे कमरे में चला गया।

शादी के बाद से, सरिता की उसकी सास के साथ नहीं बनती थी। वह उस घर में खुश महसूस नहीं करती थी, और अकसर अपने पति रविकांत से खुलकर इस पर विचार करती। फिर वे दोनों  अमरीका चले गए, और किसी न किसी बात पर घर की बात आती, तो उन में बहस छिड़ जाती।

 

आज सरिता को लग रहा था, "रवि हमेशा अपने घरवालों को ही सपोर्ट करते हैं, उनके लिए मैं कोई भी माइने नहीं रखती, वह घर के बेटे हैं, और मैं कुछ भी नहीं, मुझे इस रिश्ते में नहीं रहना चाहिए, ये शादी तोड़ देना चाहिए"

इंसान क्यों शादी जैसे पाक रिश्ते को तोड़ना चाहता है, और कैसे हम इसे बचा सकते हैं?

 

1. क्रोध बुरा है : अपने गुस्से को खुद पर हावी न होने दें। मतभेद होंगे, झगड़ा होगा, एक दूसरे पर कभी कभी गुस्सा भी आएगा, पर अपने गुस्से से अपने प्यार को मिटने न दें।

 

2. बात करना ज़रूरी है: अगर आप बात नहीं करेंगे, तो एक दूसरे के नज़रिये को समझ नहीं पाएंगे, और इससे, गलतफहमियां बढ़ सकती है। इसलिए, समस्या जो भी है, गुस्सा है, मलाल है, तो बता दीजिये। बैठ कर उस पर विचार करें, तो मन हल्का हो जाएगा, और मुश्किलें आसान हो जाएँगी।

3. सुनने और समझने की कोशिश करें: रवि वैसे तो शांत इंसान था, लेकिन हर दिन घरवालों की शिकायत से वह तंग आ गया था। वह अपने घरवालों को जानता था, उनसे जुड़ी समस्या को भी समझता था, पर सरिता की बात को सुनना नहीं चाहता था। समस्या से मुंह फेरना, समस्या का हल नहीं है। सरिता गलत नहीं थी। वह घर में नई थी, और उसे कई नई परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था, और ऐसे में वह रवि को छोड़ किसे बताती? इसलिए अपने साथी की बात को सुने, उनका सहारा बने।

उनसे बहस करना ज़रूरी नहीं है, समझाया बाद में भी जा सकता है।

4. खुद को उनकी जगह रख कर सोचें: ये पति पत्नी दोनों पर लागू होता है, कि बहस के वक़्त, वे खुद को एक दूसरे की जगह रख कर सोचें। अगर सरिता ऐसा करती तो वह समझ पाती कि घरवालों की निंदा हमेशा रवि को सुनना पसंद नहीं होगा।

5. अपने साथी पर का दबाव न डालें: हम अकसर अपने साथी को सर्वोत्तम समझने लगते हैं, और चाहते हैं, की वह हमारी तरह सोचें और करें, पर सब अलग व्यक्ति है, मत अलग है, तो ये आशा न करें कि आपका साथी आपकी तरह सोचेगा।

6. साथी बने, अभिभावक नहीं: पत्नियां सोचती हैं, कि वे अपने पति को बदल देंगी, पर इसकी ज़रूरत क्या है? मोबाइल चेक करना, हर बात पर टोकना, घर से बाहर जाते वक़्त रोकना, ये हरकतें, आपको उनके दिल से  दूर कर सकती हैं । उन्हें अपनी ज़िन्दगी जीने दें, अगर कोई आदत उनके लिए हानिकारक है, तो उन्हें सही तरह से समझाएं।

पति को भी समझना चाहिए की उनकी पत्नी एक पूर्ण महिला हैं, और उन्हें अपनी जिम्मेदारी और फैसले लेना आता है। तो उनके साथी बने, अभिभावक नहीं।

7. साथ में फैसले करें: इससे हर साथी खुद को ख़ास और महत्वपूर्ण महसूस करेगा, और आपके रिश्ते पर अच्छा असर पड़ेगा।

8. ईगो को छोड़ दें: "मैं क्यों आगे जा कर बात करूँ, उसने झगड़ा किया है, उसे माफ़ी मांगनी चाहिए, अगर उसे परवाह नहीं, तो मुझे भी नहीं", ऐसी मनोवृत्ति रखने का कोई फायदा नहीं। उन्हें हो न हो, आपको उनकी ज़रूरत है, ये आप समझें, अगर आप कहते हैं, "परवाह नहीं", तो आप खुद को धोखा  दे रहे हैं।

इस लिए ईगो को छोड़ दें, और खुद आगे बढ़ कर रिश्ते में सुधार लाएं, और अपनी शादी को बचाएं।