अपनी चिंता या एंग्जायटी को शक्ति मुद्रा (पावर पोज़)  से दूर करें।

power pose

 

 

"मैं खुश हूँ, काम कर रही हूँ, पढ़ाई भी अच्छी चल रही है, अच्छा वेतन मिल रहा है, और संसार में भी शान्ति है, पर ये शान्ति कब तक रहेगी! क्या होगा अगर फिर मुझे ससुराल जा कर रहना पड़े ! क्या होगा अगर हमारी बैंगलोर वाली ज़िन्दगी बदल जाए! क्या अगर फिर से घर के झगड़े शुरू हो जाएँ! अरे बापरे! मैं साफ़ देख पा रही हूँ, मेरी सासुमा ताने मार रही है, मेरी शिक्षा को लेकर बात उठा रही है, और मैं चिल्ला रही हूँ, ठीक से खीर भी नहीं बना पा रही! हे भगवान! मैं थक गयी", (रेशमा मन ही मन सोचती है)- कहानी एक आम गृहवधू की

अगर ये सवाल 'क्या अगर' आप के दिमाग में बार बार आ रहा है, तो इसका मतलब है, आप चिंता के शिकार हो रहे हैं जिसे हम एंग्जायटी भी कहते हैं।

भविष्य के बारे में सोच सोच कर हम परेशान होते रहते हैं। इससे हम मानसिक तनाव के शिकार होते हैं। क्या हो सकता है इसकी फ़िक्र से हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, हमें पसीना आने लगता है, सेहत पर असर होता है।

हम चिंता को दूर रख सकें तो काफी स्वस्थ रहेंगे।

भविष्य की चिंता आपके वर्तमान को हानि पहुंचाएगी। जो होगा उसे आप रोक नहीं सकते, हाँ, आप कोशिश कर सकते हैं कि एक अच्छी ज़िन्दगी जियें, अच्छा काम करें, पर होनी को टालना मुश्किल है। भविष्य की फ़िक्र से आपका आज, आजकी ख़ुशी सब खराब हो सकती है।

कहना आसान है पर करना मुश्किल। चिंता से आज़ादी एक असम्भव सा काम लगता है। अगर हम कुछ नहीं कर सकते तभी चिंता सताती है।

पर एक  चीज़ है जो आप कर सकते हैं।

'पावर पोज़', यानी सर को ऊंचा रख कर , बाज़ुओं को मोर कर कमर में तान कर, सीधा खड़ा होना, इसे अंग्रेजी में पावर पोज़ कहते हैं। ऐसा देखा गया है, कि अगर आप २ मिनट तक इस स्थिति में खड़े रहने का अभ्यास करेंगे, तो आप की शंका या चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी।

सोशल साइकोलोजिस्ट एम्मी काडी, टेड वीडियो में बताती हैं, "पावर पोज़ धारण करने से इंसान के दिमाग में २०% तक टेस्टोस्टेरोन की वृद्धि  होती है, और २५ % तक कोर्टिसोल घटता है।"

हार्वर्ड स्कूल ऑफ़ बिज़नेस में किये गए जांच द्वारा भी ये सिद्ध हो चुका है, कि सर को ऊँचा रख कर चलने वाले, उच्च-शक्ति का प्रदर्शन करने वाले, ज्यादा आत्मविश्वासी होते हैं, और उन पर  कोई भी शंका या चिंता का असर नहीं होता।

हम जो भी कार्य करते है, उसका असर दिमागी जज़्बातों पर पड़ता है। जो लोग झुक कर चलते हैं, और वैसे ही दुर्बल और घबराये हुए घूमते है। ऐसे लोगों में एंग्जायटी का प्रभाव ज्यादा पाया जाता है।

पावर पोज़ के अभ्यास से हमें अंदरूनी ताक़त मिलती है, खुद पर काबू आता है, और चिंता दूर भाग जाती है।

ऐसे ही योगा या प्राणायाम करने से भी आप में शंका काफी हद तक कम हो सकता है।

एंग्जायटी हर परिस्थिति को आपातकालीन या संकटमय बना देती है। अगर आप चिंतित महसूस कर रहे हैं, तो ५ मिनट की नींद लें, दिमाग में सब कुछ शांत होने दें। हर रोज़ के योगा और व्यायाम से आप ज्यादा स्वस्थ रह सकते हैं, और मिज़ाज को चिंतामुक्त भी कर सकते हैं।

सोशल साइकोलोजिस्ट एम्मी काडी, टेड वीडियो